तहलका पत्रकारों की हत्या की साजिश रचने के पांचों आरोपी बाइज्जत बरी

नयी दिल्ली की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने उन पांच आरोपियों को रिहा कर दिया है जिन्हें खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर तहलका पत्रिका के दो पत्रकारों तरूण तेजपाल और अनिरूद्ध बहल की हत्या की साजिश रचने के आरोप में वर्ष 2001 में गिरफ्तार किया गया था. उन दिनों तहलका पत्रिका ने रक्षा सौदे में कथित भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया था जिसके कारण तत्कालीन सरकार की काफी किरकिरी हुई थी.

अलकेमिस्ट और तहलका वालों का बिजनेस डेली ‘द फाइनेंसियल वर्ल्ड’ चुपचाप लांच

तहलका और अलकेमिस्ट. तरुण तेजपाल और केडी सिंह. दोनों का साथ. ‘द फाइनेंसियल वर्ल्ड’ तैयार. सारे कयासों को धता बताते हुए यह बिजनेस डेली लांच हो गया. चंडीगढ़ और दिल्ली में इसे आप अखबार विक्रेताओं के यहां पा सकते हैं. लेकिन कुछ अजीब व खटकने वाली बातें भी हैं. पहले अंक में प्रथम पेज पर पाठकों को कोई संदेश या संपादकीय नहीं. दिल्ली एडिशन की भी चंडीगढ़ में छपाई की गई. 16 पेजी इस ब्राडशीट अखबार में लीड स्टोरी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बॉस मुकेश अंबानी की भावी योजनाओं पर केंद्रित है.

‘तहलका’ के स्टिंग से कुछ ने शेयर मार्केट से खूब कमाया

: सम्माननीय ‘तहलका’ के असम्मानीय कर्ताधर्ता! : सुपर फिक्सर केडी सिंह आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग के निशाने पर : मूर्ति भंजन का दौर जारी है. अन्ना के साथ के कथित ईमानदार लोगों की चड्ढी-धोती खुलते-खुलते अब मीडिया के उन लोगों की भी कहानी सामने लगी है जो ईमानदारी के प्रतीक माने जाते हैं. जाने क्या पड़ी थी तरुण तेजपाल को कि अच्छी खासी ब्रांड वैल्यू वाले तहलका को चोरों-उचक्कों के हवाले कर दिया.

केडी सिंह और तरुण तेजपाल के रिश्ते

: तो इसलिए फाइनेंसियल वर्ल्ड शुरू होने से पहले ही बंद हो गया! : तरुण तेजपाल एक पवित्र नाम हैं. तहलका के मालिक हैं. पत्रकारिता की शान हैं. पत्रकारों की प्रेरणा हैं. सरोकार और आदर्श उनमें कूट कूट कर भरा है. पर हर पत्रकार उद्यमी की भांति उन्हें भी अपने प्रोजेक्ट्स के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. और पैसे पेड़ पर तो लटके नहीं मिलते. ज्यादा पैसे ज्यादातर उनके पास होते हैं जिनके साथ सरोकार, आदर्श, नैतिकता जैसे शब्द नहीं जुड़े होते.

शुरू होने से पहले बंद हुआ फाइनेंसियल वर्ल्‍ड

तहलका का बहुप्रतीक्षित बिजनेस अखबार फाइनेंसियल वर्ल्‍ड अब प्रकाशित नहीं होगा. इसके शुरू होने से पहले बंद करने का ऐलान कर दिया गया है. तहलका की प्रकाशन करने वाली कंपनी अनंत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने इस अखबार के प्रकाशन में असमर्थता जताई है. तहलका के प्रमुख संपादक तरूण तेजपाल ने एक बैठक बुलाकर सभी कर्मचारियों को इसकी सूचना दी. बैठक में उन्‍होंने बताया कि फाइनेंसियल वर्ल्‍ड नाम से आने वाला इस समूह का अखबार अब नहीं निकाला जाएगा.

जी बिजनेस की पूजा तहलका के बिजनेस अखबार में पहुंचीं

जी बिजनेस में स्पेशल करेस्पांडेंट के रूप में कार्यरत पूजा श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया है. वे नई पारी की शुरुआत तहलका समूह द्वारा लांच किए जाने वाले बिजनेस अखबार फाइनेंसियल वर्ल्ड के साथ करने जा रही हैं. ज्ञात हो कि तहलका समूह विस्तार के नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है. तहलका मैग्जीन के दो नए नये संस्करण, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ और दिल्ली-एनसीआर लांच किए जाने वाले हैं. एमपी-सीजी एडिशन जनवरी में लांच होगा जबकि दिल्ली-एनसीआर फरवरी में.

तहलका के अतुल चौरसिया को रामेश्‍वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्‍कार

रामेश्वर संस्थान, झांसी ने वर्ष 2010 का रामेश्वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार तहलका हिंदी, नई दिल्ली के उप कॉपी संपादक अतुल चौरसिया को देने का निर्णय लिया है। उन्हें यह पुरस्कार हिंदी पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान और बेहतरीन लेखन के लिए दिया जा रहा है। पुरस्कार स्‍वरूप अतुल को ग्यारह हजार रुपये नगद और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी रामेश्वरम संस्थान, झांसी के अध्यक्ष सुधांशु त्रिपाठी ने दी।

तहलका को आईपीआई इंडिया पुरस्‍कार

नई दिल्‍ली. पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए साप्‍ताहिक समाचार पत्रिका ‘तहलका’ को वर्ष 2010 के आईपीआई- भारत पत्रकारिता पुस्‍कार से सम्‍मानित किया जायेगा. पुरस्‍कार स्‍वरूप दो लाख रुपये की राशि, ट्रॉफी और प्रशस्ति-पत्र दिया जायेगा. पुरस्‍कार के निर्णायक मंडल ने सुरक्षा बलों की ओर से 23 जुलाई, 2009 को मणिपुर में दिनदहाड़े एक युवक की क्रूरता के साथ जान लेने संबंधी टेरेसा रहमान की रिपोर्ट की विशेष रूप से सराहना की है. निर्णायक मंडल ने कहा कि मणिपुर में हुई इस घटना की रिपोर्ट का जनता पर काफी प्रभाव पड़ा.

निष्पक्ष तहलका का शिव सेना के पक्ष में गुणगान!

: बाजारवादी कुत्ता बड़ा खतरनाक है भाई : तहलका के 15 नवंबर का ताज़ा अंक. पृष्ठ संख्या 22 पलटिए. देखिये एक पूरे पृष्ठ पर छपे आँखों में ताकत का गुरूर लिए एक नायक की तस्वीर. आगे कहानी पढ़िए आस्था अत्रे की. मुख्य पंक्तियों की बानगी देखिये. ”बाल ठाकरे के पोते का राजनीतिक पदार्पण जिस तेवर के साथ हुआ है, क्या उससे शिवसेना के भविष्य के लिए कुछ उम्मीदे जगती हैं.” किस उम्मीद की बात कर रहे हैं आस्था साहब. शिवसेना में आपकी आस्था तो साफ झलक रही है. नाम खराब करने को तहलका ही बचा था क्या जो पूरी कहानी में आप साहबजादे का गुणगान करते चले गए.