सहारा में 70 के करीब एंकर हैं. सभी चैनलों में. अब इनमें से करीब आधों को ऑफ एयर कर दिया गया है. करीब 34-36 एंकर ही एंकरिंग करेंगे कुल पांच चैनलों में. बाकी डेस्क पर. इनका एंकरिंग अलाउंस नहीं हटेगा, ऐसा कहा गया था. एक कमिटी थी जिसने ये फैसला किया. सूत्रों के मुताबिक कमेंटी में उपेंद्र राय के नेतृत्व में दीक्षा, मनोज मनु, रजनीकांत और विजय राय शामिल थे.
उधर, एक अन्य मेल के जरिए पता चला है कि शगुन त्यागी जो सहारा समय उत्तर प्रदेश उत्तराखंड चैनल में बतौर न्यूज़ एंकर कार्यरत हैं, अब संस्थान की बेहतरी के लिए किए गए बदलाव के तहत दूसरी ज़िम्मेदारियां निभाएंगे. विशेष प्रोग्रामिंग, रिपोर्टिंग आदि में ये सक्रिय रहेंगे. शगुन कॉमनवेल्थ खेलों के लिए प्रॉटोकॉल कमेटी में रहेंगे.












ek saharian
September 22, 2010 at 2:13 am
ye sab union nahi hone se hai.
आकाश
September 22, 2010 at 10:13 am
सहारा का दूसरा नाम बदलाव है.. हर नया व्यक्ति बहुत कुछ बदलने के इरादे से यहां आता है.. कुछ बदलता है.. वरना वो ही अपने आपको सहारा के रंग में बदल लेता है
kumarsingh
September 23, 2010 at 2:07 pm
यशंवत जी मेरा आपसे निवेदन है कि मेरी बात भी सहारा के कर्ताधरताओं तक पहुचांए। यशंवत जी सहारा में सिर्फ यूपी,बिहार और एनसीआर चैनल के एकंरों को पढ़ने से रोका गया है…क्योंकि मुझे यह सूचना सहारा के मेरे एक सहयोगी से ही मिली है और पुख्ता भी हैं कि यह बदलाव सिर्फ और सिर्फ इन तीन चैनलों में ही हुआ है,और इसमें सबसे बड़ी भूमिका मनोज मनु मोहदय की है…जो कभी सहारा में इंट्रन हुआ करते है। पर यह बडे ही दुःख की बात है कि जिस व्यक्ति ने सहारा में अपने पत्रकारिता की शुरूआत की आज वही व्यक्ति सहारा ने अच्छे चेहरों को साईड करने में तुला है…इतना घमंड करना भी कहां तक उचित है…ख़बर तो यह भी हैं कि आने वाले दिनों में सहारा में कैम्पस से नयी-नयी एंकर लायी जायेगी…वा मनोज भाई तुम से यही उम्मीद थी कि जिनके साथ कभी ज़मीन पर बैठते थे…उन्हीं को किचड़ में धकेल दिया….।
जरा खुद की एंकरिंग भी तो देखों भाई…खुदा से डरों…जहां आज तुम्हारे जलवे है…कल वहां तुम्हें ही गेट के बाहर कर दिया जाएगा….देख लेना…जहां नामवर सिंह,विनोद दुआ और पुण्य जी,संजीव जी जैसे लोगों को बहार का रास्ता दिखा दिया गया हो…वहां आप जैसे लोगों की क्या विसात…मैं दुआ करूंगा…किसी गरीब की बदुआ ना लग जांए..भाई….
तुम्हारा सहारा का एक गरीब पुराना मित्र या सुबचितंक मान लो
sandeep
September 25, 2010 at 6:03 am
yah achhchhha hua hai or is se nye longo ko bhi moka milega8)