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हाईकोर्ट ने दिया ‘कलिनायक’ में वर्णित अपराधों की जांच का आदेश

: डीजीपी को सौंपी जिम्‍मेदारी : जबलपुर हाईकोर्ट ने राजस्थान कलिनायक पब्लिकेशन की याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि राज्य के पुलिस महानिदेशक मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करें। जस्टिस एके श्रीवास्तव की एकल पीठ ने पब्लिकेशन के पार्टनर प्रेम जैन एवं अन्य द्वारा दायर कम्पलेन्ट (एनेक्जटर-7 एवं 8) की रोशनी में उक्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

: डीजीपी को सौंपी जिम्‍मेदारी : जबलपुर हाईकोर्ट ने राजस्थान कलिनायक पब्लिकेशन की याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि राज्य के पुलिस महानिदेशक मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करें। जस्टिस एके श्रीवास्तव की एकल पीठ ने पब्लिकेशन के पार्टनर प्रेम जैन एवं अन्य द्वारा दायर कम्पलेन्ट (एनेक्जटर-7 एवं 8) की रोशनी में उक्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

शिकायत में कहा गया कि सायबर पुलिस के जांच अधिकारी सुनील रजोरा और दो अन्य पुलिस कर्मियों ने 12 फरवरी को कोलकाता पहुंचकर प्रकाशक प्रेम जैन को धमकाया और कहा कि अगर कलिनायक पुस्तक और नई वेबसाइट www.rajasthankalinayak.net का प्रकाशन बंद नहीं किया तो उनके खिलाफ गैर-जमानती धारा लगाकर जेल में बंद कर देंगे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता परितोश गुप्ता और पुष्पेन्द्र यादव ने न्यायालय को बताया कि दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेशचन्द्र अग्रवाल (प्रतिवादी क्र. 12) के भ्रष्ट कारनामों का भण्डाफोड़ करने के लिए राजस्थान कलिनायक पब्लिकेशन के द्वारा कलिनायक पुस्तक प्रकाशित की। दैनिक भास्कर में इस पुस्तक का विज्ञापन प्रकाशित हुआ। इसके बाद किताब के लेखक और प्रकाशक को धमकी मिलने लगी। जिस पर प्रतिवादी क्र-12 यानी रमेश चन्द्र अग्रवाल के अपराधों पर एफआईआर दर्ज करने के स्थान पर उल्टे ही भोपाल की सायबर पुलिस पब्लिकेशन पर किताब और नई वेबसाइट पर रोक लगाने हेतु अनावश्यक दबाव डालने हेतु झूठे केस में परेशान कर रही है।

याचिका में कहा गया कि प्रतिवादी क्र-9, राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा, (आईजी स्टेट सायबर सेल), प्रतिवादी क्र.-10, दीपक ठाकुर (डीएसपी स्टेट सायबर सेल), प्रतिवादी क्र-11, सुनील राजेश (डीएसपी स्टेट सायवर सेल) प्रतिवादी क्र-12, रमेश चन्द्र अग्रवाल चेयरमैन डीबी कार्प लिमिटेड के अपराधों की जाँच करने के स्थान पर बार-बार भोपाल में जाँच के नाम से उन्हें और उनके सहयोगियों को बुलाकर परेशान कर रहे हैं। इसलिए इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर प्रकरण पंजीबद्ध किया जाना चाहिए।

पुलिस के दबाव के चलते राजस्थान कलिनायक पब्लिकेशन की वेवसाइट www.rajasthankalinayak.net बन्द हो गई है। पुस्तक पर 2 करोड़ का ईनाम रखा है। लेकिन पुलिस के दबाव के चलते पुस्तक का विक्रय ठीक से नहीं हो पा रहा है। सच्चाई का भंडाफोड़ करने की ये सजा मिल रही है।

याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायालय से निवेदन किया कि डीजीपी को दिये आवेदन पत्र (एनेवजर -7 एवं 8) में माँग की गई है कि हमारी पुस्तक कलिनायक में वर्णित मीडिया के द्वारा किए गये अपराधों की चार सप्ताह के भीतर जांच कर भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किया जाये।

याचिका का पटाक्षेप : न्यायाधीश एके श्रीवास्तव की एकलपीठ ने डीजीपी को निर्देश दिए किया तो वे स्वयं मामले की जांच करें या पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को जांच के लिए नियुक्त करें- ”this petition is disposed of by giving direction to DGP Bhopal either to take in to account the complaints himself or may authorised a suitable officer not below the rank of supritendent of police look ofter the complaint (Annexure 7 and Annexure 8).”

आदेश

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0 Comments

  1. dharmendra

    March 19, 2011 at 1:39 pm

    kalinayak ko ulti padh gai . socha tha publication band kara daingay.

  2. jai kumar jha

    March 19, 2011 at 1:42 pm

    इस देश में सत्यमेव जयते की एक और दर्दनाक कहानी……कुकर्म और अपराध का चारो तरफ बोलबाला है….दोषी पुलिस वालों को सजा नहीं मिलना इसका प्रमुख कारण है….

  3. rajkumar jain

    March 20, 2011 at 3:35 pm

    himmat ki to dad deni padegi.
    jo itni mahavpoorn janch kar pustak prakasit ki. aap himmat na hare

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