1800 दो, साल भर अखबार लो और फ्री में 3600 का विज्ञापन छपाओ!

: कंपनी बुकिंग से आने वाले पैसे को मार्केट में पांच फीसदी ब्याज पर उठाएगी : देश के बड़े अखबार वालों ध्यान दो. आगरा से जल्द एक अखबार निकलने वाला है जिसका नाम है- द सी एक्सप्रेस. इस अखबार को लाने वाली कंपनी की योजना देख लो. इसका फिलहाल कोई तोड़ नहीं दिख रहा है. शायद इस छोटे ग्रुप से बड़े ग्रुप सीख ले सकते हैं. कंपनी की सभी के लिए एक योजना है.

योजना है कि- 1800 रुपया में एक साल के लिए अखबार बुक कराओ और उस पर 3600 रुपया का विज्ञापन फ्री में छपवाओ. अब सोचो, इसमें ऐसी क्या बड़ी बात हैं जिसके आगे बड़े बड़े ग्रुप फ़ेल हैं. कंपनी की योजना है कि लगभग 20000 कॉपी बुकिंग हो ही जाएगी. तो अगर साल भर के लिए एक अखबार को कोई पाठक लेता है तो बदले में 1800 रुपये देता है. अगर पाठक संख्या 20000 हो जाती है तो दोनों का गुणा कर देने पर लगभग पैसा हो जाएगा दो करोढ सोलह लाख रुपये. चूंकि अखबार लाने वाली कंपनी का मूल धंधा ब्याज का कारोबार करना है इसलिए कंपनी जो पैसा अखबार की बुकिंग से हासिल होगा उसे 5 प्रतिशत ब्याज पर मार्केट में चला देगी.

इस तरह ब्याज ही सिर्फ ग्यारह लाख रुपये के करीब हाथ में आ जाएगा जिससे कंपनी अखबार का खर्चा शुरू में ही निकाल लेगी. इसके बाद इवेंट और अन्य धंधे भी होते हैं जिससे अखबार को आराम से चलाया जा सकता है. उसके बाद अगर अखबार को डीएवीपी की मंजूरी मिल जाती है तो सरकारी विज्ञापनों के पैसे अलग से मिलेंगे. कंपनी ने यह सब करके पीसीसी सर्वे आदि कराने का खर्च भी बचा लिया है. आगरा के हाकर भी बहुत खुश हैं क्योंकि बुक कराये प्रति अखबार पर सवा रुपये कमीशन मिल रहा है. कंपनी ने एंप्लाइज को भी टारगेट दे दिया है. एक आदमी कम से कम 100 कॉपी की बुकिंग कर के ले आए. देखना है कि आगरा मार्केट में अखबारों की बीच जो जंग होने वाली है, उसमें कौन गिरता है और कौन सफल हो जाता है.

आगरा से अभिषेक की रिपोर्ट

Comments on “1800 दो, साल भर अखबार लो और फ्री में 3600 का विज्ञापन छपाओ!

  • neha cahauhan says:

    भैया बड़े ब्याज के मोटे कारोबारी हैं यह जैन बंधु लोग। अच्छा खासा धनदा चलता हैं ब्याज का इसी के शारे इतना बड़ा नेटवर्क जमा लिया पता ही नहीं चला की इतना मामूली सा एक केबल चलाने वाला पोरेटर इतना बड़ा नेटवर्क खरीद लेगा।

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  • राजीव रंजन says:

    भईया कुल रकम दो करोड़ 16 लाख नहीं, तीन करोड़ 60 लाख होगी। यानी ब्‍याज की रकम 18 लाख। आपने तो उन्‍हें बैठे-बिठाये मूल रकम में एक करोड़ 44 लाख का और ब्‍याज में सात लाख रुपए का नुकसान करा दिया।

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  • शांति शरण सत्संगी says:

