सड़क हादसे में दो पत्रकारों की मौत

लीबिया के सिर्ते शहर के तटीय इलाके में एक सड़क दुर्घटना में दो जापानी पत्रकारों की मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल हो गया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक शुक्रवार को हुए इस हादसे में एक अन्य पत्रकार घायल हो गए। तीनों पत्रकार जापान के आसाही सिमबून समाचार पत्र के कर्मचारी थे।

सूत्रों के मुताबिक पीड़ितों में शामिल एक पत्रकार मिस्र मूल की एक महिला थी, जो सम्भवतः स्थानीय कर्मचारी थी और दो अन्य लोग जापानी मूल के थे। साभार : अमर उजाला

राहुल गांधी के अमेठी दौरे के दौरान पत्रकारों पर हमला, एक घायल

राहुल गांधी का अमेठी दौरा कवर करना तीन न्‍यूज चैनलों के पत्रकारों को महंगा पड़ते-पड़ते बचा. रायबरेली से आजतक के पत्रकार शैलेंद्र सिंह, आईबीएन7 के महेंद्र प्रताप सिंह, इंडिया न्‍यूज के शिव प्रसाद यादव हुडंई आई टेन कार से राहुल का दौरा कवर करने के लिए अमेठी गए हुए थे. राहुल गांधी जब फुरसतगंज नहर कोठी के पास पहुंचे तो काफी संख्‍या में ग्रामीणों ने उनके काफिले को रोक लिया तथा अपनी परेशानी बताई.

ग्रामीणों की परेशानी सुनने के बाद राहुल आश्‍वासन देकर निकल गए. ये तीनों पत्रकार वहीं पर रुककर ग्रामीणों की बाइट ली तथा विजुअल बनाया. इसके बाद जब ये लोग जाने लगे तभी इनकी कार से एक बुजुर्ग साइकिल सवार को धक्‍का लग गया. हालांकि उन्‍हें ज्‍यादा चोटें नहीं आईं परन्‍तु ग्रामीणों ने इसकी गाड़ी घेर ली तथा अभद्रता करने लगे. पत्रकारों ने विरोध किया तो विवाद बढ़ गया. तब तक काफी संख्‍या में गांव वाले इकट्ठा हो गए तथा इन लोगों को मारने के लिए घेर लिया.

माहौल खराब होता देख ये लोग किसी तरह गाड़ी समेत वहां से निकले. इतने में गांव वालों ने उनकी गाड़ी पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे गाड़ी चला रहे आजतक के पत्रकार शैलेंद्र सिंह को पत्‍थर लग गया तथा उनका सिर फट गया. इन लोगों की कार भी क्षतिग्रस्‍त हो गई. यह कार आईबीएन7 के रिपोर्टर महेंद्र प्रताप सिंह की बताई जा रही है. गांव वालों ने उन्‍हें काफी दूर तक दौड़ाया. परन्‍तु किसी तरह ये लोग बचकर निकलने में कामयाब रहे. इन लोगों ने किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कराया है.

इस संदर्भ में जब महेंद्र प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि ये मामला कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी का था. हमलोग राहुल के काफिले के पीछे-पीछे चल रहे थे. कांग्रेसियों का एक गुट अन्‍ना के आड़ में पुराने लोगों का टिकट काटे जाने की मांग करने के लिए जगह-जगह अपने लोगों को फिट कर रखा था, जो राहुल से स्‍वच्‍छ छवि के प्रत्‍याशी को टिकट देने की मांग कर रहे थे. इन्‍हीं लोगों की भीड़ एक जगह इकट्ठी थी. राहुल गांधी का काफिला यहां नहीं रूका, पर जब तक हमलोगों की गाड़ी पहुंचती भीड़ का एक हिस्‍सा सड़क पर आ गया. इसी बीच किसी की साइकिल में हमारी कार हल्‍की टच हो गई. इन लोगों ने हमें भी राहुल गांधी के साथ का समझ लिया. इसी बीच किसी ने ड्राइविंग सीट वाले तरफ से पत्‍थर चला दिया, जिससे शैलेंद्र को चोट आ गई. इसके बाद किसी ने कोई बदतमीजी नहीं की. बाद में राहुल गांधी के साथ चल रही एम्‍बुलेंस के डाक्‍टरों ने शैलेंद्र को पट्टी बांधा. गाड़ी को ज्‍यादा नुकसान नहीं हुआ, इसलिए हमने एफआईआर दर्ज कराना भी उचित नहीं समझा.

पुलिस-प्रशासनिक उत्‍पीड़न के खिलाफ गाजीपुर के पत्रकारों ने मोर्चा खोला

: जिला मुख्‍यालय पर बेमियादी धरना-प्रदर्शन शुरू : गाजीपुर जनपद में प्रशासन द्वारा पत्रकारों का लगातार उत्पीड़न किये जाने की घटनाओं से क्षुब्ध होकर जनपद के समस्त पत्रकारों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय के सरजू पाण्डेय पार्क में अपना बेमियादी धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। बसपा सरकार में प्रशासनिक स्तर पर हो रहे लापरवाही का इससे बड़ा मिसाल क्‍या होगा कि स्वयं लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को अपनी मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार करना पड़ रहा है।

पत्रकारों के धरना-प्रदर्शन पर बैठ जाने के चलते तमाम अखबारों व इलेक्ट्रानिक चैनलों के दफ्तर खाली पडे़ रहे। पत्रकारों के धरना प्रदर्शन को देखकर आम जनता में यह चर्चा जोरों पर रही कि इस शासन में जब पत्रकारों का ही यह हाल हो गया है कि उन्‍हें भी धरना-प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार करना पड़ रहा है तो अब आम जनता अपनी मांगों को मनवाने के लिए कौन सा रास्‍ता अपनाएगी।

गाजीपुर पत्रकार एसोसियेशन के तत्वाधान में धरना दे रहे पत्रकारों ने जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली की तीव्र भर्त्‍सना करते हुए कहा कि वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार गुलाब राय पर हुये शर्मनाक मामले में पुलिस सात माह बाद अज्ञात आरोपियों को भी गिरफ्तार नहीं कर पायी और न लूटे गये कैमरे को बरामद कर पाई। पत्रकार अनिल उपाध्याय के जमीन सम्बन्धी विवाद में न्यायालय द्वारा बिना जमानती वारण्ट जारी होने के बावजूद नामजद आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही है। पत्रकार अनिल कश्यप के मुहल्ला झण्डातर स्थित दुकान सम्बन्धी विवाद में पुलिस द्वारा एकतरफा करते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवा करने की बजाय उल्टे पत्रकार अनिल कश्यप का ही उत्पीड़न किया जा रहा है। ईटीवी के छायाकार संजीव की गत 9 अक्टूबर को हीरो होण्डा मोटरसाइकिल रेलवे स्टेशन से गायब हो गयी, जिसकी बरामदगी पुलिस आजतक नहीं कर पायी।

वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पत्रकार व प्रशासन के बीच सामन्जस्य स्थापित करने हेतु शासन के निर्देशानुसार स्थायी पत्रकार समिति का जिले में गठन किया जाय। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि इन मांग को यथाशीघ्र पूरा नहीं किया गया तो आम नागरिकों को भी इस आन्दोलन से जोड़ा जायेगा और जब जनपद के पत्रकार, अधिवक्ता, बुद्धिजीवी, सामाजिक, राजनैतिक कार्यकर्ता, छात्र व अन्य संगठन जुड़ जायेंगे तो आन्दोलन की धार को रोकना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जायेगा।

धरने में वरिष्‍ठ पत्रकार कार्तिक कुमार चटर्जी, सत्येन्द्र नाथ शुक्ला, अशोक कुमार श्रीवास्तव, लोकनाथ तिवारी, अभय नरायण राय, अनिल निर्मल, राधेश्याम यादव, रामअवध यादव, आदित्य नरायण सिंह, जयशंकर राय, दयाशंकर राय, पंकज पाण्डेय, अनिल कुमार उपाध्याय, रितेश पाण्डेय, बालाजी पाण्डेय, आशीष कुमार राय, यशवन्त सिंह, दीपक दयाल पाण्डेय, बृजबिहारी पाण्डेय, डा. एके राय, विजयशंकर तिवारी, अनिल कुमार, राजकमल, अभिनव चतुर्वेदी, विनोद पाण्डेय, पदमाकर पाण्डेय, रमाकान्त पाण्डेय, आरसी खरवार, हरिनरायण, केके चटर्जी, नरेन्द्र पाण्डेय, राजेश खरवार, वेदप्रकाश शर्मा, सूर्यवीर सिंह, विनय कुमार सिंह, शशिकान्त यादव, राजेश दूबे, श्याम सिन्हा, आशुतोष त्रिपाठी, कृपाशंकर राय, अजय शंकर तिवारी, फुलचन्द भारती, अनिल कुमार अनिलाभ, अनन्त प्रकाश वर्मा, पं. कृष्ण बिहारी द्विवेदी, नवीन कुमार श्रीवास्तव, अविनाश प्रधान एडवोकेट, शशिकान्त सिंह, ललित मोहन, तुषार सिंह, विनोद सिंह, चन्द्र कुमार तिवारी आदि लोग उपस्थित रहे। धरने की अध्यक्षता बीके राय एवं संचालन विजय कुमार मधुरेश ने किया।

दस साल बाद हुई पत्रकारों की जीत, वेतन बोर्ड होगा लागू

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पिछले 10 साल से वेतन बोर्ड को लेकर जारी कानूनी जंग को पत्रकारों ने जीत लिया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सातवां पत्रकार वेतन बोर्ड लागू करने का आदेश दे दिया। कोर्ट ने आदेश देकर कहा कि इस बोर्ड के नियमों को जल्द से जल्द लागू किया जाए। इसके अलावा कोर्ट ने सभी अखबार मालिकों पर जुर्माना भी लगाया।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश इफ्तिखार चौधरी ने वेतन बोर्ड को यथावत लागू करने तथा ऑल पाकिस्तान न्यूज पेपर्स सोसायटी और पाकिस्तान हेरल्ड पब्लिकेशन की याचिकाओं को रद्द करते हुए वेतन बोर्ड को यथावत लागू करने का आदेश दिया।

उन्होंने याचिकाकर्ताओं को अदालत का समय बर्बाद करने के लिए जुर्माना भरने का भी आदेश दिया है। मुख्य न्यायधीश ने गत 29 सितम्बर को समाचारपत्र मालिकों के वकीलों द्वारा दी गई दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। समाचारपत्र मालिकों ने सिंध उच्च न्यायलय के गत 31 मई को सातवें वेतन बोर्ड पर दिए गए फैसले को चुनौती दी थी। पाकिस्तान फेडरेशन आफ यूनियन जर्नलिस्ट ने 10 वर्ष कानूनी जंग लड़ने के बाद इस मामले में जीत हासिल की है। साभार : पत्रिका

सुप्रीम कोर्ट ने अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज के खिलाफ दिल्‍ली सरकार की याचिका खारिज की

: आपराधिक मामला शुरू करने के लिए मांगी गई थी अनुमति : सुप्रीम कोर्ट ने संसद में सवाल पूछने के लिए रुपये लेते 11 सांसदों को कैमरे में कैद करने वाले पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू करने की अनमुति संबंधी याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई की खंडपीठ ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने गत वर्ष 24 सितंबर को अपने आदेश में स्टिंग ऑपरेशन करने वाले कोबरा पोस्ट के पत्रकारों अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज के खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू करने की राज्य सरकार को इजाजत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि दोनों पत्रकारों ने भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन किया था, जो किसी भी तरीके से अनुचित नहीं था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

राज्य सरकार की दलील थी कि पैसे देकर सवाल पूछने के लिए सांसदों को प्रेरित करके दोनों पत्रकारों ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की सभी दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को जायज ठहराया और राज्य सरकार की याचिका निरस्त कर दी। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2005 में दोनों पत्रकारों ने संसद में सवाल पूछने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के 11 सांसदों को पैसे लेते हुए कैमरे में कैद किया था, जिसके बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था। साभार : एजेंसी

पत्रकारों को पैसा बांटे जाने के मामले में भाजपा मीडिया प्रभारी निलंबित

भ्रष्टाचार के खिलाफ जन जागरण पर निकले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से मीडिया में पैसा बांटने की घटना से बेहद खफा और गुस्से में हैं। पैसे बांटे जाने की घटना एक बड़ा बवाल बन गया है। इससे असहज आडवाणी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा को मामले की जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।

उनके गुस्से का कारण है कि मध्य प्रदेश में यात्रा के दौरान भारी जन समर्थन मिलने के बावजूद पत्रकारों को पैसे बांटे जाने की इस घटना ने सारे उत्साह पर पानी फेर दिया है। आडवाणी के गुस्‍से के बाद आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पार्टी ने सतना के जिला मीडिया प्रभारी श्‍यामलाल गुप्‍ता को निलंबित कर दिया गया है। इस पूरे मामले की जांच प्रदेश अध्‍यक्ष प्रभात झा खुद कर रहे हैं।

इलाहाबाद में चलती बस से पत्रकार का सामान गायब

: बरेली में भी पत्रकार के घर हुए चोरी का खुलासा करने में असफल रही पुलिस : इलाहाबाद । चलती बस से लाखों का सामान गायब हो जाए और फिर भी पुलिस हरकत में न आये। इस तरह की घटनाएं अब आम हो गई हैं। एक घटना कर्वी से इलाहाबाद आने वाली एक प्राइवेट बस में घट गई और लाखों का सामान चोरी हो गया। पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पूछताछ करके रह गई। पीडि़त पत्रकार का शक है कि प्राइवेट बस के मालिकों के दबाव पर पुलिस कार्रवाई ही नहीं करती।

दिल्ली से प्रकाशित एक दैनिक अखबार के संपादक आलोक पांडेय तीन अक्टूबर को चित्रकूट जिले के मऊ से अपनी पत्नी के साथ प्राइवेट बस से लेकर इलाहाबाद आ रहे थे। मना करने के बावजूद बस के क्लीनर ने सुरक्षा की गारंटी देने के साथ ही उनका सारा सामान डिग्गी में रख दिया। रामबाग स्थित बस स्टैंड पर बस रुकी तो क्लीनर गायब हो गया। दस मिनट बाद आया और फिर आलोक पांडेय को अपना सामान मिल पाया। किराये की जीप लेकर वह प्रतापगढ़ जिले के कुंडा तहसील स्थित अपने गांव हथिगंवा चले गए। घर जाने पर देखा तो होश उड़ गए। सूटकेस के तीनों लॉक टूटे हुए थे और उसमें रखा चार तोला सोने के आभूषण, 33 तोला चांदी के जेवरात, एक कोडक कैमरा और नगद 12 हजार रुपये गायब थे। इसकी शिकायत तत्काल एसपी चित्रकूट से की गई। उनके निर्देश पर कोतवाली कर्वी ने संबंधित बस के चालक, परिचालक और खलासी पकड़वा लिया। बाद में तीनों को मऊ थाने लाया गया और यहां पर बंद कर दिया गया। पत्रकार आलोक पांडेय का आरोप है कि उनसे न तो पुलिस अभी तक सामान बरामद कर पायी और न ही उनसे कड़ाई से पूछताछ ही कर रही है।

