Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

स्‍टेट बैंक की सवा चार लाख की रकम ले भागे शेखर त्रिपाठी!

[caption id="attachment_20693" align="alignleft" width="94"]शेखर त्रिपाठीशेखर त्रिपाठी[/caption]: तब हिंदुस्तान अखबार, वाराणसी के संपादक हुआ करते थे, आजकल दैनिक जागरण, लखनऊ के संपादक हैंबनारस में खरीदी उधारी में कार, धेला भी नहीं चुकाया : हिन्‍दुस्‍तान अखबार में छपी आधे पन्‍ने की नोटिस : स्टेट बैंक आफ इंडिया ने जारी कर दी नोटिस : जमानतदार के रूप में दर्ज पत्रकार अनिल मिश्र का नाम भी छपा अखबार में :

शेखर त्रिपाठी

शेखर त्रिपाठी

: तब हिंदुस्तान अखबार, वाराणसी के संपादक हुआ करते थे, आजकल दैनिक जागरण, लखनऊ के संपादक हैंबनारस में खरीदी उधारी में कार, धेला भी नहीं चुकाया : हिन्‍दुस्‍तान अखबार में छपी आधे पन्‍ने की नोटिस : स्टेट बैंक आफ इंडिया ने जारी कर दी नोटिस : जमानतदार के रूप में दर्ज पत्रकार अनिल मिश्र का नाम भी छपा अखबार में :

वाराणसी : दैनिक जागरण के महारथी और हरफनमौला स्‍थानीय संपादक शशांक शेखर त्रिपाठी ने स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया को करीब सवा चार लाख का चूना लगा दिया है। यह रकम उन्‍होंने अपनी रंगबाजी के लिए एक फोर्ड कार खरीदने के लिए ली थी। उधार के तौर पर ली गयी यह रकम तब बैंक से हथियायी गयी थी, जब वे वाराणसी हिन्‍दुस्‍तान में स्‍थानीय सम्‍पादक के तौर पर कार्यरत थे। लेकिन कुछ ही दिन बाद उन्‍होंने लखनऊ में दैनिक जागरण की नौकरी मिल गयी और फिर वे बिना रकम चुकाये वहां से भाग खड़े हुए। सोचा होगा कि अब उनसे कौन वसूलेगा यह रकम, लेकिन स्‍टेट बैंक वाले तो उनसे भी ढाई कदम आगे निकले और आज उनके ही पुराने अखबार हिन्‍दुस्‍तान में बाकायदा आधा पन्‍ने का विज्ञापन देकर नोटिस जारी कर दी। जाहिर है हंगामा मचा हुआ है।

शशांक शेखर त्रिपाठी अपना पूरा नाम लिखते ही नहीं हैं। प्रिंट लाइन में भी उनका नाम सिर्फ शेखर‍ त्रिपाठी ही है। लहजे में हमेशा विनोद शुक्‍ल वाली कार्यपद्यति के चलते वे कलम से ज्‍यादा दबंग पत्रकार के तौर पर ज्‍यादा पहचाने जाते हैं। अपनी दबंग छवि को रंगबाज बनाने के लिए शेखर त्रिपाठी ने फोर्ड कार खरीदने का फैसला किया। इसके लिए भारतीय स्‍टेट बैंक से लोन लिया गया। कर्जदारी के इस कागजात में उनके कथित बहनोई और हिन्‍दुस्‍तान में डीएनई अनिल मिश्र को जमानतदार बनाया गया।

अब यह संयोग ही रहा कि इसके कुछ ही समय बाद शेखर त्रिपाठी को दैनिक जागरण लखनऊ में सम्‍पादक की कुर्सी मिल गयी और वे लखनऊ चले गये। मगर इस पूरी प्रक्रिया में वे कार के लोन की किश्‍तों को भोलेनाथ की नगरी काशी में ही छोड़ आये। बैंकवालों ने नोटिसें भेजना शुरू किया। खबर शेखर त्रिपाठी को हर बार भेजी गयी लेकिन उन्‍होंने इन नोटिसों को फेंक दिया। बताते हैं कि इस हालत से परेशान बैंक वालों को शेखर त्रिपाठी की विरोधी लाबी ने हवा दे दी और आखिरकार बैंकवालों ने शेखर त्रिपाठी के खिलाफ नोटिस जारी करने का फैसला किया।