    अरे भाई, आप मुनाफे का गणित लगा रहे हो और पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों की भी तो सोचो। सभी कर्मचारियों को कूपन दिए जा रहे हैं, संपादकीय विभाग के हर आदमी को करीब 40 हजार रुपये के अखबार बुक कराने हैं और गैर पत्रकारों को 30 हजार। इसी का नतीजा है कि हिंदुस्तान एटा छोड़कर आए पंकज भारद्वाज ने त्यागपत्र दे दिया। यही हाल अभिनव पांडे, अभिनव सिन्हा का हुआ। मनीष गुप्ता को कई बार डांट लगी तो उन्होंने जमकर गालियां देना शुरू कर दिया। हालांकि वह अभी काम पर हैं। भानु प्रताप सिंह भाजपा और विवि वालों को फोन करके कूपन भेज-बेच रहे हैं। राजीव दधीच का यह धंधा केमिस्टों पर चल रहा है। अमी आधार निडर मथुरा के लोगो को बुक कर रहे हैं। अखबार शुरू करने के लिए तैयारियों के बजाए, इसी में लगे हैं सब।

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  • मेरे एक काबिल मित्र के मुंहसुना शेर आप भी सुनिए……
    “कितना महीन है ये अखबार का मुलाजिम भी….. खुद खबर है और दूसरों कि लिखता है…….”

    आदमी दो वक्त रोटी की जुगाड़ के लिए क्या-क्या नहीं करता. अगर घर-घर जाकर, दोनों हाथ जोड़कर कि…. “आपके एहसान से (सदस्य बनने से ) मेरी नौकरी (चलती रहे) ऐसा कहकर अगर समाचार पत्र भीख मंगवा भी रहा है तो कोई बात नहीं…. मित्रों, बंधुओं बच्चों का पेट पालने के लिए सब करना होता है… जिनके बच्चे नहीं हैं उन्हें बीमारी से बचने और दावा- दारू के खर्च के लिए इस प्रकार कि नौकरी करनी ही होती है….. वैसे भी प्राइवेट सेक्टर में नौकरी है कहाँ…. जो है उस पर प्रतिभावान लोग विराजमान हैं… जिन्हें कहीं नहीं मिलती (नौकरी) उनके लिए तो ऐसी, वैसी और कैसी भी चलेगी…. तेल के धंदे से तो ……… बेहतर ही है… !
    मित्रों ….. लगे रहो…. वैसे भी ज्यादा समय तक नहीं लग्न है………… आपकी तो कट जाएगी, लेकिन बच्चों को पत्रकारिता क्षेत्र में आने कि कभी भूल कर भी सलाह मत देना…. आपको आपकी मम्मी कि कसम…. क्योंकि नए शोध के अनुसार आने वाले 30 वर्षों के अन्दर प्रिंट मीडिया विलुप्त हो जाएगी और इसकी जगह नया आगाज़ होगा जिसका नाम होगा डिजिटल मीडिया….. जैन साहब आप धन्य हो…. उन कलम के सिपाहियों के लिए,,,, जो आपके लिए घर-घर जाकर अखबार बुक करा रहे हैं…. उनके लिए तो आप परम पिता परमेश्वर हैं….. क्योंकि किसी कारणवश आपका अखबार राजनीती का शिकार हो गया या बंद हो गया तो इन मीडिया कर्मिओं कि क्या हालत होगी ये तो भगवन ही जाने…..
    कथा के अंत में दो शब्द और कहना चाहता हूँ बंधुओं… पत्रकारों के श्री श्री 1008 महानुभाव एक पत्र समूह के मालिक ने चुटकी लेते हुए पत्र के लांचिंग के समय कहा था कि ” खीचो न कमान को, न तलवार निकालो, जब तोप हो मुकाबिल तो अखबार निकालो”
    मेरे मालिक आपकी ये टिप्स सुन न लें वरना ………….. मुझे भी कलेक्शन …… माय गोड

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  • सलाहकार पांडे says:

