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‘हिंदुस्तान’ अखबार बोला- हम पेड न्यूज के खिलाफ हैं

संसद में कल शरद यादव, लालू यादव, गुरुदास दास गुप्ता आदि ने मीडिया वालों को कटघरे में खड़ा किया. अन्ना के आंदोलन को जबर्दस्त कवरेज दिए जाने से खफा कई नेताओं ने मीडिया में करप्शन का मुद्दा उठाते हुए मीडिया वालों और मीडिया हाउसों को घेरा. पेड न्यूज जैसी बीमारी को भी लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की गई. इस प्रकरण को लगभग सभी अखबारों ने कम या ज्यादा प्रकाशित किया है.

संसद में कल शरद यादव, लालू यादव, गुरुदास दास गुप्ता आदि ने मीडिया वालों को कटघरे में खड़ा किया. अन्ना के आंदोलन को जबर्दस्त कवरेज दिए जाने से खफा कई नेताओं ने मीडिया में करप्शन का मुद्दा उठाते हुए मीडिया वालों और मीडिया हाउसों को घेरा. पेड न्यूज जैसी बीमारी को भी लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की गई. इस प्रकरण को लगभग सभी अखबारों ने कम या ज्यादा प्रकाशित किया है.

पर हिंदुस्तान अखबार में इस बारे में फ्रंट पेज पर खबर है और इस मुद्दे पर बतौर एक प्रमुख मीडिया हाउस, हिंदुस्तान प्रबंधन ने अपनी टिप्पणी भी दी है. कि, हम लोग पेड न्यूज करते. हिंदुस्तान प्रबंधन की इस टिप्पणी का स्वागत किया जाना चाहिए. लेकिन एक आशंका है. अतीत में यह अखबार पेड न्यूज के लिए काफी बदनाम रहा है. पटना, बनारस से लेकर कई सेंटरों के संपादकों पर आरोप लगे कि उन्होंने चुनावों में प्रत्याशियों से पैसे लेकर उनके पक्ष में लीड स्टोरी तक प्रकाशित की. पटना में ऐसा एक प्रकरण चुनाव के दौरान हुआ था. बनारस में भी ऐसा प्रकरण हुआ था.

कुख्यात अपराधियों-माफियाओं से पैसे लेकर उनके पक्ष में जय-जय छापने की सूचनाएं-खबरें भड़ास तक पहुंची थी. इन सभी प्रकरणों का अतीत में भड़ास4मीडिया ने खुलासा भी किया था. पर अगर इन दिनों में हिंदुस्तान प्रबंधन का हृदय परिवर्तन हुआ है तो यह काबिलेतारीफ है. लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. देखना है कि हिंदुस्तान प्रबंधन अपने वादे-दावे पर कितना खरा उतरता है.

हिंदुस्तान प्रबंधन इस बात के लिए बधाई का पात्र है कि उसने लिखकर तो दे दिया कि वह पेड न्यूज नहीं करता. पर बाकी अखबार और न्यूज चैनल? ऐसे वक्त में जब मीडिया पर वाकई गंभीर सवाल उठने लगे हैं और मीडिया करप्शन की हरओर चर्चा होने लगी है, हर छोटे बड़े मीडिया हाउस का दायित्व बनता है कि वह अपनी तरफ से अपने पाठकों को लिखित आश्वासन दे कि वह पेड न्यूज कभी नहीं करेगा और कंटेंट की पवित्रता का हमेशा ध्यान रखेगा. क्या यह काम दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, पत्रिका, अमर उजाला, प्रभात खबर, लोकमत, आदि अखबार और आजतक, स्टार न्यूज, एनडीटीवी, इंडिया टीवी आदि न्यूज चैनल करेंगे?

हिंदुस्तान अखबार में जो पहले पेज पर इससे संबंधित खबर प्रकाशित हुई है, उसे पढ़ें, फिर हिंदुस्तान मैनेजमेंट की टिप्पणी पढ़ें. हिंदुस्तान के प्रबंधन और संपादक को एक बार फिर बधाई.

