‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ फेम और वरिष्ठ पत्रकार सुहेब इलियासी इन दिनों दहेज कानून पर एक फीचर फिल्म बना रहे हैं. फिल्म में सुहेब उन लोगों के दर्द व संघर्ष को दिखाएंगे जिन्हें दहेज कानून के जरिए झूठे मुकदमों में फंसाया जा चुका है और जो अपनी जिंदगी के एक-एक दिन बेहद मुश्किल से काट रहे हैं. सुहेब खुद दहेज कानून के शिकार रह चुके हैं. भड़ास4मीडिया से बातचीत में सुहेब ने जो कुछ कहा, उसका संपादित व संक्षिप्त अंश इस प्रकार है-
इस दहेज कानून ने बहुतों का बहुत कुछ बर्बाद कर दिया
-सुहेब इलियासी-
मैंने दहेज कानून की प्रताड़ना को दस साल तक झेला है. कानून ने आज, दस साल बाद कहा है कि हत्या के आरोप में मैं दोषी नहीं हूं. दस साल के बाद न्याय का आना न्याय न मिलने के बराबर है. जब किसी का सब कुछ बर्बाद होकर खत्म हो चुका हो, करियर खत्म हो चुका हो, तब आप कहें कि आप तो सही हैं, तो इससे क्या फरक पड़ेगा. दहेज कानून के गलत इस्तेमाल को लेकर भारत सरकार भी गौर कर रही है. इस कानून से लाखों-करोड़ों लोग इससे त्रस्त हैं. हर घर की कहानी है. किसी को ब्लैकमेल करना हो, अपने वेस्टेड इंट्रेस्ट के लिए किसी को परेशान करना हो तो उसे दहेज कानून में फंसा दो. कोर्ट में मुकदमा चलता है तो दस साल बाद फैसला आता है कि बंदा सही था.
पिछले दस साल मैंने कैसे गुजारे हैं, यह सिर्फ मैं जानता हूं. एक-एक दिन कितने मुश्किल से गुजरे हैं, मैं ही जानता हूं. मैं सही हूं, इस बात को मैं या फिर मेरा परिवार या मेरे करीबी दोस्त जानते हैं. पर समाज को मैं कैसे बता सकता था कि मैं बेगुनाह हूं. किस-किस को बताऊंगा कि मैं बेगुनाह हूं. कौन सुनना चाहेगा आपकी परेशानी. बहुत मुश्किल था दस साल का वक्त मेरे लिए. मुझे यकीन था कि एक दिन ऐसा न्याय आएगा. लेकिन मुझे यह पता नहीं था कि दस साल बाद न्याय होगा. पिछले दस सालों में मैं कहां से कहां पहुंच गया, इस तकलीफ को मैंने झेला है. पीछे मुड़कर देखता हूं तो समझ में आता है कि इस सिस्टम की वजह से, न्यायपालिका की वजह से, मैं और मेरा करियर-मेरा जीवन बहुत पीछे जा चुका है. अगर न्यायपालिका इफेक्टिव होती तो छह महीने या एक साल में फैसला आ गया होता.
पर मेरे साथ अन्याय देखिए कि दस साल के बाद बात न्याय की बात सामने आई है. दहेज कानून का मुद्दा बहुत गंभीर मसला है. इस कानून में फर्जी ढंग से फंसाए गए लोग जानते हैं कि कितना कुछ झेलना पड़ता है. कितना कुछ खोना पड़ता है. किसी व्यक्ति को दस साल बाद बताया जाता है कि तुम बेगुनाह हो तो वह किस किस को दुबारा बताए कि मैं बेगुनाह हूं. दस सालों में समाज, कारोबार हर जगह जो छवि बन जाती है, उसे धोना बहुत मुश्किल काम होता है. मैं हमेशा से मानता रहा हूं और मानता हूं कि सच की जीत होती है लेकिन देर से मिला न्याय भी अन्याय से कम नहीं होता है. मुझे लगता है कि दहेज कानून के खिलाफ शोर मचाने की जरूरत है.
