ईटीवी राजस्थान के बीकानेर ब्यूरो चीफ लक्ष्मण राघव को पत्रकारिता के क्षेत्र का प्रतिष्ठित ज्योति बा फुले सम्मान से नवाजा गया है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजधानी जयपुर के विद्याधर स्थित ज्योति बा फुले राष्ट्रीय संस्थान परिसर में ग्यारह अप्रैल को आयोजित एक समारोह में राघव को ये सम्मान प्रदान किया. राजस्थान में निर्भीक और निडर पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले राघव को गुर्ज्जर आन्दोलन के दौरान उनकी पत्रकारिता के लिए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया.
पूर्वी राजस्थान के अलावा हरियाणा विधान सभा के चुनाव को कवर कर चुके राघव पिछले लगभग डेढ़ साल से बीकानेर में ईटीवी के संभाग प्रभारी हैं. इसी दौरान उन्हें गुर्ज्जर आन्दोलन को कवर करने की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई. पिछली बार हुए गुर्ज्जर आन्दोलन में भी नेशनल मीडिया की उपस्थिति के बावजूद उनकी सटीक और जीवन्त रिपोर्टिंग सराही गई थी.












Rohit,etv
April 15, 2011 at 4:04 pm
Very congratulation.
Narendra
April 16, 2011 at 9:03 am
Congratulation buddy…..
We all are very happy…………………
Rahul E Tv
April 19, 2011 at 3:09 am
mubarak ho
pramod sain
April 20, 2011 at 6:32 am
badhai ho sir me apki awaj jab etv per sunta hu toh bahut hi acha lagta hai
sanyogita
April 20, 2011 at 4:24 pm
लक्ष्मण राघव,सच मानिए तो आपकी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। गुर्जर आंदोलन में जो व्यक्ति शेरो-शायरी करता हो.वो बेस्ट रिपोर्टर हो जाए.मैं मान ही नहीं सकती। जैसे आप,वैसे ही आपको पुरुस्कृत करने वाली संस्था। अंधा पीसे,कुत्ता खाए…ख़ैर बधाई की औपचारिकता के साथ..नमस्कार..लेते रहो फ़र्जी पुरुस्कार
tiger
April 21, 2011 at 9:33 am
लक्ष्मण राघव जी,आप किस प्रकार की पत्रकारीता करते यह बीकानेर का बच्चा जानता है जिनका कोई वजूद नही है वही ई टी वी के होरो है क्या यह पुरस्कार भी,,,,,,,खैर सेवा के साथ मेवा भी मिलता रहे इस से अच्छा क्या है हमारी भी बधाई
prof. rakesh
April 26, 2011 at 4:17 pm
“लफ्ज नंगे हो गए, शोहरत भी गाली हो गई”
कुछ एसा ही लग रहा है आपके शब्द पढ़कर, संयोगिता जी और टाइगर जी क्या शानदार लिखा है आपने, लगता है आपकी लेखनी को पहली बार ये मौका नसीब हुआ, क्या आपको गुर्जर आन्दोलन कि मौतों का आंकड़ा मालूम है और उस वक़्त का एहसास जब आपके कान की कुछ ही दूरी से सनसनाती गोली निकलती है और खुद को किसी चमत्कार कि तरहां जिन्दा पाते हो…शायद नहीं….और कल्पना करो कि आप लाइव में हैं और एक पागल भीड़ आपके चारों और खड़ी है जिनके हाथों में नंगी तलवारें हैं….आपका एक शब्द आखिरी भी हो सकता है और टीवी को सच्चाई बताना आपका धर्म, आपके शब्दों से परिन्नाम बिगड़ा तो आप खुद को भी माफ़ नहीं कर पाओगे…….. सोचना ज़रा …..एक आखिरी बात किसी संस्थाओं से मिले पुरस्कार महत्तवपूर्ण नहीं होते वो तो बस आप जैसे लोंगो को मोटिवेट करने के लिए होते हैं ताकि छिनताक्शी के दौए में भी कुछ अच्छा कर सको……..
sanyogita
April 28, 2011 at 3:50 am
प्रिय प्रो.राकेशजी,मैं भी एक पत्रकार हूं.मै ये जानती हूं कि पत्रकारिता धर्म क्या होता है और कैसे उसे निभाया जाता है। गुर्जर आंदोलन को मेरे मित्रों ने भी कवर किया है। इस बार कौनसी गोली चली..बताएं ज़रा..। दरअसल,लक्ष्मण राघव जैसे लोग,अपनी प्रसिद्धि के लिए ख़बरों की भयावहता को गढ़ते है.ताकि उन्हें तवज्जो मिले। एक बात और लक्ष्मण राघव क्या वहां अकेले थे.कैमेरामैन तो साथ था ही मगर असल गोलियां देखी है वहां के स्टि्गर यानि स्थानीय संवाददाता ने.जिसने ख़बरें भी पहुंचाई और ये भी ध्यान रखा कि लक्ष्मण जी मेहमान नवाज़ी में कोई खलल ना पड़े। महोदय,शब्दों की लफ्फाजी से गौरवगाथा बना लो लेकिन हक़ीकत हर अच्छा पत्रकार जानता है। उनका अपना ईटीवी ही लिख रहा है कि “ईटीवी को सकारात्मक योगदान के लिए मिला सम्मान”..”ईटीवी की ओर से लक्ष्मण राघव ने लिया सम्मान..” अब बताईए कौनसा पत्रकारिता का धर्म निभाया। किसी के पैरोकार बनने से पहले ये ध्यान रखिए कि आप किसकी पैरवी कर रहे है। पूरी विनम्रता के साथ आपसे निवेदन हैं कि तथ्य देखिए..
