: सम्माननीय ‘तहलका’ के असम्मानीय कर्ताधर्ता! : सुपर फिक्सर केडी सिंह आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग के निशाने पर : मूर्ति भंजन का दौर जारी है. अन्ना के साथ के कथित ईमानदार लोगों की चड्ढी-धोती खुलते-खुलते अब मीडिया के उन लोगों की भी कहानी सामने लगी है जो ईमानदारी के प्रतीक माने जाते हैं. जाने क्या पड़ी थी तरुण तेजपाल को कि अच्छी खासी ब्रांड वैल्यू वाले तहलका को चोरों-उचक्कों के हवाले कर दिया.
हवाले करना शब्द इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा लेकिन इतना तो कर ही दिया कि अपने पवित्र व सम्माननीय ब्रांड से अपवित्र और असम्माननीय लोगों को जोड़ दिया. और इन अपवित्र लोगों की जहां जहां चर्चा हो रही है, वहां वहां तहलका की भी चर्चा हो रही है. काले कारनामों के लिए कुख्यात केडी सिंह और तरुण तेजपाल के रिश्ते को लेकर पिछले दिनों खबर भड़ास4मीडिया पर छपी थी. कुछ लोगों ने ऐसे बदनाम आदमी से साथ-संबंध रखने पर तरुण तेजपाल को भला-बुरा भी कहा. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. कुछ और बुरे आदमियों के तहलका से रिश्ते पता चले हैं.
पहले बात केडी सिंह की. तहलका पत्रिका के विवादित प्रमोटर केडी सिंह और इनकी बंद हो चुकी फाइनेंशियल वर्ल्ड अखबार की परियोजना एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में है. केडी सिंह, जो पहले से ही पैसा दे कर राज्य सभा का सीट खरीदने के आरोपी हैं और जिन्हें हाल में ही पिछले महीने दिल्ली एअरपोर्ट पर सत्तावन लाख रुपये के साथ पकड़ा गया था, अब इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग के निशाने पर भी हैं.
कारण ये हैं- केडी सिंह और उनकी एल्केमिस्ट कंपनी ने संभवतः पांच कंपनियों, अशर अग्रो, सेल मैन्युफैक्चारिंग, धनुष टेक, पिरामिड साइमिरा और रिसर्जेंस माइंस के शेयर कीमतों को गलत लाभ के लिए कृत्रिम ढंग से ऊँचा उठाने में योगदान दिया. और, पाबंदी झेल रहे स्टाक मार्केट दलाल निर्मल कोटेचा के माध्यम से विदेश पूँजी निवेशक मावी तथा सोमरसेट द्वारा अल्केमिस्ट के शेयर खरीदा जाना. इसको लेकर इंडिया टुडे में एक स्टोरी प्रकाशित हुई है. इसे तहलका के पूर्व बिजनेस एडिटर शांतनु गुहा रे ने लिखा है. स्टोरी में कहा गया है कि स्टॉक मार्केट की नियंत्रक संस्था सेबी को शेयर कीमतों में बढोत्तरी की जानकारी है और वह इस बात की भी तहकीकात कर रही है कि केडी सिंह के दो कंपनियों एल्केमिस्ट लिमिटेड और एल्केमिस्ट रिएल्टी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को अपने अकाउंट के विषय में दिए जाने वाले अनिवार्य वार्षिक तथा त्रैमासिक विवरणिका क्यों नहीं प्रस्तुत किये.
उधर, स्टाक मार्केट दलाल निर्मल कोटेचा को 2009 में पिरामिड साइमिरा से जुड़े एक फोर्जरी स्कैम में उनकी भूमिका के सामने आने के बाद बैन किया गया था. महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इसी स्कैम में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के इकोनोमिक्स टाइम्स अखबार के सहायक एडिटर राजेश उन्नीकृष्णन तथा टाइम्स समूह के साथ ज्वायंट वेंचर में लगे एक पीआर फर्म को भी बैन किया गया था. शंकर शर्मा, जो पूर्व में तहलका के प्रमोटर रह चुके हैं, भी इसी प्रकार के सेबी के मामले में फंस चुके हैं और उन पर मार्केट से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे थे. उन पर यह आरोप था कि उन्हें तहलका के स्टिंग ऑपरेशन ऑपरेशन वेस्ट एंड की पूर्व से ही अंदरूनी जानकारी थी जिसमे तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण कैमरे के सामने पैसा लेते हुए पकडे गए थे. माना जाता है कि शंकर शर्मा ने इस अंदरूनी जानकारी का इस्तेमाल शेयर कीमतों को बढ़ा कर गलत लाभ कमाने में किया. तो क्या तहलका ने जो स्टिंग किया था, वह एक बड़े खेल-तमाशे का पार्ट था जिसमें कुछ लोग शेयर मार्केट से लाभ कमाने में लगे थे. तहलका के प्रमोटर रह चुके शंकर शर्मा की कहानी तो यही कहती है.
यशवंत की रिपोर्ट












abhishek purohit
April 17, 2011 at 4:39 pm
ये तरुण तेजपाल कब से सम्मान्निय हो गया ??पत्र्कार खुद को ही सम्मान्निय कहना शरु कर देते है क्या??
Indian citizen
April 17, 2011 at 6:25 pm
हर बड़े के पीछे कोई न कोई होता जरूर है.
deepak khokhar, ROHTAK
April 18, 2011 at 6:28 am
AB KIS PAR VISHWASH KAREN YASHWANH BHAI
Akhilesh chandra
April 21, 2011 at 8:40 am
yaswant ji aye se kuch log Lucknow me bhi hai