
उत्तमा
मकबूल ऐसे ही इतने बड़े कलाकार नहीं बन गए। वर्ष 1947 में वे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप में शामिल हुए क्योंकि परंपराओं पर चलना उन्हें पसंद नहीं था। कोशिश थी कि बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट्स की राष्ट्रवादी परंपरा को तोड़कर कुछ नया करने की। लगातार नया करने की उनकी आदत ने उन्हें प्रसिद्धि की शिखर तक पहुंचा दिया। एक दिन, क्रिस्टीज़ ऑक्शन में उनकी एक पेंटिंग 20 लाख अमेरिकी डॉलर में बिकी और वह भारत के सबसे महंगे पेंटर बन गए। आर्टप्राइस को यदि प्रसिद्धि का पैमाना मानें तो दुनिया के महंगे कलाकारों में हुसैन का मुकाम 136वां है।
हुसैन पर फिदा थे कला की इस विशाल दुनिया के हजारों-लाखों लोग। इसकी ढेरों वजह हैं। वह किसी कलाकार की तरह यदि संवेदनशील थे तो व्यावहारिक भी। वह जानते थे कि किस तरह चर्चाओं में शामिल हुआ जा सकता है। उनकी चर्चा दोनों ओर होती, आलोचकों के लिए वह एक ऐसे आर्टिस्ट थे जिसे किसी आस्था से सरोकार नहीं और पैसा कमाना ही जिसका ध्येय है। उन पर हिंदू-देवी देवताओं के अश्लील चित्र बनाने का भी आरोप लगा था। 1995 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। इसके बाद पद्म भूषण और राज्यसभा की सदस्यता के लिए मनोनीत होने का बड़ा सम्मान भी हासिल हुआ।
भारत से इतना सम्मान और प्रतिष्ठा पाने वाले मकबूल से निराशा तब हाथ लगी जब उन्होंने भारतीय नागरिकता छोड़ दी। दुर्भाग्यपूर्ण उनका बयान भी था कि भारत ने मेरा बहिष्कार किया
इसलिये मैं कतर की नागरिकता स्वीकार कर रहा हूं। दक्षिणपंथी संगठनों ने उनके मुस्लिम होने पर नहीं बल्कि कला और अभिव्यक्ति पर हमला किया। मुझ पर हमला हुआ तो सरकार, कलाकार और बुद्धिजीवी सब चुप रहे। … और चाहने वालों के लिए वह हुसैन थे। वह इतने प्रसिद्ध हो गए, कि उन्हें प्रतिष्ठित फोर्ब्स मैग्जीन ने इंडियन पिकासो का नाम दे दिया।
एमएफ हुसैन उन लोगों में से एक थे जो सुंदरता की कद्र करते हैं। प्रशंसक कहते कि पुरातन काल से ही हमारा देश कला का मुरीद रहा है। सुंदरता देखने वाले की आंखों में होती है। मुगल काल में राजा-महाराजा और उच्च घराने कलाकारों को संरक्षण प्रदान कर उनकी कला का आदर करते थे। दुर्भाग्य से आज कलाकृति के सौंदर्य को अश्लीलता कहा जाता है। प्राचीन कला उत्तेजक कलाकृतियों से भरपूर रही है। पुरुष और महिला का आलिंगनबद्ध प्रदर्शन प्राचीन कला का मुख्य आकर्षण रहा है। लेकिन आज नग्नता को सिर्फ अश्लीलता की आंखों से देखा जाता है।
मकबूल फिदा हुसैन की पेंटिंग को अश्लील कहने वालों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कटाक्ष किया था। देशभर में उनके विरुद्ध मामलों के स्थानांतरण पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि अदालत में हुसैन के खिलाफ केस दर्ज करने वाले लोग लगता है कभी भी समकालीन कला के दर्शन के लिए आर्ट गैलरी नहीं गए। अगर गए होते तो उन्हें पता होता कि सिर्फ हुसैन ही नहीं बल्कि कई प्रमुख पेंटर नग्नता को अपनी अभिव्यक्ति के रूप में पेश कर चुके हैं। कुछ भी हो, आर्टिस्ट हुसैन का दुनिया से जाना सचमुच दुखभरी घटना है। मेरी ओर से उन्हें श्रद्धांजलि।
लेखिका डा. उत्तमा दीक्षित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय कला संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. कला में विशेष रूचि रखने वाली उत्तमा ब्लागर हैं तथा तमाम विषयों पर वेबाक लेखकर करती रहती हैं.












