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केंद्रीय हिंदी संस्थान और वर्धा विश्वविद्यालय के खिलाफ जांच शुरू!

प्रीति सागर नामक किसी सज्जन या सज्जनी ने एक मेल भड़ास4मीडिया के पास भेजा है जिसमें कुछ गंभीर किस्म की जानकारियां दी गई हैं. कुछ घपलों-घोटालों के बारे में उन्होंने बात कही है. उनकी बातों की चपेट में वर्धा स्थित अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय भी है जो अपनी आंतरिक राजनीति के कारण अक्सर चर्चा में रहता है पर हाल के कई महीनों से वर्धा से किसी नए बखेड़े की कोई खबर नहीं आई. वर्धा से बहुत दिनों से सिर्फ अच्छी-अच्छी खबरें ही आ रही हैं.

प्रीति सागर नामक किसी सज्जन या सज्जनी ने एक मेल भड़ास4मीडिया के पास भेजा है जिसमें कुछ गंभीर किस्म की जानकारियां दी गई हैं. कुछ घपलों-घोटालों के बारे में उन्होंने बात कही है. उनकी बातों की चपेट में वर्धा स्थित अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय भी है जो अपनी आंतरिक राजनीति के कारण अक्सर चर्चा में रहता है पर हाल के कई महीनों से वर्धा से किसी नए बखेड़े की कोई खबर नहीं आई. वर्धा से बहुत दिनों से सिर्फ अच्छी-अच्छी खबरें ही आ रही हैं.

कई तरह के आयोजन हो रहे हैं. नामचीन लोगों का जमावड़ा होता रहता है. साहित्य से लेकर राजनीति और संस्कृति पर गंभीर चिंतन किया जाता रहा है. पर यह चिट्ठी वर्धा के शांत जल में कंकड़ की तरह है. इस चिट्ठी में कही गई बातों में कितनी सच्चाई है, ये तो वर्धा के अधिकारी और प्रबंधन तंत्र के लोग बताएंगे. फिलहाल यहां प्रीति सागर का पत्र प्रकाशित किया जा रहा है. इस पत्र में कही गई बातों पर अगर कहीं से कोई सफाई या जवाब आता है तो उसे भी इतने ही सम्मान से प्रकाशित किया जाएगा. चाहें तो अपनी बात नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए भी कह सकते हैं. -एडिटर, भड़ास4मीडिया


उल्टी गिनती शुरू!

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के ब्लॉग ”हिन्दी-विश्व” पर केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम के सांस्कृतिक कार्यक्रम की कुछ झलकियों के चित्र आए हैं. चित्रों की पृष्ठभूमि पर लिखा दिख रहा है “गरिमामय उपस्थिति श्री कपिल सिब्बल, मानव संसाधन विकास मंत्री” … इस बारे में सच्चाई यह है कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इस कार्यक्रम में आए ही नहीं थे. दरअसल कपिल सिब्बल केंद्रीय हिंदी संस्थान के हिंदी में मैट्रिक पास कार्यवाहक निदेशक के. बिजय कुमार से इस बात से नाराज़ थे कि उन्होंने तकनीकी शब्दावली आयोग के एक अधिकारी को ग़लत फँसाया..

सिब्बल के आदेश पर बिजय कुमार के खिलाफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सतर्कता विभाग ने जाँच शुरू कर दी है.. इस मामले में भाषा प्रभाग के कुछ अधिकारियों पर भी गाज़ गिर सकती है… महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के फ़र्ज़ी पहचान पत्र घोटाले में भी राष्ट्रपति भवन ने जाँच का जिम्मा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी, अमित खरे को सौंप दिया है. अमित खरे वही अधिकारी हैं जिन्होंने लालू यादव को चारा घोटाले में प्रारंभिक जाँच के बाद जेल तक पहुँचाया था.. महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के फ़र्ज़ी पहचान पत्र घोटाले की जाँच के लपेट में विश्वविद्यालय के कुलपति भी आ रहे हैं जिन्होंने सारे प्रकरण में जानबूझ कर भी कोई कार्रवाई नहीं की…. अब सबकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है.. बस देखते जाइए…..