बरेली : हिंदुस्‍तान के पूर्व पत्रकार देवांग के घर में बीते 18 अगस्‍त को हुई चोरी की घटना की तह तक पहुंचने में पुलिस असफल रही। जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। पुलिस ने रिपोर्ट तो लिख ली थी लेकिन चोरों का पता लगा पाने में असफल रही। अब पुलिस ने 20 सितम्‍बर को फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामला कोर्ट को भेज दिया है. देवांग ने बताया कि कैंट पुलिस का कांस्‍टेबल कमल यादव मेरे घर आया तथा मुझी से पैसा मांग रहा था, जैसे वो अपनी ड्यूटी निभाने नहीं बल्कि मेरे ऊपर एहसान करने आया हो। एसआई वीरेंद्र शर्मा भी आश्‍वासन के सिवा कुछ नहीं दिया। मुझे दस अक्‍टूबर को कोर्ट में पेश होना पड़ा। मेरे घर चोरी हुई और मैं ही अब कोर्ट तथा पुलिस स्‍टेशन के चक्‍कर लगा रहा हूं। सामान तो मिला नहीं खर्च अलग से बढ़ गए। अब अगली तारीख 5 नवम्‍बर की है, जिसमें मुझे केस खतम करने की अर्जी देनी है।

गौरतलब है कि देवांग राठौर कांधरपुर में स्थित सैनिक कालोनी में 18 दिसम्‍बर की रात चोर घुस आए थे तथा परिजनों के ऊपर स्‍प्रे करके उन्‍हें बेहोश कर दिया तथा एलआईसी प्रीमियम भरने के लिए रखे गए लगभग पचास हजार रुपए, पचास ग्राम सोना और पांच सौ ग्राम चांदी के जेवर, एक मोबाइल और कलाई घड़ी चोरी कर लिया था।

भाजपाइयों ने पत्रकारों को दिए पांच-पांच सौ के नोट

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी एक ओर जहां देश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ रथ यात्रा पर सवार हैं वहीं सतना के पत्रकार आज भाजपा जिला मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उस समय आश्चर्यचकित रह गये जब वहां बंटे गये लिफाफे में पांच पांच सौ के नोट निकले.

भाजपा के जिला कार्यालय में आज आडवाणी की रथ यात्रा की जानकारी देने के लिये पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया था. पत्रकार वार्ता में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री नागेन्द्र सिंह, जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह बघेल तथा स्थानीय सांसद गणेश सिंह मौजूद थे.

पत्रकार वार्ता के बाद स्थानीय मीडिया प्रभारी श्यामलाल गुप्ता ने संवाददाताओं को लिफाफे बांटे. पत्रकार उस समय आश्चर्यचकित रह गये जब उन्होंने लिफाफे में पांच-पांच सौ रुपये रखे देखे. इनमें कुछ मीडियाकर्मियों ने लिफाफे वहीं वापस कर दिये जबकि अधिकतर लिफाफा लेकर चल दिये.

इस बारे में राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता अजय सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस घटना से भाजपा का चरित्र उजागर हो गया है. उन्होंने कहा कि एक ओर तो आडवाणी भ्रष्टाचार के विरोध में रथ यात्रा निकाल रहे है वहीं दूसरी ओर भाजपा स्वयं भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है. साभार : आजतक

क्‍यों एक अपराधी विधायक को बचाने में जुटे हैं मेरठ के अखबार?

प्रतिष्ठा में, सम्पादक दैनिक हिन्दुस्तान/जनवाणी/अमर उजाला/जागरण/ प्रभात। जनपद मेरठ। महोदय, आपके सम्मानित समाचार पत्र जिस प्रकार एक अपराधी विधायक एवं उसके परिवार को बचाते नजर आये उससे लगता है कि मीडिया निष्पक्ष नहीं है। इस अपराधिक छवि वाले विधायक एवं उसकी पत्नी तथा अन्य सहयोगियों ने न जाने कितनी महिलाओं के सुहाग उजाडे़ हैं तथा कितने ही परिवारों को बेघर किया है, अगर जनाब हाल जानना है तो हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में जाकर जनता से पता करें।

कोई सैकड़ों लोगों को लेकर पुलिस पर पथराव करे तो आपके संवाददाता अधिक जानकार हैं वो क्या करें? क्यों नहीं आपके समाचार पत्रों में लक्ष्मी बंसल हत्याकांड को प्रमुखता से उठाया गया? क्या कारण है कि इस अपराधिक छवि वाले विधायक के काले कारनामों एवं हत्याकांड में नाम आने पर किसी भी समाचार पत्र में जगह नहीं दी गयी? इससे लगता है कि मीडिया कहीं न कहीं इस विधायक के स्वार्थ से प्रभावित है। पुलिस ने पहली बार सही काम किया है तो उसके विरोध में मीडिया जहर उगल रही है।

दैनिक हिन्दुस्तान व अमर उजाला : इन दोनों समाचार पत्र ने तो इस अपराधी विधायक की परित्याग की हुई पत्नी को देवी बना दिया। एक नहीं कई स्थानों पर फोटो छाप कर तथा तीन सम्पूर्ण पेजों पर कवरेज दे कर क्या साबित करना चाहते हैं सम्पादक महोदय? अगर इसकी अपने स्तर से जांच कराई जाये तो आपको पता चलेगा कि आपका संवाददाता कितना धन इस अपराधी से लेकर आपके अखबार को बेच रहा है? जिस अपराधी विधायक की पत्नी को आप देवी साबित करने पर तुले है, इसी महिला ने अपनी सगी बहन सहित कई महिलाओं को अपने पति की अय्याशी के लिए परोस चुकी है और उसका नतीजा है कि आज यह महिला उस अपराधी विधायक की दूसरी पत्नी कहलाती है?

दैनिक जनवाणी : जनवाणी समाचार पत्र के मालिक तो इस अपराधी के बिजनेस पाटर्नर हैं। इनसे और उम्मीद ही क्या की जा सकती है। साथ ही इस समाचार के संस्थान में मेरठ के दागी पत्रकार नौकरी करते हैं तो वे अपने हितों के लिए कुछ भी कर सकते हैं? क्योंकि इस संस्थान के मालिकों को पत्रकारिता की एबीसीडी…भी नहीं आती? जनवाणी द्वारा दिनांक 24 सितम्बर, 2011 से इस अपराधी छवि के विधायक को महात्मा बनाये जाने की कवायद जारी है। शर्म करो सम्पादक महोदय…. आप इन अपराधियों के लिए समाचार पत्र का प्रकाशन करते हैं या आम पाठकों के लिए?

दैनिक जागरण : जागरण अपनी निष्पक्षता के लिए जाना जाता है, लेकिन आपके समाचार पत्र में जिस प्रकार इस भोण्डे आंदोलन को जगह दी गयी है वो अत्यंत शर्म की बात है?

दैनिक प्रभात : प्रभात ने तो श्याद किसी नेता से अपनी दुश्मनी निकालने का काम किया है, ये इस बात से भी साबित है कि इस समाचार पत्र का सिटी चीफ केपी त्रिपाठी, जिसके पिता माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक बनाम कर्मचारी थे जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते थे और संवाददाता संजय वर्मा इस अपराधी विधायक का रिश्ते में साला लगता है, इसलिए वो अपनी बहन को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है? सम्पादक जी आंखें बंद करके रहोगे तो ये केपी त्रिपाठी व संजय वर्मा सरीखे नौसिखये आर्थिक हित साधने वाले पत्रकार आपकी वर्षों की पत्रकारिता को भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा देंगे। खबर हवा में लिखने वाले ये पाठकों का क्या संदेश देना चाहते हैं? सम्पादक महोदय इस रिपोर्टर की बेतुकी बातों से आम पाठक को क्यों सता रहे हैं?

आज के आपके समाचार पत्रों के अंक देखकर अत्यंत ही दुखः हुआ और पाठक जागरूक मंच ने निर्णय लिया है कि आपके ऐसे बेहूदा व बेतुके तथा अपराधियों के संरक्षण दिये जाने वाले समाचारों का विरोध हर स्तर पर किया जायेगा। किसी भी ऐसी महिला व पुरूष को अपने समाचार पत्रों के माध्यम से देवी मत बनाओ जो समाज के लिए कंलक व कोढ़ हों?

भवदीया

मनीषा मोहन सिसौदिया

अध्‍यक्ष, पाठक जागरुक मंच

जागृति बिहार, सेक्‍टर 4, मेरठ

pathakjm@gmail.com

पंजाब केसरी के पत्रकार के खिलाफ प्रदर्शन

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के गोहर ब्लॉक से पंजाब केसरी के पत्रकार एवं शाला पंचायत के उप प्रधान राजकुमार के खिलाफ सोमवार को उसी पंचायत के लोग सडक़ों पर उतर आए। उपप्रधान को बर्खास्त न करने और लिखित शिकायत के बावजूद गिरफ्तार न करने पर ग्रामीणों ने हिमाचल प्रदेश आरटीआई ब्यूरो संयोजक लवण ठाकुर की अगुवाई में गोहर बाजार में रोष रैली निकाली और जम कर नारेबाजी की।

उपप्रधान के विरुद्ध कार्रवाई करने को लेकर ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी भानु गुप्ता को ज्ञापन दिया और आरोप लगाया कि उप्रधान ने पंचायत के सचिव से मिलीभगत कर रिकार्ड के साथ छेड़छाड़ की है तथा बाद में ग्रामीणों ने पुलिस थाना गोहर के प्रभारी प्रताप चंदेल को ज्ञापन सौंप कर जान से मारने की धमकी देने वाले उपप्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पंचायत के आरटीआई कार्यकर्ताओं ने आरटीआई के तहत सूचना हासिल कर मनरेगा के कामों में हुई लाखों की गड़बड़ का पर्दाफाश कर डीसी मंडी से शिकायत की थी। इस पर तिलमिलाए उपप्रधान ने आरटीआई कार्यकर्ताओं को जान से मारने की धमकी दी थी।

इस बारे में ७ सितंबर को एसपी मंडी से शिकायत की गई थी और २७ सितंबर को एसपी मंडी को फिर इस बारे में अवगत करवाया था। बावजूद इसके उपप्रधान के खिलाफ अभी मामला दर्ज नहीं हुआ है। उपप्रधान के खिलाफ जाली बिल पर लाखों का सीमेंट उपलब्ध करवाने और मनरेगा के कार्यों में जम कर धांधलिया करने के आरोप हैं। आरटीआई के तहत हासिल की गई सूचना में इस बात का खुलासा हुआ है। डीसी मंडी के आदेश के बाद इस मामले की जांच शुरू हुई है और डीआरडीए के परियोजना अधिकारी बीसी भंडारी को इस मामले में जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस बीच ग्रामीण उपप्रधान को निलंबित करने की मांग कर रहे हैं। बीडीओ गोहर भानू गुप्ता ने बताया कि इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है। 26 अक्तूबर तक जांच पूरी हो जाएगी।

एमपी के राज्‍यपाल रामनरेश यादव ने कई पत्रकारों को सम्‍मानित किया

आजमगढ़ : पत्रकारिता समाज का दर्पण तो होता ही है, समाज का दिशा बोधक भी होता है. समाज को सही दिशा देने में पत्रकारों का हमेशा से महत्वपूर्ण योगदान रहा है. आजादी की लड़ाई से लेकर आजतक पत्रकारों ने अपने दायित्वों का निर्वहन किया है. नयी पीढ़ी के नौजवान पत्रकारों से यह उम्मीद है कि वे इस परंपरा को आगे बढ़ाये और समाज को सही दिशा की तरफ ले जायें.

उक्त बातें मध्य प्रदेश के राज्यपाल महामहिम रामनरेश यादव ने आज अपने गृह जनपद आजमगढ़ में तमसा प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह में कही. आजमगढ़ जनपद के मूल निवासी श्री यादव मध्‍य प्रदेश के राज्यपाल बनने के बाद आज पहली बार जनपद मुख्यालय पर आये थे. इस अवसर पर राज्‍यपाल श्री यादव को सम्मानित किया गया. राज्‍यपाल ने भी विभिन्‍न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाले जनपद  के लोगों को प्रशस्ति पत्र, स्‍मृति चिन्‍ह तथा अंग वस्‍त्र प्रदान कर सम्‍मानित किया.

पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्‍ठ योगदान देने वाले कई पत्रकारों को राज्‍यपाल ने सम्‍मानि‍त किया, जिनमें सुधीर सिंह (पीटीआई), धर्मेन्द्र श्रीवास्तव (यूएनआई), स्वर्मिल चन्द्र (हिंदुस्तान), वेद मिश्र (ईटीवी), आलोक सिंह (डीडी न्यूज़), प्रवीर शर्मा (अमर उजाला), दीपक सिंह (सहारा समय) समेत कई अन्‍य लोग भी शामिल थे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता बनवारी लाल जालान और संचालन विजय यादव ने किया. कार्यक्रम के अंत में संयोजक एवं तमसा प्रेस क्लब के अध्‍यक्ष अशोक वर्मा ने सबका आभार व्यक्त किया.