इस एक्ट की वजह से रिश्ते बरबाद हो रहे हैं. भारत का धरोहर ज्वाइंट फेमिली स्ट्रक्चर है. पर इस कानून से ये स्ट्रक्चर बुरी तरह बिखर रहा है. इस कानून ने तेजतर्रार लड़कियों और उनके परिजनों को इतना मजबूत कर दिया है कि वे थोड़ी बहुत खुन्नस होने पर बड़ी आसानी से सामने वालों को जेल की हवा खिलवा सकते हैं और उसके पूरे परिवार को तबाह कर सकते हैं. इस कानून के फंदे में पड़कर वो शख्स कई बरसों तक जेल, जमानत, पुलिस, कचहरी, वकील के चक्कर लगाते हुए लाखों करोड़ों रुपये फूंकता रहेगा.
मुझे यहां तक पता चला है कि वकीलों के पास दहेज कानून के बने बनाए फार्मेट हैं. बस केवल आरोपी आदमी का नाम, परिजनों का नाम, पता भर डालना है. बाकी सब तैयार है कि कैसे मिट्टी का तेल डाला गया, कैसे दहेज के लिए परेशान किया गया, सारा सामान हम लोगों ने दिया था घर में… और, कोर्ट में पेटीशन फाइल. वकील और पुलिस वाले इस कानून के नाम पर जमकर पैसे बना रहे हैं. पर कानून बनाने वालों की नजर इधर नहीं जा रही है. मैं इस मसले को उठाउंगा और पूरी शिद्दत से उठाउंगा ताकि मेरी तरह पीड़ित व परेशान अन्य जनों को जीते जी न्याय मिल सके और उन्हें लग सके कि उनके दर्द को समझने वाले और लोग भी मौजूद हैं.”












Ankit Khandelwal
March 1, 2011 at 2:13 pm
Bilkul sahi keha.. By Constituation, sabhi ko saman adhikar diye gaye hain.. but jab kanoon ki baat aati to kayi baar mahilaon ko unke mahila hone ki vajah se extra advantage diya jaata hain.. jo bilkul bhi sahi nahi hain..
anil
March 1, 2011 at 2:53 pm
sahi baat he. dahej kanoon me badlave hone hi chahiye. taki kisi ko bevajah na fansaya jaye. kanoon ka durupyug teji se badh raha he. iske liye sabhi ko gambhir hona chahiye
DABANG
March 1, 2011 at 2:55 pm
YES SUHAIB BHAI…ITS VERY TRUE….JUSTICE DELAYED MEANS JUSTICE DENIED…..YE SIRF AAPKE CARRER KEE HE BAAT NAHI HAI BUT AAKE SAATH JUDE HAMARE JAISE SAIKRO BHAION KEE BHI CARRER BANTE BANTE STAND STILL HO GAI…SHREE NIVASH
Sageer-a-khaksar
March 1, 2011 at 3:20 pm
Suheb sb ka dard wajib hai. Ap ka mission insha allah zarur kamyab hoga.
vinaypathak
March 1, 2011 at 3:24 pm
suheb ji aap ki soch achi hi syad esi say kuch logo ko rhaat mil jayee.good going.
vinay pathak mumbai
Ashish Mumbai
March 1, 2011 at 3:50 pm
हमने जिसे चाह जिससे हमने प्यार किया ,
जिस पर किया भरोसा ,जिसको परिवार दिया ,
उसने ही हम पर अत्याचार किया ,
झूठे आरोपों का हम पर वार किया ,
कुछ क्वाहिशे हम उनकी कर नहीं पाए पूरी ,
तो उसने हम पर IPC 498a का झूठा आरोप दिया ,
जिसने हमें जेल भेजा ,हमारे परिवार को तबाह किया ,
इस दहेज़ कानून के झूठे आरोपों ने ,
ना जाने कितना घर बर्बाद किया ,
कितने आशाव को तोडा इसने ,
कितने दिलो पर बेरहम वार किया ,
rakesh
March 1, 2011 at 3:56 pm
Congrats ! I feel the Same pain as you. As I was the Senior Reporter of Dainik Hindustan and Incharge of Crime Bureau in year 2003 when because of this Dowry Act I and Family was Penalised for no wrong we had done.
