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विनोद कापड़ी के भीतर का पत्रकार जगा, कई टीवी संपादकों को पत्र लिख भेजा

अन्ना के गांव में मीडिया वालों के बीच जिस तरह की कुकुरभोंभों मची हुई है, वह लड़ाई दिल्ली तक आ पहुंची है. जिन कुछ न्यूज चैनलों ने इंबारगो का पालन न करते हुए अन्ना के इंटरव्यू को दिखा दिया, उनसे इंडिया टीवी के संपादक विनोद कापड़ी काफी कुपित हैं. उन्होंने सभी न्यूज चैनलों के संपादकों को पत्र लिखा है.

अन्ना के गांव में मीडिया वालों के बीच जिस तरह की कुकुरभोंभों मची हुई है, वह लड़ाई दिल्ली तक आ पहुंची है. जिन कुछ न्यूज चैनलों ने इंबारगो का पालन न करते हुए अन्ना के इंटरव्यू को दिखा दिया, उनसे इंडिया टीवी के संपादक विनोद कापड़ी काफी कुपित हैं. उन्होंने सभी न्यूज चैनलों के संपादकों को पत्र लिखा है.

पत्र में उन्होंने पत्रकारिता व नैतिकता की दुहाई दी है. कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने कुछ दस्तावेज भी साथ भेजे हैं. लीजिए पूरा पत्र पढ़िए और दस्तावेज देखिए. भड़ास4मीडिया को विनोद कापड़ी का पत्र एक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत एक संपादक के सौजन्य से मिला है. इसके लिए हम उनके आभारी हैं. विनोद कापड़ी क्या कहना चाहते हैं और उनका सवाल कितना नैतिक है, और न्यूज की होड़ के इस दौर में ऐसी नैतिकता की अपेक्षा कितना जरूरी और उचित है, इस पर आप भी सोचे-विचारें और चाहें तो अपनी बात नीचे के कमेंट बाक्स में लिख मारें. हालांकि कुछ लोगों यह भी कहते मिले कि इस बार इंडिया टीवी पिछड़ गया इंटरव्यू लेने और दिखाने में तो अब उसके पास दूसरों को किसी बहाने से गरियाने के सिवाय रक्खा क्या है. कल्पना करिए, अगर इंडिया टीवी का रिपोर्टर अन्ना का इंटरव्यू ले चुका होता तो क्या इंडिया टीवी इंबारगो का पालन करता? और, क्या अतीत में इंडिया टीवी ने पत्रकारीय नैतिकताओं का पालन किया है?

विनोद कापड़ी ने अगर सवाल उठाए हैं तो उन्हें उन पर और इंडिया टीवी पर उठने वाले सवालों का भी जवाब देने चाहिए. टीवी के तालाब को गंदा करने का आरोप इंडिया टीवी पर लगता रहा है. चैनलों को न्यूज से हटकर नान-न्यूज पर शिफ्ट होने का खेल खेलना इंडिया टीवी ने ही तो सिखाया. ऐसे में अगर दूसरे न्यूज चैनल अपनी रणनीति, मेहनत और कुशलता से खबर पहले कर लेते हैं और ब्रेक कर देते हैं तो इसमें क्या गड़बड़. थोड़ा बहुत नैतिक सवाल बन सकता है, जो विनोद कापड़ी ने उठाया है, पर बड़े फलक पर देखें तो युद्ध में सब कुछ जायज होता है और न्यूज चैनल चलाना आजकल युद्ध से कम नहीं. -यशवंत, भड़ास4मीडिया


Dear Friends

This is to bring to your notice that today in Ralegan siddhi Anna Hazare was supposed give an interview to the correspondents through a lucky draw procedure.. but when few SENOIRS flew from New Delhi and these seniors requested ANNA TEAM that they have to go back to Delhi same day, so let them take the interview first..

After this all agreed on one condition that interview taken by anybody , be SENIOR  or junior or any channel will be embargo ed  till 6 pm, 13 th September 2011 ( MoU attached) but it was appalling to see that SENIOR journalists in the beginning went on live or deferred live with their interviews on respective channels. Not only this, they immediately telecasted the same interview many times.

This is a huge breach of trust and gross violation of mutual understanding and respect…

I am attaching agreement signed by all correspondents/bureau chiefs/seniors by respective channels and this was very clear to all present including SENIORS. Seniors were very much aware of this agreement and ANNA team also agreed for interview to SENIORS after MoU signed by all channels (pls see MoU).

