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श्रीकांत त्रिपाठी पर्ल ग्रुप से कार्यमुक्‍त

वरिष्‍ठ पत्रकार श्रीकांत त्रिपाठी अब पर्ल ग्रुप के हिस्‍सा नहीं रहे. उन्‍होंने इस्‍तीफा दिया है या उन्‍हें हटाया गया है, जैसे कयासों के बीच यह बात बिल्‍कुल सच है कि पर्ल ग्रुप से उनका पुराना नाता टूट गया है. इसके साथ उनके नेतृत्‍व में पर्ल ग्रुप अखबार की होने वाली लांचिंग की खबर भी खतम हो गई. श्रीकांत त्रिपाठी पर्ल ग्रुप की मैगजीन शुक्रवार, बिंदिया और मनी मंत्रा के ग्रुप एडिटर हुआ करते थे.

वरिष्‍ठ पत्रकार श्रीकांत त्रिपाठी अब पर्ल ग्रुप के हिस्‍सा नहीं रहे. उन्‍होंने इस्‍तीफा दिया है या उन्‍हें हटाया गया है, जैसे कयासों के बीच यह बात बिल्‍कुल सच है कि पर्ल ग्रुप से उनका पुराना नाता टूट गया है. इसके साथ उनके नेतृत्‍व में पर्ल ग्रुप अखबार की होने वाली लांचिंग की खबर भी खतम हो गई. श्रीकांत त्रिपाठी पर्ल ग्रुप की मैगजीन शुक्रवार, बिंदिया और मनी मंत्रा के ग्रुप एडिटर हुआ करते थे.

श्रीकांत त्रिपाठी के नेतृत्‍व में ही इन तीनों मैगजीनों की लांचिंग हुई थी. बाद में इन्‍हें हटाकर प्रदीप पंडित को शुक्रवार का दायित्‍व थमा दिया गया था. हालांकि इन्‍हें ग्रुप से नहीं हटाया गया था. ये ग्रुप में बिना काम के पड़े हुए थे. इन्‍हें चेयरमैन का करीबी माना जाता था. पिछले काफी समय से पर्ल के बाराखंभा ऑफिस में बैठ रहे थे. बिना काम धाम के. चर्चा थी कि इनके नेतृत्‍व में पर्ल ग्रुप के अखबार की लांचिंग होने वाली है, इसलिए इन्‍हें साथ रखा गया है. पर अब श्रीकांत त्रिपाठी के जाने के बाद इस चर्चा पर भी विराम लग गया है.

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0 Comments

  1. Arun kumar singh

    March 15, 2011 at 6:46 am

    श्रीकांत त्रि‍पाठी जी के बारे में मैं बहुत अधि‍क तो नहीं जानता लेकि‍न इतना तो जरूर जानता हूं कि‍ वे समझौता वादी नहीं थे। उन्‍होने शुक्रवार पत्रि‍का को जो उचाइया दीं वह आज भी पाथेय हैं। उन्‍होने तथाकथि‍त तीस्‍ता सीतलवाड, शबाना आजमी और अनेक लोगों की जो सच्‍चाइयां उजागर की थीं वे पत्रि‍का के उत्‍थान में मील का पत्‍थर बनीं। उन्‍होने शुक्रवार को जन जन की पत्रि‍का बनाया था। आजमगढ तैनाती के दौरान उन्‍होने मुझे भी पत्रि‍का में लि‍खने का मौका दि‍या था। वे हमेशा यह सि‍खाते थे कि‍ कभी भी सच्‍चाई से समझौता मत करना। वे क्‍यों पत्रि‍का से हटे यह तो नहीं मालूम लेकि‍न उनके बारे में इतना जरूर कह सकता हुं कि‍ वे गोपाल सिंह नेपाली की इन पंक्‍ति‍यों के जरूर हकदार हैं कि‍
    तुम सा लहरों में बह लेता, तो मैं भी सत्‍ता गह लेता।
    ईमान बेचता चलता तो, मैं भी महलों में रह लेता।।

    अरूण कुमार सिंह, संतकबीरनगर, 9415379644

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