.
Ajit Kumar Pandey
March 1, 2011 at 4:57 pm
SUHEB JI ………KUCHH DETAILS MERE PASS HAI…….. GIVE ME UR MAIL ID
[email protected]
vijay pandey
March 1, 2011 at 6:32 pm
bahut sahi iliyas jee , kuki aapne ab sahi baat ki hai, ye hai apnii nayay vayastha , aapne jo muhim chalayee thi wo aaj ek vyapaar ka karkhana ban gaya hai, lekin aaj bhi logo ko indias most wanted hi yaad rakhte hain , aapka carrier kharab to hua hai …..bharat ki nayay vyawastha ne apke jeevan ke swarnim dus saal barbaad kiye hain , lekin koi baat nahi ….aapse logon ko bahut umeed haiiii……..
uthiye …….soheb bhai bessst of luck
जय कुमार, टीवी पत्रकार, चाईबासा
March 2, 2011 at 3:59 am
अपनी पत्नी के हत्यारों को बेनकाब करना छोड़, पत्नी के हत्या के कारण उठाये तकलीफ की और आपका ध्यान ज्यादा है. लगता है आपको अपनी पत्नी से ज्यादा करियर से प्यार था. कल तक कानून के दायरे में रहकर जुर्म करने वालों को सलाखों के पीछे धकेलने का दावा करने वाला, आज खुद कानून से लड़ना चाहता है. अच्छा तो यह होता की आप अपनी बेगुनाही के ठोस साबुत जनता के बिच लाते. अफ्सोसो!!!!!!!! इस लेख से आप के तेवर में आया बदलाव झलकता है.
Suhaib Ilyasi
March 2, 2011 at 7:09 am
I am overwhelmed to read your comments.
mujhe hindi typing nahi aati warna hindi hi me likhta..beharhaal, kuch khayal zahan me aa rahe hai, aapke saath share karna chahta hun.
If i look back… It was strange to realise that 10 years ago most of the media, for reasons unknown, reported my tragedy as it had had something to do with murder of my wife Anju Ilyasi. starangely most of the media aggresively reported as if it was a murder case under IPC 302. not mentioning much about 498A/304B.
Perhaps I was producing a crime show and brought to book several culprits, it was interesting for people to mud sling me as a person who reports crime and was himself facing criminal charges.
My plight became an overnight Masala Khabar for media at large. But justice being delivered after 11 years leaves me emotionless… do I laugh, do I cry or feel relieved… I don’t know.
I dont know how to react because I have lost too much in last 10 years.
Since I’m know, people will come to know through media that I’m innocent but what about those (the common man) who are victims and are falsely implicated under Section 498A/ 304B.
It is almost like every other household’s story. If young ones are not mature enough and not able carry forward a relationship then Section 498A/ 304B becomes a tool in the hands of the girl’s family / mother to settle the scores and bring boy’s family in order.This unfortunate factor is disturbing the ethos of joint family in this country.
The Government is now thinking to review this Act. In reality we do need this Act for people who actually are culprits and trouble the girl’s family with their dowry demands but it needs immediate amendments so that someone is not falsely implicated under this Act.
I thank you all for your belief in me.
The truth has come out but it is too late.
Aparna
March 2, 2011 at 7:21 am
सुहेब जी आपको अपने ऊपर हुए अन्याय का दुःख है.. जानकार हर किसी को दुःख हुआ.
आप अपनी खोयी प्रतिष्ठा जल्द वापस हासिल करे..
पर श्रीमान.. उन सच्चे दहेज़ लोलुपों की संख्या, % कहीं अधिक है जो लड़की को सिर्फ उपभोग की वस्तु और
न मिलने पर पल भर में राख कर देते है..
