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हाय रे यूपी! भ्रष्‍टाचार की जानकारी मांगी तो दलित उत्‍पीड़न में फंसा देंगे अधिकारी

उत्‍तर प्रदेश में अब अधिकारी अपने गलत-सही कार्यों पर पर्दा डालने के लिए लोगों को नए तरीकों से डराना-धमकाना भी शुरू कर दिया है. ताजा मामला है गाजीपुर जिले का. जिला पंचायत सदस्‍य बृज भूषण दुबे द्वारा लोकवाणी के माध्‍यम से मांगी गई जानकारी पर अपर मुख्‍य अधिकारी इतना भड़के कि उन्‍होंने सूचना मांगने वाले को ही पत्र लिखकर हरिजन उत्‍पीड़न के तहत मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दे डाली. जबकि सूचना पत्र में कहीं भी जाति या धर्म किसी प्रकार का उल्‍लेख नहीं किया गया था.

उत्‍तर प्रदेश में अब अधिकारी अपने गलत-सही कार्यों पर पर्दा डालने के लिए लोगों को नए तरीकों से डराना-धमकाना भी शुरू कर दिया है. ताजा मामला है गाजीपुर जिले का. जिला पंचायत सदस्‍य बृज भूषण दुबे द्वारा लोकवाणी के माध्‍यम से मांगी गई जानकारी पर अपर मुख्‍य अधिकारी इतना भड़के कि उन्‍होंने सूचना मांगने वाले को ही पत्र लिखकर हरिजन उत्‍पीड़न के तहत मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दे डाली. जबकि सूचना पत्र में कहीं भी जाति या धर्म किसी प्रकार का उल्‍लेख नहीं किया गया था.

बीते त्रिस्‍तरीय पंचायत चुनावों के दौरान प्रत्‍याशियों को जिला पंचायत विभाग के द्वारा अदेय प्रमाण पत्र लेना पड़ता था. जिसके लिए प्रति व्‍यक्ति 200 रुपये का शुल्‍क रखा गया था. इस दौरान पूरे गाजीपुर जनपद से 23477 लोगों ने अदेय प्रमाण पत्र बनवाया. जिसके मद में 4695200 रुपये का आय हुआ. इसी के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता और जिला पंचायत सदस्‍य बृज भूषण दुबे ने लोकवाणी के माध्‍यम से जानकारी मांगी थी. उन्‍होंने अपने पत्र में पूछा था कि यह शुल्‍क किस आदेश के तहत या निर्वाचन आयोग के किस निर्देश के तहत बढ़ाया गया था.  या फिर पूर्व के सदन में सदस्‍यों के बहुमत के आधार पर बढ़ाया गया था?

उन्‍होंने जिलाधिकारी से भी इस पूरे प्रकरण की जांच कराकर आवश्‍यक तथा उचित कार्रवाई करने की मांग की थी. साथ उन्‍होंने इस मामले में दोषी व्‍यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. इस लोकवाणी को पढ़ने के बाद अपर मुख्‍य अधिकारी उज्‍ज्‍वल अंबेश इतने नाराज हुए कि उन्‍होंने बृज भूषण दुबे को एक तरह से हरिजन उत्‍पीड़न में फंसाने की धमकी देते हुए पत्र लिख डाला. इस मांगी गई जानकारी को उन्‍होंने चरित्र हनन तथा इसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने का कृत्‍य बता डाला. साथ ही उन्‍होंने आगे से ऐसे अनर्गल लेखन पर सयंम बरतने की सलाह भी दे दी.

इस प्रकरण से आसानी से समझा जा सकता है कि उत्‍तर प्रदेश में सच का गला किस प्रकार से घोटा जा रहा है. संबं‍धित व्‍यक्ति को मांगी गई जानकारी देने की बजाय उल्‍टे दलित उत्‍पीड़न में फंसाने की धमकी दी जा रही है. प्रदेश में भ्रष्‍टाचार तो है ही अधिकारी भी अब पूरी तरह निरंकुश होकर काम करने लगे हैं. आए दिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के कुकृत्‍यों की चर्चा होती ही रहती है. यानी माया राज में आम आदमी भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आवाज उठाने में असमर्थ हो गया है.

