लखनऊ : तकनीक ने पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का काम किया है। जैसे-जैसे तकनीक बढ़ी है पत्रकारों का काम पहले के मुकाबले ज्यादा सरल, सुगम व प्रभावी होता गया। हालांकि आज हिन्दी पत्रकारिता में अकुशल अथवा अर्द्धकुशल लोगों की आमद बढ़ रही है फिर भी हमारे देश के बड़ी तादाद में लोगों की आशाओं का केन्द्र यही है। यह कहना है सूचना आयुक्त वरीन्द्र सक्सेना का।
वह हिन्दी पत्रकारिता दिवस के मौके पर लखनऊ श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की ओर से प्रेस क्लब में ’पत्रकारिता पर तकनीक का प्रभाव विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। मुख्य वक्ता लोकमत के स्थानीय संपादक उत्कर्ष सिन्हा ने कहा कि मीडिया में तकनीक का प्रभाव बढ़ गया है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा अब बेहतर ढंग से हा पा रही है। इन्टरनेट को हिन्दी पत्रकारिता के लिए एक उपयोगी साधन बताते हुए सिन्हा ने कहा कि आज सदंर्भ व इतिहास के लिए पत्रकार को ज्याद प्रयास नहीं करने पड़ते हैं। हालाकि साइबर दुनिया पर अधिक निर्भरता के चलते मौलिकता समाप्त हो रही है। ब्लाग और वेबसाइटों के चलन को उन्होंने पत्रकारिता के लिए स्वस्थ संकेत बताया।
लखनऊ विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. ऊषा सिन्हा ने कहा कि श्रेष्ठ पत्रकार वही है जिसमें भाषा, व्याकरण, वर्तनी के ज्ञान के साथ सामाजिक नैतिक मूल्य भी हों। उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता में अभिनव प्रयोगों को स्थान मिलना चाहिए। उर्दू दैनिक कौमी खबरें के स्थानीय संपादक श्री उबैद उल्लाह नासिर ने कहा कि तकनीक का विकास तो हुआ है पर प्रशिक्षित पत्रकारों की कमी हो गयी है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर पर उंगुली रखने से पहले जनता की नब्ज पर उंगुली रखना जयादा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों के अभावके चलते उर्दू पत्रकार नहीं मिल रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्त्ता व पी.यू.सी.एल. के उपाध्यक्ष राम कुमार ने कहा भूमण्डलीयकरण के दौर में हिन्दी अखबार बहुत हद तक स्थानीय होकर रह गये हैं। एक जिले की खबर उसी अखबार के दूसरे जिले के संस्करण में नहीं नजर आती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिर्तनों में अखबरों की बढ़ी भूमिका है। और तकनीक इसे पूरा करने का एक साधन है।
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश महासचिव पी.के. तिवारी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता में अंग्रेजी भाषा का बढ़ता प्रभाव चिन्ता का विषय है। आज तकनीक के विकास के साथ काम का दबाव ज्यादा बढ़ गया है। इससे पहले विषय प्रवर्तन करते हुए लखनऊ श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष सिद्धार्थ कलहंस ने कहा कि तकनीक के विकास लाभ अधिक हैं जबकि खतरे कम हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक ने हिन्दी पत्रकारिता में गुणात्मक परिर्तन लाने का काम किया है। यूनियन की सचिव विनीता रानी ‘विन्नी’ ने कहा कि आज भी हिन्दी पत्रकारिता में ऐसे लोग मोजूद हैं जिन्होंने तकनीक के उत्तरोत्तर विकास को देखा है। संगोष्ठी में विजय उपाध्याय, कुतुब उल्लाह, जयदीप भल्ला, नैय्यर जैदी, शिव शरण सिंह, जावेद काजिम, हरि शंकर शाही, रमेश चन्द्र गुप्ता, अमिता शुक्ला, इफ्तिदा भट्टी के सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद थे। प्रेस विज्ञप्ति












Haider Rizvi
May 30, 2011 at 6:07 pm
Saathi Utkasrh Aapka Newspaper Kab Launch Ho raha hai. Kalhans Saheb ne Badi Tareef Kar ke Rakha Hai Aap Ki. Umeed Hai Badhiya Paper Aapki Sadarat Mein Niklega.