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केडी सिंह और तरुण तेजपाल के रिश्ते

: तो इसलिए फाइनेंसियल वर्ल्ड शुरू होने से पहले ही बंद हो गया! : तरुण तेजपाल एक पवित्र नाम हैं. तहलका के मालिक हैं. पत्रकारिता की शान हैं. पत्रकारों की प्रेरणा हैं. सरोकार और आदर्श उनमें कूट कूट कर भरा है. पर हर पत्रकार उद्यमी की भांति उन्हें भी अपने प्रोजेक्ट्स के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. और पैसे पेड़ पर तो लटके नहीं मिलते. ज्यादा पैसे ज्यादातर उनके पास होते हैं जिनके साथ सरोकार, आदर्श, नैतिकता जैसे शब्द नहीं जुड़े होते.

: तो इसलिए फाइनेंसियल वर्ल्ड शुरू होने से पहले ही बंद हो गया! : तरुण तेजपाल एक पवित्र नाम हैं. तहलका के मालिक हैं. पत्रकारिता की शान हैं. पत्रकारों की प्रेरणा हैं. सरोकार और आदर्श उनमें कूट कूट कर भरा है. पर हर पत्रकार उद्यमी की भांति उन्हें भी अपने प्रोजेक्ट्स के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. और पैसे पेड़ पर तो लटके नहीं मिलते. ज्यादा पैसे ज्यादातर उनके पास होते हैं जिनके साथ सरोकार, आदर्श, नैतिकता जैसे शब्द नहीं जुड़े होते.

तरुण तेजपाल ने तहलका मैग्जीन के लिए पैसे की व्यवस्था करने हेतु जो रास्ता अपनाया, उसकी तारीफ हर ओर होती है. उन्होंने पाठकों से मिले पैसे के आधार पर एक कोष तैयार कर उससे तहलका का संचालन किया ताकि कहीं से किसी तरफ का कारपोरेट या सरकारी या राजनीतिक दबाव तहलका को न झेलना पड़े. इसलिए क्योंकि अगर कारपोरेट, सरकार और राजनीति के लोग पैसे तहलका में लगाते तो वे देर सबेर अपना दबाव तहलका पर डालते और तहलका को भी छुप छुपाकर उनकी बात माननी पड़ती. सो, तरुण तेजपाल ने इसी कारण जनता के बीच जाने का फैसला किया. अपने पाठकों से अपील की. और तहलका अंग्रेजी का विशाल व धनी पाठकवर्ग उन्हें लाखों रुपये देने को सहर्ष तैयार हो गया. खुशवंत सिंह से लेकर कई लोगों ने लाखों रुपये तरुण तेजपाल को दिए और तरुण ने इस पैसे का कोष बनाकर तहलका का निर्बाध संचालन जारी रखा हुआ है.

लेकिन कहानी अब बदल चुकी है. तरुण तेजपाल भी एक बड़े मीडिया हाउस के निर्माण की तरफ अग्रसर हैं. तहलका का लगातार विस्तार करने के सपने पाले हुए हैं. उन्होंने पिछले दिनों बिजनेस अखबार फाइनेंसियल वर्ल्ड शुरू करने की घोषणा की. इसके लिए नियुक्तियां भी शुरू हो गईं. पर अचानक इस प्रोजेक्ट को रोक देना पड़ा.  पिछले लगभग दो माह से मीडिया जगत में लगातार यह बात उत्सुकता पैदा करती रही है कि आखिर तहलका समूह की ओर से आने वाला संभावित बिजिनेस दैनिक, फाइनेंसियल वर्ल्ड किन कारणों से शुरू नहीं हो पाया है. जितने मुंह उतनी बातें थीं, कोई कहता कि इकोनोमिक्स टाइम्स और बिजिनेस स्टैण्डर्ड ने इस प्रतिद्वंद्विता को पहले ही पहचानते हुए ऐसे लुभावने ऑफर शुरू कर दिए कि पब्लिशर्स को लगा, इसमें नुक्सान ही होगा. दूसरे कह्ते कि लगता है प्रमोटर्स ने अपने हाथ खींच लिए हैं. और ना जाने क्या-क्या. लेकिन बीते रविवार को द इकोनोमिक टाइम्स में जो कुछ प्रकाशित हुआ, वह नई कहानी है. केडी सिंह को तो आप लोग जानते ही होंगे.

वहीं, जो लाखों रुपये की नगदी के साथ हवाई अड्डे पर पकड़े गए थे. रिपब्लिक ऑफ चिकन चेन के विवादास्पद पोल्ट्री मालिक और चार माह पूर्व में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा एवं अब तृणमूल कॉंग्रेस के सांसद सदस्य केडी सिंह की छवि से हम सब खूब परिचित हैं. इनसे बातचीत द इकोनामिक टाइम्स में प्रकाशित हुई है. हर बड़ा उद्यमी मीडिया को पटा कर रखता है. अपने जमाने में धीरू भाई अंबानी ने यह खेल किया तो आज के जमाने में राडिया के कंधों पर सवार होकर कई बड़े कारपोरेट हाउस यह खेल करते रहे हैं, जिसकी स्टोरीज पिछले दिनों राडिया कांड के बाद जनता के सामने आई. केडी सिंह भी मीडिया से प्रेम करते हैं. केडी मीडिया में निवेश को इच्छुक रहते हैं. यह जानकारी कम लोगों को होगी कि तहलका मैग्जीन प्रकाशित करने वाली कंपनी अनंत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में एक बड़ा शेयर केडी ने खरीदा है.

