देवरिया। हिंदुस्तान अखबार को देवरिया में ज्यादा से ज्यादा बेचने की प्रबंधन की स्कीम एक ओर जहां धरी रह गई वहीं दूसरी ओर वितरकों के साथ हाथापाई और मारपीट तक की नौबत बन गयी। ज्ञात हुआ है कि 23 दिसंबर, 2010 को हिंदुस्तान अखबार ने देवरिया में अपने अखबार की प्रसार संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से वितरकों की मीटिंग लंच पर बुलायी थी। मीटिंग शुरू हुई तो वितरकों ने बताया कि उन्हें प्रबंधन की ओर से पहले यह जानकारी दी गयी थी कि वितरकों को एक अखबार अस्सी पैसे में दिया जाएगा। इस बात से हाकर राजी थे किंतु मीटिंग के दौरान उन्हें पुनः बताया गया कि अब यह अखबार आपको दो रूपये में मिलेगा और तीन रूपये में पाठक को दें।
हालांकि इस अखबार में अभी देवरिया की कोई खबर नहीं प्रकाशित होती है और गोरखपुर एडिशन ही यहां लखनऊ एडिशन के नाम पर चार रूपये में बेचे जाने की चर्चा चली। बात यहीं से बिगड़नी शुरू हुई। गोरखपुर से आए प्रसार विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी से वितरकों की काफी नोकझोंक हुई। यह नोकझोंक हाथापायी और मारपीट में बदलने लगी। देवरिया में सभी अखबारों का मिलाकर लगभग 250 वितरक हैं। इनमें से अधिकांश इस मीटिंग में शामिल थे। किंतु हाथापाई होने के बाद आधे से भी ज्यादा वितरकों ने मीटिंग छोड़ दी, लंच का भी बहिष्कार किया और बिना किसी निर्णय के वहां से चले गए। इस तरह देवरिया में हिंदुस्तान की प्रसार संख्या बढ़ाने के उद्देश्य को जोरदार झटका लगा। पाठक को कौन कहे, वितरकों ने ही हिंदुस्तान के उद्देश्य में पलीता लगा दिया! साभार : पूर्वांचलदीप