प्रीति सागर

[email protected]

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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0 Comments

  1. sardar raja singh

    April 11, 2011 at 4:21 pm

    are baba yeh priti sagar koi aur nahi wahi jisnehali me apply kiea thaa lekin kuch gadbadiea paye jane ke wajah se wah post kisis aur ko chali gaye bechra priti sagar namak vyakti thak har kar faltu bate likh raha hei shayad ose malumnahi ki videsho me kiea gaye karnamo se huea wah kalnkit aarop ke karan ose yeh post nahi mili, yeh koi akhbar chalne ki jagah thodi hei, student ke bhavishy ka swal hei , kalnkitvyakti kyo di jaye jimmedari bhari post,

  2. विनोद शुक्ल

    April 13, 2011 at 8:30 am

    यशवंत जी,
    वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के हिन्दी में मैट्रिक पास अध्यक्ष के बिजय कुमार को केंद्रीय हिंदी निदेशालय और केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक का भी काम दे रखा गया है . के बिजय कुमार की वित्तीय तथा प्रशासनिक गड़बड़ियों पर मेरी २ विस्तृत रिपोर्टें सहारा टाइम में आ चुकी हैं . इन मामलों की जाँच के दौरान ही मुझे पता चला कि के बिजय कुमार ने आयोग के एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी को बदले की भावना से फँसा दिया . मैने इस मामले की पड़ताल प्रारंभ की तो पता चला कि उस अधिकारी को फँसाने के षड्यंत्र में महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुछ लोग भी शामिल थे ….यह बिजय कुमार से उनकी मित्रता थी या मंत्रालय के कुछ अधिकारियों का दबाव..इसका जवाब शायद महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा ही दे सकता है..बहरहाल जब मैने महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की पड़ताल प्रारंभ की तो मुझे बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे . महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के फ़र्ज़ी पहचान पत्र घोटाले की जानकारी भी मुझे उसी दौरान हुई .मैने मामले की जानकारी केंद्रीय सतर्कता आयोग को दी और केंद्रीय सतर्कता आयोग ने मुझे सूचित किया कि उसने मामले को महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव को कार्रवाई के लिए भेज दिया . एक ओर जहाँ महाराष्ट्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में जाँच कर रही है वहीं दूसरी ओर जब मैने इस मामले में महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से जन सूचना अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के संबंध में जानकारी माँगी तो मुझे महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा नें जानकारी दी कि चूँकि यह घोटाला विश्वविद्यालय से संबंधित नहीं है इसलिए सक्षम अधिकारी के आदेश से कंप्लेंट को फाइल कर दिया गया . किसी विश्वविद्यालय के फ़र्ज़ी पहचान पत्र बन रहे हों ..ऐसे फ़र्ज़ी पहचान पत्रों का उपयोग उसी विश्वविद्यालय के कर्मचारी कर रहे हों और सारे तथ्य उपलब्ध करवाने के बाद भी विश्वविद्यालय उस मामले को अपने से जुड़ा ना माने…इसे आप क्या कहेंगे . मैने इस मामले में राष्ट्रपति को शिकायत की और इस मामले में महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति की भूमिका की भी जाँच का अनुरोध किया. मुझे राष्ट्रपति भवन से सूचना दी गई कि इस मामले को ,मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अमित खरे को कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है . महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की गुणवत्ता की स्थिति यह है कि वहाँ का प्रकाशन प्रभारी देवनागरी में वेबसाइट शब्द तक सही नहीं लिख सकता . वो वेबसाइट शब्द को बेव साइट लिखता है…अनुशासन की स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपना सह आचार्य (असोसीयेट प्रोफेसर) पद्नाम का लेटर हेड छपवा रखा है और उसका निडर हो कर विश्वविद्यालय में खुलेआम प्रयोग कर रहा है …शिकायत के बावज़ूद विश्वविद्यालय ने कोई कार्रवाई नहीं की ( मैं इन मामलों की पड़ताल अभी भी लगा हूँ ) ..यह हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के पवित्र उद्देश्य से स्थापित किसी संस्था का शायद सबसे गंदा , घिनौना और बदबूदार चेहरा है..मैं इस मामले के कुछ काग़ज़ आपको भी भेजूँगा . ( व्यावसायिक मजबूरी के कारण मैं सभी सामग्री तो आपको उपलब्ध नहीं करवा पाऊँगा )