बताया जाता है कि केडी सिंह सौ करोड़ रुपये देने का वादा तरुण तेजपाल से कर चुके थे. इसी रुपये के दम पर फाइनेंसियल वर्ल्ड नाम से एक बिजनेस डेली शुरू करने का प्लान था. लेकिन जब केडी पैसे देने के अपने वादे से मुकर गए तो तरुण तेजपाल का फाइनेंसियल वर्ल्ड का प्लान भी गड़बड़ा गया. इस बारे में केडी सिंह ने कहा- फाइनेंसियल वर्ल्ड के प्रकाशन को रोकने का निर्णय पूर्णतया तहलका का था. मैं तो मात्र अनंत मीडिया का एक साइलेंट इन्वेस्टर हूँ. मैं उसके दैनिक कार्यों में दखलंदाजी नहीं करता. उधर, तहलका के एडिटर इन चीफ और अनंत मीडिया के एक प्रमोटर तरुण तेजपाल केडी की बात से सहमत होते हुए कहते हैं- ”प्रोजेक्ट को छोटे स्केल का बनाने और उसे आर्थिक रूप से बहुत बड़ा न करने का निर्णय लेने समेत सभी निर्णय मेरे थे. केडी सिंह ने कभी भी इस तरह की कोई बात नहीं कही और ना ही ऐसे कोई सुझाव ही कभी दिए हैं. मुझे आशा है आगे भी यही स्थितियां बनी रहेंगी.”

ज्ञात हो कि मीडिया मुगल बनने का सपना देख रहे केडी सिंह को मीडिया की वजह से काफी परेशानी उठानी पड़ी है. जुलाई 2010 में जिस दिन उनका चुनाव राज्य सभा के लिए होना था, उसी दिन पूर्व तहलका संवाददाता अनिरुद्ध बहल के कोबरापोस्टडॉटकॉम के एक स्टिंग ऑपरेशन से उन्हें खासी परेशानी हुई जिसमें उन्हें पैसे का इस्तेमाल करके उच्च सदन में जाने की बात सामने रखी गयी थी. यह स्टिंग सीएनएन-आईबीएन पर दिखाया गया था जिसने एक पल में ही सिंह को कुख्यात कर दिया था.  आगे वे जेएमएम से तृणमूल में चले गए जिसे लेकर रांची में हिंसक घटनाएं भी हुईं. पिछले दिनों दिल्ली एअरपोर्ट पर वे सत्तावन लाख रुपये ले कर जाते समय रोक लिए गए थे जब वे चुनाव के दौर से गुजर रहे असम राज्य जा रहे थे. उन्हें उस समय जाने दिया गया जब उन्होंने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एयर इंटेलिजेंस ईकाई को संभवतः यह संतुष्ट कर दिया कि यह धनराशि पूर्णतया वैध है.

2009 में चंडीगढ़ के ट्रिब्यून ने खबर दी थी कि उन्होंने ग्यारह बिजनेस घरानों में इनकम टैक्स द्वारा किये गए सर्वे के बाद बाईस करोड रुपये की अघोषित संपत्ति विभाग को सुपुर्द किया था. कुछ हफ्ते पहले इंडिया टुडे में केडीसिंह का एक शानदार प्रोफाइल प्रस्तुत किया गया. उसमें केडी ने बताया था कि वे शीघ्र ही एक बंगाली न्यूज़ चैनल शुरू करने वाले हैं. तो, आधुनिक भारत के नए और बड़े लायजनर केडी सिंह और आधुनिक भारत के पत्रकारिता के नए और शीर्ष प्रतिमान तरुण तेजपाल के बीच जो रिश्ता है, उससे कुछ लोगों को दिक्कत हो सकती है और कुछ इसे सामान्य बात मान सकते हैं लेकिन यह समीकरण उतना भी सहज नहीं है जितना केडी और तरुण अपने अपने बयानों में बताते हैं.

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0 Comments

  1. BIJAY SINGH

    April 12, 2011 at 10:55 am

    K.D.singh is a businessman and industrialist,of course no one is going to invest even a single rupee in any media project ,unless he gets FULL BENEFIT of the media,directly and indirectly.
    The same story we are experiencing from every BIG MEDIA HOUSES ,who are involved in either power plant,reality,malls or gold mines.
    I think DHANPASHUS are financing media organisations only due to their interest not for social cause and the same story is with evevy established media houses even.
    BIJAY SINGH. JAMSHEDPUR.

  2. zareen siddiqui

    April 12, 2011 at 3:55 pm

    बात सिर्फ पैसों के बबरे में नहीं है और ये भी सत्य है की तरुण तेजपाल नहीं बिक सकते न ही पत्रकारिता की साख को बट्टा लग सकते है| लेकिन एक सवाल बचा रहता है| की श्री तरुण तेजपाल जैसा व्यक्ति अगर घर में बैठ जाये तो निश्चित रूप से समाज को ही नुकशान होगा | इसलिए हमें कोई हक़ नहीं पहुचता की हम अनर्गल बाते करे कमल का फूल पाने के लिये जाने वाला रास्ता कीचड़ का ही होता है ….ज़रीन सिद्दीकी रायपुर से

  3. surender

    April 14, 2011 at 2:28 pm

    tarun ji jaise log bik nahi sakte, jis par imandari ka nasa hota hai wo galat kam nahi kar sakta, lekin logo ko to kuch kehena hi hey so unhone yehi ilzam laga diya.
    yashwant ji kripaya aap aisi baato ko hawa mat do, publicity stunt har jagha acha nahi

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