Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

जेपी अवतार अन्ना हजारे! (एक)

एसएन विनोदतो क्या देश को एक ‘जेपी’ मिल गए? वर्षों से भ्रष्टाचार के महासागर के हिलोरें मारती लहरों को देखने को मजबूर देशवासी सिसकारी भरते आ रहे हैं-काश! आज कोई जेपी होता.. अगर जेपी होते तो वर्तमान महाभ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ पूरे देश को एक मंच पर खड़ा कर देते। और तब भ्रष्ट-व्यवस्था, सड़ांध पैदा कर रही भ्रष्ट-व्यवस्था, और इसे उर्जा देनेवाले, इससे लाभान्वित होने वाले नेता, अफसर, व्यवसायी पलायन को मजबूर हो जाते।

एसएन विनोदतो क्या देश को एक ‘जेपी’ मिल गए? वर्षों से भ्रष्टाचार के महासागर के हिलोरें मारती लहरों को देखने को मजबूर देशवासी सिसकारी भरते आ रहे हैं-काश! आज कोई जेपी होता.. अगर जेपी होते तो वर्तमान महाभ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ पूरे देश को एक मंच पर खड़ा कर देते। और तब भ्रष्ट-व्यवस्था, सड़ांध पैदा कर रही भ्रष्ट-व्यवस्था, और इसे उर्जा देनेवाले, इससे लाभान्वित होने वाले नेता, अफसर, व्यवसायी पलायन को मजबूर हो जाते।

ठीक उसी तरह, जैसे 1974 के जेपी आंदोलन की मांग पर मुहर लगाते हुए 1977 में जनता ने तब की भ्रष्ट इंदिरा सरकार को उखाड़ फेंका था। हां! यह दीगर है कि तब नए हुक्मरानों ने जयप्रकाश के साथ ही नहीं, देश के साथ भी विश्वासघात किया था। नतीजतन, देश से क्षमा मांग इंदिरा गांधी ने फिर उसे अपने पाले में कर लिया था। फिर इतिहास में अनेक दु:खदायी अध्याय जुड़े। जयप्रकाश गये, आपात्काल में दमन के प्रतीक बने संजय गांधी गये, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई, ‘मिस्टर क्लीन’ राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, लेकिन अगले ही चुनाव 1989 में जनता ने उन्हें ‘भ्रष्ट’ निरूपित कर सत्ताच्युत कर दिया।

विश्वनाथ प्रतापसिंह और चंद्रशेखर के रूप में दो अल्पकालिक प्रधानमंत्रियों के बाद पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व में पुन: कांग्रेस 1991 में सत्ता में आई। उनके पश्चात गठबंधन सरकारों का जो दौर चला उसने भ्रष्टाचार को एक नया आयाम दे डाला। अब स्वयं प्रधानमंत्री ‘गठबंधन धर्म’ निभाने में मजबूरी और समझौतों की दुहाई दे रहे हैं। देश इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं। कथित गठबंधन धर्म के सामने सरकार या राजनीतिक दल झुकें, देश क्यों झुकेगा? सत्ता वासना की तृप्ति के लिए पूरे देश को लूटने वालों को देशवासी बर्दाश्त क्यों करें? साक्ष्य मौजूद हैं कि शासक न केवल भ्रष्टाचार के माध्यम से देश को लूट रहे हैं, लुटवा रहे हैं बल्कि देश की सुरक्षा से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। देश की अस्मिता को दांव पर लगाने में ये नहीं झिझक रहे।

यह कल्पना कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि देश को तेजी से आर्थिक गुलामी की ओर धकेलने वाले ये शासक अंतत: कहीं देश की आजादी और सार्वभौमिकता का भी सौदा न कर बैठें। महंगाई, भ्रष्टाचार और कुशासन से ‘त्राहिमाम’ करती जनता इतिहास के पन्नों को उलट एक ‘नाम’ ढूंढ़ रही थी। जयप्रकाश सरीखा ऐसा गैरराजनीतिक नाम जिसके कदमों का अनुकरण कर भ्रष्टाचारमुक्त सुशासन हासिल किया जा सके। अन्ना हजारे के रूप में ऐसा ही एक नाम उभरकर सामने आया है। सत्ता की राजनीति से सर्वथा दूर, ईमानदार, देशहित और समाजहित की सोचनेवाला यह शख्स आज जब भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ हुंकारे भर रहा है, भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ नेतृत्व की प्रतीक्षा करनेवाला देश आशान्वित हो उठा है। इसी की तो जरूरत थी।

70 के दशक की दुरवस्था से करोड़ों गुना अधिक बदतर स्थिति के बावजूद देश असहाय लग रहा था तो इसीलिए कि उसके पास कोई ‘जेपी’ नहीं था। तो क्या अन्ना हजारे जेपी की तरह भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ देश को आंदोलनरत करने में कामयाब हो पाएंगे। प्रश्‍न का उत्तर आसान तो नहीं किंतु आशावादी मैं इसके पक्ष में हाथ उठाने को तैयार हूं। जयप्रकाश के रिक्त स्थान की पूर्ति अन्ना हजारे करते हैं। जयप्रकाशजी नारायण की तरह अन्ना हजारे राष्ट्रीय स्तर पर भले ही सुपरिचित चेहरा न हों, किंतु अपरिचित भी कतई नहीं। लगता है इतिहास स्वयं को दोहराने को आतुर हो उठा है। तो क्या अन्ना हजारे इसके माध्यम बनेंगे?