बैंक की तरफ से अखबार में प्रकाशित नोटिस (पूरा पढ़ने के लिए नोटिस पर क्लिक कर दें)

बैंक की तरफ से अखबार में प्रकाशित नोटिस (पूरा पढ़ने के लिए नोटिस पर क्लिक कर दें)

कल रविवार को बैंक की तरफ से हिन्‍दुस्‍तान के दूसरे पृष्‍ठ पर आधा पेज की एक नोटिस जारी की गयी है, जिसमें शेखर त्रिपाठी का नाम प्रमुखता से छापा गया है। इस नोटिस में शेखर त्रिपाठी पर चार लाख सात हजार रूपयों का बकाया कार लोन की मद में दिखाया गया है। नोटिस में अनिल मिश्र का नाम भी बतौर शेखर त्रिपाठी के जमानदार छापा गया है और कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि में जमा नहीं किया गया तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अनिल मिश्र इसी अखबार में संयुक्‍त समाचार सम्‍पादक के पद पर कार्यरत हैं। अनिल मिश्र को शेखर त्रिपाठी ही दिल्‍ली दैनिक जागरण से लेकर हिन्‍दुस्‍तान में लाये थे। शेखर त्रिपाठी पर हुई बैंक की इस कार्रवाई ने वाराणसी के पत्रकार जगत में हंगामा खड़ा कर दिया है। खासतौर पर उनके विरोधी इस मामले को तूल देने पर आमादा हैं।

इस प्रकरण पर भड़ास4मीडिया ने जब शेखर त्रिपाठी का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। बाद में उन्हें एसएमएस भेजकर इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई और उनसे अपना पक्ष रखने की अपील की गई तो भी उन्होंने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. Ritesh Kumar

    June 26, 2011 at 11:47 pm

    Ab Aaya Oont Pahar K e Niche.;)

  2. prakash

    June 27, 2011 at 6:52 am

    Aise he patrakar imandar patrakaron ko badnam karte hain . Unki isi harkat ke karan bank patrakaron ko jaldi se loan dene ko tayyar nahi hote.

  3. rajbali

    June 27, 2011 at 7:25 am

    shekhar tripathi purane chor hain. inse to bach kar rahna chahiye, vaise bhi tamam sahkarmiyon se bhi inhone kafee kafee udharee le rakhi hai. sbi to paisa le lega , lekin hamara kya hoga shekhar chacha.

  4. pawan

    June 27, 2011 at 8:01 am

    patrakar dabagaye kare pariwarwad kare to wo patrakar ho hi nahi sakta asey logo ne patrakarita ke chhwi dhumil kiya hai

  5. कमल शर्मा

    June 27, 2011 at 10:44 am

    शेखर जी….राम राम जपना…बैंक का माल अपना। राष्‍ट्रीय बैंक से पैसा लिया है और आप इस राष्‍ट्र के तो बैंक भी आपका ही हुआ ना। अब लखनऊ में भी कोई तगडा हाथ साफ करना जी।

  6. pradeepkumardixit

    June 27, 2011 at 11:52 am

    yeh ak nadi sajish hai. asi khabro ko etny jaldi chhpna theek uahi hai.

  7. rajesh kumar

    June 27, 2011 at 12:45 pm

    ese hi logo ne to patrkaaro ko badnaam kar rakha hain.jiske karan jaroorat padne par jarooratmand patrkaar ko lone nahi mil pata hain

