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शराबी पत्रकारों के चलते अन्ना के गाँव में नहीं मिली मीडियाकर्मियों को शरण

मुंबई. अन्ना के गाँव में उन्हें कवर करने पहुंची मीडिया को इस बार कुछ खास मजा नहीं आ रहा है. हजारे के दिल्ली अनशन के दौरान उनके गाँव में मीडिया कर्मियों की जो खातिरदारी हुई थी, उसका उन लोगों ने खूब दुरुपयोग किया था. गांववाले मीडिया के लोगों की वह बदतमीजी भूल नहीं पाए हैं. इन मीडियावालों ने हजारे के गांववालों की मेहमानवाजी के दौरान जमकर उसी गाँव में शराब पी, सिगरेट के धुंए उड़ाये.

मुंबई. अन्ना के गाँव में उन्हें कवर करने पहुंची मीडिया को इस बार कुछ खास मजा नहीं आ रहा है. हजारे के दिल्ली अनशन के दौरान उनके गाँव में मीडिया कर्मियों की जो खातिरदारी हुई थी, उसका उन लोगों ने खूब दुरुपयोग किया था. गांववाले मीडिया के लोगों की वह बदतमीजी भूल नहीं पाए हैं. इन मीडियावालों ने हजारे के गांववालों की मेहमानवाजी के दौरान जमकर उसी गाँव में शराब पी, सिगरेट के धुंए उड़ाये.

इतना ही नहीं डीजे सिस्टम के कानफाड़ू आवाज पर जमकर डांस भी की. जहां इतना सब कुछ मिले, भला उसकी रिपोर्टिंग करने कौन पत्रकार नहीं जाना चाहेगा. अन्ना हजारे के गाँव से लौटे पत्रकारों ने मुंबई में इस कदर तारीफ़ की, जिसे सुनकर कुछ वरिष्ठ अपने जूनियर रिपोर्टरों के उम्मीदों पर हथौड़ा मारकर खुद ही रालेगन सिद्धि पहुंच गए. लेकिन वहां पहुंचने पर उनकी भी उम्मीदों पर पानी फिर गया. इस बारे में विस्तृत खबर यह है कि अन्ना हजारे १६ अगस्त से दिल्ली में जिस समय अपना अनशन शुरू किये थे, उस दौरान उनके गाँव में क्या हो रहा है, यह जानने और लोगों तक खबर पहुंचाने के उद्देश्य से मीडिया का पूरा झुण्ड वहां पहुंच गया. उस समय पूरे देश में राष्ट्र भक्ति का प्रेम उमड़ रहा था, सो ऐसे में अन्ना का गाँव क्यों पीछे रहे.

गाँव वालो ने अन्ना हजारे द्वारा स्थापित रूलर डेव्हलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर में मीडिया कर्मियों के लिए रहने और खाने की पूरी व्यवस्था कर दी. बदले में पत्रकार अपने लाइव रिपोर्ट के दौरान उनका भी कमेन्ट ले लेते थे. अन्ना हजारे के गाँव वालों की खातिरदारी कुछ पत्रकारों  को हजम नहीं हुई. उन महाशय लोगों ने बाहर से शराब की बोतल लाकर ट्रेनिंग सेंटर के कमरे में बैठकर पीने शुरू कर दिया. जाते समय शराब की खाली बोतल वहीं छोड़ गए थे, जिसे अन्ना समर्थको को ठिकाने लगानी पड़ा. अन्ना हजारे का शाकाहारी गाँव भला इस बार कैसे शराबी पत्रकारों की खातिरदारी करता.

खबर यह भी है कि कई चैनलों  के होनहार पत्रकारों ने मुफ्त के खाने-पीने और रहने की व्यवस्था का भी अपने कार्यालय से भुगतान करा लिया था. वैसे तो सभी चैनलों का टीए-डीए रेट अलग -अलग है फिर भी कम से कम प्रति दिन प्रति व्यक्ति ६०० से १००० रुपये दिए जाते है. इसी तरह रहने के होटल का मोटा बिल भी लोगो ने पास करा लिया. इसी उम्मीद में कुछ लोग इस बार भी रालेगन सिद्धि पहुंचे थे. पर अफसोस इस बार इन लोगो को अन्ना के ट्रेनिंग सेंटर में शरण नहीं मिली और खबरियो की फ़ौज को वहां से १२-१५ किमी दूर होटलों में पनाह लेनी पड़ी. पिछली  बार अन्ना के गाँव में मीडिया कर्मियों का झुण्ड १३ से १४ दिन डेरा डाले हुए था. उस दौरान के कुछ  पत्रकारों ने अपनी कंपनियों से १२ से १५ हजार रुपये ले लिए.

