: पटना कार्यालय में बैठे प्रभात खबर के अतिथि संपादक : बॉलीवुड स्टार अभिषेक बच्चन कल प्रभात खबर के अतिथि संपादक थे. वे रविवार को प्रभात खबर के पटना कार्यालय में अतिथि संपादक के रूप में बैठे. प्रभात खबर की टीम के साथ कई मुद्दों और खबरों पर चर्चा की. अखबार छपने की प्रक्रिया को समझा. उन्होंने अतिथि संपादक के रूप में युवाओं की तारीफ की. युवाओं को भारत का भविष्य बताया. प्रभात खबर में अतिथि संपादक के रूप प्रकाशित लेख.
बेहतर भविष्य के शिल्पी हैं युवा : अभिषेक बच्चन
आज के युवाओं से बुजुर्ग या अधेड़ उम्र के बहुतेरे लोग खासे नाराज रहते हैं. वे उन्हें मतलबी मानते हैं, जो बस खाने-पीने,मौज-मस्ती में डूबा है. उसे अपने समाज व देश की चिंता नहीं है. वे सौरभ गांगुली या धौनी को नहीं देख पाते, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की परिभाषा बदल दी.
वे मुजफ्फरपुर के सुधीर के उस जुनून को भी नहीं देख पाते, जो मैच देखने साइकिल से बांग्लादेश पहुंच जाता है. सिर्फ क्रिकेट ही क्यों, आज का युवा शिक्षा, उद्यमिता, कृषि, व्यवसाय-सभी क्षेत्रों में नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. यही युवा राष्ट्रीय चुनौतियों का भी शानदार ढंग से मुकाबला कर रहा है. पिछले दिनों भ्रष्टाचार तेजी से फैला. इसने संसद सहित देश की सभी प्रमुख संस्थाओं की प्रतिष्ठा खतरे में डाल दी. इसके बाद जो हुआ, उसे पूरी दुनिया ने देखा.
अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की व पूरे देश के युवा उनके पीछे चल दिये. केंद्र सरकार ने समय रहते अन्ना की मांग मंजूर कर ली. जो काम 40 वर्षो से रुका था, वह आंधी की तरह उठी युवा शक्ति के कारण सिर्फ चार दिनों में हो गया.
अब लोकपाल बिल दो महीने बाद ही संसद में पेश होगा. यह बात भी तय है कि सिर्फ लोकपाल बिल आने से ही भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो जायेगा, बल्कि इसके लिए नागरिक समाज को सक्रियता दिखानी होगी. यहां भी निराश होने जैसी कोई बात नहीं है. सिटीजन जर्नलिस्ट अवार्ड वितरण के दौरान मैं मंच पर था. मैंने देखा, किस तरह लोग सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल कर रहे थे. गांवों व छोटे शहरों के लोग असाधारण साहस का परिचय देते हुए सिस्टम को चुनौती दे रहे थे.
एक लड़की ने आरटीआइ के जरिये पूछा था कि उसके स्कूल के बगल में कूड़ा घर क्यों बना दिया गया है. भ्रष्टाचार ही नहीं, देश के हर सवाल पर उसकी नजर है. सवालों को हल करने के लिए उसके पास अपनी दृष्टि है. वह बेहतर समाज, खुशहाल राष्ट्र व विश्व बंधुत्व के लिए समर्पित है.
अगली बार ऐश के साथ आऊंगा
बॉलीवुड स्टार व युवा आइकॉन अभिषेक बच्चन रविवार को नये रूप में दिखे. वह प्रभात खबर, पटना के दफ्तर में अतिथि संपादक के बतौर बैठे. प्रभात खबर की टीम के साथ सभी खबरों पर चर्चा की.
उन्होंने नासा से जुड़ी खबर में विशेष रुचि दिखायी. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रभात खबर की अन्य यूनिटों के साथ भी खबरों पर चर्चा की. बिहार में आये बदलाव को लेकर खासे उत्साहित दिखे. उन्होंने वादा किया कि अगली बार पूरे परिवार के साथ बिहार आऊंगा. साभार प्रभात खबर












sikanderhayat
April 18, 2011 at 5:41 am
ekdum bakvaas ye abvishak jese yuva to nakshe me bihar kaha ye bi nahi jante honge hindi ki to inke jivan me koi jagah nahi ha parbhat khabar or harivansh k bare me inhe kuch bi nahi pata hoga criket khiladeyo ko desh or deshbhakti ya vikas ka paryay batana to khoon khola deta ha
jaatak
April 18, 2011 at 9:00 am
दुखद. बहुतै दुखद. इ का करे हरिबंस जी, अभिसेकवा को गेस्ट एडिटर बना दिए. अउर इ अभिसेकवा भी परबचन देने लगा. ऊ भी जुवा लोगन को. हम जैसन बांके ज़ुवाओ को. लानत है. इ पीत नाए मट्टी-पलीत पतरकारिता है. उम्मीद नाए हति हरिबंस बाबू से अइसन बचकाना हरकत की.
बताइए कहाँ बात अजीत भट्टाचार्य जी की, और कहाँ ये अभिषेक (बच्चन) रॉय. ये तो स्वयं अधूरे व्यक्तिक्त्व का, मानसिक रूप से अपंग व्यक्ति है. ये तो बाप और बीवी की बैसाखी के बिना चल ही नहीं सकता. अधम. अधमाधम. इसकी नज़र में युवा कौन हैं, वो जो उस लफंडरी के खेल ‘क्रिकेट’ के सरताज हों.
हरिबंस जी, अपनी तो आदत है ना बुरा देखो ना बुरा कहो ना सुनो. जाकी रही भावना जैसी……
वैसे इक बात बतावें कहीं इ गेस्ट एडिटरशिप प्रायोजित तो नहीं होती………ना ना मैं तो यूं ही कह रहा था…..वो इसकी एक फिलिम भी तो आने वाली है, ऐसे समय पे ये लोग बहुत ड्रामे बाज़ी करते है ना…….
खैर, भट्टाचार्य जी पे अपने जो लिखा वो अच्छा था. पर “GRASSROOTS” का ज़िक्र नहीं हुआ…वो भी एक अच्छा प्रयास था. परनाम.