आवेदन

जवाब

गाजीपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. SANJAY SHARMA

    April 20, 2011 at 6:52 am

    भाई इस पत्र की प्रति लगा कर मुख्यमंत्री को शिकायत करे. फिर उनसे पूछे कि आपके पत्र पर क्या कार्यवाही हुई. कुछ न हो तो मुझे 9452095094 पर अवगत कराये. मैं खबर छापता हूँ . डरे न इन बेईमान अफसरों से.

  2. Indian citizen

    April 20, 2011 at 2:44 pm

    क्या बात है, सूचना देने के स्थान पर धमकी….

  3. Dr.Ajeet Tomar

    April 20, 2011 at 5:04 pm

    इस पत्र की भाषा पढकर बडा ही रोष पैदा हुआ है जब एक जिला पंचायत सदस्य (जोकि क्षेत्र का सम्मानित व्यक्ति होता है) को जिला पंचायत का ही एक अपर मुख्य अधिकारी इस तरह की अपमानजनक भाषा का पत्र लिख सकता है तो कायदे से तो उस जिला पंचायत सदस्य और अध्यक्ष दोनो को ही अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए…क्योंकि इस पत्र के पढने के बाद उनका अपने जनपद में क्या वजूद है इसका साफ पता चलता है, हद हो गई ये तो माया के जंगलराज़ की वैसे तो सुना ये जाता है कि माया के राज़ मे अफसरशाही खौफ मे जीती है लेकिन यहाँ तो उल्टा ही मामला बन पडा है एक निर्वाचित जन प्रतिनिधि को ही उसी की संस्था के एक अधिकारी के द्वारा धमकाया जा रहा है…।
    इस अधिकारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कारवाही की जानी चाहिए ताकि सुधारात्मक प्रशासन का ढिंढोरा पीटने वाले ये समझ सके कि एक चयनित(अधिकारी) और निर्वाचित(जिला पंचायत सदस्य) मे गरिमा के मामले में किसको वरिष्ठ समझा जाता है? इसका सबक भी सिखाना जरुरी हो गया है।
    यूपी मे दलित कानून की आड मे लम्बे समय से भले लोगो का शोषण हो रहा है इसमे कोई संदेह नही हैं…मै इसकी भर्त्सना करता हूँ।

    डॉ.अजीत तोमर

  4. pappu pandit

    April 21, 2011 at 3:28 am

    समाचार पढ़ कर दुखद आश्चर्य हुआ , जन सेवक अपर मुख्‍य अधिकारी उज्‍ज्‍वल अंबेश जी, आप के उठाये गये कदम ने सरकारी सेवा के दावो पर पड़े कई पर्दों को एक ही झोंके में हटा दिया है | सूचना मांगने की हिम्मत जुटाने वाले दुबे जी के साथ ही उन सब पर दलित उत्‍पीड़न की कार्रवाई आप को करनी चाहिए जिसने इस कानून का प्रस्ताव रक्खा और बनाया |जानकारी के लिए बता दे इसके लिए केंद्र की कांग्रेस के साथ प्रदेश की मायावती सरकार भी दोषी है | आप इन सब पर कठोर कार्रवाई करे , आखिर एक दलित का सवाल है और आप एक दलित जो ठहरे | आप तो सरकार, संविधान व भारतीय कानून के ऊपर की चीज है | इन सब पर कार्रवाई करने में हिचकिचाहट मत बरतियेगा आप ने तो जनता को मिले अधिकार की बात करने वाले को धमकी देकर जनता के साथ ही नेताओं के मुंह पर करार तमाचा जड़ दिया है …………| भगवान आप को सदबुद्धि प्रदान करे | पप्पू पंडित

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