एडिटर

भड़ास4मीडिया


पेड न्यूज भी आए लोकपाल के दायरे में

नई दिल्ली, वि.सं./एजेंसियां : लोकपाल मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के दौरान मीडिया और स्वयंसेवी संस्थाएं तमाम दलों के वक्ताओं के निशाने पर रहे। लालू, शरद यादव समेत जब-जब सांसदों ने अन्ना आंदोलन को हवा देने के लिए मीडिया खास कर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को निशाना बनाया तो उनका मेजें थपथपा कर स्वागत किया गया।

लोकसभा में लालू अन्ना टीम पर हमले कर रहे थे तब सदन में एक आवाज गूंजी, ‘पीपली लाइव’ बना दिया है!’ लालू यादव ने सदन में कई बार प्रेस दीर्घा की ओर मुखातिब हो कर मीडिया कर्मियों को चेताया कि वे निष्पक्ष रिपोर्टिग करें। माकपा बासुदेव आचार्य ने कहा कि मीडिया में पेड न्यूज भी एक भ्रष्टाचार है। इसीलिए उसे भी लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए। सीपीआई के गुरुदास दासगुप्ता का भी कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की भूमिका लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं रही। उन्होंने पेड न्यूज की भी निन्दा की।  शरद यादव ने मीडिया की खिंचाई करते हुए टीवी चैनलों को ‘डब्बा’ तक कहा।

हिंदुस्तान का नजरिया : ऐसे समय में जब मीडिया की विश्वसनीयता पर सड़क से संसद तक तमाम सवाल उठ रहे हों, तब एक बार फिर अपने पाठकों के प्रति वचनबद्धता दोहराना चाहते हैं कि हिंदुस्तान पेड न्यूज के खिलाफ है.  हम अपने कंटेंट की पवित्रता पूर्ण गरिमा से कभी समझौता नहीं करेंगे.

 


 

दूसरे अखबारों ने भी मीडिया पर उठाए गए सवाल से संबंधित खबरें प्रकाशित की हैं, उदाहरण के तौर पर कुछ खबरों को देखें…

‘डब्बा’ बंद कराइए, सोने नहीं देता: शरद

नई दिल्ली (वार्ता) : डब्बे को बंद कराइए सोने नहीं देता। लोकसभा में शनिवार को जनता दल (यू) के शरद यादव ने अन्ना प्रकरण को लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रवैए पर नाराजगी जताते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने टीवी चैनलों का जिक्र ‘डब्बा’ कहकर किया तो पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।

उन्होंने कहा कि डब्बा दिन-रात सिर्फ एक ही बात को दिखा रहा है। उसे बाढ़ जैसी देश की अन्य समस्याओं की कोई फिक्र नहीं है। उसे लगता है कि देश में सिर्फ एक ही समस्या है और कहीं कुछ हो ही नहीं रहा। सदस्यों ने उनकी बातों का मेजें थपथपा कर समर्थन किया। यादव ने सरकार से अनशन समाप्त कराने के लिए अन्ना हजारे की शर्तें मान लेने का आग्रह करते हुए कहा कि उनकी तीनों बातों को मान लीजिए और इस डब्बे को बंद कराइए…यह सोने नहीं देता। उनकी इस टिप्पणी पर सदन काफी देर तक ठहाकों से गूंजता रहा।

शरद यादव ने मीडिया पर चुटकी ली

नई दिल्ली: लोकसभा में शरद यादव ने मीडिया और अन्ना पर चुटकी ली जिसका कांग्रेस ने ज़बर्दस्त समर्थन किया. लोकसभा में लोकपाल पर गंभीर चर्चा के दौरान शरद यादव ने बीच-बीच ऐसी चुटकी ली कि सारा सदन ठहाकों से गूंज उठा. सबसे पहले तो जनता दल युनाईटेड के नेता शरद यादव ने अन्ना के जनलोकपाल बिल को ज़रूरी बताते हुए इस बिल को पास कराने में हुई देरी पर कटाक्ष किया.

