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24 घंटे में दो किसानों ने खुद को मार डाला

[caption id="attachment_19349" align="alignleft" width="85"]लखनलखन[/caption]इस देश को अन्‍न देने वाला किसानों के सामने आत्‍महत्‍या करने के सिवा लग रहा है कोई चारा नहीं रह गया है. देश भर से किसानों की आत्‍महत्‍याएं की खबरें आती हैं. अब मध्‍य प्रदेश किसानों के कत्‍लगाह के रूप में आबाद होता जा रहा है. प्रदेश के छत्‍तरपुर जिले में चौबीस घंटे के भीतर दो किसानों ने आत्‍महत्‍या कर लिया. एक घटना ईशानगर के पठादा गांव की है तो दूसरी महेवा की.

लखन

लखन

इस देश को अन्‍न देने वाला किसानों के सामने आत्‍महत्‍या करने के सिवा लग रहा है कोई चारा नहीं रह गया है. देश भर से किसानों की आत्‍महत्‍याएं की खबरें आती हैं. अब मध्‍य प्रदेश किसानों के कत्‍लगाह के रूप में आबाद होता जा रहा है. प्रदेश के छत्‍तरपुर जिले में चौबीस घंटे के भीतर दो किसानों ने आत्‍महत्‍या कर लिया. एक घटना ईशानगर के पठादा गांव की है तो दूसरी महेवा की.

प्रशासनिक मशीनरी अब इन दोनों हत्‍याओं पर लीपापोती करने में जुट गई है. एक को किसान मानने से इनकार कर दिया गया तो दूसरे को पागल बता दिया गया. प‍हली घटना पठादा गांव की है. यहां के किसान कुंजीलाल अहिरवार ने की फसल पिछले तीन सीजन से बरबाद हो रही थी. बाढ़ और पाला ने उसे बदहाल कर रखा था. फसल के बरबाद होने तथा परिवार चलाने के लिए उसे कई लोगों से कर्जा लेना पड़ा. कर्ज के बोझ तले दबे कुंजीलाल को शासन  की तरफ से मिलने वाला मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा था. वह यहां-वहां भटकते-भटकते परेशान हो चुका था. रही सही कसर इस बार भी पाला ने पूरा कर दिया. उनकी फसल पूरी तरह बरबाद हो गई. इसके बाद वह मजदूरी करने लगा था. लेकिन मजदूरी से रोज का खर्च चल पाना ही मुश्किल था. कर्ज कहां से चुकाता. कर्ज के बढ़ते दबाव और कहीं से आमद की कोई आशा न देख कुंजीलाल ने मौत को ही गले लगाना बेहतर समझा. उन्‍होंने अपने खेत के पास स्थित एक पेड़ पर फांसी लगाकर आत्‍महत्‍या कर लिया. मृतक किसान के चार छोटे बच्‍चे हैं. जिनका पालन पोषण वह खेती से ही करता था. प्रशासन ने कुंजीलाल को किसान मानने से ही इनकार कर रहा है.

दूसरी घटना महेवा गांव की है. यहां भी एक किसान ने पेड़ से फांसी लगाकर आत्‍महत्‍या कर ली. किसान किशन लाल की भी फसल पिछले कई सीजनों से खराब हो रही थी. किशन ने यहां वहां से पैसे लेकर फसल बोई थी. पर मौसम की मार ने उसकी फसल को बुरी तरह तबाह कर दिया. उसके ऊपर अपनी बेटी के शादी का भी बोझ था. किशन लाल के पास परिवार चलाने का एकमात्र साधन खेतीबाड़ी ही थी. मानसिक दबाव के चलते किशन ने भी फांसी लगाकर अपनी इहलीला समाप्‍त कर ली. किशन के मौत की जानकारी जब उस क्षेत्र के पटवारी को हुई तो उसने किशन को पागल करार दे दिया. जबकि उसके घर वालों ने इससे इनकार करते हुए बताया कि फसल खराब होने के चलते इधर बीच किशन काफी परेशान चल रहे थे.

शिवराज के शासन में किसान आत्महत्या कर रहा है और सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे पा रही है. आत्महत्या का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है. दमोह जिले में रोजाना हो रही किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था, अब छतरपुर भी उसी श्रेणी में आने लगा है. प्रदेश में लगातार हो रही किसानों की आत्महत्या से जहां पूरा प्रदेश दहल उठा है, वहीं प्रशासन और शासन इस वीभत्स स्थिति से अपने आपको पाक-साफ रखने के लिए इस तरह की घटनाओं पर लीपापोती करने में सक्रिय हो गया है. जिस प्रदेश के कृषि मंत्री किसान की आत्महत्या

राजेश चौरसिया

राजेश चौरसिया

को पाप की संज्ञा दे रहे हों वहां पर किसान आत्महत्या नहीं करेगा तो और क्या करेगा.

लेखक राजेश चौरसिया छत्‍तरपुर में टीवी पत्रकार हैं तथा न्‍यूज24 से जुड़े हुए हैं.

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0 Comments

  1. kmsingh

    January 24, 2011 at 1:59 pm

    bhai u.p. ke firozabad jile ke police station nagla khangar ke 30 saal ke kishaan vijay singh ne khud ko goli maar kar aatm hatya kar li hai.
    pls contact my e mail.com
    [email protected]

  2. rajesh chourasia (09424910001)

    January 24, 2011 at 2:44 pm

    bhadas4 media pariwar me shamil karne ka aapko dil se dhanyavad…
    ab lagatar mera satat pryash rahega ki CHHATARPUR aur KHAJURAHO me khabron k mamle me hum sabse aage rahenge…….i

    aapka- Rajesh chourasia
    chhatarpur_mp
    09424910001
    09685850001

  3. Indian Citizen

    January 25, 2011 at 3:49 pm

    पूरे देश में ऐसा ही होता है, भूख से कोई नहीं मरता, कोई किसान आत्महत्या नहीं करता..

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