आज नई पीढ़ी के पत्रकार संघर्ष की रवायत को भूल चुके हैं. एक समय पत्रकारों के आंदोलन से सरकार हिल गई थी. जंतर-मंतर पर तिल रखने की जगह नहीं रहती थी. पत्रकारों ने शोषण और दमन के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना था. आज की पीढी को भी श्रमिकों की एकता की अहमियत का पता होना चाहिए. हमर पत्रकार एक होकर ही महफूज हो सकते हैं. ये बातें वरिष्ठ पत्रकार एएन बल ने शनिवार को दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के कार्यालय में मई दिवस और डीयूजे की स्थापना की पूर्व संध्या पर हुई बैठक में कही.
इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के पूर्व सचिव मदन सिंह ने मई दिवस के मौके पर पत्रकार बिरादरी से अपील की कि वे सोमवार को बड़ी संख्या में दस जनपथ पहुंचे. वेज बोर्ड के नोटिफिकेशन में हो रही देरी के खिलाफ सोमवार को पत्रकारों से दस जनपथ का घेराव करने की अपील की गई है.
डीयूजे के 62वीं सालगिरह के मौके पर महासचिव शैलेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि पत्रकारों को अपनी सांगठनिक एकता दिखाते हुए दस जनपथ से अपने अधिकारों को मांगने आना चाहिए. डीयूजे की अध्यक्ष सुजाता मधोक ने भी मई दिवस और पत्रकारों के संघर्षों को याद करते हुए सोमवार की रैली को यादगार बनाने की अपील की है. साभार : जनसत्ता