लेकिन इसके बाद वह अचानक टेलीविज़न चैनलों का जिक्र करने लगे. उन्होंने कहा, “ये डब्बा वाले बहुत बेचैन हैं. लगता है यही देश चला रहे हैं. इनका मुंह बंद करो भाई. कांग्रेस भाइयों, आप क्यों चले जाते हो आजकल बेइज्जत होने के लिए उनके यहां. आपकी हालत देख कर बहुत तरस आती है. मत जाओ मेर भाई बहनों मत जाओ.” उनके इस कथन के बाद कांग्रेसी सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनका स्वागत किया तो कहीं बीच से आवाज़ आई इनके लिए भी आचार संहिता बने. इस पर शरद यादव ने कहा, “बताइए. इनको कौन देखेगा जिसको लोग देख रहे हैं. पूरे दिन -रात अन्ना-अन्ना, रामलीला मैदान. अरे भाई गंगा और कोसी तबाही लाई हुई है. लोग परेशान हैं. इसका फिक्र इन्हें नहीं है.”

शरद यहां भी नहीं रुके और टेलीविजन पत्रकारों के ‘ज्ञान बांचन’ पर चुटकी ली. कहना था,” हम बैठे हैं, हमारे कांग्रेस के जयपाल रेड्डी जी बैठे हैं, आडवाणी जी है, सुषमा जी हैं. क्या ये लोग कम योग्य हैं.क्या हमारी संसद में जनता के लिए कुछ नहीं होता. फिर इन डिब्बे वालों की हिम्मत देखिए. हमारे सदन को ही बेकार बता हैं.” जब शरद यादव ने अपनी बात ख़त्म करनी चाही तो क्या सत्ता पक्ष और क्या विपक्ष, सभी ने एक सुर से कहा .. नहीं नहीं शरद जी आप बोलिए

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0 Comments

  1. ayush kumar

    August 28, 2011 at 3:52 pm

    सर,कृपया कर हिंदुस्तान की बातों पर भरोशा न करे.दुसरे जगह की बात तो मैं नहीं कर सकता परन्तु बिहार मे यदि हिंदुस्तान गंगा नदी की कसम खा कर भी बोले की वो पेड न्यूज़ और नीतीश न्यूज़ के खिलाफ हैं तो ये पचने वाली बात नहीं.धन्यवाद

  2. Sareen Chandra Goyal Raj Express Bhopal Repoter

    August 29, 2011 at 3:43 am

    मुलायम सिंह,सलमान खुर्शीद,रवि शंकर प्रसाद का पेट मैं दुखना जायज है.मीडिया ने अनेक भ्रष्ट नेताओ को पैड न्यूज़ व अन्य मामलों जमकर लूटा है इसलिए उक्त नेताओं कि पीड़ा जायज लगती है. मीडिया को भी चाहिए कि स्वयं आगे आकर पैड न्यूज़ का विरोध करे और भ्रस्टाचार के खिलाफ बन रहे माहोल मैं अपने को साफ सुथरा साबित करे कही ऐसा न हो कि कोई आदमी जो मीडिया का सताया हो वह अन्ना कि तरह खड़ा होकर सरेआम मीडिया कि पोल खोलने लगे तब उसके पास कहने को कुछ नहीं होगा वहीँ पैड न्यूज़ के जरिये मीडिया ने अनुपयुक्त नेताओं को जनप्रतिनिधि बनवाने मैं भूमिका अदा कि है इसका दोषी भी मीडिया है कि उसके लालच के कारण सही व्यक्ति जनप्रतिनिधि नहीं बन सका जहाँ तक हिंदुस्तान सहित अन्य अख़बार दावा करे कि वह पैड न्यूज़ के खिलाफ है अच्छी बात है लेकिन अनेकों ऐसे उदहारण है जब मीडिया भ्रष्ट आचरण का सहारा लेता है क्या अपनी गरिमा के लिए दुराचारों को त्याग नहीं सकते यह एक बड़ा प्रश्न है

  3. vinod

    August 29, 2011 at 6:33 am

    sharad yadav ye mat bhule ki aaj media wale nahi hote to aapako ko janta tak nahi. aapaka khabar dikhaye to wah wah aur anna ki khabar dikhaye to dibba wale.sharad ji aadato me sudhar layen.

