वरिष्ठ पत्रकार बसंत अवस्थी का निधन 17 जुलाई को शुक्रवार तड़के 3 बजे छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित महारानी हास्पिटल में हुआ। वे लंबे समय से उदर रोग का इलाज करवा रहे थे। पत्नी, 3 बेटे, बहुओं और पोते-पोतियों का उनका भरा-पूरा परिवार है। मूलतः रायपुर के रहने वाले बसंत अवस्थी ने बस्तर में पांचवें दशक के अंत और छठें दशक की शुरूआत में पत्रकारिता शुरू की और पत्रकारिता को अपनी लेखनी से एक नया आयाम दिया। अपने विचारों से पोषित संस्था बस्तर प्रकृति बचाओ समिति के माध्यम से उन्होंने बस्तर में घटते वन और बिगड़ते पर्यावरण की तरफ न केवल राज्य सरकारों का, बल्कि आम आदमी का ध्यान भी खूब खींचा।
इस संस्था की ही कोशिश थी कि साल वनों को काटकर पाइन रोपने की विश्व बैंक की मंशा पूरी न हो सकी। इसमें उनके सहयोगी शरतचंद्र वर्मा का भी सहयोग कम नहीं था। बस्तर की बदलती सूरत देखने की हसरत बसंत अवस्थी में थी। बसंत अवस्थी पत्रकारिता की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते थे, जिन्हें प्रकृति और संस्कृति दोनों की समान समझ थी। वे सृष्टि से लेकर सियासत तक, लोक अंचल से लेकर अंतर्राष्ट्रीय विषयों तक और प्रशासन से लेकर प्रजा तक की बातों को खबरों के अंदाज में कहने की महारत रखते थे। शब्दों की ऐसी रचना करते थे कि वह शब्दों की कारसेवा लगती थी। लेखन विधा से जुड़े और बस्तर के हितों को लेकर चिंतन करने वाले हर उम्र, आय और वर्ग के लोगों से उनकी खूब छनती थी। वे उम्र को बाधा नहीं मानते थे और छोटे-बड़े हर लेखक पत्रकार को समान सम्मान और प्रोत्साहन देते थे।