    विनोद शुक्ल
    मुख्य उप संपादक
    सहारा टाइम

  3. Rajesh sai

    April 15, 2011 at 8:49 pm

    इस कड़ी केंद्रीय हिंदी संस्थान के बारे में यह लेख देखिए

    ऐसे चलते हैं हिंदी के संस्थान भाग – 2
    एक संवाददाता
    हिन्दी संस्थानों की बदहाली के किस्से को आगे बढ़ाते हुए, कुछ न्ई जानकारियों को रोशनी में लाना जरूरी हो गया है। आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में व्याप्त अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को हिन्दी जगत के लोग बंद आँखों से भी देख सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष चश्में की जरूरत नहीं है। पिछली तीन वर्षों से कठपुतली निदेशकों के भरोसे चल रहे केंद्रीय हिन्दी संस्थान में चोरों और डाकूओं की पौ बारह हो रही है। संस्थान के पूर्व निदेशक नित्यानंद पाण्डेय के पद छोड़ने के बाद से ही संस्थान में मनमानी, लूट-खसोट का तांडव और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों की दादागिरी का जो दौर चला है, वह थमने का नाम ही नहीं ले रहा। संस्थान के निदेशक और उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए होने वाली धांधलियों के बारे में आप पहले ही पढ़ चुके हैं। मंत्रालय की मिलीभगत से निदेशक शंभूनाथ के बाद सबसे पहले चार्ज वरिष्ठतम प्रो रामवीर सिंह को मिला और फिर बाद में कांग्रेस पार्टी के ’जय हो’ फेम चारण-कवि अशोक चक्रधर की कृपा से हिंदी में मैट्रिक पास प्रो के. बिजय कुमार संस्थान के निदेशक बने। संस्थान के निदेशक नियुक्ति प्रक्रिया को बार-बार बोझिल बनाकर मंत्रालय अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाह रहा। परन्तु उसकी ठीक नाक के नीचे ही संस्थान में गड़बड़ घोटाला जारी है।
    संस्थान की इस गफलत में उसे अपनी लूट, हवस और मनमानी का शिकार बनाया संस्थान के फर्जी ड्रिगीधारी रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी और उनके गिरोह ने। इन अगड़ी जाति के चोरों के नेता और दिल्ली, जयपुर, बंग्लुरू, नौएडा, देहरादून, चेन्नई, पूना आदि में न जाने कितनी बेनामी ज़मीनों और फ्लेटों के मालिक संस्थान के रजिस्ट्रार का नाम शुरू से ही संस्थान के निदेशकों की बेइज्जती और वहाँ गुंडाराज चलाने के लिए बदनाम है। किसी अदने कर्मचारी को सरेआम पीटना या पिटवाना इन त्रिपाठी का दाएँ हाथ का खेल है। इस प्रकार की उनके गर्म मिज़ाज की घटनाओं की खबर आए दिन आगरे के अखबारों में निकलती रहती है। ज्ञात हो कि कुछ वर्ष पहले इसी रजिस्ट्रार ने असम विश्वविद्यालय से आए संस्थान के निदेशक प्रो नित्यानंद पाण्डेय की जमकर पिटाई और बेइज्जती की थी और मामला पुलिस तक जा पहुँचा था। जिस कारण अंतत: प्रो. पाण्डेय ने निराश होकर संस्थान छोड़ दिया। बाद में इसी गिरोह ने निदेशक शंभूनाथ को जान से मारने की धमकी का पत्र लिखवाया था। फेरहिस्त बहुत लंबी है।