पत्रकार पर जानलेवा हमला, मामला दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

नूरमहल में अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र के संवाददाता दिलबाग सिंह पर हुए कातिलाना हमले की गुत्थी अभी सुलझ नहीं पाई है। पुलिस इस मामले की जांच में बुरी तरह उलझ गई है। दिलबाग ने जिन दो युवकों पर शंका जाहिर की थी, उनको पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। परन्‍तु पूछताछ में उन दोनों की संलिप्‍ता नहीं पाई गई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच की दिशा बदल दी है। अब कई अन्‍य पहलुओं को ध्‍यान में रखकर मामले की जांच की जा रही है।

पुलिस के एक विशेष दल ने दिलबाग से लिए गए इनपुट के आधार पर दो युवकों का स्कैच तैयार किया है। एक विशेष काउंटर इंटेलिजेंस की टीम भी इस केस को सुलझाने में जुट गई है। पुलिस उम्‍मीद जता रही है कि स्‍कैच के सहारे वो आरोपियों तक जरूर पहुंच जाएगी। पुलिस अधीक्षक (डी) गुरमीत सिंह भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि शक के आधार पर हिरासत में लिए गए दोनों युवकों की इस हमले के मामले में शामिल होने की बात अभी सामने नहीं आई है, लेकिन अभी भी उनको क्लीन चिट नहीं दी जा रही है। वे अब भी हमारे शक की रडार में हैं। मामले में जांच चल रही है। गुरमीत सिंह ने माना कि इन युवकों से पूछताछ के बाद जांच की दिशा बदल चुकी है, कई कोणों को ध्‍यान में रखकर पुलिस जांच में जुट गई है।

गोरखपुर प्रेस क्‍लब के सात पदों के लिए 26 लोगों ने किया नामांकन

गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब वर्ष 2010-11 के लिए होने वाले कार्यकारिणी चुनाव के सात पदों पर कुल 26 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है। नामांकन पत्रों की जांच सोमवार को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक होगी। 11 अक्टूबर को नामांकन वापसी का दिन है। 12 अक्टूबर को वैध प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाएगी। 16 अक्‍टूबर को मतदान होगा। कोषाध्‍यक्ष एवं संयुक्‍त मंत्री पद पर मात्र एक नामांकन होने से इस पद पर निर्विरोध चयन तय है।

प्रेस क्‍लब चुनाव अधिकारी राजन राय, सहायक चुनाव अधिकारी अभिनव उपाध्याय और ब्रजेंद्र कुमार सिंह ने संयुक्‍त रूप से बताया कि अध्यक्ष पद पर एसके सिंह, मृत्युंजय शंकर सिन्हा, अरविंद शुक्ला (पूर्व अध्‍यक्ष), एसपी सिंह, कामेश्वर उपाध्याय, शेष नारायण पाण्‍डेय, उपाध्यक्ष पद पर अखिलेश कुमार शर्मा, अजीत यादव, महामंत्री पद पर मनीष कुमार मिश्र एवं मार्कण्डेय मणि त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष पद पर अरुण कुमार राय, संयुक्त मंत्री पद पर नरेंद्र कुमार तिवारी ने नामांकन दाखिल किया।

पुस्तकालय मंत्री पद पर डीके गुप्ता, रंजीत कुमार श्रीवास्तव, अशोक सिंह, अजय कुमार राय ने नामांकन किया है। कार्यकारिणी सदस्य के लिए रबीश कुमार श्रीवास्तव, आशीष भट्ट, विनीत कुमार, राजेश पांडेय, धर्मेंद्र कुमार त्रिपाठी, अनिल कुमार राय, विवेक कुमार अस्थाना, डा. शैलेष ओझा, सर्वेश त्रिपाठी और चंदन निषाद ने पर्चा भरा है। कोषाध्यक्ष पद पर अरुण कुमार राय तथा संयुक्‍त मंत्री पद पर नरेंद्र कुमार तिवारी का निर्विरोध चुना जाना तय है।

नंबर एक का अखबार और दो लाइन का समाचार नहीं : दैनिक जागरण अपने को एक नंबर का अखबार बताता है, लेकिन यह अखबार प्रेस क्लब चुनाव से सम्बन्धित दो लाइन का समाचार भी नहीं दे पाया। हालांकि गोरखपुर से निकलने वाले अन्‍य सभी अखबारों ने प्रमुखता से प्रेस क्लब चुनाव से सम्बन्धित खबरों को प्रकाशित किया है। अब तो जागरण के पत्रकार भी अपने अखबार की आलोचना कर रहे हैं।

रायपुर में मीडियाकर्मियों से मारपीट : डॉक्‍टरों के खिलाफ मुकदमा

रायपुर। डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल परिसर में शनिवार की देर रात जूनियर डॉक्टरों द्वारा मीडियाकर्मियों से मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पत्रकारों की शिकायत पर पुलिस अस्पताल अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी सहित जूनियर डाक्‍टरों (जूडा) के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत बलवा का मामला दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

चिकित्सकों के व्यवहार व सुस्त कार्रवाई से नाराज पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आईजी मुकेश गुप्ता से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। आईजी ने पत्रकारों को भरोसा दिलाया कि घटना के दोषी चिकित्सकों पर अवश्य कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर उन्‍हें गिरफ्तार भी किया जाएगा। परन्‍तु घटना के 24 घंटे बाद भी आरोपी  चिकित्सकों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, इससे पत्रकार नाराज हैं। मीडियाकर्मियों की शिकायत भी काफी हो हल्‍ला के बाद दर्ज की गई. मौदहापारा थाना पहुंचे पत्रकार ने अपने साथ हुई घटना की रिपोर्ट लिखानी चाही तो पुलिस ने सामान्य धारा के तहत मामला दर्ज करके बात को टालने का प्रयास किया, मगर मीडिया कर्मी धारा 307 जोड़ने की मांग पर अड़ गए। मगर पुलिस इस धारा के तहत मामला दर्ज करने से इनकार करती रही।

नाराज मीडियाकर्मी थाने से निकलकर मुख्‍यमंत्री निवास पहुंच गए। उन्‍होंने सीएम के आवास के बाहर ही धरना शुरू कर दिया, जो सुबह चार बजे तक जारी रहा। मजबूरन पुलिस ने धारा 307 के तहत भी मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी, डॉक्टर्स संघ के अध्यक्ष डॉ. चंदन, डॉ. सौरव व अन्य डॉक्टर्स के खिलाफ मारपीट, बलवा, हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

गौरतलब है कि शनिवार को जूनियर डाक्‍टर अस्पताल में व्याप्त अनियमितताओं सहित डॉक्टर्स रूम में एयर कंडिशनर व वॉटर कूलर की मांग को लेकर देर शाम धरना-प्रदर्शन कर हड़ताल कर रहे थे, जिसे कवरेज करने के लिए काफी संख्या में मीडिया कर्मी पहुंचे थे। इसी दौरान एक चैनल के संवाददाता द्वारा जूडा के धरना-प्रदर्शन से अस्पताल में फैली अव्यवस्था व मरीजों के हाल पर प्रश्न पूछे जाने से जूनियर डॉक्टर्स बौखला गए। जूनियर डॉक्टरों ने मीडिया कर्मियों से गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। चैनल के ओबी वैन में जबर्दस्त तोड़फोड़ की गई और कई पत्रकारों को पीटा गया।

सिटी एसपी सहित कई आला अफसरों की उपस्थिति में डॉक्टर्स गाली-गलौज कर हंगामा करते रहे, लेकिन उन्‍हें रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा नाराज मीडिया कर्मी अस्पताल परिसर में ही धरना शुरू कर दिया तथा आरोपी डॉक्‍टरों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे, इसके बाद पुलिस बचाव की मुद्रा में आ गई। पुलिस देर रात मीडिया को दिए गए आश्वासन से पीछे हटते हुए एक चैनल के संवाददाता पर बलवा का मामला दर्ज कर लिया गया। बताया जा रहा है कि उक्‍त पत्रकार पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. विवेक चौधरी की रिपोर्ट पर लोक सम्पत्ति क्षति निरूपण अधिनियम व बलवा का मामला कायम किया गया है।

इस मामले में प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री अमर अग्रवाल ने तीन सदस्‍यीय जांच कमेटी का गठन किया है, जो जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप देगी। इस समिति में स्‍वास्‍थ्‍य सचिव, मेकाहारा के डीन व आरएमई को शामिल किया गया है।

‘द लंदन पोस्‍ट’ वेबसाइट के पत्रकार की हत्‍या

लाहौर : पाकिस्तान में ऑनलाइन प्रकाशन में काम करने वाले एक पत्रकार फैसल कुरैशी लाहौर स्थित अपने आवास में मृत पाए गए हैं. कुरैशी का गला धारदार हथियार से काट दिया गया और उसके शव पर जख्म के कई निशान मिले हैं. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अब्दुल रज्जाक चीमा ने बताया कि ‘द लंदन पोस्ट’ बेबसाइट के लिए लिखने वाले फ़ैसल कुरैशी जोहर कस्बे में अपने आवास पर मृत पाए गए.

पुलिस ने बताया कि कुरैसी के चचेरे भाई ने इस घटना के बारे में जानकारी दी. पुलिस मामले की जांच कर रही है तथा हत्‍या के कारण का पता लगाने की कोशिश कर रही है. गौरतलब है कि इसके पहले भी पाकिस्‍तान में कई पत्रकारों की हत्‍या की जा चुकी है.

नशे में धुत चालक ने पत्रकार की बाइक पर बस चढ़ाई

: लखनऊ की घटना, बस बसपा सांसद अखिलेश दास के कॉलेज की : लखनऊ : नशे में धुत एक कॉलेज के बस चालक ने अपनी बस एक पत्रकार की खड़ी मोटरसाइकिल पर चढ़ा दी. घटना में कोई घायल नहीं हुआ परन्‍तु जिस अति‍सुरिक्षत क्षेत्र में ये हादसा हुआ उससे तमाम सवाल खड़े हो गए हैं. बस बसपा सांसद अखिलेश दास के कॉलेज की है. पत्रकार अभी भी बस को मौके पर रोके हुए हैं. पत्रकार लोग हंगामा कर रहे हैं और मोटरसाइकिल की क्षतिपूर्ति की मांग की जा रही है.

स्‍वतंत्र भारत के क्राइम रिपोर्टर डीपी शुक्‍ला अपनी मोटरसाइकिल एनेक्‍सी भवन के सामने बने पत्रकारों के स्‍टैण्‍ड पर खड़ी कर पुलिस विभाग की नियमित प्रेस कांफ्रेंस कवर करने गए थे. इसी बीच बाबू बनारसी दास कॉलेज की एक तेज रफ्तार बस ने उनकी मोटरसाइकिल को तेजी से धक्‍का मारा तथा फंस कर बस मौके पर ही रुक गई. बस में कॉलेज की छात्राएं सवार थीं. गनीमत रही कि किसी को चोट नहीं आई. इस घटना के बाद अतिसुरक्षित एरिया में हड़कम्‍प मच गया.

किसी ने तत्‍काल इसकी सूचना पत्रकारों को दी कि किसी पत्रकार की मोटरसाइकिल को बस ने कुचल दिया है. भागे-भागे पत्रकार नीचे पहुंचे तो वहां का हाल देखकर सन्‍न रह गए. मोटरसाइकिल बुरी तरह कुचली पड़ी थी. पत्रकारों ने तत्‍काल चालक को पकड़ लिया तथा उससे पूछताछ करने लगे, परन्‍तु चालक इतने नशे में है कि वो अपना नाम तक नहीं बता पा रहा है. मौके पर पुलिस भी पहुंच गई है. पत्रकार मोटरसाइकिल की क्षतिपूर्ति को लेकर बस रोके हुए हैं. पत्रकारों का कहना है कि जब तक मोटरसाइकिल की क्षतिपूर्ति नहीं मिलती बस को जाने नहीं दिया जाएगा. खबर देने तक मौके पर हंगामा मचा हुआ है.

आईजेयू ने पीसी जार्ज के पत्रकार को जेल भेजने के बयान पर विरोध जताया

Hyderabad : Indian Journalists Union (IJU) today strongly condemned the reported statement of Kerala Government Chief Whip P C George against a TV reporter. George had reportedly said that Pradeep C Naduman, a journalist with a local Malayalam TV channel, “should be jailed” for exposing the alleged illegal activities of the imprisoned former Minister Balakrishna Pillai.

 

In a statement here, IJU Secretary General Devulapalli Amar said “the outburst of the Government Chief Whip is a direct attack on the freedom of the media and negation of the fundamental right of the citizens to know. What Pradeep did was a legitimate journalistic duty to expose the illegal activities of the person in high position.”

Pillai (77) landed in trouble last week with the television channel airing a telephonic talk with him, which involved violation of prison rules. Pradeep conducted a sting operation by calling Pillai, jailed in a graft case, and aired the conversation on the channel. There were uproarious scenes in Kerala Assembly for the last few days over the alleged mobile phone conversations of Pillai from jail with several powerful people in the state. Courtesy : Manoramaonline

गुजरात के वरिष्‍ठ पत्रकार व लेखक भूपत बड़दोरिया का निधन

गुजरात के मशहूर पत्रकार एवं लेखक भूपत बडदोरिया का बुधवार की रात अहमदाबाद में निधन हो गया. वे 82 वर्ष के थे तथा कुछ समय से बीमार चल रहे थे. भूपत बडदोरिया 50 से ज्‍यादा बेस्‍ट सेलर उपन्‍यास लिखे थे. उनका नाम राजकोट से प्रकाशित ‘फूलछाब’ के सबसे युवा संपादक के रूप में दर्ज है. उनके निधन पर मुख्‍यमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, पूर्व मुख्‍यमंत्री केशुभाई पटेल समेत तमाम लोगों ने शोक व्‍यक्‍त किया है.

कई पत्र-पत्रिकाओं को अपनी सेवा देने के बाद उन्‍होंने ‘संभव’ नामक खुद के अखबार का प्रकाशन कर रहे थे. इसके बाद से ‘जनसत्‍ता’ दैनिक तथा ‘अभियान’ नामक साप्‍ताहिक मैगजीन का प्रकाशन भी करने लगे थे. भूपत बड़दोरिया को उनके लेखन के लिए साहित्‍य अकादमी समेत कई पुरस्‍कार मिल चुके हैं.

