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सुरक्षा आयोग के गठन की मांग लेकर सड़क पर उतरे पत्रकार

: लखनऊ के घटना की निंदा : नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट ( इंडिया) से सम्बन्ध उत्तर-प्रदेश जर्नलिस्ट एसोशिएशन ( उपजा) एवं अन्य संगठनों के पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए जालौन की सड़क पर उतरे.  सभी पत्रकार केन्द्रीय एवं राज्य स्तरीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के गठन की मांग सहित दस सूत्रीय मांगों से जुड़ा ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति व राज्यपाल को भेजा.

: लखनऊ के घटना की निंदा : नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट ( इंडिया) से सम्बन्ध उत्तर-प्रदेश जर्नलिस्ट एसोशिएशन ( उपजा) एवं अन्य संगठनों के पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए जालौन की सड़क पर उतरे.  सभी पत्रकार केन्द्रीय एवं राज्य स्तरीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के गठन की मांग सहित दस सूत्रीय मांगों से जुड़ा ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति व राज्यपाल को भेजा.

यूपी के जालौन जनपद में उपजा एवं अन्य संगठनों के पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए 30 जून को काला दिवस के रूप में मनाते हुए जिला मुख्यालय उरई स्थित चौराहे पर जमकर नारेबाजी की. बाद में मानव श्रृंखला बनाकर कुछ देर के लिए सड़क पर जाम भी लगा दिया लेकिन आम जनजीवन अस्त-व्यस्त न हो इसके लिए पत्रकारों ने कुछ ही देर में अपना सांकेतिक जाम समाप्‍त कर दिया. जाम की सूचना पर सीओ सिटी कमल किशोर मौके पर पहुंच गये.

जिस पर प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने उपजा के जिलाध्यक्ष नाथूराम निगम, उपजा के पूर्व प्रदेश मंत्री दीपक अग्निहोत्री,  दैनिक आज के ब्यूरो अरविन्द द्विवेदी, अमर उजाला के ब्यूरो अनिल शर्मा, दैनिक जागरण के ब्यूरो केपी सिंह, वाइस ऑफ़ लखनऊ के ब्यूरो नीरज बंसल, बीपीएन टाइम्स के ब्यूरो सुधीर त्रिपाठी, लोकभारती के ब्यूरो ओमप्रकाश राठौर,  अलीम सिद्दीकी (इंडिया न्यूज़), संजय गुप्ता ( दूरदर्शन), प्रशांत बनर्जी ( ई.टीवी), अजय श्रीवास्तव ( सहारा समय), मनीष राज ( जी.न्यूज़)  सहित संजीव श्रीवास्तव ( अमर उजाला), रमाशंकर शर्मा ( आज), आबिद नकवी ( हिन्दुस्तान), हेमंत सिंह दाऊ ( आज), शिवकुमार जादौन ( दैनिक जागरण), इसरार खान ( लोकभारती), वीरेंद्र तिवारी ( अमर उजाला), राम आसरे त्रिवेदी ( कर्मयुग प्रकाश), राहुल गुप्ता ( चैनल वन),  प्रदीप त्रिपाठी (चैनल वन), जीतेन्द्र द्विवेदी जीतू ( सहायक जनसंदेश न्यूज़) आदि पत्रकारों ने उन्हें दस सूत्रीय मांग पत्र सौपा.  जो राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम संबोधित था.

पत्रक में पत्रकारों ने मुंबई में हुई मिड डे के पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या के मामले की सीबीआई जांच कराने एवं मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने की मांग की.  साथ ही पत्रकारों को समुचित सुरक्षा व शोषण से मुक्त कराने के लिए केंद्र सरकार से केन्द्रीय सुरक्षा आयोग एवं राज्य सरकार से राज्य पत्रकार सुरक्षा आयोग के गठन की मांग प्रमुखता से की.  इसके अलावा मणिसाना आयोग की रिपोर्ट सख्ती से लागू कर केन्द्रीय सूचना मंत्रालय द्वारा निर्धारित वेतनमान दिलाये जाने की मांग की.

पत्रकारों ने मांग की कि किसी भी पत्रकार के विरुद्ध किसी उच्च राजपत्रित अधिकारी से जांच और जिलाधिकारी से अनुमति लिए बगैर रिपोर्ट दर्ज न कराया जाय.  पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि देश भर में विगत तीन वर्षों से पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज सभी फर्जी शिकायतों का सर्वे करवा कर उन्हें निरस्त कराने तथा किसी प्रकार पर किसी भी तरह के हमले आदि के लिए एसपी को सीधे जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई कराने की मांग की एवं लखनऊ में पत्रकारों पर पुलिस के अधिकारियों के द्वारा किये गये हमले की भी निंदा की.

दूसरी तरफ बाराबंकी में पत्रकारों ने लखनऊ में मीडिया पर हुए हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.  पत्रकारों ने एकजुटता के साथ कहा कि शलभ और मनोज राजन से बदसलूकी के आरोपी, दोषी अधिकारियों को जेल भेजा जाये. इस मौके पर बाराबंकी अमर उजाला के प्रभारी केपी तिवारी, जागरण के नरेन्द्र मिश्र, आज तक व  इंडिया टीवी से दीपक निर्भय व कामरान अल्वी, ईटीवी से दीपक मिश्र, स्टार न्यूज़ से सतीश कश्यप, लाइव इंडिया से विशन सिंह, एनडीटीवी से सरफराज वारसी, चैनल वन से सैफ मुख्तार, महुआ न्यूज़ से हसनैन जैदी, इंडिया न्यूज़ से ध्रुव गोस्वामी के अतिरिक्‍त अन्य पत्रकार मौजूद थे.  इस मौके पर पत्रकारों ने मीडिया पर हो रहे हमलो पर चिंता जताई और पत्रकारों को संगठित होकर साथ देने की अपील की.

केपी तिवारी ने कहा कि मीडिया में हमेशा सच लिखने और दिखाने पर लड़ना पड़ता है. ये लड़ाई अगर मिल के लड़ी जाये तो जीत हमेशा पत्रकारों की होती है क्यों कि अधिकतर खबरों का सरोकार जनहित से होता है.  इस मामले पर सभी वक्ता एकमत थे कि दोषी अधिकारियों की गिरफ़्तारी होनी चाहिए.  इस सभा का संयोजन डीके सिंह ने किया.  उन का कहना था कि नौकरशाही को दलीय राजनीति से दूर रहना चाहिए, बीपी अशोक और अनूप कुमार दोनों आखिर क्यों लखनऊ में पोस्टिंग पाए हुए हैं,  इन दोनों को कितने प्रमोशन मिले हैं,  इस बात की जाँच से ही साफ हो जायेगा कि सरकार के करीबी इन अधिकारियों को  आईबीएन7  पर सचान मामले की रिपोर्टिंग सरकार की तरह ही रास नहीं आ रही थी.  ये लोग भूल गए कि ये लोक सेवक हैं. इन्हें सिर्फ कानून का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए न की पार्टी विशेष के नेताओं को खुश करने के लिए मीडिया को निशाना बनाना चाहिए. कायदे से इन दोनों को लोक सेवक की नौकरी में रहने का अधिकार नहीं रह गया है.  इन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. पत्रकारों ने इस आशय का ज्ञापन भी जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को भेजा.

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