: कांस्टेबल ने लुटेरे को भगाने में मदद की : भड़ास4मीडिया से बातचीत में आपबीती सुनाई : इस महिला जर्नलिस्ट के साथ जो कुछ हुआ, वह रेल सफर के दौरान सुरक्षा के दावे को तार-तार करने के लिए काफी है. किस तरह चोर-पुलिस मौसेरे भाई बन चुके हैं, जर्नलिस्ट मीनाक्षी गांधी के साथ हुए हादसे से समझा जा सकता है. मीनाक्षी के साथ रेल सफर के दौरान लूट होने की सूचना भड़ास4मीडिया को मिलने पर जब उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने अपनी पूरी आपबीती सुनाई. उन्हीं की जुबानी पूरी कहानी पेश है. उम्मीद करते हैं कि रेल मंत्रालय से जुड़े अधिकारी इस महिला जर्नलिस्ट को न्याय दिलाएंगे और दोषियों को दंडित कराएंगे. -एडिटर, भड़ास4मीडिया
मैं सोमवार रात को अपने बेटे के साथ जयपुर के गांधीगनर रेलवे स्टेशन से जयपुर-अमृतसर एक्सप्रेस पर सवार हुई और जालंधर के लिए रवाना हुई। मेरी बोगी नंबर 2 थी और सीट नंबर 1 और 4 थे। रिवाड़ी स्टेशन पर जब गाड़ी रुकी, तो वहां आरपीएफ के दो कांस्टेबल गाड़ी में सवार हुए। एक का नाम दिलबाग सिंह और दूसरे का नाम मनोज कुमार था। इस दौरान एक स्नैचर भी गाड़ी में आया और उसने मेरे सिर के नीचे रखा मेरा पर्स उठाकर वहां से भागना शुरू किया। मैं भी उसके पीछे भागी पर पर्स को प्लेटफार्म पर फेंक उसने ट्रेन से छलांग लगा दी। उस समय गाड़ी अभी स्टेशन से चलना शुरू हुई ही थी।
कंपार्टमैंट के दरवाज़े पर कांस्टेबल दिलबाग सिंह खड़ा था। मैंने उसे पर्स स्नैचिंग के बारे में बताया और चोर को पकड़ने के लिए कहा। पर उसने मेरी बात को पूरी तरह से अनसुना करते हुए मुझे सामान की संभाल कैसे की जाती है, इसके बारे में बताना शुरू कर दिया। इस दौरान उसने मेरे साथ बदसलूकी भी की। बार-बार चोर को पकड़ने के लिए कहने पर भी उसने एक नहीं सुनी। तब मैंने अपने ऑफिस में अपने क्लीग से बात कराने की कोशिश की, पर वो वहां से भाग चुका था। मैं उसके पीछे दौड़ी और वो तब तक दो बोगी पार कर चुका था। बार-बार नाम पूछने पर भी उसने अपने बारे में कुछ नहीं बताया। और बार-बार ऊंची आवाज़ में मुझे ही डांटता रहा कि ट्रेन में सफर के दौरान कीमती सामान कभी अपने पास नहीं रखना चाहिए।
जब पैसेंजर सारे मिलकर उससे बात करने गए, तो उसने मेरे ही फोन से बात करके कंप्लेंट लिखने के लिए कहा। साथ ही उसने मुझे अगले स्टेशन पर गाड़ी छोड़ने के लिए भी कहा ताकि कंप्लेंट लॉज हो सके। जब मेरे समेत समेत सभी यात्रियों ने इस पर एतराज जताया कि अकेली महिला रास्ते में नहीं उतरेगी और कंप्लेंट जालंधर जाकर भी दर्ज हो सकती है, तो बड़ी ना-नुकर के बाद उसने हैड कांस्टेबल को कंप्लेट लिखने को कहा। करीब डेढ घंटे के बाद हैड कांस्टेबल राजबीर ने कंप्लेंट दर्ज की जिसका पीएनआर नंबर 2641064112 है। गाड़ी की दो बोगियों एस-1 और एस-2 में कोई टीटी भी नहीं था। बताया गया कि स्टाफ शार्टेज के चलते टीटी हिसार में ही गाड़ी में चढ़ता है। कांस्टेबल दिलबाग सिंह का मेरे साथ व्यवहार काफी संदिग्ध रहा। उसने चोर को वहां से भगाने में पूरी मदद की और मेरी मदद करने से पूरी तरह इंकार कर दिया और चोरी का सारा ठीकरा मेरे सिर ही फोड़ दिया। इस चोरी में मेरे पर्स में से 5 हजार रुपए कैश, सोने के तीन जोड़ी झुमके, एक अंगूठी, एक लॉकेट, एक चांदी के गणपति, बैंक लॉकर की चाबी, ऐनक, लैंस व उसका लोशन, फोन का चार्जर, हैड फोन, एयरटैल का सिम कार्ड, मैमरी कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, प्रैस कार्ड, कॉसमैटिक्स व रोजमर्रा के सामान समेत काफी कीमती सामान थे, जिसकी कीमत 70 से 80 हजार रुपए के करीब है।