यूपी प्रेस क्‍लब अपने मेंबरों को देगा मिनी लैपटाप

चिट्ठी-पत्री लिखने के चलते हाल में चर्चा में आए उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब ने अब अपने मेंबरों को मिनी लैपटाप देने की योजना बनायी है। खबर है कि क्लब के कोषाध्यक्ष व सचिव ने इस बारे में मन बना लिया है और जल्दी सभी मेंबरों के हाथ में लैपटाप होगा। गौरतलब है कि हाल के दिनों में यूपी प्रेस क्लब की आमदनी में खासा इजाफा हुआ है।

आमदनी को देखते हुए क्लब की संचालक बाडी वर्किंग जनर्लिस्ट यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आयकर न देने का मुद्दा पत्र लिख कर उठाया था। उन्होंने क्लब की ओर से यूनियन को कुछ न दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए थे। इन सब बातों को देखते हुए क्लब के पदाधिकारी आमदनी को लैपटाप खरीदने में खर्च करने जा रहे हैं। क्लब के पदाधिकारियों का कहना है कि आयकर के रूप में लाखों देने से बेहतर होगा सभी सदस्यों को लैपटाप दे दिया जाए। क्लब में चर्चा चल रही है कि लैपटाप नए साल पर दिया जाए या होली के मौके पर। जो भी हो इस सब से एक बार फिर क्लब खबरों में आ गया है।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

बिहार के पत्रकार अभिषेक एवं विजय को नेपाल प्रेस क्‍लब ने सम्‍मानित किया

भारत और नेपाल के बीच शुरू से ही बेटी और रोटी का सम्बन्ध तो रहा ही है कई तरह के व्यवसायिक और सामाजिक सरोकार भी दोनों देशों को एक किये हुए है. इसमें सीमा क्षेत्र में काम करने वाले मीडियाकर्मियों की भूमिका हमेशा से ही महत्वपूर्ण रही है.

इसी महत्वपूर्ण कड़ी को और मजबूत करने के लिए नेपाल सरकार और नेशनल प्रेस क्लब, नेपाल ने इस साल देश लाइव न्यूज़ चैनल के भारत नेपाल सीमा स्थित रक्सौल संवाददाता अभिषेक कुमार और दैनिक जागरण के संवाददाता विजय कुमार गिरी को “अंतरराष्ट्रीय संचारकर्मी सम्मान 2011” से सम्मानित किया है. यहाँ हम आपको बताते चलें कि नेशनल प्रेस क्लब नेपाल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने 27 साल के महत्वपूर्ण इतिहास में पहली बार किसी भारतीय संचारकर्मी को सम्मानित किया है.

नेशनल प्रेस क्लब नेपाल के तेइसवें स्थापना दिवस के अवसर पर काठमांडू स्थित नेपाल पर्यटन बोर्ड के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में नेपाल सरकार के उद्योग वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री लेखराज भट्ट, सामाजिक कल्याण मंत्री दान बहादुर चौधरी, प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार राम रिझन यादव, नेशनल प्रेस क्लब के अध्यक्ष रामकृष्ण कर्माचार्य सहित सैकड़ों पत्रकार तथा स्‍थानीय लोग उपस्थित थे.

नागार्जुन ने दी महिला पत्रकार को जान से मारने की धमकी, मामला दर्ज

हैदराबाद। मशहूर तेलुगु स्टार ए. नागार्जुन पर एक महिला पत्रकार ने जान से मारने की धमकी देने और बदसलूकी का आरोप लगाया है। महिला पत्रकार ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत की है। जुबली हिल्स स्थित पुलिस थाने में नागार्जुन के खिलाफ आईपीसी की धारा 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक नागार्जुन और महिला पत्रकार वाई.सुनीता चौधरी से पूछताछ की जाएगी। स्वतंत्र पत्रकार सुनीता राज्य के सेंसर बोर्ड की सदस्य है। सुनीता के मुताबिक 29 सितंबर को एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अन्नपूर्णा स्टूडियो में उसकी नागार्जुन से मुलाकात हुई थी। इस दौरान नागार्जुन ने उसको जान से मारने की धमकी दी और भद्दी-भद्दी गालियां दी।

बताया जा रहा है कि नागार्जुन सुनीता के उस आर्टिकल से नाराज थे जो उसने कुछ महीने पहले लिखा था। 52 वर्षीय नागार्जुन मशहूर तेलुगु एक्टर ए. नागेश्वर राव के पुत्र हैं। 1989 में नागार्जुन को शिवा फिल्म के लिए फिल्म फेयर का बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला था। साभार : पत्रिका

जुझारू पत्रकार केडी पाण्‍डेय का निधन, पत्रकारों ने शोक सभा तक आयोजित नहीं की

गोरखपुर : जुझारु पत्रकार एवं रेलकर्मी केडी पाण्‍डेय का 28 सितम्‍बर को वाराणसी में कैंसर से निधन हो गया. श्री पाण्‍डेय अपने इलाज के लिए सपरिवार कैंसर रिसर्च इंस्‍टीट्यूट वाराणसी गए थे. 48 वर्षीय श्री पाण्‍डेय अपने पीछे पत्‍नी दो पुत्र और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं. वे सच्ची कहानियां, मनोहर कहानियां व नूतन कहानियों में पिछले तीस वर्षों से लगातार शिवम-शनि के नाम से लिखते रहे.

दुखद यह कि गोरखपुर प्रेस क्‍लब जो तथाकथित पत्रकारों के हितों का संरक्षण होने का दावा करता है, उसने भी कोई शोक सभा तक आयोजित नहीं की और न तो प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष व महामंत्री ने इस विषय में कोई जानकारी लेने का प्रयास किया. अपने जुझारू तेवर के कारण ही श्री पाण्‍डेय गोरखपुर के माफिया व ठेकेदार पत्रकारों के खिलाफ कई बार कलम चलाई थी. इसका परिणाम यह रहा कि गोरखपुर के माफिया पत्रकारों के भय से कोई भी पत्रकार श्री पाण्‍डेय के दाह-संस्‍कार में नहीं गया. पूर्वांचल का सबसे लोकप्रिय अखबार दैनिक जागरण ने तो श्री पाण्‍डेय के निधन तक की खबर नहीं छापी. इसका कारण श्री पाण्‍डेय ने अभी एक वर्ष पूर्व ही ‘गोरखपुर के पत्रकारों में कहां है एक’ शीर्षक से सच्‍ची कहानियां में चार पेज की एक स्‍टोरी लिखी थी.

उस स्‍टोरी में दैनिक जागरण के गोरखपुर के संपादक एवं प्रबंधक शैलेन्‍द्र मणि त्रिपाठी के खिलाफ उन्‍होंने बताया था कि मात्र कुछ ही वर्षों में उन्‍होंने कैस करोड़ों रुपये की सम्‍पत्ति इकट्ठा कर ली. इस स्‍टोरी से जागरण ग्रुप बुरी तरह क्षुब्‍ध चल रहा था. यही नहीं इस स्‍टोरी में उन्‍होंने राष्‍ट्रीय सहारा, गोरखपुर के प्रबंधक पीयूष बंका के खिलाफ भी कलम चलाई थी, जिससे गोरखपुर के कई पत्रकारों ने श्री पाण्‍डेय को जान से मारने की धमकी भी दी थी. बावजूद इसके श्री पाण्‍डेय ने कहा था कि वह शीघ्र ही दूसरी किस्‍त लिखने वाले हैं. इसके लिए कई पत्रकारों के बिजनेस व व्‍यवसाय के फोटो आदि इकट्ठा किया था, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है.

गोरखपुर में रेलवे के खिलाफ कोई भी अखबार आज निगेटिव खबर नहीं प्रकाशित करता है, लेकिन श्री पाण्‍डेय जब तक रेलवे की सेवा में नहीं रहे रेलवे के खिलाफ लिखते रहे. श्री पाण्‍डेय को अपने पिता के मौत के बाद रेलवे में नौकरी मिल गई थी, लेकिन उन्‍होंने लिखना नहीं छोड़ा. भारतीय रेलवे जब देश भर में मात्र सात जोनों में विभक्‍त था, उस समय पूर्वोत्‍तर रेलवे, गोरखपुर के महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक, मुख्‍य जनसम्‍पर्क अधिकारी समेत रेलवे के पांच वरिष्‍ठतम अधिकारियों के खिलाफ गोरखपुर के कैंट थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कराया था. इससे पूरे रेलवे में हड़कम्‍प मच गया था. लगभग तीस वर्ष को होने को हैं, उसके बाद कोई दूसरा व्‍यक्ति पूर्वांचल में नहीं पैदा हुआ, जो रेलवे के इतने बड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करा सका हो. श्री पाण्‍डेय के निधन से गोरखपुर के कई माफिया और व्‍यवसायिक पत्रकारों में दुख के बजाय हर्ष है, क्‍योंकि उन्‍हें भय था कि केडी फिर कुछ लिखेगा.

गोरखपुर के एक पत्रकार का दावा है कि जब वह प्रेस क्‍लब में केडी पाण्‍डेय के निधन की खबर देने पहुंचे तो वहां कई पत्रकार मतदाता सूची ठीक‍ कराने में जुटे थे. उन्‍होंने पाण्‍डेय के निधन का तो संज्ञान ही नहीं लिया. हद तो तब हो गई जब केडी पाण्‍डेय के सबसे नजदीकी रहे वरिष्‍ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही, दीप्‍त भानु डे, प्रेस क्‍लब के पूर्व अध्‍यक्ष अरविन्‍द शुक्‍ल, अशोक अज्ञात और रत्‍नाकर सिंह जैसे लोग हाल चाल लेने नहीं गए.

अतिउत्‍साही प्रेस अधिकारी ने सीएम का पीआर बिगाड़ा, पत्रकार ने सूचना मांगी

26 सितम्बर की शाम को मध्य प्रदेश के गवर्नर के सम्मान में भोज हुआ. इस सरकारी भोज में आमंत्रित अधिकारी, मंत्री और चुनिन्दा बीस पत्रकारों को ही बुलाया गया. सीएम के यहाँ नव नियुक्त प्रेस अधिकारी, जो सयुंक्त संचालक के पद पर काम कर रहे हैं, ने भोपाल के केवल बीस पत्रकारों को बुलाकर बाकी के श्रेष्ठ और जयेष्ट पत्रकारों की लॉबी को अप्रसन्न किया है.

ऐसा लगता है कि प्रदेश सरकार में इस बार के प्रेस सलाहकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह सीएम को ले डूबेंगे, जो चुनिन्दा संपादकों से प्रेस वार्ता के बाद बैकफुट पर आ गए थे. भूपेन्द्र गौतम जो पहले इंदौर में पदस्थ थे वे मुख्यमंत्री के नजदीक आने के हर तरह के हथकंडे पहले से ही अपनाते रहे हैं. पूर्व में जहां वे पदस्थ थे वहां भी सीएम की खबरों वाले अखबारों को सीएम को दिखाने से नहीं चूकते थे. अंततः अपनी चाटुकारिता के चलते वे सीएम कार्यालय पहुंच ही गए. अब लगता है वे शिवराज सिंह को ले डूबेंगे…? भूपेन्द्र गौतम कार्यक्रमों में सीएम से अपनी नजदीकियां दिखाने के लिए जानबूझकर बार-बार कान में जाकर कुछ कहते हैं.

दरअसल वह भीड़ को यह बताना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री के एक मात्र वही नजदीक हैं. उनकी इस हरकत से समूचा सचिवालय और जनसंपर्क परेशान है. इनको न तो समाचारों की समझ है और न ही भोपाल के पत्रकारों की पहचान. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का जनसंपर्क कार्यालय कुछ इसी गैरजिम्मेदार अंदाज में इस समय चलाया जा रहा है. अगर राकेश श्रीवास्तव की बात करें तो वे भी उद्योग विभाग में उद्यमिता करके आईएएस बने हैं और इसके पहले इन्दौर कलेक्टर रहे.

इन्हीं दोनों ने मिलकर भोपाल के बीस पत्रकारों की सूची बनायी और प्रमुख पत्रकारों को छोड़ दिया. इस कार्यक्रम में बड़े पत्रकारों के अलावा बड़े वाले पत्रकारों को ही बुलाया गया. पत्रकारों के साथ इस भेदभाव से उनमें असंतोष है. जब सीपीआर महोदय से फ़ोन पर बात करने की कोशिश की गयी तो वे अपना मोबाइल स्विच आफ किये हुए थे. इस सम्बन्ध में एक पत्रकार अखिलेश उपाध्याय ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी माँगी है, जिसमें निम्न सवाल पूछे गए है-

1.  राज्यपाल महोदय के सम्मान में आयोजित भोज में कुल कितने लोगों को आमंत्रण दिया गया और इसमें कितने लोग पहुंचे?
2.  भोपाल के पत्रकारों की सूची किसने तय की?
3.  इस कार्यक्रम में कुल कितना खर्च हुआ?

अमूमन अब तक की परंपरा में सभी श्रेष्ठ पत्रकारों को बुलाया जाता रहा है जबकि इसमें टाइम्स आफ इंडिया और दैनिक भास्कर जैसे समूह के पत्रकारों और अन्य बड़े बैनर के खबरचियों को भी नहीं बुलाया गया. अब जब प्रश्न उठ रहे हैं तो जनसंपर्क कमिश्नर फिर मुंह छिपाते क्यों घूम रहे हैं? असल में भूपेन्द्र गौतम नाम के व्यक्ति को पता ही नहीं है कि भोपाल में कितने पत्रकार हैं और किसे तवज्जो देना चाहिए किसे नहीं. ऐसे में फिर ख़ाक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पीआर बनेगा…? सीएम के प्रेस अधिकारी पीआर बनाने की जगह बिगाड़ने पर तुले हैं  और राज्यपाल के सम्मान में दिए गए इस भोज से आक्रोशित पत्रकार अगर अपनी पर आ गए तो शिवराज सरकार के लिए बहुत भारी पड़ेगा.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

केवी थॉमस ने पीएम से मजीठिया वेज बोर्ड की रिपोर्ट स्‍वीकार करने की सिफारिश की

New Delhi :  Food and Consumer Affairs Minister K V Thomas has urged Prime Minister Manmohan Singh to accept the recommendations of wage boards on revising the salaries of journalists and non-journalists. Thomas, Lok Sabha member from Ernakulam parliamentary constituency in Kerala, made this request to the PM through a letter.

“It is worthy of notice that the salaries of the working journalists and non-journalists workers in the newspaper industry have not been revised since 2001 though the work force in Central and State services, public and private enterprises have had revision in their salaries and service conditions at least twice during this period,” he said. Thomas, who is Minister of State for Food and Consumer Affairs, urged the Prime Minister to accept the wage boards recommendations in Part One relating to revision of wages and service conditions. “The Part two recommendations regarding welfare measures and social security may be deferred for the time being,” he said in the letter. The Supreme Court had last week said the Union Cabinet can take a decision on implementing the recommendations of the Majithia Wage Board for journalists and non-journalists. (PTI)

चंडीगढ़ नगर निगम ने माना की प्रेस क्‍लब की जमीन लीज पर नहीं है

पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम और प्रेस क्लब को जवाब तलब किया है. प्रशासन पर मिलीभगत और प्रेस क्लब पर बिना किसी लीज़ या अनुमति के करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े का आरोप लगाया गया है. याचिका पत्रकार और क्लब के सदस्य संजीव पांडे ने दायर की है.