  8. Harishankar Shahi

    June 27, 2011 at 12:45 pm

    बैंक नोटिस तो कोई बड़ी बात नहीं हो सकती हैं क्योंकि अगर त्रिपाठी सर गलत तरीके से धन कमाने वाले होते तो बैंक के पैसों पर हाथ नहीं डालते. क्योंकि बैंक का पैसा तो एक ना एक दिन नोटिस में आ ही जाएगा. अब गाडी खरीदना वह भी लोन लेकर खरीदना फिर लोन ना चुका पाना कोई इतना बड़ा अपराध तो नहीं हो गया.
    इस देश में लाखो लोग हैं जो बैंक द्वारा नोटिस में चस्पा होते रहते हैं. लोन लेना और चुकाना अलग अलग बातें हैं और दूसरी बात बैंक का पैसा लेकर तो कोई भाग नहीं सकता जिस तरह यहाँ प्रचार किया जा रहा है.
    अब भड़ास मात्र व्यक्तिगत खुन्नस निकालने का मंच बन गया है. यहाँ भी तो वही है जो संपादक का मन करेगा छपेगा अन्यथा कूड़े के ढेर में. बस लोन ना चुकाना डकैती कैसे हो गई क्योंकि बैंक पूरी गारंटी लेकर लोन देते हैं फिर वसूल भी लेते हैं. अब भड़ास फॉर मीडिया ना होकर व्यक्तिगत भड़ास फॉर मेरा मन हो जाना चाहिए.

  9. pradeepkumardixit

    June 27, 2011 at 1:02 pm

    es treh ka aarop lagna galat hai.loan he to liya hai koi chori nahi ke haia sakehar himmaty mardadaa mardada khudaa .dont wory we are always withyou .

  10. Satish Pradhan

    June 27, 2011 at 6:28 pm

    यह कोई खबर नहीं है. लोन लेना अपराध नहीं है, जबकी लोन ना देना अपने बैंक को कंगाली के दरवाजे पर पहुंचाना है. त्रिपाठी जी ने यदि लोन लिया और इसके बाद वह बनारस से कहीं अन्यत्र चले गए तो यह अपराध है क्या. लोन ना चुका पाने की सूचना अखबारों में छपवाना बैंक की नीति का हिस्सा है. स्टेट बैंक कितना ही करोड़ रुपया राईट आफ कर देता है, एक पत्रकार का साढ़े चार लाख रुपया माफ़ नहीं कर सकता. हिन्दुस्तान अखबार की सूचना छापकर उसके साथ खबर का प्रकाशन भड़ास४मीडिया द्वारा किया जाना ना तो अच्छी बात है और ना ही पत्रकारिता की नजर से जायज. इससे इस पोर्टल की विशवस्नीयता पर फर्क पडेगा. इस खबर पर सिंह साहब फिर से नजर डालें और इस दुरुस्त करें.

  11. शिवशंकर

    June 27, 2011 at 11:31 pm

    प्रदीप कुमार दीक्षित और हरिशंकर शाही जी।

    आपने लिखा, सबने पढ़ा, लेकिन मनन करने की जरूरत किसी ने समझी हो, मुझे ऐसा नहीं लगता।

    यह तथ्‍य का मंच है, दलालों का नहीं।

    एक कहावत है कि आदमी दिया हुआ धन भूल सकता है, लेकिन लूटी या उधार ली हुई रकम हर्गिज नहीं भूल सकता।
    जरा अक्‍ल लगाइये, कि आप पर करीब दस हजार रूपयों का मासिक कर्जा हो और आप भाग खड़े हों। इतना ही नहीं। शहर भी छोड़ आये। अपना बैंक बदल कर दूसरे बैंक में खाता खुलवा लिया। वाह भाई वाह। दूध पीते बच्‍चे हैं आप। यह चुगदपना किसी और को समझाइयेगा।
    आप पर लाखों का कर्जा हो और आप वहां झांकने भी ना जाएं।

    हालांकि मैं इस प्रकरण से केवल इतना ही वाकिफ हूं जितना भड़ास पर छपा है। लेकिन तथ्‍य गवाह हैं कि यह लैमारी का केस है।

    क्‍या खाकर आप दूसरों को नैतिकता सिखाते हैं। शर्म आनी चाहिए। उधार लेते समय तो खूब गिड़गिड़ाते हैं, मगर चुकाते समय आपका बेइमान जाग जाता है। अरे जरा भी शर्म हो तो अदा करो ना एकसाथ सारी रकम। साबित तो करो कि तुम्‍हारी नीयत खराब नहीं थी। अब अपने मालिक से कहो, जिसकी तरफदारी तुम कर रहे हो, कि सारा पैसा अदा करे और सार्वजनिक रूप से बताये कि अब उसकी देनदारी नहीं बची। यह भी बताये कि आखिर ऐसा क्‍यों हुआ।
    लेकिन यह क्‍या साबित करेंगे। क्‍या खाकर साबित करेंगे। बेईमानी जिसकी नसों में उफनाती रहती हो, उसके बारे में इससे ज्‍यादा और क्‍या कहा जाए।