  4. ranjan

    August 29, 2011 at 3:38 pm

    hindustan ke maujuda pradhan sampadak jab amar ujala mai the tab hi wahan paid news ka kam shuru huya tha. tabhi se akhbar ki sakh girni shuru hui.

  5. arjun rathore

    August 31, 2011 at 4:39 pm

    Rathore Arjun दूसरे अखबार भी पेडन्यूज के बारे में बताएं – अजु‍र्न राठौर
    अब समय आ गया है हिन्दुस्तान टाइम्स के बाद अन्य अखबारों को भी अपनी नीति पेडन्यूज के बारे में बता देनी चाहिए । वैसे भी अखबारों में प्रथम पेज से लेकर सारे ही पेज विज्ञापन दाताओं को समर्पित हो गए हैं ऐसे में बचा खुचा बंटाढार पेड न्यूज ने कर दिया है जिसके पास पैसा वह मीडिया में रातों रात महान हो सकता है अमीर आदमी का बाप मरता है तो दूसरे दिन अखबारों में पहले पेज पर पूरे श्शहर को उनके पिता का फोटो देखने के लिए मजबूर होना पड़ता है लेकिन गरीब के पिता चले जाएं तो इससे अखबारों को क्या लेना देना ? मुकेश अंबानी ने अपनी पत्नी को जाने कितने करोड़ का विमान भेंट किया तो सारे अखबारों ने खबरें छापी लेकिन औसत भारतीय पति अपने परिवार के लिए कुछ भी करे तो उससे मीडिया को कोई लेना देना नहीं है ।

  6. arjun rathore

    August 31, 2011 at 4:39 pm

    Rathore Arjun सबसे बड़ा रिश्वतखोर तो जनसम्पर्क विभाग है
    आज चारों तरफ रिश्वतखोरी की चर्चा हो रही है लेकिन सबसे बड़ा रिश्वतखोर तो जनसम्पर्क विभाग है जहां अखबार वाले रिश्वतखोरी करके विज्ञापन प्राप्त करते हैं अब तो सुना है कि खुलेआम विज्ञापन लेने के लिए कमीशनबाजी चल रही है अगर आपको विश्वास नहीं है तो पहुंच जाइए किसी भी अखबार का बैनर और आॅफर लेकर आपको रेट भी पता चल जाएंगे और फायदा भी । वैसे भी राकेश श्रीवास्तव जैसे अफसर इस विभाग की छवि में चार चांद लगा ही रहे हैं ….

  7. raagdarbaari

    September 1, 2011 at 3:16 pm

    koi stringers bhi to dard suno. saalo saal tak kaam karne ke baad bhi milta kya he…100 rupye se 250 rupye ki dihari aur peeth bhar kaam. dalali karo yaa paid news lao…..phir ghar chalao.

  8. badrri prasad

    September 1, 2011 at 7:01 pm

    hindustan to chutiyape ki bat karne ka mahir hai,. tsne is randi baji mai jagran ko bhi peechhe chod diya hai, bas jagran ko npata nahi hai ti vo chutiya ban gaya hai,,..hindustan ki sobhna ko doob marn a chahiyee aisa kahte,,,,,,

  9. vishnu pratap singh parmar pti

    September 13, 2011 at 11:54 am

    hindustan mai paid news hamesa lagti hai ye hamara dawa hai.

    pti ripotar lucknow

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