: सरकार उसकी रिपोर्ट मानने को बाध्य नहीं- अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल डॉ. अशोक निगम : लखनऊ के अधिवक्ता अशोक पांडे तथा सामजिक कार्यकर्त्री डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में दायर रिट याचिका संख्या 3556/ 2011(एमबी) में शनिवार (16/04/2011) में केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने एक बहुत महत्वपूर्ण सूचना दी.
भारत के अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल डॉ. अशोक निगम ने साफ़ कहा कि दिनांक 08/04/2011 द्वारा लोकपाल बिल हेतु अन्ना हजारे से जुडी ज्वायंट ड्राफ्टिंग कमिटी के लिए जारी की गयी अधिसूचना मात्र सलाहकारी है, जो सरकार को राय देने के लिए बनाई गयी है. इस अधिसूचना के आधार पर बनायी गयी कमिटी के रिपोर्ट के आधार पर केन्द्र सरकार अपने हिसाब से अंतिम निर्णय लेगी.
पांडे और डॉ. ठाकुर ने रिट याचिका में उच्च न्यायालय को भारत सरकार को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप इन ला मेकिंग (पीपीपीएल) के लिए नोटिफिकेशन जारी करने का निवेदन किया था और साथ ही इन दोनों ने इस हेतु एक मॉडल नोटिफिकेशन का प्रारूप भी प्रेषित किया था. यद्यपि इस रिट याचिका को जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस एससी चौरसिया की डबल बेंच ने खारिज कर दिया पर उन्होंने यह भी कहा- ‘ यद्यपि हम संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत इस तरह के आदेश निर्गत करने के हकदार नहीं हैं पर याचिकर्ता इस देश के नागरिक होने के नाते सरकार को इस सम्बन्ध में अपनी बात रख सकते हैं और जिन स्थानों पर वह सुधार चाहते हैं, उन सभी बिंदुओं पर सुधार की मांग कर सकते हैं.’
इसके अलावा उन्होंने कुछ अन्य महत्वपूर्ण बाते कहीं- ‘यह सही है कि न्यायालयों के हाथ बंधे हुए हैं पर इस लोकतांत्रिक प्रणाली में जनता के हाथ नहीं बंधे हुए. अनुच्छेद 19 के अंतर्गत न्यायिक व्यवस्था के अधीन उन्हें अपनी बात कहने और अपनी मांग रखने का पूरा-पूरा अधिकार है.’ उन्होंने यह भी कहा-‘ इसके साथ जनता को यह भी अधिकार है अपने लिए ऐसे प्रतिनिधि चुनें जो पूरी तरह से साफ़-सुथरे चरित्र के हों.’ अशोक पांडे और डॉ. नूतन ठाकुर अब इस निर्णय के आलोक में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप इन ला मेकिंग (पीपीपीएल) के अपने मॉडल नोटिफिकेशन को इस निर्णय की प्रति के साथ केंद्र सरकार को प्रेषित कर रहे हैं.












Indian citizen
April 17, 2011 at 6:31 pm
ये तो पहले से ही तय होना चाहिये था. और वैसे भी समितियों की रिपोर्ट मानना, न मानना सरकार का विशेषधिकार होता है.