  12. ajay

    June 28, 2011 at 3:48 am

    ek to saale patkaro ko bank n lone dete hain aur n hi credit crad…..
    banko ki manmani wasuri ki marji ka dabang jawab patrakar hi de sakta hai…..

  13. mahendra

    June 28, 2011 at 7:00 am

    भाई यशवंत जी, इस तरह की खबर से आप क्या साबित करना चाहते हैं। रंगबाज और पैसा लेकर भाग गए आदि शब्दों का उपयोग किसी व्यक्ति के लिए करना उचित है क्या। क्या बैंक की नोटिस में छपा है कि श्री त्रिपाठी ने रंगबाजी के लिए कार लोन लिया था और वह अब गायब हो गए हैं। यदि निर्धारित समय पर वह लोन चुकता कर देते हैं, तो फिर आपके शब्द कहां रह जाएंगे। कृपया किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस न पहुंचाएं, यह अनुरोध है। इस दुनिया में बहुत से रंगबाज हैं। किसी दिन आपसे कोई भिड़ गया, तो फिर आप भी खबर बन जाएंगे। वैसे आपसे इस विनम्रता की उम्मीद बेमानी है।

  14. prakash

    June 28, 2011 at 7:33 am

    Harishankar ji Bank ka paisa na chukana apradh to nahi lekin isse admi ki neeyat jaroor pata chalti hai. Musibat ka mara admi loan na chuka paye to ek bar samajh me ata hai lekin khate peete log he sarkari bank ke paise par buri najar rakhen to ye bahut bada apradh hai.

  15. rakesh pandey, editor vitrak awaz

    June 28, 2011 at 2:08 pm

    shekhar ji, kyo apni chichaledar karwa rahe hai. hamare vichar se ab apko paise ki kami nahi honi chahiye. turant bank ka karja ada kar es phajihat se chutkara paiye. ye meri salah hai

  16. shivshankar

    June 29, 2011 at 4:10 am

    महेद्र जी, आपका दर्द हम समझ सकते हैं।
    सही बात कही है आपने। चोर और उचक्‍कों को चोर और उचक्‍का हर्गिज नहीं कहा जाना चाहिए। किसी भी कीमत पर नहीं।
    अच्‍छा जरा बताइये, कि क्या ऐसे मामलों में बैंक की नोटिस में छापा जाना चाहिए कि लोन लेने के बावजूद लम्‍बे समय से पैसा अदा न करने वाला शख्‍स अब गायब है। वैसे, आपको शायद पता न हो कि ऐसी नोटिस छापी ही तब जाती है जब बैंक के पास इसके अलावा कोई और चारा नहीं बचता है। आपका कहना है कि किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचायी जानी चाहिए। तो आप ही वह कर्ज क्‍यों अदा नहीं कर देते।
    वैसे आप इसकी प्रतीक्षा ही क्‍यो कर रहे हैं कि किसी दिन यशवंत से कोई भिड़ गया, तो फिर वे भी खबर बन जाएंगे। बेहतर तो यह हो कि आप शेखर त्रिपाठी की वकालत करने के बजाय, खुद ही उनकी उधारी चुकता कर देंते। शेखर त्रिपाठी जैसे लोगों को आप जैसे लोगों की ही तो प्रतीक्षा रहती है। वैसे आपसे इस विनम्रता की उम्मीद बेमानी है।

  17. shalu

    July 3, 2011 at 6:34 pm

    intajar kariye abhi ek khabar aur aane wali hai. kanpur road par gram sabha ki jameen par khule dhabe ki. Shekhar ji mahan hain. sampadak dhaabe bhi chalane lage. wah bhai patkarita ki jai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...