: नोटिस देने के बाद भी कथित पैसा मांगने वाले पत्रकारों पर कार्यवाही न होने पर पीड़ित कानून की शरण में पहुंचा : यूपी के जिला बदायूं से सूचना है कि अखबार में प्रकाशित एक खबर से नाराज एक व्यक्ति ने अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर, स्थानीय संपादक केके उपाध्याय, बदायूं के ब्यूरो चीफ तौकीर हैदर, बदायूं के क्राइम रिपोर्टर व सिलहरी के एजेण्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है. पीड़ित ने पहले अखबार से जुड़े लोगों को नोटिस भेजा था लेकिन नोटिस का जवाब न मिलने के बाद सीजेएम न्यायालय पहुंचकर मुकदमा दर्ज करा दिया.
आरोप है कि हिन्दुस्तान, बदायूं के सिलहरी क्षेत्र के एजेण्ट ने सालारपुर ब्लाक के लेखाकार राजबहादुर गौतम से बिना किसी बात के पांच सौ रुपये देने की मांग की. गौतम की गिनती ईमानदार अधिकारियों में की जाती है. उन्होंने एजेण्ट को पैसा देने को मना कर दिया. बताया जाता है कि इसके बाद सिलहरी के एजेण्ट ने लेखाकर के खिलाफ एक खबर ब्यूरो कार्यालय में भेज दी. एजेण्ट द्वारा प्रेषित खबर को ब्यूरो में तैनात क्राइम रिपोर्टर ने 27 सितम्बर के अंक में प्रकाशित करा दिया. खबर में लेखाकर पर तमाम आरोप लगाते हुए उनकी एक भाकियू नेता के साथ मारपीट का जिक्र किया गया था. बताया जाता है कि यह भाकियू नेता एजेण्ट का रिश्तेदार है.
प्रकाशित खबर में लेखाकार के नाम का भी जिक्र कर दिया गया. अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल किए जाते देख लेखाकार गौतम ने अखबार को नोटिस देने का फैसला ले लिया. गौतम ने अखबार के प्रधान संपादक शशिशेखर, बरेली के संपादक केके उपाध्याय तथा बदायूं के ब्यूरो चीफ तौकीर हैदर को पार्टी बनाते हुए अपने वकील के माध्यम से नोटिस भेज दिया. बताते हैं कि नोटिस के बाद गौतम पर समझौते के लिए दबाव पड़ने लगा. गौतम किसी दबाव में नहीं आए. कुछ रिपोर्टरों पर आरोप है कि वे अधिकारियों पर गौतम के खिलाफ कार्यवाही के लिए दबाव बनाने लगे. पुलिस से संबंधों का फायदा उठाते हुए गौतम को किसी मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई.
यह भी बताया जाता है कि समझौते की बैठक के नाम पर गौतम को एक दिन किसी निश्चित जगह पर बुलाया गया और बाद में लौटते वक्त उनका एक्सीडेण्ट करा दिया गया. गौतम को अस्पताल में एडमिट होना पड़ा. गौतम ने नोटिस पर कोई कार्यवाही न होते देख सीजेएम न्यायालय में 04 नवम्बर 10 को अखबार से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया. सूत्रों के मुताबिक गौतम को आये दिन बदमाशों की तरफ से समझौते के लिए धमकियां मिल रही हैं. इस प्रकरण में भड़ास4मीडिया को मिले दस्तावेज इस प्रकार हैं…


















sudhir kumar
November 5, 2010 at 1:13 am
Jaroor in patrakaro ne bechare gautam ko bevajaha sataya hoga tabhi baat itne badi h.
DINESH KUMAR
November 5, 2010 at 1:19 am
Badaun k haalaat din b din kharaab hote ja rahe h, Management ko kuch karna chahiye varna yaha k reporter HIndustan ki saakh par batta hi lagvaate rahenge.
sanjay
November 5, 2010 at 5:43 am
chote shahare ke patrakar aise hi blacemale kar paisa wasulate hain..
vikram srivastava
November 6, 2010 at 8:24 am
mahgai ke dur me ak patrkar hi hai jisko bhukhe marne ki nubat hai . chahe akhbar ho ya news channel sbhi patrkaro se add uthvate hai .. ye thik hua ki sampadak ke khilaff bhi mukdma darj hua hai …
shiv
November 6, 2010 at 10:46 am
bure din aa gaye hai hindsustan ke
Vikas Kumar
November 9, 2010 at 1:42 pm
yhan to 500Rs. ka mamla hai , budaun ke chenal bale to 50-50Rs. ke liye apna jameer tak bech dete hain , inka bas chale to yeh dadbody ka kafan utar kar bech den . ……
sandeep singh
November 9, 2010 at 1:47 pm
jab se nange bhuke ghar ke log media line main aaye hain tab se is line ka bedagark ho gya hai .:'( daroga ki surat dekh kar pent gili karne bale patrkar aaj ssp ko apna chacha btate hue bda garv mehsush karte han. in nango ne budaun ki media ka satya nash kar diya hai .
Satyabaadi
November 10, 2010 at 4:00 pm
Aise patrkaro ko nikkalo barna hindustan babbaad hone me der nahi lalegi