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रंगकर्मी संजय बने एमपी नाट्य विद्यालय के निदेशक

जाने-माने रंगकर्मी संजय उपाध्याय को भोपाल में खुलने जा रहे नए नाट्य विद्यालय का निदेशक बनाया गया है। दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तर्ज पर शुरू हो रहे मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय में अगले सत्र से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। निदेशक के रूप में संजय उपाध्याय को विद्यालय की अकादेमिक रूपरेखा बनाने से लेकर पाठ्यक्रम का स्वरूप तैयार करने तक कई अहम जिम्मेदारियों का शुरू में ही निर्वहन करना होगा।

जाने-माने रंगकर्मी संजय उपाध्याय को भोपाल में खुलने जा रहे नए नाट्य विद्यालय का निदेशक बनाया गया है। दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तर्ज पर शुरू हो रहे मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय में अगले सत्र से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। निदेशक के रूप में संजय उपाध्याय को विद्यालय की अकादेमिक रूपरेखा बनाने से लेकर पाठ्यक्रम का स्वरूप तैयार करने तक कई अहम जिम्मेदारियों का शुरू में ही निर्वहन करना होगा।

संजय उपाध्याय राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक हैं और इससे पहले दिल्ली के श्रीराम सेंटर में भी कला निदेशक के पद रहे हैं। पिछले कई वर्षों से रानावि के शिक्षण कार्यक्रमों में भी उनकी नियमित भागीदारी बनी हुई है। अब तक पचास से अधिक नाट्य प्रस्तुतियां निर्देशित कर चुके संजय उपाध्याय को उनकी सांगीतिक प्रस्तुतियों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उनके द्वारा निर्देशित भिखारी ठाकुर के नाटक ‘बिदेसिया’ की प्रस्तुति क्लासिक का दर्जा हासिल कर चुकी है। प्रस्तुति के अब तक 500 से अधिक प्रदर्शन हो चुके हैं। इन दिनों वे उज्जैन के अभिनव कला मंच के लिए हृषिकेश सुलभ के नाटक ‘अमली’ की प्रस्तुति तैयार कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश सरकार ने इसी वर्ष राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय स्तर का नाट्य विद्यालय खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। तभी से इसके पहले निदेशक की तलाश शुरू हो गई थी। कई रंगकर्मी इस पद की दौड़ में थे, लेकिन आखिरकार पिछले तीस वर्षों से थिएटर की दुनिया में सक्रिय 48 वर्षीय संजय उपाध्याय के नाम को ही सबसे उपयुक्त पाया गया। करीब दो दशक पहले राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की डिग्री हासिल करने के बाद अपने कई अन्य समकालीनों की तरह फिल्मी दुनिया का रुख करने के बजाय संजय उपाध्याय ने अपने गृहनगर पटना का रास्ता पकड़ा।

अपनी संस्थाओं निर्माण कला मंच और सफरमैना के जरिए उन्होंने पटना के रंग परिदृश्य को एक नई ऊर्जा प्रदान की। फिलहाल निर्माण कला मंच को हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में पचास से अधिक प्रस्तुतियों के लिए बुलावा आता है। अपनी इस सक्रियता के दौरान संजय ने एक ओर लोकतत्त्वों से परिपूर्ण ‘बिदेसिया’, ‘परती परिकथा’, ‘गबरघिचोर’ जैसी प्रस्तुतियों को आकार दिया, वहीं ‘माटी गाड़ी’ और ‘मैंगोसिल’ और ‘कहां गए मेरे उगना’ जैसी बेहतरीन प्रस्तुतियों के जरिए आधुनिक शहरी रंगमंच की नब्ज और प्रयोगशीलता पर अपनी पकड़ को भी साबित किया। मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय का औपचारिक उद्घाटन एक नवम्‍बर को होगा, जिसके लिए मध्यप्रदेश शासन जोर-शोर से तैयारियों में जुटा हुआ है।

 

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0 Comments

  1. bharat sharma

    October 10, 2010 at 6:15 am

    sanjay ji ko hardik badhai…..

  2. Harendra Narayan

    October 13, 2010 at 4:36 pm

    Sanjay G se kafi apekshaye hai.Bhopal ke mathadisho se sambhalker rahiyega.waha kuch nahi to Bihar Aur Rss ka nam ghasit k badnaam karnewale kai giroh hai.,Makhanlal vv Ka hungama suna hoga hi.Shubhkamna n Badhai..,Harendra Narayan

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