    दिव्यांशु जी ,,,,,,,गलती से मैं भी चला गया था….. लेकिन बच गया……… किसी एक राजनीतिज्ञ कहे जाने वाले तजुर्बेकार गधे ने भांजी मार दी.. शायद उसे लगने लगा था की ये आया तो मेरी किरकिरी होने में देर नहीं लगेगी……. बहुत से राज दफ़न हैं मेरे इस छोटे से दिल में…… कहीं वह खुल न जाएँ इसी डर से उसने मेरे पहुँचने से पहले ही फील्डिंग कर ली,,,, और मुझे कह दिया गया आपकी जरूरत होगी तो बुला लेंगे….. अब समझ में आया कि किस टाइप के कलाकार चाहिए थे जैन साहब को…………. खैर भगवन उनकी नौकरी सलामत रखे जिन्होंने मेरी शान में जैन साहब तक अपनी गन्दी राजनीती के चलते ये बात पहुंचा दी कि ” मैं थानों से वसूली करता हूँ….. ” अब आप सोच सकते हो कि दिन भर ऑफिस में रहने वाला एक डिजाइनर थानों से वसूली कैसे कर सकता है.. और अगर डिजाइनर थानों से वसूली कर सकता है तो फील्ड में रहने वाले पत्रकार कितनी करते होंगे, खैर ये बात मेरे तो गले नहीं उतरी कि इतना बड़ा संसथान चलने वाले कैसे एक चापलूस के बहकावे में आ गए ….. लेकिन जैन साहब आपके पत्रकर तथा अन्य स्टाफ तो आपकी सदस्य बनाने वाली शर्त पर दी नौकरी को बखूबी अंजाम दे रहे हैं वो भी घर – घर जाकर…….. भई ये भी खूब रही… दिलचस्प बात है ….
    मेरे प्यारे दोस्तों हम सबको इस संसथान से यही सीख मिलती है कि मन लगाकर नौकरी करो….. मनचाहा वेतन भी पाओ लेकिन पहले अपनी तनख्वाह से दस गुना रुपया जनता जनार्दन से वसूल कर ले आओ…… वाट एन आइडिया सर जी ……….

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  • सररतन says:

    आज के इस इंसान को ये क्या हो गया
    इसका पुराना प्यार कहाँ पर खो गया
    कैसी ये मनहूस घड़ी है
    भाईयों में जंग छीड़ी है
    कहीं पर खून कहीं पर ज्वाला
    जाने क्या है होने वाला
    सबका माथा आज झुका है
    आजादी का जुलूस रूका है
    चारों ओर दगा ही दगा है
    हर छूरे पर खून लगा है
    आज दुखी है जनता सारी
    रोते हैं लाखों नर नारी
    रोते हैं आंगन गलियारे
    रोते आज मोहल्ले सारे

    सुनो जरा ओ सुनने वालों आसमा पर नजर घुमा लो
    एक गगन में करोडो तारे रहते हैं हिलमिल के सारे
    कभी नहीं वो छुरे चलते नहीं किसी का खून बहाते
    लेकिन इस इन्सान को देखो धरती कि संतान को देखो
    कितना है ये हाय कमीना इसने लाखों का सुख छीना
    कि इसने जो आज तबाही देंगे उसकी ये मुखड़े गवाही…
    दस लिया सरे देश को जहरी नागों ने
    घर को लगा दी आग घर के चिरागों ने

    आगे याद नहीं आ रहा…………?
    क्रमशः

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  • सी न्यूज़ में पत्रकार नहीं धौंस वाले दलालों की भर्ती की गई है,विश्वास न हो तो जिन लोगो नें अखबार बुक किया है उनका इतिहास और चरित्र और अखबार बुक कराने का तरीका जिन्होंने अखबार बुक करा लिया है उनसे पता कर लीजिये !शर्म आएगी आपको पत्रकारिता की इस स्थिति पर और इस मिशन को तो इन धंधेबाजो नें कोठे की वेश्या बना ही डाला है जो किसी भी समय और किसी भी कीमत पर कहीं भी बिक सकती है !
    अखबार बुक कराने वाले आगरा के एक नामचीन सज्जन की भी टिपण्णी सुन लीजिये –
    कौन मुंह लगता इनके सो दान समझ कर १८०० रुपये इनके सामने डाल दिए !
    खैर भानु ,अमी आधार और दधीचि जैसे दिग्गजों का भिखमंगो जैसा हश्र देख कर नवागत अखबारों और उदयीमान पत्रकारों को सबक जरुर ले लेना चाहिए की समाज को लम्बे समय तक बौद्धिक रूप से बंधक नहीं रखा जा सकता और समाज का आर्थिक उत्पीडन उनकी सामाजिक स्थिति को कितना दयनीय बना सकता है !

