
विश्व विभूति
प्रिंट मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की इस गलाकाट स्पर्धा में गुजरात वैभव को इतनी ऊंचाईयों तक पहुंचाना किसी विलक्षण सूझबूझ के धनी एवं समर्पित व्यक्ति का ही कार्य हो सकता है, जिसे विश्व विभूति विदेह ने कर दिखाया. कुछ ही वर्ष पूर्व गुजरात वैभव के संस्थापक-संपादक विश्वदेव शर्मा भी परलोक प्रयाण कर गये थे। गुजरात वैभव को इस अल्पकाल में ही दो झटकों का सामना करना पड़ रहा है.
विश्वविभूति विदेह ने अहमदाबाद से गुजरात वैभव का सफल प्रकाशन करने के बाद देश की राजधानी दिल्ली से भी 2006 में विराट वैभव का प्रकाशन प्रारंभ कर अपनी अप्रतिम कर्मठता एवं लगन का परिचय दिया था.
श्री विदेह के निधन पर विराट वैभव, दिल्ली के कार्यालय में एक शोक सभा हुई. जिसमें वैभव परिवार के लोगों ने नम आंखों से विदेहजी को याद किया. मर्मांतक शोक की इस बेला में सभी साथियों ने कामना की कि परमपिता उनकी आत्मा को शांति दें. वैभव परिवार में मार्गदर्शक और अभिभावक के रूप में उनकी कमी हमें हमेशा खलेगी.












pushpranjan
January 15, 2011 at 10:34 am
विदेहजी KE ACHANAK निधन KI KHABAR PAR VISHWAS NAHI HO RAHA HAI.
विश्व विभूति विदेह Ji गुजरात की धरती पर हिंदी भाषियों की सेवा करने वाले legend THE.
HINDI KI SEVA KARNE WALE IS MAHAMANAV KO PRANAM,
उनकी आत्मा को परमपिता शांति दें.
Pushpranjan