आज आपने अपने ऊपर हुए गलत अत्याचारों को करीब से महसूस किया तो समझ पा रहें है..तनिक लड़की का दुःख महसूस कीजिये.
जो यदि जीती है ऐसे नपुंसक के साथ तो अन्तिम सांस तक मौत से बदतर जिन्दगी होती है.
मैंने देखा है लड़की के परिवारों को तिल तिल जलते मरते..
आपके पास पैसा था तो आप केस लड़ पाए उनका सोचिये जिनकी बिटिया भी हाथ से जाती है , आँखों के सामने कमीना दामाद दूसरी शादी करता है और सच्चाई जानने के बावजूद लड़की का पिता सिवा आंसू बहाने के कुछ नहीं कर पता.
मै मानती हूँ कानून के कुछ पक्ष्य दोष पूर्ण है. पर इसका कारण भी कहीं न कहीं पुरुषो की और दहेज़ लोलुपों की ज्यादती की शिकार लड़की और लड़की के घर वालों की मनोदशा है.
आप जहाँ ऐसे कानून में संशोधन की बात कर रहें है वहां अपने युवा मित्र से अनुरोध करे की दहेज़ को मिटने के लिए क्या कदम बढ़ा रहे है?
क्या संकल्प ले रहे है? क्या सामाजिक बदलाव लाना चाहते है?
दहेज़ लेने वाले नपुंसकों के लिए क्या आपकी फिल्म में कोई सन्देश होगा?
true
March 2, 2011 at 8:01 am
really very sensational story…….
Adarsh Bhalla
March 2, 2011 at 8:39 am
Shuheb Ji
This is our system. You blame any body and then comes his duty to prove him self innocent if you are honest definitely if he is honest he will be behind the bars. because honest persons seldom keep any records of proof. Duniya Ka bus chle to ye mar hi dale, Hum Jo jinda hain jeene ka hunar rakhte hain. God bless you.
deepak khokhar-9991680040
March 2, 2011 at 8:49 am
congrates suhaib bahi.
shahzad akhtar
March 2, 2011 at 2:12 pm
suhaib bhai ham jo bhi jis terha kamate hai usi terha gavante hai, agar apni isi dastan ka arth khud se he puchte to shayad aapko javab mil jata. aapne patrkarita ki aad me kya kya kiya aap bhi jante hai aur sara zamana bhee janta hai. aajkal aap ak masjid me baithker ek patrika nikal rahe hai aur adress likhte hai 2 pink siti haise kastoorba gandhi marg agar himmat hai to pata likho kastoorba gandhi masjid. agar aur kuch sunne aur pedne ki himmat ho batana
priya
March 27, 2011 at 6:06 pm
suhaib badhai ho yar
Ravinder
June 25, 2011 at 1:42 pm
भारतीय संविधान में जो महिलाओं को अधिकार दिए गए हैं मुझ जैसे पता नहीं कितने बेगुनाह उसका शिकार हो रहे हैं , मुझपर मेरे ससुराल वालो ने झूठा दहेज का केस थोपा है, मेरे पास अपनी बेगुनाही के सबूत भी मौजूद हैं, परन्तु फिर भी मुझे इन्साफ नहीं मिल रहा है. करीब 2 साल पहले मेरी शादी हुई थी, शादी के कुछ दिन बाद ही मेरी पत्नी की तबियत ख़राब हो गई, उसे हॉस्पिटल में भरती करवाया तो डाक्टर ने उसकी जांच की तो पता चला की वो एक ला इलाज़ ह्रदय रोग से ग्रस्त है, डॉक्टर ने बोला की ये लड़की शादी के काबिल नहीं थी, और लड़की के पिताजी को भी डॉक्टर ने