मीनाक्षी गाँधी
वेब कोआर्डिनेटर
दैनिक भास्कर, जयपुर












vikas srivastava
November 3, 2010 at 6:33 pm
rail safar me istarah ki vardat hamesa hoti hai, is bar ek journalist ke sath hua hai. rail me rahane wale surksa karmi kabhi bhi yatri ki ek nahi sunte hain, main to kahata hun, jab sari subhida rail me ho sakti hai to sikayat pustika kyoun nahi, kyoun kisi yatri ko platform per utar kar sikayat karni padti hai. or jab platform par sikayat pustika mangye to das tarah ke sawal. is par kadai se karvai honi chhye.
sanjay
November 3, 2010 at 7:54 pm
esh mamale me Station k ragistar me complane likhye ya sinior adhkariyo ko latter likhe… may be action ho
Sanjeet Choudhary
November 3, 2010 at 11:36 pm
आदरणीय मैडम जी, में तो कहूँगा कि फिर भी बचाव हो गया. आप हिम्मत वाली थी, क्योकिं जर्नलिस्म से जुडी हैं. अगर किसी स्टेशन पर गाड़ी चलते समय एक नवविवाहता के कान से बाली छिनने से उसका कान फट गया और दोनों इतने लाचार नजर आए कि किसी से कुछ नहीं बोल पाए और अपना दुःख लेकर अपने घर चले गए. इनके रेलवे वालों के खिलाफ कारवाही होनी चाहिए तभी जनता सुरक्षीत रह सकती है.
ramlal
November 4, 2010 at 4:42 pm
apne office main ham chahe jitne bhi bade sher ho bahar duniya ke samne aam aadmi aur corporate office main baithkar koi aam admi ke dard ko nahi samajh sakta hai…..
mini sharma
November 4, 2010 at 4:49 pm
Yeh too Hota hee Rahta Hai…..Kyu kee Yeh Ugta Bharat Hai……[b][/b] Hum Logo ko in Sabkee Kee Aadat Dal Lene Chaheye…
gulshan saifi
November 5, 2010 at 1:30 am
bhartiye rail aapke liye sadev,,,,,,,,,,,,,,
shailendra parashar
November 5, 2010 at 4:07 pm
railway ke sabse bade sahab to a hi police walei h bina inki setting ke koi kuchh kar sakta hai bhala railway rul ko sabse pahle a hi todte h complant book trian main t.t. ke pas ?hone ka rull hote huwe bhi ajtak maine complant trian main hoti nahi dekhi
Suresh Tripathi
November 6, 2010 at 8:43 pm
Mahila Patrakar Minakshi ke sath ghati ghatna kafi dukhad hai, Chalti gadiyon me RPF/GRP ki milibhagat se chori ki aisi ghatnayien hona koi nayi baat nahi rah gayi hai.. Yeh aur bhi dukhad hai ki ghatna ke baad chor ko pakadne ya report likhne ke bajaay passenger ko hi ye naseehat dene lagte hain..yeh aur bhi dukhad hota hai.. Is laaparwahi ke liye nishchit roop se sambandhiton ke khilaaf strict action hona chahiye..
Iske sath hi hum yatriyon ka bhi kartavya banta hai ki hum apne saamaan ki suraksha khud karein aur jyada saamaan lekar na chalein. Apne saamaan ki prathamik suraksha karne ki jimmedari khud rail-yatri ki hai.
bhupendra bhati
November 7, 2010 at 10:51 am
app jaipur se dabav banay