prof. rakesh
April 30, 2011 at 3:33 pm
संयोगिता जी, आपके द्वारा खुद को एक अच्छा पत्रकार कहने के लिए धन्यवाद, मैं चाहूँगा कि अगली बार कमेंट्स करते समय अप अपनी प्रशंसा में भी कुछ जरूर कहें. अब पहले तो मैं ये बता दूँ कि मैं लक्ष्मण राघव को टीवी से जानता हूँ…मैं वकील नहीं हूँ लेकिन मेरा दिमाग तर्क करने के बाद ही पैरवी करता है, आपने ख़बरों कि भयावहता गढ़ने का आरोप लगाया है और साथ में ये जोड़ा है कि कितनी गोलियां चली…..मुझे लगता है कि भयावहता gadhne वालों को सकारात्मक तो नहीं कहा जा सकता और purshkar poore aandolan के लिए diya gya था न कि लास्ट मोवेमेंट कि पत्रकारिता को….तथ्यों कि बात आप करना चाहें तो उस संस्था का सम्मान पत्र मैंने फसबूक पे देखा है उसमे एटीवी को पुरष्कार नहीं है बल्कि लक्षमण राघव को पुरष्कृत किया गया है …मैं इसका उत्तर देने के लिए जिम्मेदार नहीं हूँ कि आखिर ईटीवी ने खबर को इस तरह क्यूँ चलाया….आपको आपने मित्रो को सम्मान नहीं मिलने पर रंज हो सकता है और मैं ये बिलकुल नहीं मानता कि वंहा बाकि मीडिया बेवकूफ था, पर इतना जरूर है कि आपको भी मेरी तरह लक्ष्मण राघव कि रिपोर्ट्स जरूर ठीक लगी होंगी….यदि देखि गई होंगी…….अब बात स्थानीय reporter और kemramen की तो आप मुझे batao कि narega का पुरष्कार bharatsingh को ही kyon diya गया …kyon नहीं sabhi jilon se bulaye gye
sanyogita
May 4, 2011 at 3:26 am
prof. rakesh आप प्रोफेसर हैं..और ख़ुद कह रहे है कि राघव को टीवी पर देखा..बीकानेर की गलियों में घूमिए,पत्रकारिता में राघव जैसों का वजूद क्या है वो समझिए.ख़बरों के बदले कैसे नोट कमाए जाते है ये हूनर उन्हे आता है.कातिल के ख़ास शागिर्दों में से एक है वो.ज्यादा मत लिखवाईए,बस इतना जान लिज़िए कि आप के अलावा कोई सम्मानिय पत्रकार ना तो उन्हें पत्रकार मानता है और ना ही उस संस्था को..इसीलिए आप उन्हे बधाई दे सकते है..क्योंकि लेने वाला और पुरुस्कार देने वाले एक ही थाली के चट्टे बट्टे है.हालांकि वे खुद भी इसे अपना अहोभाग्य समझ रहे है। गंभीर पत्रकारों में ये गुण नहीं होता.जहां तक मेरा सवाल है या मेरे दोस्तो का सवाल है,ऐसे अहोभाग्य के मौक़े हम अपने एड़ी के नीचे रखते है.ताकि राघव जैसे अपनी किस्मत पर ग़ुमान कर सके। मेरे बारे में आपने जानना चाहा है,इसीलिए मुझे लगता है कि आपका ज्ञान यहीं तक है कि राघव के हिमायती है.पत्रकारों की असल और वाजिब नस्ल से आपका ताल्लुक नहीं है।
shaktiputra
May 19, 2011 at 9:16 am
sanyogitaji mujhe samjh mai nahi aa rha hai ki aapke pait mai dard kyu ho rha hai….bhai laxman did well we should congratulate him…humne bhi gurjar andolan mai unaki reporting dekhi hai..he is really a brave and great journalist..ek minute ke liye sochiye ki wha par laxman ki jagah par aapko bheja jaye phir usaki coverage dekhna..kisi ke achievement ko personaly prejiduce hokar dekhna thik nahi..rahi bat usake godfather ki to aapko bata du ki wo apane aap ko partap rao ji ka shishya mante hai ye aur bat hai ki aaj unake boss katial sab hai..lekin sanyogitaji aap jo pursakar pahrji lena daina likh rahi ho..hame to aap hi farzi nazar aati ho..rajasthan mai patrakarita hum bhi dus sal sai kar rahe hai..kabhi aapko tv par ya akhbar mai byline nahi dekha..phir farzi kaun huaa? aap jaise ptrakar hi hai jo system par likhane ke bajay acha kam karne wale apane hi jamat ke kisi bhai bande ko nishana banate hai aur puri jamat ko sharminda karte hai..akhiri nasihat barak obama ko mila noble bhi cancel kara dijiye..aapke alawa kisi bhi aur ko milane wala har purskar aapki nazar mai to farzi hi hai…bhagwan aapke jalte dil ko shanti de…hum aapke liye laxman ko bhi request karate hai ki aage sai koi purskar mile to pls. khud lane ki bajay es harishchandra ki baiti ko de daina..
prof. rakesh
May 19, 2011 at 1:43 pm
shakti putra ji in harishchandra ki beti ki nashl konsi hai
RR GROUP OF EDUCATION JAIPUR
July 31, 2011 at 8:39 am
very congratulation, keep it up.