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विनम्र ओबामा का छिछोरा प्रेस सेक्रेट्री

[caption id="attachment_18571" align="alignleft" width="94"]शमशेर सिंहशमशेर सिंह[/caption]: अमेरिकी मीडिया और दादागिरी : एक बड़ा अमेरिकी अधिकारी दरवाजे के बीच अपना पैर अड़ा देता है. वह चीखकर भारत के सीनियर अफसरों को ललकारता है कि अगर हिम्मत है, तो दरवाजा बंद करके दिखाओ. वो धमकी भी देता है कि अगर सबकुछ उसके मनमाफिक नहीं हुआ, तो वह बैठक के बीच से ही राष्ट्रपति ओबामा को लेकर वापस चला जाएगा. यह सब उस दरबाजे पर हो रहा था, जिसके भीतर ओबामा और मनमोहन सिंह की मुलाकात चल रही थी. यकीन नहीं हो रहा होगा न आप लोगों को? यहां अगर पात्रों के ओहदे और उनकी वेशभूषा हटा दी जाए, तो यह बिलकुल गली-मोहल्‍लों के छुटभैये गुंडों जैसी हरकत ही थी. संसार के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति, जो अपनी ताकत नहीं, बल्कि व्यवहार से लोगों का दिल जीतने में माहिर माने जाते हों, उनके प्रेस सेक्रेट्री से ऐसे छिछोरे व्यवहार की उम्मीद तो नहीं ही की जा सकती है.

शमशेर सिंह

शमशेर सिंह

: अमेरिकी मीडिया और दादागिरी : एक बड़ा अमेरिकी अधिकारी दरवाजे के बीच अपना पैर अड़ा देता है. वह चीखकर भारत के सीनियर अफसरों को ललकारता है कि अगर हिम्मत है, तो दरवाजा बंद करके दिखाओ. वो धमकी भी देता है कि अगर सबकुछ उसके मनमाफिक नहीं हुआ, तो वह बैठक के बीच से ही राष्ट्रपति ओबामा को लेकर वापस चला जाएगा. यह सब उस दरबाजे पर हो रहा था, जिसके भीतर ओबामा और मनमोहन सिंह की मुलाकात चल रही थी. यकीन नहीं हो रहा होगा न आप लोगों को? यहां अगर पात्रों के ओहदे और उनकी वेशभूषा हटा दी जाए, तो यह बिलकुल गली-मोहल्‍लों के छुटभैये गुंडों जैसी हरकत ही थी. संसार के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति, जो अपनी ताकत नहीं, बल्कि व्यवहार से लोगों का दिल जीतने में माहिर माने जाते हों, उनके प्रेस सेक्रेट्री से ऐसे छिछोरे व्यवहार की उम्मीद तो नहीं ही की जा सकती है.

ये बवाल मचा हैदराबाद हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाकात की तस्वीरें कैद करने को लेकर. यह पहले से तय था कि दोनों देशों के आठ-आठ मीडिया वाले अंदर ‘फोटोअप’ के लिए जाएंगे. बाद में कई कारणों से भारतीय अधिकारियों ने ये संख्या पांच कर दी. बस क्या था, व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेट्री रोबर्ट गिब्‍स अड़ गए. उन्‍होंने कहा कि यह संख्‍या आठ से कम करने का कोई सवाल ही नहीं उठता और हर हाल में वे आठों अमेरिकी मीडियावालों को अंदर लेकर ही जायेंगे.

भारतीय अधिकारियों ने अपनी मजबूरी जताई. उनसे मान जाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन गिब्‍स कुछ सुनने की बजाय और भड़क रहे थे. वे चिल्लाने और धमकाने लगे. रही बात गिब्‍स  की अगली हरकत की, उसका जिक्र तो हमने ऊपर किया ही है. अब कोई चारा नहीं था सिवाए गिब्‍स के आगे झुकने का. हमारे अधिकारियों ने वही किया. जलालत, झल्लाहट सब पी गए. दूसरी ओर गिब्‍स अपनी मनमानी कर आगे निकल गए. हर कोई यह देखकर दंग था. हमारे अधिकारी सहमे से थे, लेकिन गिब्‍स और अमेरिकी मीडिया के लोगों के चेहरे पर विजयी मुस्कान साफ झलक रही थी. वाह रे गिब्‍स, शाबाश. तभी तो कहते हैं… ‘अतिथि देवो भव’.

लेखक शमशेर सिंह आजतक न्यूज चैनल के साथ पिछले करीब तेरह सालों से जुड़े हुए हैं. उन्हें 2008-09 के लिए पत्रकारिता का सबसे बड़ा सम्मान रामनाथ गोयनका अवार्ड से नवाजा गया है. शमशेर आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मसलों और नक्सल प्रभावित इलाकों में काफी समय तक काम किया और अपनी रिपोर्ट के जरिये कई बड़े खुलासे भी किये हैं. उनका यह लिखा उनके ब्लाग आन द स्पाट से साभार लिया गया है.

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0 Comments

  1. ..XYZ..

    November 18, 2010 at 10:32 am

    Bilkul sahi kiya Gibbs ne ! India ke logon ko jab har baat mein America hi nazar aata hai to phir Gibbs ka vyavhaar kahan se galat hua ! Gibbs ko maalum hai ki India ke TV Channels hon Ya politicians Ya phir elite class ! Har jagah America aur Americans ke peeche bhaagne ki inki aadat hai ! Jaisa America kahta hai, maan ne ki inki aadat hai .Gibbs jaanta hai ki Barac Obama se haath milaane aur unki ek nazar paane mein Indian , apne aap ko kita bhaagyashaali samajhate hain. Gibbs jaan ta hai ki America ke ghurane se India ki pant gili ho jaati hai . Gibbs jaan ta hai ki Aaj Indian ki maansikta Ek gulaam ki maansikta jaisee ho chali hai ! Lihaza Gibss ka vyavhaar expected tha. Galti humaari hai. Kash , China se hum kuch seekh paate !

  2. मदन कुमार तिवारी

    November 18, 2010 at 1:08 pm

    ठीक तो किया । जब आठ – आठ मीडिया वलों को अंदर जाने का निर्णय लिया गया था फ़िर भारतीय अधिकारी कौन होता है उसको पांच करने वाला । आपके अधिकारी संख्या क्यों कम करना चाहते थें। पत्रकारों को चमचागिरी सिखाने वाले , सेंसरशिप की वकालत करने वाले भारतीय अधिकारियों को याद रखना चाहिये हर जगह उनकी दादागिरी नही चलेगी । गिबस को मेरी बधाई । उसने बिल्कुल ठीक काम किया ।

  3. dhanish sharma

    November 19, 2010 at 3:53 am

    bhai amarika hai.kuch bhi ho sakta hai.

  4. kd, sbr

    November 19, 2010 at 5:24 am

    yahan ke adhikari pahale hi sarm pi chuke hain.

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