वीओआई में तकनीक घोटाला, उंगलियां सीईओ की तरफ
त्रिवेणी के नए लांच चैनल वायस आफ इंडिया के कुछ लोग अपने मालिक और संपादक का ही स्टिंग आपरेशन करने में जुटे हैं। भड़ास4मीडिया को पक्की सूचना मिली है कि इस चैनल के मालिक और नए समूह संपादक की भाषा, व्यवहार और शैली से नाराज कुछ लोगों ने इनकी बातों को रिकार्ड कर लिया है। इस टेप में वे बातें भी हैं जिसमें चैनल के मालिक द्वारा कुछ राज्यों में जल्द होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नेताओं से अभी से पैसा उगाहो अभियान चलाने की बात कही गई है। अभी जबकि ये रीजनल चैनल लांच भी नहीं हुए हैं, इन रीजनल चैनलों के हेड से लेकर स्टेट ब्यूरो व डिस्ट्रिक रिपोर्टर तक से खबर चलाने के लिए पैसे लेने को दबाव बनाया जाने लगा है।
इस पूरी बातचीत की रिकार्डिंग कुछ लोगों ने की है और इसे सूचना प्रसारण मंत्रालय के पास इस आशय के साथ भेजने की तैयारी कर रहे हैं ताकि इस चैनल का लाइसेंस कैंसिल कराया जा सके। इसी तरह नए समूह संपादक द्वारा ब्यूरो की भरी मीटिंग में सभी को गधा बताने की बात को भी रिकार्ड किया गया है।
उधर, वायस आफ इंडिया में एक घोटाले की चर्चा भी आम है। इस चैनल के लिए जो टेक्नालाजी खरीदी गई है, वो आउटडेटेड है। इसके चलते लोगों की ज्यादातर एनर्जी तकनीकी से लड़ने व उसे ठीक से संचालित करने में जाया हो जाती है। अगर कभी प्रबंधन से इसकी शिकायत की जाती है तो तकनीक की खरीदारी करने वाले लोग न्यूज के लोगों पर इसे ठीक से हैंडल न कर पाने का आरोप लगा किनारा कर लेते हैं। बताया जाता है कि इस तकनीक की खरीद में लंबी कमीशनबाजी हुई है। अब इस खराब तकनीक को सुधारने के नाम पर कमीशन का खेल खेले जाने की तैयारी है। इस तकनीक की खरीदारी में चैनल के सीईओ राहुल कुलश्रेष्ठ की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है।
उधर, वीओआई में तख्ता पलट के बाद आंतरिक हलचल तेज हो गई है। ग्रुप डायरेक्टर न्यूज बनाए गए रामकृपाल सिंह से पीए हटाकर उसे एमडी के साथ अटैच कर दिया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संस्थान रामकृपाल को किनारे करने की तैयारी में है। इससे आहत उनके खेमे के कई वरिष्ठ लोग जल्द ही चैनल को बाय बोलने की तैयारी में हैं क्योंकि इन लोगों का मानना है कि वीओआई में अब काम करने के हालात नहीं रह गए हैं। हालांकि कई लोगों का यह भी कहना है कि कंटेंट के लेवल पर चैनल की जो दशा आज है उसके लिए जिम्मेदार रामकृपाल सिंह ही हैं। मृतप्राय सा कंटेंट, लुक, प्रजेंटेशन और पैकेजिंग चैनल को अरुचिकर बनाने के लिए पर्याप्त है। संभवतः इसी के चलते प्रबंधन ने चैनल के कायाकल्प के लिए इसे नए हाथों में सौंपा है। पर सूत्रों का कहना है कि रविशंकर का अपना कोई टीवी का खास अनुभव नहीं रहा है। त्रिवेणी के नए आने वाले लक्जरी चैनल मिलनेयर के हेड रविशंकर जबसे समूह संपादक बने हैं, मिलनेयर के कई लोग जो उनके खास हैं, अब वीओआई की नेशनल टीम के वरिष्ठ लोगों को दिशा-निर्देश और ज्ञान देते टहलते देखे जाते हैं। इससे न्यूज रूम में संकेत साफ है कि अब रामकृपाल से जुड़े लोगों की खैर नहीं है।
फिलहाल तो इतना ही कहा जा सकता है कि वीओआई के आने वाले दिन ठीक नहीं दिख रहे हैं, बावजूद इसके कि यह चैनल खुद को असली खबरों का चैनल और बाकी को भ्रम बताने के लिए करोड़ों रुपये का मीडिया कंपेन चलाए हुए है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर यही स्थितियां रहीं तो कहीं यह चैनल खुद ही भ्रम न बन जाए और बाकी चैनल खबरिया कहलाएं।