धीरेन्द्र
June 9, 2011 at 5:50 pm
लगता है आप ने वे चित्र देखे नहीं जिनके अश्लील होने का आरोप लगा… आपके शब्दों में >:(
keshav mehta
June 9, 2011 at 8:39 pm
आखिर प्रधानमंत्री और सोनिया एक भगौड़े अपराधी और कानून का मजाक बनाने वाले के निधन पर शोक क्यों व्यक्त कर रहे है ? मित्रों मकबूल फ़िदा हुसैन एक बहुत ही अच्छे चित्रकार थे इस पर कोई दो राय नहीं होनी चाहिए . उन्हें अहमदाबाद बहुत प्रिय था .उन्होंने सिर्फ अहमदाबाद…… में हुसैन गुफा बनाई थी जिसमे उनके पेंटिंग की प्रदर्शनी थी .. वो जब भी अहमदाबाद आते तो लाल दरवाजा के पास लकी टी स्टाल जहा कब्रों के बीच बैठकर चाय पी जाती है जरूर आते थे और उन्होंने तीन पेंटिंग भी लकी टी स्टाल को भेट दी है .. लेकिन क्या इतने महान इंसान को इस देश के कानून का मजाक बनाना चाहिए ? आज सारे टीवी चैनल बजरंग दल को कोस रहे है की बजरंग दल के कारण मकबूल को भारत छोडना पड़ा .. बाबा रामदेव अगर रामलीला मैदान से भागे तो मीडिया इसे नकारात्मक रूप से दिखाती है लेकिन क़ानूनी करवाई से बचने के लिए मकबूल इस देश से भागे है तो मीडिया उनको महान बता रही है .. क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ने नाम पर कोई भी चित्रकार भारत माँ और हिंदू देवी देवताओ का अश्लील चित्र बना सकता है ? सलमान रश्दी , तशलिमा नसरीन और डेनियल [ डेनमार्क के अखबार के संपादक जिन्होंने मोहम्मद साहब का कार्टून बनाया था ] और अलोक तोमर [ जिन्होंने उस कार्टून को नवभारत टाइम्स में छापा था ] क्या इनको अभिब्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है ? अलोक तोमर जी को चार महीने जेल जाना पड़ा था . सलमान रश्दी भारतीय मूल के है और शिमला में उनका घर है भारत सरकार ने पांच बार उनका वीसा आवेदन ठुकराया तब मीडिया ने अफ़सोस क्यों नहीं जताया ? क्या अभिवक्ति की स्वतंत्रता हिन्दुओ के लिए अलग है और मुसलमानों के लिए अलग ? क्या सरकार और मीडिया ये मानते है की कोई भी मुस्लमान अगर हिंदू आस्था का मजाक उडाये तो उसे अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी है ? पुरे भारत में २४ अदालतों ने मकबूल को सम्मन भेजा है और वे आज तक भारत के किसी भी अदालत में पेश नहीं हुए . क्या ये भारत के कानून और संबिधान का मजाक उड़ाना नहीं है ? कोई भी अदालत किसी भी अर्जी को बिना सत्यापन और क़ानूनी पहलु के स्वीकार नहीं करती .यानि भारतीय अदालते प्रथम दृष्टया मानती है की मकबूल ने गुनाह किया है लेकिन मकबूल को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है इसलिए उन्हें अदालत का सम्मान करते हुए अपने आप को निर्दोष सिद्ध करना चाहिए ना की भारत से चुपके से भाग खड़े होना . और कांग्रेस पार्टी मुस्लिम वोट की कितनी भूखी है की प्रधानमंत्री और सोनिया शोक प्रकट कर रहे है . आखिर मिडिया इस बात को इस देश की जनता को क्यों नहीं बता रही है की मकबूल इस देश के एक भगौड़े अपराधी
mahesh sharma
June 10, 2011 at 4:19 am
मैडम आप वास्तव में धर्मिनरपेक्षता की प्रतिमूर्ति हैं। हिन्दू देवी देवताओं की नग्न तस्वीरें हिन्दू और महिला होने के बाद भी अगर आपको उद्वेलित नही करती? तो भगवान मालिक कहना भी आपके लिए बेमानी है…
anjan masiha
June 10, 2011 at 5:26 am
makbul ji isi ke partra the unhe gart me jaana hi tha………………..
Guddu Chaudhary
June 10, 2011 at 11:16 am
Ms Uttama Dixit or what so ever name is…..if u r so big fan of M F Hussain…why have u not approached him before….he would have made the nude paintings of you…..and we would have loved to see that painting as a art not as a nude pics. Stil you have time u can hire the services of any painter and arrange for your nude painting…i m sure thousands of people would love to see that as a art creature.
Now tell me do u have guts to do that if no then shut your bloody mounth and don’t try to be over smart or big fan of a M F Hussain, that bloody have made the nude paintings of hindu goddeess, and on the other hand he has made the painting of his mother in full cloths…..if he would have done this for muslims of other religion he would have killed earlier……..
Shantanu
June 11, 2011 at 4:28 am
arey bhai aalochna karne walo, jara dhang se padh lo. uttama ji ne hussain ke baare mein dono pakshon ki rai likhi hai, na ki unki tareef.
Aquib Ali
June 11, 2011 at 6:43 am
Husain ki kala ko samajhane ki jarurat hai. Uttama ji ak artist hone ki vajah se unaki tarif ki hai na ki ek sampradaik unmadi ki tarah. kam se kam yah uttar Guddu Chaudhary ke liye hai.
Guddu Chaudhary
June 11, 2011 at 8:53 am
Dear Mr. Aqib Ali,
if it is not religious….can you show me any nude paintings made by MF Hussain of other then hindu’s goddess……
His mother was in full cloths….Biwi Fatima was in full cloths…why only Hindu Goddess are nude ???? any answer ???????
Due to this he had to leave India other wise…..rest u r good enough to understand….