    सक्षम निदेशकों की गैरमौजूदगी में त्रिपाठी गिरोह ने पूरे संस्थान पर जैसे अपना अंधा राज स्थापित कर लिया है। माना जाता कि पिछले दस वर्षों ने इस रजिस्ट्रार ने फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपए का धन बटोर लिया है और वे पिछले कई दिनों से अपनी पत्नी को संस्थान में नौकरी दिलवाने की जुगाड़ में लगे हुए हैं। संस्थान में चलने वाले बिजली-जनरेटर के तेल, साजों सामान की खरीददारी, विदेशी विद्यार्थियों के हवाई टिकट की खरीद, सेमिनार/समारोह आयोजन से लेकर शिलांग में स्थित संस्थान के सेंटर के भवन- निर्माण में इस गिरोह ने करोड़ों रुपए का कमीशन खाया है। यह आश्चर्य की बात नहीं है कि संस्थान में होने वाली पढ़ाई का स्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा है जब रजिस्ट्रार और शिक्षक मिलकर संस्थान को लूटने की योजना से दिन-रात जुड़े हों।
    मिली जानकारी के अनुसार इसी गिरोह ने रिश्वत लेकर संस्थान के सभी केद्रों पर अपने सगे-संबंधियों या क्षेत्रीय लोगों को संविदा पर नियुक्त करवाया हुआ है। अब इस गिरोह द्वारा संविदा पर नियुक्ति पाए हुए कर्मचारी किसी प्रोफेसर / प्रभारी के सामने खुलेआम जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने से गुरेज नहीं करते। जब सईंया भए कोतवाल तो डर काहे का।
    संस्थान को केंद्र सरकार से हर साल मिलने वाले बजट में से करोड़ों डकार जाने वाले इस त्रिपाठी गिरोह ने फर्जीवाड़ा करके न जाने कितनों बैंको से अवैध लोन लिया हुआ है। संस्थान के सहकारी ऋण समिति के नाम पर हर साल कर्मचारियों का जमा पैसा यह गिरोह अवैध तरीकों से आगरा , मथुरा और बनारस की सूद की मंडियों में लगा रहा है। मनमानी और घोटाले के ये हाल है कि संस्थान द्वारा हर वर्ष लाखों रुपए भवन रख-रखाव में व्यय किए जाते है परन्तु त्रिपाठी गिरोह की कारस्तानी देखिए कि संस्थान का प्रत्येक भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ा हुआ है। शौचालयों की हालत यह है कि आवारा जानवर प्राय: यहाँ मल_मूत्र विसर्जन करते नज़र आते हैं। संस्थान को दीमक की तरह चाटना चाह रहा यह गिरोह अपनी काली करतूतों के कारण मंत्रालय की आखों की किरकिरी बना हुआ है। अब नौबत यह है कि संस्थान के हर काम में मंत्रालय अड़ंगा लगा रहा है।
    अपने घर में अवैध बिजली और संस्थान के खर्चे पर छह-छह एसी मशीनों का इस्तेमाल करने वाले रजिस्ट्रार त्रिपाठी को इस संबंध में मंत्रालय की विजिलेंस कमेटी का नोटिस पहले ही मिल चुका है। संस्थान को अपने घर की मुर्गी समझने वाले रजिस्ट्रार ने संस्थान के खर्चे पर अवैध तरीकों से चार-चार नौकर रखे हुए है और वे अपने निजी-वाहन चलवाने का काम एक प्रांतीय रक्षक दल के जवान से संस्थान के वेतन पर करवा रहे हैं। खुलेआम बंदूको के साये में चलने वाले इस गिरोह की हरकते अन्ना हाजरे को भी रूला देंगी।
    अब देखना यह है कि मंत्रालय के आई.ए.एस अमित खरे के नेतृत्व में गठित विजिलेंस कमेटी इस गिरोह के परों पर कब कैंची चलाती है। संस्थान की आगरा में स्थापना करने वाले महान हिंदी सेवी श्री मोटूरी सत्यनारायन ने यह कभी नहीं सोचा होगा कि चंद लोगों के स्वार्थपरकता के कारण संस्थान रसातल में चला जाएगा।
    साभार: http://mohallaalive.blogspot.com/