अन्ना के ट्रेनिंग सेंटर से खदेड़े गए पत्रकार इस समय दिन भर की रिपोर्टिंग के बाद रालेगांव से करीब २० किमी दूर राजन गाँव में थकान मिटाने पहुंच रहे हैं. वहां शराब और मुर्गे की पूरी व्यवस्था है, लेकिन मुफ्त नहीं.  राजन गाँव में अन्ना के गाँव के तरह किसी भी तरह की नशाबंदी नहीं है. गौरतलब हो कि अन्ना हजारे के गाँव में शराब, बीड़ी-सिगरेट और गुटखा जैसे तमाम नशे पर रोक है. रालेगांव की किसी भी दुकान पर नशे से जुड़ी चीजें नहीं बेची जाती.

-मुंबई से पत्रकार विजय यादव की रिपोर्ट

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0 Comments

  1. mohan

    September 5, 2011 at 8:31 am

    यह नई बात नही जब अपनी कद्र आप नही करोगों तो यह दिन तो देखना ही पड़ेगा । वजह साफ है कि जब गांव वालो को खुद बतायेगे ये करियो हमरे लिए अच्छा है और लोग देखेगे फौरेब दिन भर बाचेगे । तो जो वहां का निवासी होगो उसे नफरत तो आयेगी । चार लोग खाना नही बनाये और पुरे गांव मे कह देगे कि चुल्हे नही जले तो जो चुल्हा जलाये रहेगा आपकी बात पर हेसेगा ही . और आप अपनी विश्वसनीयता पर संकट खड़ा ही कर रहे है। दूसरो पर भी यह संकट लाद दे रहे है। आज पत्रकारिता जहां भी पहुंची हो लेकिन एक बात यह भी सच कि लोगों में अब पहले की तरह पत्रकारों पर भरोशा नही है। बिन बुलाये मेहमानों की तरह जब पहुंचेगे तो यही हाल होगा।और पहुंचियें हमने तो तब ही माथा पीट लिया था जब अभिषेक बच्चन की शादी थी और ये भोपू में लगातार चिल्ला चिल्ला कर एक्सक्लूसिव तस्वीर पेश कर रहे थे अरे भइया आप को जरा गरीबों के मुद्दे पर भी नजर इनायत करिये अब यह सच नही है कि टीवी केवल शहरों मे देखा जा रहा गांवों मे भी देखा जा रहा है। और िस देश की जनता सत्तर प्रतिशत गांवों में निवास करती है जरा उसका भी खोज खबर लिजिए वरना ऐसे ही अपमान सहना पड़ेगा।

  2. snjay jha

    September 5, 2011 at 5:58 pm

    शराब पीना बुरी बात है। शराब पीकर कहीे हुडदंग मचाना उससे भी बुरी बात है। यदि शराब के कारण पत्रकारों की इमेज इतनी खराब हो रही है तो इसे त्याग देना चाहिए और दूसरों को भी समझाना चाहिए कि वे शराब का सेवन न करें।ंं

  3. satyavart

    September 6, 2011 at 5:14 pm

    anaa kay gav may media karmiyo ka is trah say sharab pina hurdang baji karna kafi galt hai vaha aisa karnay walay patrkaro ki list kar un kay compnio kay maliko ko bejni cahi jinahy turant parbhav say nukari say nikal dena cahiya
    ek or sara des desh kay liae lad raeha hai dusri or yei sab sharam ki bat hai

    satyavart
    [email protected]

  4. Journalist

    September 11, 2011 at 6:46 am

    viajay yadav jaise patrkaron ne hi free me rahne ki jgah khoji hogi.. mai wahan tha lekin maine aur na hi kisi aur patrakar ne Gaon me rahne ki jagah khoji hogi..ye sab bakwas likhne se pahle Mr. Yadav thoda dimag ka istemal kara karen

  5. vijay yadav

    September 12, 2011 at 2:05 pm

    आदरणीय बेनाम जर्नलिस्ट जी
    आप कहा रुके थे और आपको क्यू मुफ्त घर नहीं मिला या आपने लिया नहीं यह तो हमें नहीं पता . अगर आप अपने नाम से कमेन्ट करते तो मै जरुर दिमाग का इस्तेमाल कर आपकी भी हकीकत जानने की कोशिश करता. उम्मीद है आगे से अपने नाम से कमेन्ट जरुर करेंगे.
    विजय यादव

  6. bhartiya nagrik

    September 26, 2011 at 1:04 pm

    vijay yadav ji agar aap in Patrakaro ke Naam bhi Likhte to khub rahi hoti ! woh koun patrakar the jinhone TA .DA lekar muft me Hajare ke gaon me Raate kanti aur sharab pikar shabab me sama gaye the jara bata dijiye ! such ko Apne Samne laya Dhanyawad

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