वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार डा. केशवानंद ममगाईं (75 वर्ष) का रविवार को कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में निधन हो गया। वे मूल रूप में उत्तरांचल के रहने वाले थे लेकिन कई दशकों पूर्व आकर कुरुक्षेत्र में बस गए थे। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार प्राणचैन श्मशानघाट में कर दिया गया। इस मौके पर मीडिया से जुड़े लोगों के अलावा राजनीतिक, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकता शरीक हुए और उन्हें अंतिम विदाई दी।
पत्नी के अलावा उनके तीन पुत्र और एक पुत्री है। उन्हें वर्ष 2005 में हरियाणा साहित्य अकादमी के प्रतिष्ठित बाबू बालमुकंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने विभिन्न विषयों पर एक हजार के ज्यादा लेख, फीचर और रिपोतार्ज लिखे थे। उनके पसंदीदा विषय धार्मिक, कला, समाज और प्रकृति थे। उन्होंने हरियाणा पर खूब लिखा जिसे सराहा गया।
वे मूलत: शिक्षक थे लेकिन पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि थी। वे मदरलैंड, नवभारत टाइम्स के बाद जनसत्ता में आए और सेवानिवृत्ति तक यहीं पर रहे। चंडीगढ़ संस्करण में काम करते समय वे संपादकीय पेज देखा करते थे। हिंदी में अच्छी पकड़ होने के कारण उन्हें यह विशेष जिम्मेदारी दी गई थी। सेवानिवृत्त होने से पहले वे इसी पेज के प्रभारी बने रहे। सेवानिवृत्त होने के बाद जब भी वे चंडीगढ़ आते अपने पुराने साथियों से मिलना नहीं भूलते थे। मिलनसार और शांत स्वभाव के होने के कारण उन्हें ज्यादातर लोग पसंद करते थे। पूरे जनसत्ता स्टाफ को उनकी मौत से दुख हुआ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे यही दुआ करते हैं।
महेन्द्र सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.












mahandra singh rathore
December 15, 2010 at 9:53 am
dr. mamgai ke nidhan se mujhe dukh hua hai. wo bhaut vidhvan the bavjud iesse unme ratti bhar bhi guman nahi tha.eese kisi sajjan purush ka jana sachmuch man ko santap de jata hai. bhagwan unkki attama ki shantai pardan keren.