विकीलीक्स जल्द ही स्विस बैंकों में काला धन छिपाने वाले सफेदपोशों का पर्दाफाश करेगा. स्विस बैंक में काले धन से जुड़ी अहम जानकारियां जल्द ही विकीलीक्स पर उपलब्ध हो सकती है. स्विट्जरलैंड की जूलियस बेअर बैंक के पूर्व अधिकारी रूडोल्फ एल्मर ने लंदन में कहा है कि वे लगभग दो हजार ऐसे ग्राहकों की सूची विकीलीक्स को सौंप देंगे जो कर चोरी एवं काले धन को इकट्ठा करने में शामिल हैं.
एल्मर का दावा है कि इस दस्तावेज में एशियाई देशों के अलावा अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन समेत कई देशों के राजनेताओं और व्यवसायियों की सूची है. वह इसके माध्यम से इन सभी को बेनकाब कर देंगे. यदि ऐसा होता है तो भारत के कई ऐसे नेताओं और प्रभावशाली लोगों के नामों का भी खुलासा हो सकता है, जो टैक्स चोरी करने के लिए स्विस बैंक में अपना काला धन जमा कर रखे हैं. उल्लेखनीय है कि स्विस बैंकों में काले धन का मामला भारत में काफी पहले से तूल पकड़ रखा है.
गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार एल्मर ने कहा है कि वे ऐसे दस्तावेज विकीलीक्स को देंगे, जिनमें उन लोगों के नाम होगे जो टैक्स से बचने के मकसद से काले धन को स्विस बैंकों में गोपनीय तरीके से रखते हैं. एल्मर ने दावा किया है कि यह सारा डाटा सोमवार को वे लंदन के फ्रंटलाइन क्लब में विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को सौंप देंगे. एल्मर के अनुसार इन दस्तावेजों में देश विदेश के 40 नेताओं सहित कई प्रमुख हस्तियों के नाम हैं, जिन्होंने 1990 से 2009 के बीच अपना पैसा जमा कराया है.
एल्मर 2005 में स्विस बैंकों की गोपनीयता भंग करने के आरोप में 30 दिन की हिरासत में भी रह चुके हैं. एल्मर स्विस बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं. एल्मर ने बाद में जूलियस बीयर नाम से अलग बैंक स्थापित कर लिया था. उन पर बैंक के डाटा को लीक करने के मामले में मुकदमा चल रहा है. एल्मर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए 19 जनवरी को स्विटरजलैंड पहुंचेंगे.












madan kumar tiwary
January 17, 2011 at 4:30 am
एक खामोश क्रांति की धुंधली सी संभावना दिख रही है । न गोली चलेगी और न हीं कोई जुलुस निकलेगा । अगर कुछ होगा तो वह होगा नेताओं के अंदर भय । तादाद कम हैं लेकिन आवाज बुलंद है । हर स्तर पर लडाई लडी जा रही है । जाति और धर्म की दिवार जहं गिरी , अच्छे लोगों का चयन जनता करेगी और वह शुरुआत होगी एक क्रांति की । लक्षण तो अभी हीं नजर आने लगे हैं । रेप और भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं के पक्ष में खुद उनके दल वाले और कट्टर चमचे भी बोलने में हिचक रहे हैं।