याचिका में कहा गया है कि अदालत तक वे एक लम्बी जद्दोजहद के बाद आए हैं. उनका आरोप है कि चंडीगढ़ प्रेस क्लब के पास कोई लीज़ या अनुमति नहीं है. सूचना के अधिकार के तहद प्रशासन से ये जानकारी पाने में ही उन्हें मुद्दत लग गई. प्रेस क्लब और सभी सम्बंधित सरकारी विभाग लीज़ की जानकारी देने के मामले में टालमटोल करते रहे. प्रशासन मामले को नगर निगम और नगर निगम एस्टेट आफिस के मत्थे मढ़ता रहा. आखिरकार केन्द्रीय सूचना आयोग के दखल के बाद उन्हें जानकारी मिल पाई. जानकारी ये मिली कि चंडीगढ़ प्रेस क्लब को ये ज़मीन कभी लीज़ पर दी ही नहीं गई.

याचिका के मुताबिक़ चंडीगढ़ प्रेस क्लब का पंजीकरण कोई 33 साल पहले सेक्टर 23 में स्थित एक घर के पते पर कराया गया गया था. लेकिन क्लब 27 सेक्टर में करोड़ों रुपये मूल्य की तीन एकड़ ज़मीन पर काबिज़ है. रजिस्टर्ड आफिस के रूप में कोई ठोस पता क्लब के लैटर हेड या वेबसाईट पर आज भी नहीं है. सरकारी रिकार्ड के मुताबिक़ ज़मीन दरअसल कम्युनिटी सेंटर की है, जिस पर प्रेस क्लब काबिज़ है और वहां किचन है, बार है, स्विमिंग पूल है, तमाम तरह की व्यापारिक गतिविधियां हैं. आरोप है कि ये सब प्रशासन की मिलीभगत का नतीजा है. ये भी आरोप है कि इस जगह का उपयोग आम बाशिंदों की बजाय कुछ ख़ास लोगों के लिए हो रहा है.

श्री पांडे का आरोप है कि किसी भी लीज़ के अभाव में चंडीगढ़ प्रेस क्लब करोड़ों रुपये कीमत की इस ज़मीन पर काबिज़ है तो वो अतिक्रमण है. और वो खुद प्रशासन को किसी लीज़ की जानकारी नहीं होने के बावजूद है तो ये मिलीभगत का सबूत भी. याचिका में कहा गया है कि कभी कोई कार्रवाई मीडिया, नौकरशाहों और नेताओं की मिलीभगत की वजह से नहीं की गई. न्यायमूर्ति एस.के.मित्तल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है.

आंदोलनों के प्रति मीडिया की भूमिका कभी भी सकारात्‍मक नहीं रही है : अच्‍युतानंद मिश्र

नई दिल्ली : पूर्व के समय में पत्रकारों के समक्ष दूसरे प्रकार की चुनौतियां थीं, लेकिन वर्तमान में उनके समक्ष चुनौतियों की फेहरिस्त बढ़ गयी हैं. इस बदलती परिस्थितियों से जूझने में पत्रकारों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. ये बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने दिवंगत पत्रकार कंचना की आठवीं पुण्यतिथि पर आयोजित कंचना स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कही.

मुख्य अतिथि आरिफ खान ने कहा कि मीडियाकर्मियों को अपने पूर्वाग्रह से भी मुक्त होना होगा. उन्हें किसी नेता को उनके कौम से न जोड़ कर, उनके कार्य से जोड़ें, ताकि नेताओं को कार्य करने में आसानी हो, और उन्हें सही सम्मान व स्थान मिल सके. उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल या विभिन्न नेताओं के द्वारा किया गया आंदोलन को ही जनांदोलन का नाम देना क्या ठीक है? क्या सर्व शिक्षा अभियान या अन्य सामाजिक कार्यों को जनांदोलन नहीं कहा जा सकता है? अभी भी जातिवाद विराजमान है और उसके विरुद्ध आंदोलन सामाजिक स्तर पर ही हो सकता है। अल्पसंख्यक बहुसंख्यक की अवधारणा का अंत होना चाहिए. ऐसे आंदोलनों के लिए अनेक जगह है, लेकिन मीडिया राजनीतिक आंदोलनों को ही आंदोलन साबित करती है.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के महासचिव मोहन सिंह ने कहा कि आज सबसे बड़ी जरूरत जनांदोलन को समझने की है. जनांदोलन क्या है, इस पर विचार होना चाहिए. कोई व्यक्ति बिना किसी योजना और विचार के आंदोलन खड़ा कर दे, तो उसे जनांदोलन नहीं कहा जा सकता. इस प्रकार के आंदोलन को पिछले दिनों मीडिया ने भी काफी स्थान दिया. अच्छा होगा अगर मीडिया जनांदोलनों को सही तरीके से परिभाषित करे. उन्होंने कहा कि किसी भी जनांदोलन को खड़ा करने में मीडिया की बड़ी भूमिका होती है. इसलिए मीडिया जनांदोलन को सही तरीके से समझे, तभी मीडिया देश को सही दिशा दे सकती है. इस समय तो मीडिया जनांदोलन को नहीं समझ रही है. खुद मीडिया ही व्यवसाय में अंधी है तो जन आंदोलन को कहां से समझेगी.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एंव व्याख्यानमाला के अध्यक्ष अच्युतानंद मिश्र जी ने कहा कि मीडिया की भूमिका कभी भी आंदोलनों के प्रति सकारात्मक नहीं रही है और हो भी नहीं सकती है. हिन्दी आंदोलन का मीडिया के एक वर्ग ने उपहास उड़ाया. आपातकाल विरोधी आंदोलन में भी मीडिया की भूमिका अच्छी नहीं थी. जन आंदोलनों में मीडिया से बहुत अपेक्षा करनी भी नहीं चाहिए। हां अन्ना हजारे के आंदोलन में मीडिया ने सक्रिय भूमिका निभा कर अपना दामन धोने की कोशिश की है.

जानकारी हो कि पत्रकार कंचना 26 सितंबर 2003 को दुर्घटनाग्रस्त हो गईं और अगले दिन उनकी मृत्यु हो गयी थी. उसके बाद से उनके पति एवं वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार द्वारा प्रति वर्ष इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. इस दौरान पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता व विभिन्न राजनीतिक दलों से जुडे़ लोग इस कार्यक्रम को संबोधित करते हैं. इस कार्यक्रम में श्रोताओं के रूप में वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक, टीवी चैनल एडिटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एनके सिंह, जैन टीवी के समूह संपादक दिलीप कुमार, पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह, समाजवादी जनता पार्टी के महासचिव एचएन शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार प्रबाल मैत्र, अरविंद मोहन, अजय झा, जयप्रकाश पांडेय, गांधी शांति प्रतिष्ठाण्न के मंत्री सुरेंद्र कुमार सहित राजनीतिक, सामाजिक एवं मीडिया क्षेत्र की अनेक नामी गिरामी लोग उपस्थित थे. सभा का संचालन भारतीय विरासम के प्रमुख विद्वान डॉ. आनंद वर्धन ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री महेंद्र गर्ग ने किया. प्रेस रिलीज

उपमुख्यमंत्री के प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार का जूता चोरी

अब तक वीआईपी लोगों के कार्यक्रम और प्रेस कांफ्रेंस में जूता-चप्पल चलने की ख़बरें आती थी. लेकिन इस बार एक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार का जूता ही चोर उड़ा ले गए. यह कारनामा तब हुआ जब झारखण्ड के उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो चक्रधरपुर में पत्रकार सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे. सभी दैनिक अख़बार के प्रतिनिधि सुदेश महतो से सवाल करने पहुंचे थे.

उपमुख्यमंत्री से सवाल-जवाब करना था, लिहाजा यह दिन अंचल के पत्रकारों के लिए खास था. पत्रकार दुल्हे की तरह बन संवरकर प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचे थे. पत्रकारों की इस जमात में दैनिक भास्कर का एक पत्रकार बबलू मंडल भी शामिल था. करीब आधे घंटे तक प्रेस कांफ्रेंस चला. शाम ढल चुका था, लिहाजा पत्रकार खबर भेजने की होड़ में हड़बड़ा कर बाहर निकले. दैनिक भास्कर के पत्रकार बबलू मंडल भी कमरे से बाहर निकले. बाहर निकलते ही बबलू मंडल की परेशानी बढ़ गयी.

दरअसल बबलू मंडल ने शिष्टाचार का परिचय देते हुए अपने जूते कमरे के बाहर उतार दिए थे, वापस लौटने के क्रम में उसे नहीं मिल रहे थे. शाम ढलने के साथ पीक आवर शुरू हो चुका था. समय घोड़े की रफ्तार से दौड़ रहा था. पत्रकार बबलू मंडल बदहवास होकर कमरे के बाहर यहाँ-वहाँ जूते की खोज में लग गए. आधा घंटा बीत गया लेकिन उनको जूता नहीं मिला. बबलू मंडल समझ गए कि अब उनका जूता उन्हें वापस मिलने से रहा. आख़िरकार वे मायूस होकर नंगे पैर वापस अपने दैनिक भास्कर कार्यालय लौट आये. बबलू मंडल ने अपनी छोटी सी कमाई से 800 रुपये खर्च कर हफ्ते भर पहले जूता ख़रीदा था. एक पत्रकार की इस तरह उपमुख्यमंत्री के दरबार में जूता चोरी होने की खबर को लोग चौक-चौराहों पर चुटीले अंदाज में एक दूसरे के साथ बाँट रहे हैं. कुछ लोग तो अब यह भी कहने लगे हैं कि मंदिर से भगाए जूता चोर शायद अब उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो के साथ रहने लगे हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

विधायक ने पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी!

जामताड़ा (झारखण्ड) के झामुमो विधायक विष्णु भैय्या ने एक पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी है. भुक्तभोगी पत्रकार का नाम गोपाल शर्मा है, जो स्थानीय दैनिक इंडियन पंच के संवाददाता हैं. गोपाल शर्मा ने विधायक की धमकी को गंभीरता से लिया और पूरे घटनाक्रम की सूचना जामताड़ा के आरक्षी अधीक्षक को दे दी है. गोपाल शर्मा ने अपने साथ विधायक द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की जानकारी अखबार प्रबंधन को भी दे दी है.

गोपाल शर्मा के अनुसार जब वो स्थानीय बाज़ार होते हुए अपने आवास के लिए निकल रहे थी, तभी झामुमो विधायक विष्णु भैय्या के उन्हें बुलाया. जब गोपाल शर्मा विधायक के नजदीक पहुंचे, तभी विधायक ने उन्हें गाली दी और उन्हें जान से मारने की भी धमकी दी. उनके अनुसार विधायक उक्त अखबार में अपने विरुद्ध छप रही खबर से नाराज थे. हालांकि जामताड़ा में पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार कोई नयी नयी बात नहीं है. आज से सात-आठ वर्ष पूर्व ईटीवी के जामताड़ा संवाददाता राजकमल की भी बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी. और राजकमल के सर को पत्थरों से कुचल दिया था.

मीडिया की मंडी बनने जा रहा है आगरा, लालाओं की चलेगी दुकानदारी

अब आगरा बनेगा मीडिया की मंडी। पहले आमतौर पर इंदौर को मीडिया की मंडी कहा जाता था। इंदौर शहर छोटा बाम्‍बे के नाम से भी मशहूर है, परन्‍तु अब जल्द ही आगरा मीडिया की मंडी बन जाएगा क्योंकि आगरा में जल्द ही कई नए अखबार लांच होने जा रहे हैं। अगर आगरा में खुलने वाले अखबारों पर एक नज़र घुमायी जाए तो जल्द ही आगरा में चार नए अखबार आ रहे हैं।

सबसे पहला अखबार आ रहा है एनसीआर इंडिया। उसके बाद है तस्वीर भारत और उसके बाद है नवलोक टाइम्स। दूसरी ओर अमी आधार निडर भी बीपीएन टाइम्‍स से इस्‍तीफा देकर नया अखबार लाने की तैयारी में जुटे हुए हैं, क्योंकि अमी आधार निडर के बारे में कहा जाता है कि निडर एक ऐसे पत्रकार हैं जो कभी भी हार नहीं मानता है और आगरा में धड़ाधड़ संस्‍करण लॉंच कराता है। इस सब मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई संस्‍करण फ़ेल हो जाए तो भी अमी आधार निडर की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता, वो झट से दूसरा अखबार लेकर आ जाते हैं। अक्सर कहा जाता है कि अमी आधार निडर के राधा स्वामी मत के एक ऐसे गुरु जी अच्छे संबंध हैं जो कि जरूरत पड़ने पर आगरा के सारे अखबारों को खरीद सकता है।

एनसीआर इंडिया दिल्‍ली से छपकर आगरा आएगा, वहीं तस्वीर भारत आगरा के ही शराब कारोबारी का अखबार है जो कि अभी हाल में ही निशा नरेश नाम का अखबार निकालता रहा हैं। अगर बात की जाए नवलोक टाइम्स की तो नवलोक टाइम्स एक ऐसे आदमी का अखबार बताया जा रहा है जो कि पेशेवर पत्रकार है। कहा जा रहा है कि उसके बाप परदादा भी पत्रकार थे। अमी आधार निडर भी अखबार किसी भी कीमत पर लॉंच करना चाहते हैं। दूसरी और नए अखबारों के साथ-साथ आगरा में जल्द ही तीन नए केबल भी लॉंच होने वाले हैं, जिसमें दो केबल डेन और डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूआईएल का दफ्तर आगरा में खुल चुका है, जबकि अभी हाल में इन्न केबल भी आगरा में घुसने की तैयारी में जोरशोर से जुटा हुआ है।

अगर मीडिया की बात की जाए तो आज यहां के हालात बहुत बुरे हैं। वर्तमान में भी आगरा में बहुत सारे अखबार हैं जिसमें दैनिक जागरण, अमर उजाला , हिंदुस्तान, अमर भारती, कल्पतरु, आई-नेक्‍स्‍ट, काम्‍पैक्‍ट, उजाला, सच का उजाला, बीपीएन टाइम्‍स आदि प्रमुख  अखबार हैं। इसके साथ साथ फ़ाइल कॉपी पर चलने वाले तमाम अखबार भी हैं। कुछ पत्रकारों के लिए नए मीडिया के दुकानों से फायदा है तो ज्‍यादातर के लिए परेशानी। अब नए खुलने जा रही मीडिया की दुकानों में तमाम लाला लोग अपनी दुकान चलाएंगे।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

तीन फर्जी पत्रकारों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

हजारीबाग : गिरिडीह जिला के पिरटांड़ निवासी तीन फर्जी पत्रकार रामजी तिवारी, सिकंदर तिवारी व योगेंद्र तिवारी को मुफस्सिल पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे सड़क बनाने वाली कंपनी से चंदा वसूल रहे थे। मुफस्सिल थाना प्रभारी सुजीत कुमार ने बताया कि मोरांगी स्थित फोर लेन कंपनी जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट से फर्जी पत्रकार यज्ञ के नाम पर चंदा मांग रहे थे।

सूचना के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। अन्य तीन भागने में सफल रहे। उनके पास से एक टीवीएस मोटरसाइकिल भी पुलिस ने बरामद की है। बताया जाता है कि एक पत्रिका के क्राइम रिपोर्टर बनकर कंपनी के गेट से अंदर छह फर्जी पत्रकार घुसे और कंपनी के मैनेजर भूपेंद्र जी से यज्ञ के लिए छह हजार रुपये चंदा मांगा। मैनेजर ने तीन हजार रुपये उन्हें दे दिया। शेष पैसे बाद में देने को कहा। नहीं मानने पर मैनेजर ने पुलिस को सूचना दे दी। साभार : जागरण

भारत ने अमेरिकी पत्रकार को वापस लौटाया

वीजा को लेकर भारत और अमेरिका में चल रही रस्‍साकसी में भारत ने एक अमेरिकी पत्रकार को अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही वापस अमेरिका भेज दिया. अमेरिकी पत्रकार डेविड बारसामियन के पास उचित वीजा नहीं था. पिछली बार भी भारत यात्रा के दौरान डेविड ने वीजा नियमों का उल्‍लंघन किया था.