  4. मनोज

    April 18, 2011 at 3:32 pm

    कपिल सिब्बल के मंत्रालय में ही भांग घुली है ..पूरा मंत्रालय ही नशे में है … हिन्दी में मैट्रिक पास के बिजय कुमार पूरे मंत्रालय को और इसके साथ साथ पूरे देश को कैसे टोपी पहना रहे हैं इसका नमूना देखिए …वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की स्थापना 1 अक्तूबर 1961 को हुई थी ..इस हिसाब से इस आयोग की स्थापना के 50 साल 1 अक्तूबर 2011 को पूरे होंगे..किसी भी संस्था की स्वर्ण जयंती संस्था की स्थापना के 50 साल पूरा करने के बाद ही मनाई जा सकती है…पर यह बिजय कुमार का गणित है कि वो 27 अप्रैल 2011 की संस्था के 49 वें साल में ही वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की स्वर्ण जयंती मना रहे हैं और इस बार भी कपिल सिब्बल को मुख्य अतिथि बनाया गया है…क्या देश के प्रबुद्ध और जागरूक पत्रकार बिजय कुमार के इस गणित का विश्लेषण करने के लिए समय देंगे ?????

  5. महेश

    April 19, 2011 at 5:50 pm

    बिजय कुमार की शायद मुश्किलें बढ़ने वाली हैं क्योंकि जिस अधिकारी को फँसाने के मामले का ज़िक्र विनोद शुक्ल ने किया है उसकी सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को पिछले हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को नोटिस जारी कर दिया है .. अब बिजय कुमार और वर्धा दोनों सुप्रीम कोर्ट में जवाब की तय्यारी करें …यह दोनों के लिए गर्मी की छुट्टियों के पहले का होमवर्क होगा….पाप का घड़ा तो एक ना एक दिन भरना ही था ..

  6. dr.priti sagar

    April 20, 2011 at 5:01 am

    priti sagar ke naam se jis vyakti ka patr praksait kiya gaya hai wo koi mansik rogi hai jisko ilaaz ki zaroorat ha.priti sagar ke naam ka istemaal kar galat baaton ka prachar kar wo apne mansik diwalipan ka parichay de raha hai . agar uski baaton me sachai hai to apni pahchaan ke saath saamne kyon nahin aata?