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  • सी न्यूज़ में पत्रकार नहीं धौंस वाले दलालों की भर्ती की गई है,विश्वास न हो तो जिन लोगो नें अखबार बुक किया है उनका इतिहास और चरित्र और अखबार बुक कराने का तरीका जिन्होंने अखबार बुक करा लिया है उनसे पता कर लीजिये !शर्म आएगी आपको पत्रकारिता की इस स्थिति पर और इस मिशन को तो इन धंधेबाजो नें कोठे की वेश्या बना ही डाला है जो किसी भी समय और किसी भी कीमत पर कहीं भी बिक सकती है !
    अखबार बुक कराने वाले आगरा के एक नामचीन सज्जन की टिपण्णी भी सुन लीजिये –
    कौन मुंह लगता इनके सो दान समझ कर १८०० रुपये इनके सामने डाल दिए !
    खैर भानु ,अमी आधार और दधीचि जैसे दिग्गजों का भिखमंगो जैसा हश्र देख कर नवागत अखबारों और उदयीमान पत्रकारों को सबक जरुर ले लेना चाहिए की समाज को लम्बे समय तक बौद्धिक रूप से बंधक नहीं रखा जा सकता और समाज का आर्थिक उत्पीडन उनकी सामाजिक स्थिति को कितना दयनीय बना सकता है !

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  • सी न्यूज़ में पत्रकार नहीं धौंस वाले दलालों की भर्ती की गई है,विश्वास न हो तो जिन लोगो नें अखबार बुक किया है उनका इतिहास और चरित्र और अखबार बुक कराने का तरीका जिन्होंने अखबार बुक करा लिया है उनसे पता कर लीजिये !शर्म आएगी आपको पत्रकारिता की इस स्थिति पर और इस मिशन को तो इन धंधेबाजो नें कोठे की वेश्या बना ही डाला है जो किसी भी समय और किसी भी कीमत पर कहीं भी बिक सकती है !
    अखबार बुक कराने वाले आगरा के एक नामचीन सज्जन की टिपण्णी भी सुन लीजिये –
    कौन मुंह लगता इनके सो दान समझ कर १८०० रुपये इनके सामने डाल दिए !
    खैर भानु ,अमी आधार और दधीचि जैसे दिग्गजों का भिखमंगो जैसा हश्र देख कर नवागत अखबारों और उदयीमान पत्रकारों को सबक जरुर ले लेना चाहिए की समाज को लम्बे समय तक बौद्धिक रूप से बंधक नहीं रखा जा सकता और समाज का आर्थिक उत्पीडन उनकी सामाजिक स्थिति को कितना दयनीय बना सकता है !

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  • yogesh sharma says:

    mere pyare bandhuo,mitro , shubh chintako, main itna bura aadmi nahi hu, mujhe itana bhi jalil mat karo ki sea tv ke chhothe manjil se kud kar jaan deni pade.
    jab maine tv join kiya tha us samay mere paas kuchh bhi nahi tha . aaj main chhaplussi kar kar ke is mukam par pahucha hu.agar main aisa nahi karta to aaj mere paas i-10 gaadi. rahne ke liye flat . purane makan se kiraya kaise aata.bachho ko bahar padai ke bhej diya hai aap logo main kabliyat nahi hai to main kya karu. aisha malik milna muskil hai.maine apni naukri bachane ke liye kya kya nahi kiya.kuttoon se bhi buri kadra di hai saalo ne.saale itna jalil karte hai bhir bhi meri majboori hai kyoki agar gggggg par laat maar di to ye kutta na ghar ka na ghaat ka. gaadi chhod kar purana scootar main kik lagani padegi. flat bechna pad jayega.
    mere pyarro meri mat lo main khud waqct ka mara hu.agar tumame taqat hai to mere maalik ke baare likh kar dikho, tumari neeche se pant gili ho jayegi ..yogesh sharma. vice president(marketing/branding/official)sea tv network ltd

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