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दुख-दर्द

सरकारी अध्‍यापक ने पत्रकार को पीटा

राजौरी में एक सरकारी अध्‍यापक ने एक पत्रकार को पीट दिया. ये घटना गुरुवार को राजौरी के मेन मार्केट में हुई. पत्रकार और अध्‍यापक ने एक दूसरे के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है. सूत्रों ने बताया कि पीटीवी न्‍यूज नेटवर्क के पत्रकार अमित शर्मा को किसी बात के लिए सरकारी अध्‍यापक विनोद गुप्‍ता ने पीट दिया. इसके पहले दोनों के बीच जमकर कहासुनी हुई.

राजौरी में एक सरकारी अध्‍यापक ने एक पत्रकार को पीट दिया. ये घटना गुरुवार को राजौरी के मेन मार्केट में हुई. पत्रकार और अध्‍यापक ने एक दूसरे के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है. सूत्रों ने बताया कि पीटीवी न्‍यूज नेटवर्क के पत्रकार अमित शर्मा को किसी बात के लिए सरकारी अध्‍यापक विनोद गुप्‍ता ने पीट दिया. इसके पहले दोनों के बीच जमकर कहासुनी हुई.

सूत्रों का कहना है कि पहले दोनों के बीच शाब्दिक लड़ाई हुई. इसके बाद यह लड़ाई मारपीट में बदल गई. इस दौरान वहां पर स्‍थानीय लोगों की काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी. स्‍थानीय लोगों ने दोनों का बीच बचाव कर मामला तात्‍कालिक तौर पर सुलझाया. इसके बाद दोनों राजौरी थाने पहुंचे तथा एक दूसरे के खिलाफ एफआईआर दी. पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. पूरे मामले की जांच की जा रही है कि आखिर किस कारण से दोनों के बीच मारपीट हुई.

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0 Comments

  1. santosh kumar pandey

    September 16, 2011 at 7:06 am

    मास्टरों की बड़ी दबंगगई है हमको एक बात समछ में नहीं आती की मास्टरों को असलहे कैसे पास हो जाते है कई को तो मैंने देखा है रिवाल्वर लेके पढ़ाने आते है इनके खिलाफ भी अन्ना बनाना पड़ेगा ||

  2. ऋतुपर्ण दवे

    September 16, 2011 at 4:09 pm

    अब शिक्षक अध्यापक नहीं रहा। मास्टर हो गया है। मास्टर यानी मास्टर। धोती, कुर्ता वाले मास्टर कम जीन्स और टी शर्ट वाले ज्यादा हो गए हैं। कमाई के शॉर्टकट तरीके अपना कर तनख्यवाह को सुरक्षित रख दीगर तरीके से घर खर्च चलाने वाले मास्टर काफी खतरनाक हो गए हैं। कई जगह तो एमडीएम का खेल भी मास्टर कर रहे हैं और एसएचजी यानी स्वसहायता समूहों के कैश बुक, स्टॉक रजिस्टर मेन्टेन करना गल्ले का आरओ लाने का काम भी मास्टर कर रहे हैं। आज के मास्टर गांव का बड़ा नेता हो गया है। सरपंच बनाने बदलने की ताकत रखता है । यकीनन हथियार रखना और उसका उपयोग करना उसके लिए बड़ी छोटी सी बात हो गई है। असल में वो तो गांव की हुकूमत का मास्टर जो बन गया है। ऐसे में अगर किसी मास्टर से कोई पत्रकार उसकी करतूत उछालने की गुस्ताखी कर बैठा और अपनी मास्टरी पर उतर आया तो क्या अचंभा…???? सरकार भी तो न जाने कैसे – कैसे नियम बनाती है। डॉक्टर, नर्स, वकील, पुलिस,ड्राइवर, सफाईकर्मी के लिए तो ड्रेस की अनिवार्यता बताती है लेकिन मास्टर और मास्टरनियों को जीन्स और सूट में बच्चों का भविष्य बनाने की छूट दे रही है। भला जीन्स और सूट वाला मास्टर क्यों किसी से डरे न छात्र से न ही छात्र के बाप से । जय हो शिक्षा व्यवस्था की जहां ड्रेस केवल विद्यार्थियों के लिए है न कि विद्यार्थी बनाने वालों के लिए। भला मास्टर क्यों न दबंग हो …………….अब तो शिक्षक दिवस पर न छात्र ही फूल लेकर मास्टर के घर जाते दिखते और न ही आज के मास्टर फूल लेने का मतलब ही जानते पता नहीं इस सबके पीछे कौन FOOl हौ या फूल ……???? बहरहाल गनीमत है मास्टर ने पत्रकार को ही पीटा किसी पुलिसवाले को नहीं ..। दरअसल दोष व्यवस्था का है न कि जीन्स और सूट वाले मास्टर, मास्टरनियों का…..

  3. monika

    September 16, 2011 at 5:41 pm

    मास्टरों की बड़ी दबंगगई है हमको एक बात समछ में नहीं आती की मास्टरों को असलहे कैसे पास हो जाते है कई को तो मैंने देखा है रिवाल्वर लेके पढ़ाने आते है इनके खिलाफ भी अन्ना बनाना पड़ेगा ||

  4. V.P.Ahuja

    September 23, 2011 at 3:59 pm

    SSSSSSSSSSS…………..

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