  7. विनोद कुमार शुक्ल

    April 20, 2011 at 3:53 pm

    कौन सी प्रीति सागर सही हैं इस पर विवाद हो सकता है पर पत्र के तथ्य शत प्रतिशत सत्य हैं ..मानव संसाधन विकास मंत्री की ओर से प्रो के बिजय कुमार द्वारा डॉ आर के मिश्र को फँसाए जाने की जाँच सतर्कता अधिकारी अमित खरे को दी गई है और इस मामले में के बिजय कुमार द्वारा षड्यंत्र के और इस षड्यंत्र में वर्धा के लोगों के शामिल होने के सबूत हमारे पास हैं ..सतर्कता जाँच में भी मामला बिजय कुमार के खिलाफ है..भाषा प्रभाग के कुछ अधिकारियों पर भी गाज़ गिर सकती है ..वर्धा के फ़र्ज़ी पहचान पत्र घोटाले की जाँच राष्ट्रपति भवन नें मानव संसाधन विकास विकास मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी अमित खरे को सौंपी है. इसके लिखित प्रमाण हमारे पास हैं..शिकायत मेरी ही थी और राष्ट्रपति भवन नें इस बारे में मुझे सूचित किया है .विश्‍वविद्यालय के कुलपति की भूमिका इस पूरे प्रकरण में बेहद खराब और संदेहास्पद रही है.डॉ आर के मिश्र की विशेष अनुमति याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट नें 15 अप्रैल को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को नोटिस ज़ारी कर दिया है..अगर डॉ आर के मिश्र नें वर्धा के लोगों की भूमिका और वर्धा के फ़र्ज़ी पहचानपत्र घोटाले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया तो वर्धा के कुलपति भी लपेट में आ सकते है..नौकरियाँ तो वर्धा में कइयों की जा सकती हैं ..अब बिजय कुमार मामले को सुलझाने के लिए हाथ पैर मार रहे है पर शायद रायता इतना घुल चुका है कि उसका किसी भी रूप में संभालना नामुमकिन है…डॉ आर के मिश्र के खिलाफ कहीं कोई भी सबूत नहीं हैं ..क्या प्रीति सागर के नाम का कॉपी राइट किसी के पास है. किस प्रीति सागर ने पत्र भेजा यह मुद्दा नहीं है .पर पत्र के तथ्य शत प्रतिशत सत्य हैं..मेरे पास सारे अभिलेख हैं . इसमें मानसिक दीवालिएपन की कोई बात कम से कम मेरी समझ में नहीं आ रही है..क्या वर्धा विश्‍वविद्यालय
    इस मामले में कोई सफाई भेजेगा..केंद्रीय सतर्कता आयोग के अनुरोध पर महाराष्ट्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बन चुकी इस विश्‍वविद्यालय की कारगुज़ारियों की जाँच कर रही है..केंद्रीय सतर्कता आयोग के पत्र की प्रति मेरे पास है..वर्धा पुलिस नें भी इस मामले में कार्रवाई की है और जल्दी ही वर्धा पुलिस की जाँच की स्थिति भी मुझे आर टी आइ के जवाब से पता चल जाएगी …धैर्य रखिए और प्रतीक्षा कीजिए..मैं कोशिश करूँगा की कथा इसकी परिणीति तक जाए ..हर षड्यंत्रकारी को उसके षड्यंत्र की सज़ा मिलनी ही चाहिए….. मैं किसी की चरित्र हत्या में विश्‍वास नहीं करता हूँ पर मैं किसी की चरित्र हत्या होने भी नहीं दूँगा..यही पत्रकारिता का धर्म भी है ..

  8. C J Patil

    April 25, 2011 at 4:14 pm

    From the above comments it seems that Hindi should be deleted from Official Language as well as National Language at once. How is it possible that a Secondary Pass person (in Hindi) can become the Chairman of Such a National Organisation? Is Dr.Mishra in line of becoming Chairman or more qualified than Chairman? If yes then I feel this Preeti and Chairman and other may be party for Dr.Mishra’s Ouster so that a learned Person can’t become head of such organisation. I request the people who really care for Hindi must start a movement to throw away the persons who are harming Hindi or DELETE HINDI from ………

  9. मनोज

    April 27, 2011 at 6:54 pm

    वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के विज्ञान भवन में आयोजित तथाकथित स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कपिल सिब्बल 27 एप्रिल के कार्यक्रम में नही आए .. सबसे बड़ा तमाशा तो ये हुआ की शिक्षा सचिव विभा पुरी दास नें उद्घाटन संबोधन में बिजय कुमार का नाम तक नहीं लिया …सचमुच सबकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है…..

  10. C J Patil

    May 4, 2011 at 3:41 pm

    Its really really surprising that a matric pass is Director of Central Hindi Directorate/Chairman of CSTT and also in charge of Kendriya Hindi Sansthan. Mr.Bijay Kumar must be a super man.Shame on Persons teaching Hindi or better to say Hindi Lovers as they dont have a single person who is better than Mr.Bijay Kumar. It seems that no competent person in Hindi is worth for the above mentioned post or all Hindi Lovers/eminent professors/writers are IMPOTENT as they even cant raise voice against Mr.Bijay Kumar

  11. महेश यादव

    May 14, 2011 at 3:42 pm

    लगता है सचमुच सबकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है …मानव संसाधन विकास मंत्रालय के भाषा प्रभाग व प्रशासन की संयुक्त सचिव अनीता भटनागर जैन को कपिल सिब्बल नें मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया है … बिजय कुमार को भी 27 मई को चलता किए जाने की तय्यारी पूरी हो गई है और उनके सेवा विस्तार की फाइल को टर्न डाउन कर दिया गया है …. क्या सचमुच अगला नंबर वर्धा के लोगों का है ????

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