राजदीप सरदेसाई की करतूत जगजाहिर करने वाली तहलका टीम को बधाई

नूतन ठाकुर: आशीष खेतान को सच लिखने और सिद्धार्थ गौतम को सच बोलने के लिए विशेष तौर पर बधाई : तहलका ने सचमुच देश की पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया. एक से बढ़कर एक बड़ी खबरें ब्रेक की. कैमरे के सामने नोटों की गड्डियां लहराते भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का चेहरा सभी को याद होगा.

मीडिया और दो आंदोलनों की दास्‍तान

मणिपुर वूमेन गन सर्वायवर्स नेटवर्क की संस्थापक बीनालक्ष्मी नेप्राम ने मुझसे अपनी सुपरिचित व्यग्रता के साथ पूछा : ‘आप इरोम शर्मिला के एक दशक से चल रहे अनशन का कवरेज उतनी ही मुस्तैदी से क्यों नहीं करते, जैसा आपने अन्ना हजारे के तेरह दिन के अनशन का किया था?’

राजदीप सरदेसाई ने लिखा अन्‍ना के नाम पत्र

सचमुच ये दौर ही ऐसा है कि आम आदमी इन दोहरे चरित्र वाले तथाकथित बुद्धिजीवी और बड़े लोगों की बात सुने तो बौखला जाए. अजब हिप्‍पोक्रेसी का दौर तो हैं ही जरूरी नैतिकता का भी पता नहीं कहां लोप हो गया है. हम सरे आम चोरी करते हैं और सबके सामने कहते हैं कि चोरी करना पाप है यानी थोड़ी सी लज्‍जा, शर्मा और हया इस पूंजीपति व्‍यवस्‍था में नहीं बची रह गई है.

टाइम्स वालों ने अपना अधिकृत इतिहास छपवाया

अखबारों की उम्र 24 घंटे होती है. पर किताबें और उसमें लिखी बात टिकाऊ होती हैं. ये लंबे समय तक पढ़ी सुनी कही बताई जाती हैं. अखबार छापने वाले लोग अपने घराने और खुद से जुड़ी कहानियों-मिथों-गल्पों को अधिकृत रूप देने की एक नई कोशिश में लगे हैं. और हमेशा की तरह शुरुआत टाइम्स ग्रुप ने की है. टाइम्स आफ इंडिया वाले मालिकान अपने प्रोडक्ट और इससे जुड़े लोगों के इतिहास की कथाओं लिखवा रहे हैं.

 

One side fits all

An authorised biography of the Times of India media group is revealing in spite of itself. The central message Bachi Karkaria seeks to deliver through her book on the inside story of the Times of India group is summed up quite succinctly at the end of one of its shorter chapters. This is the chapter she aptly calls “Fall of the Wall” and this is how it ends:

Samir Jain Vineet Jain RK Laxman Dilip Padgaonkar Girilal Jain Sham Lal Prem Shankar Jha JC Jain TN Ninan Jug Suraiya Swaminathan Aiyar Pritish Nandy Pradip Guha Rajdeep Sardesai

: On SAMIR JAIN, vice-chairman (VC) : On the international Response (advertising) conferences—holidays really—the participants not only wallowed in VC’s generosity, they also learnt about cost consciousness from him. Once Indira Deish [of Times Response], while taking her room key, instructed the receptionist to give her a wake up call, and send a pot of bed tea with it.