अखबारों की उम्र 24 घंटे होती है. पर किताबें और उसमें लिखी बात टिकाऊ होती हैं. ये लंबे समय तक पढ़ी सुनी कही बताई जाती हैं. अखबार छापने वाले लोग अपने घराने और खुद से जुड़ी कहानियों-मिथों-गल्पों को अधिकृत रूप देने की एक नई कोशिश में लगे हैं. और हमेशा की तरह शुरुआत टाइम्स ग्रुप ने की है. टाइम्स आफ इंडिया वाले मालिकान अपने प्रोडक्ट और इससे जुड़े लोगों के इतिहास की कथाओं लिखवा रहे हैं.
पहले जैसा राजा रजवाड़े लिखवाते थे, उसी तरह अब लोग अपने अपने खास व प्रिय पात्रों से अपना इतिहास लिखवाते हैं. ‘बिहाइंड द टाइम्स’ को वैसे तो आप इतिहास नहीं कहेंगे लेकिन एक मीडिया घराने और उससे जुड़े बड़े पदों पर आसीन लोगों के बारे में काफी कुछ इसमें बताया कहा गया है. इस लिहाज से यह किताब टाइम्स ग्रुप की अंदरुनी बातों के बारे में टाइम्स ग्रुप की तरफ से प्रामाणिक दस्तावेज है. बची करकरिया द्वारा लिखित इस किताब में कुल 325 पेज हैं और इसका दाम 395 है. प्रकाशित किया है टाइम्स ग्रुप बुक्स ने.
उस कुछ अंशों को पढ़ते हैं जो टाइम्स ग्रुप से जुड़े कुछ खास लोगों से संबंधित है, क्लिक करें- समीर जैन, विनीत जैन, अन्य
इस किताब के बारे में बिजनेस स्टैंडर्ड में एक समीक्षा छपी है जिसे इस पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं- One side fits all