लेखक एसएन विनोद वरिष्ठ पत्रकार हैं. प्रभात खबर अखबार के संस्थापक संपादक रहे हैं. दर्जनों अखबारों-चैनलों में संपादक रहने के बाद इन दिनों खुद का हिंदी विचार दैनिक ‘1857’ का प्रकाशन नागपुर से कर रहे हैं. यह लेख दैनिक 1857 में प्रकाशित हो चुका है वहीं से साभार लिया गया है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. ashok gupta

    April 8, 2011 at 5:03 am

    क्या अन्ना हजारे भ्रस्टाचार खतम कर पाएंगे

    क्या अन्ना हजारे भ्रस्टाचार खतम कर पाएंगे

    आम जीवन में नैतिकता की स्थापना से ही भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है ;

    नैतिकता के लिए धर्म की स्थापना चाहिए

    पहेले काले धन की बेलगाम फैक्ट्रीयों रुकें

    सरकारी लोगों द्वारा भ्रष्टाचार , देश के खिलाफ अपराध मन जाये.

    अगर उनका गुजारा तनख्वाह से नहीं चलता तो वे कोई और कम करें

    अभी तक की काली कमाई को माफी दे कर देश में मंगाया जाये

    curroption is not only in govt. it is in every body’s mind.

  2. मदन कुमार तिवारी

    April 8, 2011 at 6:33 am

    जेपी के आंदोलन की तुलना इस प्रायोजित आंदोलन से न करें । आपलोगो की हीं देन है कि देश रसातल में जा रहा है । जनता में आक्रोश चरम पर है और उसी आक्रोश की भावना को कैश करने के लिये जन लोकपाल बिल लागू करने की मांग की जा रही है । आपने पढा भी है , लोकपाल और जन लोकपाल बिल को । लिखने के पहले पढने की आदत डालें। कुछ चुके हुये स्वार्थी लोग चाहते हैं की देश की जनता के आक्रोश को अपने फ़ायदे के लिये उपयोग करना। पहले पढ ले जन लोकपाल बिल । इस बिल में जन कहीं भी नही है । सिर्फ़ विदेशी पुरुस्कार विजेता हैं जो भारत की तकदीर तय करेंगे।

  3. Media

    April 8, 2011 at 8:08 am

    सेवा में

    मीडिया परिवार

    निवेदन ये है की हिंदुस्तान(Hindustan Times) के फोटो ग्राफ़र आज़म हुसैन को जान से मारने की धमकी दी जिसकी खबर ७-०४-२०११ के अमर उजाला में छपी है. आज़म हुसैन का दोष सिर्फ इतना था की वोह पूरी इमानदारी से फोटो ग्राफी व रिपोर्टिंग करते है जिसकी तारीफ में हमें कुछ नहीं कहना है उसकी इमानदारी और होसले के बारे में लखनऊ की मीडिया जगत में काफी अच्छी पहचान है. इस वक़्त आवशकता है की मीडिया परिवार को एक होने की. आज़म हुसैन जैसे कितने पत्रकार है जिन्हें समाज के भय से खामोश हो जाना पड़ता है .
    घटना उस समय की है जब ६ अप्रैल को दिन में एक बजे नगर निगम के अधिकारी व ठाकुर गंज पोलिस बगैर किसी नोटिस के महजबीं फातिमा पति महताब अली निवासी ४६७/ १५२ क के घर में घुस गए उस समय महजबीं फातिमा की पुत्री रिंकी १९ वर्षीय अकेली थी घर में उसके साथ गली गलोच की और घर के कमरे में धकेल कर बंद कर दिया और घर का बाथरूम व कुछ हिस्सा तोड़ डाला. बड़े अफ़सोस की बात है की इस घटना को नगर निगम के अधिकारी व ठाकुर गंज पोलिस ने इस दूरभागय कम को अंजाम दिया जो देश के सविधान को भूल चुके है.ये अधिकारी मोहम्मद अली जफ़र व उनके तीनो पुत्र मीसम नकवी, शान नकवी, (जो पेशे से खुद को वकील बताते है) मीसम नकवी शिया कॉलेज में दलाली करके स्टुडेंट का एडमीशन करवाते है जबकि इरम नकवी की खुद की परचून की दुकान है से हाथ मिला चुके है जबकि ठाकुरगंज की पुलिस अभी तक शान नकवी और मीसम नकवी का साथ देते आ रहे है. एक वर्ष से ज्यादा वक़्त बीत चुका है अपने पडोसी महजबीं फातिमा के परिवार को परेशान करते हुवे जिसकी रिपोर्ट ठाकुरगंज पोलिस को भी है.
    अजाम हुसैन की जान को खतरा है जबकि आज़म हुसैन की माँ काफी समय से बीमार है इस घटना से वोह और ज्यादा बीमार हो गेई है मीडिया से अनुरोध है की वोह मामले की विस्तृत जानकारी लेकर अपने मित्र आज़म हुसैन की मदद करे.इस देश को इमानदार पत्रकार की ज़रुरत है. आशा है की आप सब सहयोग देंगे.
    आपका आभारी

    थ्रू मीडिया परिवार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...