This is really very unfortunate and complete breach of TRUST..All reporters/Correspondent( so called juniors) stationed in RALEGAN SIDDHI from 12 days to get ONE, ONLY ONE interview of ANNA are  very very upset and frustrated bcoz of this..

I thought this should come to your notice.Hope we seniors will think about our junior friends in future.

Regards,

Vinod Kapri


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0 Comments

  1. prashant

    September 14, 2011 at 2:42 am

    यह तो होना ही था. मीडिया वालों ने ही मीडिया पर भरोसा किया है.

  2. Alok

    September 14, 2011 at 8:14 am

    Haathi ke khane ko aur khilane ko aur

  3. Sushant Kumar

    September 14, 2011 at 3:20 pm

    विनोद जी
    आपकी बात से मीडिया जगत के सभी महानुभवों को सहमत होना चाहिये। एक तरफ़ तो यह लोग बहुत बडी बडी बात करते हैं। कहते हैं कि मैं भी अन्ना तू भी अन्ना, सारा जग अन्ना। लेकिन खबर के वास्ते अन्ना से ही दगा। पत्रकारिता में विश्वास का होना बहुत जरुरी है। लेकिन लगता है इन चैनल वालों को तो सिर्फ़ खबर सबसे पहले दिखाने के चक्कर में नैतिकता आदी कुछ भी याद नहीं रहता।

    विनोद जी आपने इन सभी चैनल वालों का साईन किया हुआ यह पत्र दिखा कर इन सभी को समाज के सामने नंगा करने का काम किया है। आप साधुवाद के पात्र हैं।

  4. BALCHANWA

    September 15, 2011 at 4:37 am

    लगता है कापड़ी जी अपनी बात ठीक तरीके से नहीं कह पाए हैं। उनकी अंग्रेजी भी बेहद कमजोर लगती है। अगर अंग्रेजी नहीं लिख सकते तो हिंदी में अपनी बात कहने में कोई शर्मिंदगी की बात नहीं है। जहां तक नैतिकता का सवाल है, कापड़ी जी को इसकी उम्मीद दूसरों से नहीं करनी चाहिए। उनसे पूछा जाना चाहिए कि निजी जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक में उन्होंने कब-कब नैतिकता का पालन किया है। अगर किसी को कोई शक हो तो उनके पंद्रह साल के करियर का इतिहास-भूगोल सब बता सकता हूं। उम्मीद है वो ऐसी गलती दोबारा नहीं करेंगे। धन्यवाद। बलचनवा।

  5. jai ganesh

    September 15, 2011 at 6:00 am

    First of all, this letter is drafted by some one else becoz vinod kapdi can not write a letter in english. second, india tv which is known for its immoral and unethical news presentation,can not teach a lesson on ethics. aaj chot lagi to pataa chalaa….

  6. तौफीक रज़ा

    September 15, 2011 at 6:20 pm

    अरे भाई, ये तथाकथित बड़े पत्रकार जूनियरों को कहीं गिनते ही नहीं। चूंकि किस्मत से इनको बड़े बैनर में काम करने का मौका मिल गया और इसीलिए अब जूनियरों को तो ये कूड़ा समझते हैं। बड़ी कुर्सी मिलने के बाद जूनियरों से बात करना भी अपनी तौहीन समझते हैं। पुण्य प्रसून जी की काबिलियत में कमी नहीं, लेकिन जब वे सहारा पहुंचे थे है़ड बनकर तो सामने से गुजरते समय दुआ सलाम का भी जवाब देना मुनासिब नहीं समझते थे। इसी तरह बाकी चैनलों के हैड बात करने पर ऐसा रुखा व्यवहार करते हैं, जैसे आप पत्रकार कहलाने के काबिल ही नहीं हैं,निहायत ही गिरे आदमी हैं। अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी, आशुतोष जैसे लोगों इतना मत भूलो, कि कभी आप भी जूनियर थे और कभी आपको भी दुर्दिन देखने पड़ सकते हैं।

  7. amit pathak

    October 10, 2011 at 8:27 pm

    kaun hai ye Vinod kapdi? kya aapne iski english dekhi? jab ise English nahi aati to English me khat likhne ki kyaa zaroorat aan padi thi? jahan tak baat hai ethics ki to aisi baaten Vinod kapdi jaise logon ke muh se shobhaa nahi deti. Dakoo agar pravachan dene lage to vo mahatmaa nahi ban jaata. India tv aur Vinod kapdi apne girebaan men jhank kar dekhe….aur yaad rakhe ki jis din inke paap kaa ghadaa bhar gayaa us din inhe bachaane vaaala koii nahi hogaa!

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