फटकार लगाई के जब तुम्हे पता था की ये लड़की शादी के काबिल नहीं है तो तुमने जान बुझकर क्यूं इस लड़के की जिंदगी ख़राब की, तो डॉक्टर ने हमे सलाह दी के अपने ससुराल वालो पर 420 का मुकदम्मा कर दो और लड़की को तलाक दे दो. परन्तु हमने इंसानियत के नाते ऐसा करना ठीक नहीं समझा. और उसे अपने पास ही रखा, और उसका इलाज़ करवाते रहे जिस में हमारा बहुत धन व्यय हुआ, कुछ दिनों बाद लड़की अपने घर चली गई. और मैं उसके घर वालो को भी उसके इलाज़ का खर्चा देता रहा. लेकिन फिर उनका लालच बढ़ गया और वो मुझे भुत अधिक धन की मांग करने लगे, जोकि मेरी पहुँच से दूर था मैंने उन्हें पैसे देने से इनकार कर दिया तो मुझे धमकियाँ देने लगे की 7 लाख रूपए दे दो नहीं तो हम तुम पर झूठ दहेज का केस करके तुमको साड़ी उम्र जेल में कैद करवा देंगे, मैंने उतनी राशि देने में असमर्थ था. इस बारे में मैंने अपने जिले के स.प. को शिकायत भी की, लेकिन पुलीस ने कोई कार्यवाही नहीं की. तो उन्होंने हम पर दहेज का झूठा केस कर दिया, जिस वजह से मुझे 3 दिन हवालात में भी रहना पड़ा. मैंने अपनी बेगुनाही के सबूत भी पुलीस को दिखाए लेकिन मेरी एक नहीं सुनी गई,
हर रोज कोर्ट कचेहरियों के चक्कर काट काट कर बहुत परेशांन हो चूका हूँ मैं और बहुत पैसा भी बर्बाद हो गया है,तक़रीबन 40,000 रूपए से भी ज्यादा लग चुके हैं हमारे कोर्ट में लेकिन फिर भी इन्साफ नहीं मिल रहा. जिस वजह से मेरे ससुराल वालों के होसले और बुलंद हो गए हैं, उन्होंने पैसों के बल पर पुलीस और कानून दोनों को अपनी तरफ कर लिया है, बिलकुल ऐसा ही वो पहले भी १ बार कर चुके हैं अपने एक दामाद के साथ जो दिल्ली में रहता था उनसे भी इन्होने 10,00,000 रूपए वसूले थे, इस वजह से हमारे साथ भी वो ऐसा ही कर रहे हैं. मेरे पास अपनी बेगुनाही के सारे पुख्ता सबूत मौजूद हैं.
आज कल ऐसे ही इस दहेज वाले कानून का दुरूपयोग करके लोग पता नहीं कितने बेगुनाहों से लाखो कमा रहे हैं .लड़कियां ससुराल वालों को ब्लैकमेल करती हैं की यदि उनकी मनमर्जी नहीं की गए तो वो दहेज़ का झूठा केस करके सबको जेल करवा देंगी, जी वजह से मजबूर पतियों को उनकी इस जिद्द के आगे अपने माँ – बाप तक को छोडना पड़ता है. मेरा कसूर सिर्फ इतना है की मैंने उसकी वक़्त डॉक्टर की बात मान कर उसे तलाक देने की बजाए उस से हमदर्दी दिखाई. एक तरफ तो भारत का कानून स्त्रियों से हमदर्दी करके की सलाह देता हैं, और दूसरी तरफ मुझे सिर्फ उसी हमदर्दी की सजा मिल रही है.
मैं सिर्फ इतना चाहता हूँ की, मेरे साथ जो हुआ सो हुआ, लेकिन किसी और के साथ ऐसा न हो. यदि इस कानून का इसी तरह गलत इस्तेमाल होता रहा तो, married life नरक बन जाएगी और लोगो के मनं से इंसानियत बिलकुल ख़तम हो जाएगी और लोग स्त्रियों का भला करने से भी कतराने लगेंगे.
इसी बारे में मैंने ऐसी ही एक पत्र महामहीम राष्ट्रपति जी को भी ईमेल किया था . लेकिन राष्ट्रपति जी से भी मुझे निराशा भी हाथ लगी
धनयवाद .
Ravinder Kamboj