अमेरिका की विदेश नीति की तीखी आलोचना के लिए मशहूर अमेरिकी पत्रकार और लेखक डेविड बारसामियन पिछली बार टूरिस्‍ट वीजा पर भारत आए थे तथा यहां से जाने के बाद कश्‍मीर पर एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था, ज‍बकि पत्रकारों के लिए अलग वीजा का प्रावधान होता है. इस बार भी वे टूरिस्‍ट वीजा पर ही भारत आए थे. उन्‍हें अगले हफ्ते कश्‍मीर जाना था. कश्‍मीर के एक संगठन का कहना है कि डेविड राज्‍य के मानवाधिकार पैनल के जरिए 2000 बेनामी कब्रों की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस पर काम करना चाहते थे.

मानवाधिकार मीडिया सलाहकार समूह का गठन, कई बड़े संपादक शामिल

नई दिल्ली : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिंदी और अंग्रेजी मीडिया के वरिष्ठ पत्रकारों को शामिल कर मीडिया और मानवाधिकार पर सलाहकार समूह का गठन किया है। आयोग ने इस समूह का गठन देश में मानवाधिकार के मुद्दे को ज्यादा प्रभावी ढंग से रखने में मीडिया के साथ बेहतर साझेदारी कायम करने के इरादे से किया है।

इस 12 सदस्यों वाले समूह में दैनिक जागरण के संपादक संजय गुप्त भी शामिल हैं। इनके अलावा नई दुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता, हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर, न्यूज चैनल आज तक के समाचार निदेशक कमर वाहिद नकवी, हिंदुस्तान टाइम्स के प्रधान संपादक संजोय नारायण, पीटीआइ के प्रधान संपादक एमके. राजदान और द वीक के स्थानीय संपादक केएस. सच्चिदानंद मूर्ति भी शामिल हैं। इस समूह की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष केजी. बालाकृष्णन करेंगे। साभार : जागरण

गंगटोक में पत्रकारों पर भड़के चिदंबरम, सभी को अस्‍पताल से बाहर निकलवाया

भूकम्‍प से प्रभावित सिक्किम के दौरे पर गंगटोक पहुंचे गृहमंत्री पी चिदंबरम को पत्रकारों के सवालों पर अचानक गुस्‍सा आ गया और उन्‍होंने सुरक्षाबलों से तुरंत पत्रकारों को बाहर करने का आदेश दे दिया. चिदंबरम गंगटोक अस्‍पताल में घायलों से मिलने पहुंचे थे. इस सूचना पर पत्रकार भी अस्‍पताल पहुंच गए तथा चिदंबरम से सवाल पूछने लगे. सवालों का जवाब दे रहे केन्‍द्रीय गृहमंत्री पत्रकारों पर उस समय भड़क गए, जब उन्‍होंने 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले से संबंधित सवाल दाग दिए.

2जी स्‍पेक्‍ट्रम पर पूछे गए सवालों से चिदंबरम असहज हो गए तथा पत्रकारों पर भड़क गए. पत्रकार उनसे प्रणब मुखर्जी के चिट्ठी से सन्‍दर्भित सवाल पूछे थे. उन्‍होंने अपने सुरक्षाकर्मियों को आदेश दिया कि सभी पत्रकारों को तत्‍काल अस्‍पताल से बाहर निकाला जाए. उन्‍होंने कहा कि अब वे अस्‍पताल के अंदर तभी जाएंगे जब सारे पत्रकार वहां से बाहर निकल जाएंगे. इस पर सिक्‍युरिटी वालों ने आनन-फानन में सभी पत्रकारों को अस्‍पताल से बाहर का रास्‍ता दिखा दिया.

लायंस क्‍लब ने मुंबई के दर्जनों पत्रकारों को सम्‍मानित किया

मुंबई : लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 323-ए-3 ने पत्रकारिता व लेखन के विविध क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने के लिए मुंबई के पत्रकारों (प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) तथा क्लब बुलेटिन के 22 संपादकों का सम्मान किया। गोरेगांव (पूर्व) के लैंडमार्क वेंक्वेट में क्लब बुलेटिन समिति के अध्यक्ष लायन सुशील भगेरिया, साम्प्रदायिक सौहार्द समिति के अध्यक्ष लायन कन्हैयालाल सराफ व जनसंपर्क अधिकारी लायन विपुल रांदेरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में फ़ीरोज़ अशरफ़ (स्तम्भकार), अभय मिश्र (दोपहर का सामना), आफताब आलम (पत्रकारिता कोश/मीडिया डायरेक्टरी), धर्मेश भट्ट (दिव्य भास्कर), तुलसीदास भोईटे (टीवी9), सुनील सिंह (एनडी टीवी), मुकेश कुमार मासूम (मुंबई संध्या), मनजीत सिंह कोहली (स्वतंत्र पत्रकार) तथा जगदीश जानी (द लायंस) को शॉल, श्रीफल व स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में क्लब के जिलाध्यक्ष लायन पी.एस.रामास्वामी, विशेष अतिथि के रूप में उपजिलाध्यक्ष लायन वी.सुरेंद्रनाथ व लायन सुभाष उदयपुरी तथा मुंबई शहर के अनेक पत्रकार, समाजसेवक व लायंस क्लब के सदस्य मौजूद थे। इस अवसर पर क्लब के लगभग 22 अलग-अलग समाचार बुलेटिन तथा ई-बुलेटिन का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन लायन विकास सराफ ने किया। प्रेस रिलीज

राजस्‍थान पत्रिका की युवा पत्रकार आकांक्षा राव का निधन

झीलों की नगरी उदयपुर की युवा पत्रकार आकांक्षा राव का 16 सितम्बर की रात को उपचार के दौरान अहमदाबाद में निधन हो गया। वे पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रही थी। आकांक्षा के निधन की खबर उस रात 11 बजे लगी तो पत्रिका ही नहीं अन्य पत्रकारों के आंखों से नींद गायब हो गई।

पचीस वर्षीय आकांक्षा राव राजस्थान पत्रिका में बतौर रिपोर्टर के मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, कृषि विवि, आईआईएम, उदयपुर का महाराणा प्रताप हवाई अड्डा, सौर वेधशाला सहित कई विभागों को देख रही थी। पिछले डेढ़ वर्ष में सुखाडिय़ा विवि से संबंधित कई महत्वपूर्ण व खोजपरक खबरें देने वाली आकांक्षा राव की हर फील्ड में बहुत अच्‍छी पकड़ थी। होशियारी के साथ काम करने वाले आकांक्षा का आए दिन बाई नेम स्टोरी पत्रिका में पेज वन व लास्ट पर लगती थी। इससे पहले आकांक्षा राव पत्रिका के साथ निकलने वाले ‘जस्ट उदयपुर’ की भी प्रभारी रही। विज्ञान, संचार क्रांति व अंग्रेजी में भी आकांक्षा की इतनी अच्‍छी पकड़ थी कि पत्रिका न्यूज सेक्शन के अन्य साथी उसकी मदद लेते थे।

आकांक्षा ने उदयपुर में आने वाले ख्यात व फिल्मी हस्तियों के भी कई साक्षात्कार किए, इसमें वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति अब्‍दुल कलाम, अमिताभा बच्‍चन, सलमान खान, अनिल कपूर, सैफ अली खान, करिश्मा कपूर, करीना कपूर, दलेर मेहंदी, राखी सावंत, सोनम कपूर, स्मृति ईरानी, एकता कपूर, शान, मिस इंडिया तनवी, मेघना नायडू, जावेद अख्तर, जाकिर हुसैन, पं. शिव कुमार शर्मा, दुर्गा जसराज, प. विश्व मोहन भट्ट, सितारा देवी, इसरो प्रमुख प्रो. राघवन आदि के साक्षात्कार किए।

पत्रकारिता में आने से पहले भी बनाए रिकार्ड : सुखाडिय़ा विवि से ही पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्‍म, बी.एससी (बॉयोलोजी) अच्‍छे अंकों के साथ पास की। पत्रिका में आने से पहले आकांक्षा ने पत्रिका के ही पाई एज्‍यूकेशन की स्टूडेंट रहते हुए बेस्ट स्टूडेंट का खिताब पाया। हर समय हंसमुख रहने वाली आकांक्षा ने पत्रिका में रहते हुए नेशनल लेवल पर बेस्ट लेआउट का वर्ष 2008-09 तृतीय पुरस्कार व वर्ष 2009-10 में द्वितीय पुरस्कार और संस्करण स्तर पर पांच मंथली अवार्ड प्राप्त किए। राव को वर्ष 2001 में गार्गी अवार्ड सहित कई अवार्ड मिले। पत्रिका में रहते आकांक्षा का संस्थान ने मुंबई में होने वाले रियलटी शो के कवरेज के लिए चयन किया था और आकांक्षा ने इसे बड़े उत्साह के साथ अच्‍छी तरह से कवर किया।

डॉ. तुक्तक भानावत की रिपोर्ट.

ओमकार चौधरी सहित कई लोग सम्मानित

चडीगढ़ प्रेस क्लब में विचार गोष्ठी और सम्‍मान समारोह आयोजित हुआ। इसमें विश्व परिदृश्य में हिंदी- विषय पर विचार गोष्ठी हुई। हिंदी में सराहनीय कार्य के लिए पांच विद्वानों को सम्‍मानित किया गया। सम्‍मानित होने वालों में चंडीगढ़ दूरदर्शन के निदेशक डा. कृष्ण कुमार रत्तू, साहित्यकार और शिक्षाविद सुरेश सेठ, हरिभूमि के संपादक ओमकार चौधरी, शिक्षाविद और पूर्व प्रधानाचार्य श्यामसुंदर और डीएवी स्कूल पटियाला के प्रधानाचार्य एसआर प्रभाकर शामिल हैं। इन सभी लोगों को पशस्ति पत्र, श्रीफल एवं शाल ओढ़ाकर सम्‍मानित किया गया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में -विश्व परिदृश्य में हिंदी विषय पर गोष्ठी हुई जिसमें डेमोक्रेटिक वर्ल्‍ड पत्रिका के संपादक डा.चंद्र त्रिखा ने प्रमुख वक्ता के तौर पर परचा पढ़ा। उनके मुताबिक वैश्वीकरण के इस दौर में हिंदी ने अपना स्थान बनाया है और इसके और फलने-फूलने की अपार संभावना है। हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने के लिए समयबद्ध योजनाएं बनाने और उन्हें साकार करने की जरूरत है। कहा कि विश्व के सौ से ज्यादा देशों में हिंदी पढ़ाई जाती है, इसका अर्थ है कि विश्व परिदृश्य में हिंदी का अच्छा खासा असर है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर नाटयधर्मी आत्मजीतसिंह ने की, मुख्‍य अतिथि पंजाब की समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मीकांता चावला और इंफोटेक के चेयरमैन हरजीत ग्रेवाल थे।

कार्यक्रम का आयोजन पंजाब प्रादेशिक हिंदी साहित्य संगम ने किया था। संगम के संरक्षक महंत आत्माराम, प्रधान मोहन मैत्रेय, मंत्री संतोष कुमार, सदस्य अजय शर्मा और संजीव कुमार ने सफल आयोजन के लिए सभी का आभार जताया। इस दौरान काफी संख्‍या में पत्रकार एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

चंडीगढ़ से जयश्री राठौड़ की रिपोर्ट.

उदयपुर के वरिष्‍ठ पत्रकार सुरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव का निधन

उदयपुर के वरिष्‍ठ पत्रकार सुरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव का शनिवार की सुबह निधन हो गया. वे लगभग 62 साल के थे. वे पिछले 35 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय थे. उनकी गिनती उदयपुर के कद्दावर पत्रकारों में की जाती थी. सुरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव ने ब्लिट्ज, आर्थिक घोष एवं प्रभात किरण जैसे अखबारों को अपनी सेवाएं दीं. वे डेढ़ दशक तक आर्थिक घोष के उदयपुर ब्‍यूरो चीफ रहे. उनके निधन की सूचना से उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई.

आईजेयू ने पत्रकार डेविड देवदास की पिटाई मामले में प्रेस काउंसिल से जांच की अपील की

Hyderabad : The Indian Journalists Union (IJU) has appealed to the Press Council of India (PCI) to take up inquiry into the case of “brutal assault” allegedly by security personnel on senior journalist and author David Devadas on September 5 in Srinagar.”The unprovoked and brutal assault” on Devadas amounted to attack on the freedom of media, IJU said in a letter addressed to PCI Chairman Justice G N Ray.

