Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

लाइफस्टाइल

स्टीव जॉब्स की जुबानी, उनकी अपनी तीन कहानी

मैं दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटियों में से एक आपकी यूनिवर्सिटी में आकर आज खुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूं। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की तीन कहानियां सुनाना चाहता हूं। बस इतना ही। कोई बड़ी बात नहीं। सिर्फ तीन कहानियां। पहली कहानी कुछ बिंदुओं के मिलन के बारे में है। रीड कॉलेज की पढ़ाई मैंने छह महीने के बाद ही छोड़ दी थी, लेकिन उसके अगले 18 महीनों तक, जब तक कि मैंने वास्तव में पढ़ाई छोड़ न दी, मैं वहां ड्रॉप-इन छात्र के रूप में बना रहा।

मैं दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटियों में से एक आपकी यूनिवर्सिटी में आकर आज खुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूं। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की तीन कहानियां सुनाना चाहता हूं। बस इतना ही। कोई बड़ी बात नहीं। सिर्फ तीन कहानियां। पहली कहानी कुछ बिंदुओं के मिलन के बारे में है। रीड कॉलेज की पढ़ाई मैंने छह महीने के बाद ही छोड़ दी थी, लेकिन उसके अगले 18 महीनों तक, जब तक कि मैंने वास्तव में पढ़ाई छोड़ न दी, मैं वहां ड्रॉप-इन छात्र के रूप में बना रहा।

मैंने पढ़ाई क्यों छोड़ी? मेरे पैदा होने से पहले ही इसकी शुरुआत हो गई थी। मुझे जन्म देने वाली मां एक अविवाहित कॉलेज ग्रैजुएट थीं और उन्होंने मुझे गोद देने का फैसला किया। उनकी ठोस राय थी कि वह मुझे किसी कॉलेज ग्रैजुएट को ही गोद देंगी, सो मेरे जन्म से पहले ही सब कुछ तय हो गया था कि मुझे एक वकील और उनकी पत्नी गोद लेंगे। जब मैं पैदा हुआ, तो अंतिम समय में मुझे गोद लेने वालों ने फैसला बदल दिया कि वे वास्तव में एक लड़की चाहते थे। इसलिए मेरे वर्तमान अभिभावकों को, जो उस वक्त प्रतीक्षा सूची में थे, आधी रात में फोन आया और उनसे पूछा गया, ‘हमारे पास एक अवांछित बालक हैं, क्या आप उसे लेना चाहेंगे?’ उनका त्वरित जवाब था, ‘बेशक।’ मुझे जन्म देने वाली मां को जब बाद में पता चला कि मेरी नई मां ने कभी कॉलेज से कोई डिग्री नहीं ली है और मेरे पिता के पास तो हाई स्कूल की भी कोई डिग्री नहीं है, तो उन्होंने गोद लेने के आखिरी कागजात पर दस्तख्त करने से इनकार कर दिया। कुछ महीनों के बाद वह तब जाकर नरम पड़ीं, जब मुझे गोद लेने वालों ने उनसे वायदा किया कि वे मुझे उच्च शिक्षा जरूर दिलवाएंगे।

और 17 वर्ष की उम्र में मैंने कॉलेज में दाखिला लिया। लेकिन इसे मेरी बेवकूफी कहिए कि मैंने एक ऐसे कॉलेज का चयन किया, जो स्टैन्फोर्ड की तरह ही महंगा था। मेरे कामकाजी माता-पिता की पूरी जमा-पूंजी मेरी ट्यूशन फीस में ही खर्च हो जाती थी। छह महीने के बाद मुझे लगा कि इससे कुछ सार्थक नहीं होने वाला। मुझे उस वक्त कुछ भी नहीं मालूम हो पा रहा था कि आखिर मैं अपनी जिंदगी से क्या चाहता हूं और न ही मैं यह समझ पा रहा था कि आखिर कॉलेज कैसे मुझे अपने जीवन को एक दिशा देने में मदद कर सकता है, जबकि मैं अपने माता-पिता की पूरी जमा-पूंजी अपनी पढ़ाई पर खर्च कर रहा हूं, जो उन्होंने अपने भविष्य के लिए बचाकर रखी है। इसलिए मैंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने का निश्चय किया। उस वक्त मेरा वह फैसला यकीनन कुछ भयभीत करने वाला था, लेकिन सच मानिए, आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे यही लगता है कि मैंने अपने जीवन में जो बेहतर फैसले किए हैं, वह उनमें से एक था।

कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के लगभग 10 साल बाद, जब हम पहले ‘मैकिनतोश’ कंप्यूटर की डिजाइन तैयार कर रहे थे, तो पढ़ाई छोड़ने के बाद जो कुछ भी मैंने सीखा था, मसलन कैलिग्राफी, सेरिफ व सैन सेरिफ टाइपफेस आदि के बारे में जो जानकारियां हासिल की थीं, वे सब मेरे दिमाग में थीं। यदि मैंने एक विषय में ग्रैजुएशन की कॉलेज की पढ़ाई नहीं छोड़ी होती, तो उम्दा टाइपोग्राफी वाला मैकिनतोश अस्तित्व में न आ पाता। निस्संदेह, जब मैं कॉलेज में था, तब भविष्य के बिंदुओं को जोड़ना नामुमकिन था, लेकिन दस वर्षों के बाद पीछे मुड़कर देखने पर उन बिंदुओं का जुड़ाव साफ-साफ दिख रहा था।

मेरी दूसरी कहानी प्रेम और नाकामयाबी के बारे में है। मैं खुशकिस्मत था कि अपनी जिंदगी के शुरुआती वर्षों में जो कुछ मैं करना चाहता था, मैंने किया। 20 साल की उम्र में वोज के साथ मैंने अपने पिता के गैराज में एप्पल की शुरुआत की। हमने कड़ी मेहनत की और दस वर्ष के भीतर ही यह दो बिलियन डॉलर की कंपनी हो गई। हमने अपनी सर्वश्रेष्ठ कल्पनाशीलता की उपज ‘मैकिनतोश’ को एक साल पहले ही लॉन्च किया था और उस वक्त मेरी उम्र 30 साल हुई ही थी। फिर मुझे निशाना बनाया गया। आखिर जिस कंपनी की शुरुआत आपने की हो, वह आप पर कैसे हमलावर हो सकती है? दरअसल, एप्पल की तरक्की के साथ हमने एक ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्ति को चुना, जिनके बारे में मेरी राय थी कि वह मेरे साथ अच्छी तरह से कंपनी चला सकते हैं। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन फिर भविष्य को लेकर हमारे दृष्टिकोणों में अंतर आने लगा और धीरे-धीरे हम संबंध टूटने के कगार पर पहुंच गए। निदेशक मंडल ने उनका साथ दिया और मैं कंपनी से बाहर कर दिया गया। उस समय मेरी उम्र 30 वर्ष थी। यह मेरे लिए बेहद त्रासद था।

कुछ महीनों तक मैं समझ ही नहीं पाया कि आखिर क्या करूं? बहरहाल, अगले पांच वर्ष के दौरान मैंने एक नई कंपनी की शुरुआत की। उसका नाम रखा ‘नेक्स्ट।’ एक अन्य कंपनी का नाम ‘पिक्सर’ रखा। उसी समय मुझे एक बेमिसाल औरत से प्यार हुआ और वह मेरी बीवी बनी। पिक्सर ने दुनिया का पहला कंप्यूटर एनीमेटेड फीचर फिल्म ‘ट्वॉय स्टोरी’ प्रस्तुत किया। आज इसके पास दुनिया का अत्यंत कामयाब एनीमेशन स्टूडियो है। फिर उल्लेखनीय घटनाक्रम के तहत एप्पल ने नेक्स्ट को खरीद लिया और मैं फिर एप्पल से जुड़ गया। नेक्स्ट में जो टेक्नोलॉजी हमने विकसित की थी, वह एप्पल की ताजा कामयाबी के मूल में है। लॉरेन्स के साथ मेरा परिवार खुशहाल है। मुझे पक्की राय है कि यदि एप्पल से मुझे निकाला नहीं गया होता, तो ये तमाम उपलब्धियां मैं हासिल नहीं कर पाता।

मेरी आखिरी कहानी मौत के बारे में है। लगभग एक वर्ष पहले मुझे पता चला कि मैं कैंसर का शिकार बन गया हूं। एक सुबह 7.30 बजे मेरा स्कैन हुआ और उसमें मेरे पैंक्रियाज में ट्यूमर साफ दिख रहा था। डॉक्टरों ने मुझे बताया कि यह एक तरह का कैंसर है, जिसका इलाज मुमकिन नहीं। और फिर अचानक एक दिन जांच के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि आपका रोग अलग तरह का है और ऑपरेशन के जरिये इसका इलाज हो सकता है। मुझे कुछ दशक और मिल गए। दोस्तो, कोई भी मरना नहीं चाहता। लेकिन समय तो सबका तय है। इसलिए इसे दूसरों की जिंदगी जीने में जाया मत करो। दूसरों की नुक्ताचीनी पर बहुत ध्यान मत दो। सिर्फ अपनी अंतरात्मा की सुनो और उसी के मुताबिक अनुसरण करो।

एप्पल कंप्यूटर्स के संस्थापक स्टीव जॉब्स के 12 जून, 2005 को स्टैन्फोर्ड में दिए गए भाषण के अंश. स्टीव के भाषण का वीडियो देखने सुनने के लिए क्लिक करें- स्टीव का ऐतिहासिक लेक्चर

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...