यशवंत जी, निष्पक्ष समाचार प्रकाशित करने का दंभ भरने वाले दैनिक जागरण, अमर उजाला, सहारा के संपादकों से गोरखपुर में यह उम्मीद नहीं की जा सकती। 5 मई को पूर्व प्रमुख और विधान सभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे एक बाहुबली नेता की प्रताड़ना से आजिज उसकी मां और भाइयों ने प्रेस क्लब में पहुंचकर अपना दुखड़ा रोया। सभी समाचार प़त्रों के रिपोर्टर प्रेस क्लब में थे। इन लोगों ने प्रेस वार्ता भी किया लेकिन हिदुस्तान को छोड़ शेष अखबार के लोगों ने इसे छापने की जहमत नहीं उठाई।
मां और भाइयों के प्रेस वार्ता करने के बाद बाहुबली नेता सभी अखबार के आफिस में पहुंचा संपादकों से मिलकर उसने अपनी करतूत प्रकाशित न करने की बात कही। नेता के प्रभाव में आकर दैनिक जागरण, अमर उजाला के संपादकों ने तो समाचार प्रकाशित नहीं किया लेकिन हिंदुस्तान ने पीडितों की बात छाप इन दोनों प्रतिष्ठित अखबारों को ईमानदारी का आईना दिखाया है। गोरखपुर में पत्रकारिता के बदल रहे नए मायने से गरीब और पीडित लोगों को अखबार से न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है। अत्याचार, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले अखबार के बडे़ लोग ही बाहुबली, भ्रष्टाचारी को सह दे रहे हैं।
सबसे अधिक हैरत तो अमर उजाला की रिपोर्टिग से हो रही हैं। समाचार मैनेज न करने के लिए जाना जाने वाला अखबार विगत कुछ दिनों से अपने साख के उलट काम कर रहा है। इसके पीछे का कारण सब लोग जानते है। यशवंत जी बाहुबलियों, धनबलियों के इशारे पर गोरखपुर में चल रही पत्रकारिता की इस तस्वीर को प्रकाशित करने की बस एक आप से ही उम्मीद की जा सकती है, ताकि लोग सच्चाई से वाकिफ हो सकें कि ईमानदारी, नैतिकता की बात करने वाले संपादक समाचार के प्रकाशन में कितनी निष्पक्षता दिखा पा रहे। साथ ही हिंदुस्तान अखबार के संपादक को समाचार प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद देते हुए आगे भी गरीब और पीडित लोगों की बात प्रमुखता से उठाने को कहूंगा ताकि लोगों को मीडिया पर भरोसा कायम रह सके।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












Sageer khaksar
May 7, 2011 at 1:06 pm
Hindustan ko badhai.gkp se main bhi juda raha hun.editor mr nagendr aur h.v.shahi g .ne sabit kar diya ki we sirf sachai aur mulyon ki baat hi nahein karte balki us par puri tarah amal bhi karte hain.9838922122.
महेश्वर झा
May 9, 2011 at 8:43 am
आप तो जानते हिन् हैं की पहले छोटी मछली को बड़ी मछली खाती थी , पर अब बड़ी मछली को भी बड़ी मछली खाने लगी है