The letter has been signed by IJU President S N Sinha and Secretary-General Devulapalli Amar.”The assault was meant to scare away journalists. The arrogance of the security personnel was exposed when they registered a case against Devadas alleging that he attacked them with an intent to kill,” they said.”We urge upon the Government of Jammu and Kashmir to give adequate security cover to the scribe,” an IJU statement said here today.Devdas, author of `In Search of a Future, the Story of Kashmir’, has alleged that he was taken to a police station in Sringar where he was assaulted by policemen. (PTI)

गलत इस्‍तेमाल से मीडिया की छवि खराब होती है : जीएन रे

गुड़गांव। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जीएन रे ने मीडिया की निष्पक्षता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं हो कि इसका गलत इस्तेमाल किया जाए। वे शुक्रवार को गुड़गांव में मीडिया और प्रशासन विषय पर विचार गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मीडिया निष्पक्ष रूप से काम करे और देश के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही को निभाए।

बकौल रे मीडिया की छवि उस समय खराब होती है जब मीडियाकर्मी उचित तरीके से काम नहीं करते और पैसा लेकर लोगों को गलत सूचना देते हैं। इससे देश के लिए बहुत बड़ी समस्या पैदा होती है। भारतीय प्रेस परिषद ने कहा कि मीडिया और लोकतंत्र के तीन स्तंभ एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी रचनात्मक भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि आदर्श स्थिति यह होगी कि मीडिया युक्तियुक्त, सामजिक और आर्थिक विकास में उत्प्रेरक भूमिका निभाए, जिसके बिना अच्छा प्रशासन संभव नहीं है। ट्रिब्यून के समूह संपादक राज चेंगप्पा ने कहा कि लोगों की यह सोच सही लगती है कि मीडिया केवल शहरी इलाकों की ही खबरें देता है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि देश अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और ऐसे समय में मीडिया को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कहा कि आज की राजनीति ज्यादातर मीडिया पर आधारित हो गई है। इस गोष्ठी का आयोजन भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के हरियाणा चैप्टर और हरियाणा लोकप्रशासन संस्थान द्वारा किया गया। संस्थान की महानिदेशक रजनी सेखरी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

गुड़गांव से दीपक खोखर की रिपोर्ट.

श्रीनिवासन रमानी को अप्‍पन मेनन पत्रकारिता पुरस्‍कार

इकोनामिक्‍स एंड पॉलिटिकल वीकली के सीनियर असिस्‍टेंट एडिटर श्रीनिवासन रमानी को इस साल का अप्‍पन मेनन मेमोरियल अवार्ड से प्रदान किया जाएगा. श्रीनिवासन को यह पुरस्‍कार ”नेपाल में नई लोकतात्रिक व्‍यवस्‍था और भारत का रोल” विषय पर बेहतर कवरेज के लिए दिया जा रहा है. वरिष्‍ठ पत्रकार अप्‍पन मेनन की याद में हर साल यह पुरस्‍कार युवा पत्रकारों को प्रदान किया जाता है.

श्रीनिवासन दिल्‍ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों पर पीएचडी कर रहे हैं. इस पुरस्‍कार के तहत उन्‍हें एक लाख रुपये नकद एवं प्रशस्‍ति पत्र प्रदान किया जाएगा. यह पुरस्‍कार अप्‍पन मेनन ट्रस्‍ट की ओर से प्रदान किया जाता है. गौरतलब है कि अप्‍पन मेनन जाने माने पत्रकार थे. उन्‍होंने एडीटीवी, हिंदू, फ्रंटलाइन, पीटीआई तथा यूएनआई को अपनी सेवाएं दी थीं.

पत्रकार उत्‍पीड़न मामला : कुमायूं के आयुक्‍त ने दिए जांच के आदेश

: पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश : उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिल के मदकोट कस्बे में दैनिक जागरण के पत्रकार पवन बत्रा को खनन माफियाओं द्वारा धमकी दिए जाने के मामले में कुमायूं मंडल के आयुक्‍त ने पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने तथा पवन बत्रा को सुरक्षा सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया है. उन्‍होंने जांच के बाद राजस्‍व पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश भी दिया है.

उल्‍लेखनीय है कि मदकोट में दैनिक जागरण के पत्रकार पवन बत्रा ने सात सितम्बर को गोरी नदी में हो रहे अवैध खनन की खबर लिखी थी. खबर के अनुसार 15 सितम्बर तक राज्य में नदियों में खनन पर प्रतिबंध होता है, इसके बावजूद खनन का कार्य जारी था. इस खबर के बाद खनन व्यवसाय से जुडे़ प्रदीप रावत ने अन्य खनन माफियों के साथ पत्रकार के मदकोट स्थित प्रतिष्‍ठान पर धावा बोला तथा उनके साथ मारपीट की. प्रतिष्‍ठान में तोड़फोड़ की गई हुई तथा उनकी पत्नी को नग्न घुमाने की धमकी दी गयी. उनकी पत्‍नी को भी प्रताडि़त करने की कोशिश की गई.

इस मामले में पत्रकार पवन बत्रा ने सात सितम्बर, 2011 को राजस्व पुलिस में मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर उपजिलाधिकारी मुनस्यारी को दी, परन्‍तु अब तक मामला दर्ज नहीं किया गया है. पत्रकार को अगवा करने का भी प्रयास किया गया. इसके बाद उसने पुलिस को तहरीर दी, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अगवा करने का एफआईआर दर्ज करने की बजाय गाली-गलौच करने, धमकी देने जैसी सामान्य घटना दिखाते हुए इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 232, 504, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया तथा जेल भेजा. इसके बाद भाजपा के तमाम लोग खनन माफियाओं को बचाने में सक्रिय हो गए तथा पत्रकार को भी खाप पंचायत के आधार पर पांच दिन में इलाका छोड़ने का फरमान जारी कर दिया गया.

एक पत्रकार के साथ होने वाले उत्‍पीड़न को देखते हुए श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने पूरे मामले में नाराजगी जताया तथा पत्रकार का उत्‍पीड़न रोके जाने की मांग की. इसके बाद यूनियन के महासचिव प्रयाग पाण्‍डेय के नेतृत्‍व में एक प्रतिनिधिमंडल कुमायूं मण्‍डल के आयुक्‍त से मिला तथा पूरे मामले की जानकारी दी. इसके बाद आयुक्‍त ने पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले की मजिस्‍ट्रेटी जांच कराने तथा पत्रकार पवन बत्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. उन्‍होंने यह भी निर्देश दिया है कि जांच के बाद राजस्‍व पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया जाए.

पुणे में पत्रकार को जान से मारने की धमकी

पुणे में पिछले कई वर्षों से स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाले जुझारु पत्रकार ओमप्रकाश पाण्‍डेय को फोन पर जान से मार देने की धमकी मिली है। इस संबंध में पाण्‍डेय ने पुणे के पुलिस आयुक्त और राज्य के गृहमंत्री को पत्र भेजकर सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। ओमप्रकाश पाण्‍डेय ने अपने पत्र में लिखा है कि गत दिनों उन्हें खबर मिली थी कि पुणे रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ द्वार जनरल कोच के यात्रियों से जबरन धन उगाही की जाती है।

इस खबर को कैमरे में कैद करने के लिए वे पुणे स्टेशन गए थे और फोटोग्राफी भी की थी। इस फोटोग्राफी का आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा ने कड़ा विरोध किया था। इस संबंध में जब समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित हुआ तो अरुण मिश्रा और बौखला गए और उन्होंने अपने रिश्तेदार विनोद पाण्‍डेय के माध्यम से उन्हें जान से मारने की धमकी भी दिलवाई। इसी संबंध में किसी भोसले नामक व्यक्ति ने भी पाण्‍डेय फोन पर जान से मार देने और चुपचाप बैठने की धमकी दी ऐसा पाण्‍डेय ने अपने पत्र में उल्लेखित किया है।

पुणे से लवकुश तिवारी की रिपोर्ट.

संघर्ष और जनजागरण में कमजोर पड़ रहे हैं लघु-मध्‍यम समाचार पत्र : रमेश शर्मा

: आइसना ने की आलोक तोमर की स्‍मृति में पुरस्‍कार देने की घोषणा : प्रदीप श्रीवास्‍तव, यशवंत सिंह, डा. पुरुषोत्‍तम मीणा, सुप्रिया राय समेत दो दर्जन से ज्‍यादा पत्रकार सम्‍मानित : लघु और मध्यम समाचार पत्रों में राष्ट्र की मूल छवि देखने को मिलती है, इन समाचार पत्रों को जन जागरण का अभियान चलाना चाहिए क्योंकि यह दौर संघर्ष का है, जिसमें हम कमजोर हो रहे हैं। उक्त बातें राष्ट्रीय एकता परिषद के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कही।

श्री शर्मा मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आल इंडिया स्माल न्यूज पेपर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। आइसना द्वारा स्थानीय रवीन्द्र भवन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में पांच ख्यातिनाम पत्रकारों को राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान, आठ वरिष्ठ पत्रकारों को विशिष्ट पत्रकारिता सम्मान तथा प्रदेश के 10 नामचीन पत्रकारों को राज्य स्तरीय पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चन्द्र वर्मा ने कहा कि आज पत्रकारिता की कोई परिभाषा नहीं रह गयी है। उन्होंने कहा कि जुगाड़ू लोग जिन्हें एक लाइन लिखना नहीं आता आज वे अच्छे पत्रकारों की बिरादरी में घुस आये हैं।

श्री वर्मा ने कहा कि समाज के हर स्तर पर नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है तो पत्रकारिता इससे अछूती कैसे रह सकती है। समारोह को संबोधित करते हुए प्रखर वक्ता एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र पाल सिंह ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में पत्रकारिता के वर्तमान परिवेश और चुनौतियों को रेखांकित किया। इस अवसर पर आइसना के प्रांतीय अध्यक्ष अवधेश भार्गव ने वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय आलोक तोमर की स्मृति में 25 हजार रुपये के नगद पुरस्कार की घोषणा भी की।

राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान से स्वर्गविभा मुंबई की डा. तारा सिंह, प्रेसपालिका जयपुर के डा. पुरूषोत्तम मीणा ‘‘निरकुंश’’, भड़ास फार मीडिया डाट कॉम दिल्ली के यशवंत सिंह, डेट लाइन इंडिया दिल्ली की सुप्रिया राय, दैनिक स्वतंत्र वार्ता निजामाबाद के स्थानीय संपादक प्रदीप श्रीवास्तव को भी सम्मानित किया गया। विशिष्ट पत्रकारिता सम्मान से 10 पत्रकारों को जिसमें जय श्रीवास्तव इण्डिया न्यूज, भरत सेन स्वतंत्र पत्रकार, राम विलास शर्मा चंबल सुर्खी, त्रयम्बक शर्मा कार्टूनिस्ट, सुनील गुप्ता दैनिक जागरण, डॉ. शशि तिवारी सूचना मंत्र, स्व. सुरेश खरे को मरणोपरांत, लक्ष्मीनारायण उपेन्द्र स्वतंत्र पत्रकार, कुंदन अरोरा स्वतंत्र पत्रकार, सम्मानित किये गये। साथ ही 11 पत्रकारों प्रान्तीय पत्रकारिता सम्मान में विनोद उपाध्याय दैनिक अग्रिबाण, रामकिशोर पंवार दैनिक पंजाब केसरी, अनिल बिहारी श्रीवास्तव ई.एम.एस., लोकेन्द्र सिंह राजपूत भारत समाचार, सुरेन्द्र सिंह अरोरा दैनिक फ्री प्रेस, विवेक श्रीवास्तव दैनिक नई दुनिया, सीताराम ठाकुर दैनिक राज एक्सप्रेस, अनिल दीक्षित पीपुल्स समाचार, शालिगराम शर्मा स्टार समाचार, ओम सरावगी टी.ओ.सी.न्यूज कटनी, अमर नौरिया विज्ञापन की दुनिया को  सम्मानित किया गया।

समारोह में मुख्य रूप से आइसना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएस त्रिपाठी, राष्ट्रीय संगठन सचिव सीव्ही मजूमदार, राष्ट्रीय सचिव सुश्री आरती त्रिपाठी, आइसना के प्रांतीय अध्यक्ष अवधेश भार्गव, महासचिव विनय जी. डेविड, उपाध्यक्ष लोकेश दीक्षित, आरएस शर्मा, गुड्डू मालवीय, सुभाष शर्मा, रवीन्द्र निगम, सलीम खाड़ीवाला, चन्द्रशेखर भालसे, आरएम चौबे, प्रवीण मिश्रा व बलराम सेन सहित कई सैकड़ा पत्रकार साथी उपस्थित थे। प्रेस रिलीज

टाइम्‍स नाउ को कई पदों के लिए योग्‍य पत्रकारों की जरूरत

अंग्रेजी न्‍यूज चैनल टाइम्‍स नाउ को देश के छह शहरों में दर्जनों पदों पर पत्रकारों की जरूरत है. चैनल ने एक विज्ञापन देकर मुंबई, नोएडा, बंगलुरू, कोलकाता, जयपुर एवं पटना के लिए करेस्‍पांडेंट के लिए आवेदन आमंत्रित किया है. चैनल को भिन्‍न शहरों के लिए भिन्‍न पदों के लिए सक्षम पत्रकारों की आवश्‍यकता है.

चैनल को विभिन्‍न शहरों के लिए सीनियर एडिटर, न्‍यूज एडिटर, डिप्‍टी न्‍यूज एडिटर, सीनियर प्रोड्यूसर, डिप्‍टी एक्‍जीक्‍यूटिव प्रोड्यूसर, न्‍यूज एंकर, रिसर्चर, सीनियर रिसर्चर, गेस्‍ट एवं प्रोग्राम कोआर्डिनेटर, प्रिंसिपल/स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट, एसोसिएट प्रोड्यूसर, प्रोड्यूसर, प्रोमो प्रोड्यूसर सहित कई अन्‍य पदों के लिए योग्‍य उम्‍मीदवारों की आवश्‍यकता है. पदों के बारे में जानन के लिए नीचे दिए गए फोटो पर क्लिक करके पढ़े.

आगरा के वरिष्‍ठ पत्रकार नरेश बिहारी माथुर का निधन

आगरा के वरिष्‍ठ पत्रकार नरेश बिहारी माथुर का नई दिल्‍ली के एक अस्‍पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. वे अस्‍सी साल के थे. दो दिन पहले आगरा में एक सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्‍हें आगरा के एक हास्‍पीटल में भर्ती कराया गया, जहां हालत नाजुक होने पर उन्‍हें दिल्‍ली रेफर कर दिया गया था.

