
सतिंदर सिंह
वर्ष 2004 में उन्हें -कविता दी भूमिका- नामक पुस्तक पर साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था। उनकी अन्य पुस्तकों में -बिरख निपटारे, सरदल ते आर-पार, नाल-नाल तुरदियां, त चेरी दे फूल और सूरज ते मसीहा नामक प्रमुख है। वे आलोचक के साथ-साथ बेहतरीन कवि भी थे। उनके निधन से पंजाबी साहित्य जगत को ठेस लगी है। पंजाबी में साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित डा. फूलचंद मानव और प्रो. योगेश्वर कौर ने आस्ट्रेलिया से नूर के परिवार को संदेश भेजकर दुख जताया है। उन्होंने कहा है कि नूर उनके अच्छे मित्रों में थे उनसे जब भी मुलाकात होती थी तो उसका मुख्य विषय पंजाबी भाषा के प्रचार और प्रसार को लेकर ही होता था। उन्होंने कहा कि पंजाबी साहित्य के लिए उन्होंने बहुत काम किया है जिसकी सराहना समय समय पर होती रही है।
महेन्द्र सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.












ankur singh
February 15, 2011 at 4:50 am
ss noor ke na rehne ka mujhe bhi dukh hua hai. mai unse kabhi mila to nahi hun. kuch dosto na bataya ki wo punjabi ki leye jayda jane jate hain lakin hindi mai bhi unki acchi pakar thi.