मा‍थुर आंध्र प्रदेश में टाइम्‍स आफ इंडिया को काफी समय तक अपनी सेवाएं दी थी. वे टूरिज्‍म पत्रकारिता के पुरोधा थे. वे युवा पत्रकारों के लिए अपने आखिरी समय तक मार्गदर्शक बने रहे. गुरुवार को आगरा के ताज गंज श्‍मशान घाट पर उनका अंतिम संस्‍कार किया गया. इस दौरान काफी संख्‍या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और उनके जानने वाले मौजूद रहे.

डीजीपी ने जांच होने तक पत्रकार की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

भोपाल : उज्‍जैन के पत्रकार पवन उपाध्याय के खिलाफ शासकीय चिकित्सक डा. संतोष कोतकर द्वारा पुलिस से मिलकर झूठा प्रकरण दर्ज कराने के संबध में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा के नेतृत्व में पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के डीजीपी एसके राउत एवं अतिरिक्ति संचालक जनसंपर्क रज्जू राय से मुलाकात की व इस मामले में अधिकारी द्वय को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

इस पर श्री राउत ने तत्काल आईजी उज्जैन को दूरभाष पर निर्देशित किया कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाये। जांच की रिपोर्ट आने तक पत्रकार पवन उपाध्याय की गिरफ्तारी नहीं करने के निर्देश दिये। प्रदेश अध्यक्ष शारदा ने मध्यप्रदेश शासन के गृह (पुलिस) के आदेश दिनांक 06 जनवरी 2010 का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी पत्रकार के विरूद्ध अपराध के पंजीयन के बाद चालान लिये जाने के पूर्व प्रकरणों में उपलब्ध साक्ष्य की समीक्षा पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक द्वारा की जायेगी। समीक्षा में यह सुनिश्चित कर लिया जाये की संबधित पत्रकार/मीडिया के व्यक्ति को दुर्भावना वश या तकनीकी किस्म के प्रकरण स्थापित कर परेशान तो नहीं कर रहै है।

इस आदेश का हवाला भी पुलिस महानिदेशक एसके राउत ने अपने कनिष्‍ठ सहयोगियों को दिया। उन्‍होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्‍वस्‍त किया कि पत्रकार पवन उपाध्‍याय के मामले की जांच निष्‍पक्षतापूर्वक की जाएगी. प्रतिनिधिमंडल में शारदा के साथ पत्रकार आनंदकुमार, जगदीश प्रसाद शर्मा, पुरूषोत्तम चौबे समेत कई और लोग भी शामिल रहे।

पत्रकार राम प्रसाद बहुगुणा के नाम पर पुरस्‍कार देगी उत्‍तराखंड सरकार

उत्‍तराखंड सरकार हर वर्ष एक पत्रकार को उसके उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए पुरस्‍कृत करेगी. पुरस्‍कार के लिए योग्‍य पत्रकार का चयन मुख्‍य सचिव की अध्‍यक्षता में गठित एक कमेटी करेगी. इस संबंध मे सूचना विभाग ने शासनादेश जारी कर दिया है. सीएम की घोषणा के अनुपालन में पत्रकारों को पुरस्‍कृत करने की योजना बनाई गई है. यह पुरस्‍कार दिवंगत पत्रकार राम प्रसाद बहुगुणा की स्‍मृति में प्रदान किया जाएगा.

राज्‍य के सचिव उमाकांत पंवार द्वारा जारी शासनादेश में बताया गया है कि राम प्रसाद बहुगुणा की स्‍मृति को चिर स्‍थायी बनाए रखने के लिए इस राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार का गठन किया जा रहा है. इस पुरस्‍कार के चयनित पत्रकार को स्‍मृति चिन्‍ह एवं 51 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी. पुरस्‍कार प्रतिवर्ष 30 मई को पत्रकारिता दिवस पर प्रदान किया जाएगा. पुरस्‍कार पाने की पहली शर्त है कि पत्रकार की आयु न्‍यूनतम 55 वर्ष होनी चाहिए. पूर्णकालिक पत्रकार के रूप में उसे काम करते हुए कम से कम 25 वर्ष का अनुभव होना चाहिए. साथ ही वो पत्रकार उत्‍तराखंड में कम से कम 15 वर्षों तक नियमित रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हो. चयन प्रक्रिया के अनुसार पत्रकार का व्‍यवसाय पूर्णत: पत्रकारिता होना चाहिए साथ ही उसके सामाजिक, सांसकृति, ऐतिहासिक, विकास एवं रचनात्‍मक विषयों पर नियमित लेख प्रकाशित हुए होने चाहिए.

चयन प्रक्रिया की शर्त पूरा करने वाले पत्रकारों का नामांकन अखबारों के माध्‍यम से किया जाएगा. योग्‍य पत्रकार के चयन के लिए मुख्‍य सचिव की अध्‍यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रमुख सचिव, सचिव, सूचना महानिदेशक, प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के एक-एक पत्रकार तथा एक वरिष्‍ठ साहित्‍याकार रहेंगे.

व्‍यावसायिकता में गुम होते राष्‍ट्रबोध को पत्रकार ही बचा पाएंगे

: भोपाल में पत्रकारों का दो दिवसीय सम्‍मेलन आयोजित : वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा आयोजित नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन गत चौबीस एवं पच्‍चीस अगस्त को रवीन्द्र भवन भोपाल में सम्पन्न हुआ। ”पत्रकारिता में राष्ट्रबोध और स्वातंत्रय वीर सावरकर”  विषय पर केन्द्रित इस सम्मेलन में पत्रकारिता में राष्ट्रबोध के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पत्रकारिता के उच्‍चतम मापदण्डों का पुनर्स्‍मरण तो किया ही गया साथ ही इन दिनों ”राष्ट्रबोध” से महती उस पत्रकारिता की चर्चा भी की गई जो व्यावसायिकता की होड़ में अपने आदर्शों और सिद्घान्तों को खोती जा रही है।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के जाजल्यमवान नक्षत्र स्वातंत्रय वीर सावरकर के अवदान के माध्यम से इस अधिवेशन में वक्ताओं ने पत्रकारिता और आत्म बलिदान के रिश्तों के पारिभाषित करने और इस माध्यम से राष्ट्रीयता के तत्व की पुनर्प्रतिष्ठा की बात भी कही। अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क एवं संस्कृति मंत्री, लक्ष्मीकान्त शर्मा ने सरकार और पत्रकार जगत के अर्न्तसम्बन्धों की चर्चा की और इन्हें अन्योन्याश्रित बताते हुए पत्रकारिता के उत्थान को सरकार के प्राथमिक दायित्वों में से एक बताया। श्री शर्मा ने अधिवेशन के लिए विषय चयन की प्रशंसा करते हुए आयोजकों को बधाई दी कि वे स्वातंत्रय वीर सावरकर के बलिदान के माध्यम से पत्रकारिता में राष्ट्रबोध के अलख को जगाना चाहते हैं वो आज की सबसे अहम जरूरत है। श्री शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में पत्रकारिता के महत्व को स्वीकार करने और विकास की रीति नीति तय करते समय पत्रकार जगत के सुझावों को महत्व देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि अधिवेशन में पत्रकार जगत की समस्याओं पर चिंतन-मनन के बाद जो एक निष्कर्ष पत्र बनेगा उस पर माननीय मुख्यमंत्री जी से विचार विमर्श कर अनुकूल निर्णय लिये जाएंगे।

इस सत्र में नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस के कायर्कारी अध्यक्ष श्री प्रेमशंकर अवस्थी ने इस अधिवेशन को पत्रकारिता के क्षेत्र में उपस्थित मूल्यों के संकट की स्थिति में स्वतंत्रता संग्राम के समय की स्थितियों से प्रेरणा प्राप्त कर समाधान की ओर बढ़ना बताया। उन्होंने अपने प्रभावी संबोधन में अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी के अवदान की चर्चा करते हुए कहा कि व्यावसायिकता की आँधी में गुम होते राष्ट्रबोध को पत्रकार ही बचा पाएंगे। प्रेमशंकर जी ने सत्ता से साथ पाने के लिए लालायित पत्रकारों को आडे़ हाथों लेते हुए यह स्पष्ट किया कि ”प्रेस नोट”  के सहारे पत्रकारिता लम्बे समय तक नहीं चलती है। उद्घाटन सत्र में ही वरिष्ठ पत्रकार और मध्य प्रदेश राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा ने आजादी की लड़ाई में स्वातंत्रय वीर दामोदर विनायक सावरकर के अवदान का पुण्य स्मरण करते हुए बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के उक्त दौर में पत्रकारिता, राष्ट्र बोध का ही पर्याय थी और उस राष्ट्र बोध में ही जन-जन में स्वतंत्रता की ललक पैदा की थी।

अधिवेशन सत्र की अध्यक्षता दैनिक नई दुनिया, भोपाल के संपादक ओमप्रकाश मेहता ने की और मध्य प्रदेश गौसम्वर्धन बोर्ड के अध्यक्ष शिव चौबे इस सत्र में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। यूनियन के अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने अतिथियों का स्वागत भाषण पढ़ा और महासचिव महेन्द्र सिंह पंवार ने संगठन की भावी रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशि तिवारी ने किया और अतिथियों के प्रति आभार आदित्य नारायण उपाध्याय ने व्यक्त किया।

राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसर सत्र में सुदूर अंचल से आये पत्रकारों ने अपनी बातें कहीं। मध्य प्रदेश गौपालन बोर्ड के अध्यक्ष शिव चौबे और रमेश शर्मा इस सत्र में विशेष अतिथि थे। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राधावल्लभ शारदा ने की। कार्यक्रम का संचालन सलिल मालवीय ने किया। इस सत्र में पत्रकारों ने आंचलिक स्तर पर कार्य करने वाले पत्रकारों की समाचार संकलन में आने वाले दिक्कतों, विभिन्न बाहुबलियों के खिलाफ खबरें छापने पर आशंकित खतरों, पत्रकारों को पुलिस द्वारा परेशान करने और अधिमान्यता व अन्य सुविधाओं के बारे मे भी खुलकर और विस्तृत चर्चा की। इस खुले अधिवेशन में छोटे एवं मध्यम समाचार पत्रों और उनके मालिकों, सम्पादकों एवं पत्रकारों के आर्थिक संरक्षण और तदनुरूप विज्ञापन नीति की भी चर्चा की।

पच्‍चीस अगस्त को स्वराज भवन, भोपाल में नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन हुआ। नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आर.आर. गोस्वामी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रेमशंकर अवस्थी, सेकेट्री जनरल, राधावल्लभ शारदा की उपस्थिति और मध्य प्रदेश गौसम्वर्धन बोर्ड के अध्यक्ष शिव चौबे के विशेष आतिथ्य में सम्पन्न हुआ इस राष्ट्रीय अधिवेशन में पूरे देश की प्रांतीय इकाईयों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। नेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्टस की इस राष्ट्रीय बैठक में पत्रकारों के कल्याण पर विचार कर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जिसे ”भोपाल घोषणा पत्र”  का नाम दिया गया। दो दिवसीय इस आयोजन में बड़ी संख्या में अन्य प्रातों से पत्रकारों ने भाग लिया। शिव चौबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस अधिवेशन में विचारों का मंथन हुआ और अमृत निकला, राष्ट्रबोध और सावरकर के राष्ट्र ऋण की याद दिलाई।

उन्होंने बताया कि मानव तीन ऋण लेकर पैदा होता है। उन्होंने आगे कहा राजनीति में सेवाभाव होना जरूरी है और साथ ही साथ कथनी और करनी में भी अन्तर होना चाहिए। उन्होंने सरकार की योजना बताने के साथ-साथ ग्रामीण पत्रकारों की पीड़ा मैं समझता हूं भी कहा। मीडिया की भी उन्होंने प्रशंसा की और कहा कि मीडिया ने जो भूमिका आपातकाल में निभाई थी वह आज निभा रहा है,  हमारा दर्द व्यक्त कर रहा है। वर्किंग जर्नलिस्टस यूनियन द्वारा आयोजित पत्रकारों के इस सम्मेलन में जहां आप देश के विभिन्न भागों से आये वहां म.प्र. के ग्रामीण अंचलों से आये विभिन्न पत्रकारों की भी भागीदारी रही है। मध्‍य प्रदेश में पत्रकारों में वैसे तो कई आयोजन होते हैं राष्ट्रीय एवं प्रांतीय। इस आयोजन में पत्रकारों को विचार के लिये जो विषय रखा गया राष्ट्रबोध और पत्रकारिता। इसका सीधा अर्थ है पत्रकारों को सबसे पहले देश के बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि मैं भी एक पत्रकार रहा हूं और इसी राजधानी में इंदौर से प्रकाशित स्वदेश का संवाददाता रहा हूं। ग्रामीण अंचल का होने के कारण ग्रामीण पत्रकारों के दुख दर्द को अच्‍छे से समझता हूं।

हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने पत्रकारों के लिये विशेष ध्यान दिया है और इस काम के लिये उन्होंने अपने सहयोगी माननीय लक्ष्मीकान्त जी को ये दायित्व दे रखा है। जिस तरह से लक्ष्मीकान्त को पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखने का दायित्व दिया। उसी तरह वर्किंग जर्नलिस्ट प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा जी मेरे पास पत्रकारों के स्वास्थ्य हेतु आर्थिक सहायता एवं उनके उत्पीड़न के प्रसंग लाते हैं। जिन्हें मैं माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास प्रस्तुत करता हूं और उनके निर्देशानुसार उन प्रकरणों पर उचित कार्यवाही हेतु भेजता हूं। म.प्र. में कई संगठन हैं और उनके कई नेता हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पत्रकारों को सम्बोधित करने ले जाते हैं,  ऐसे नेता जो निस्वार्थ भाव से अपने साथियों की मदद करते हैं। यदि ऐसे गुण सभी में आ जाये तो समाज की अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को लाभ मिलेगा। मैं आप सभी का स्वागत करता हूं अभिनन्दन करता हूं।

इस अधिवेशन में आर.आर.गोस्वामी, अहमदाबाद (गुजरात), प्रेम शंकर अवस्थी, फतेहपुर (उत्तरप्रदेश),  विनोद कुमार पांचाल, पानीपत (हरियाणा),  लीलाधर शर्मा, फाजिल्का (पंजाब),  योगराज भाटिया, भिलाई (छत्तीसगढ), शिवकुमार शर्मा (नई दिल्ली),  निशांतभाई, नागपुर (महाराष्ट्र),  देवेंन्द्र शर्मा, मैनपुरी (उत्तरप्रदेश), राज गोस्वामी, बिलासपुर (छत्तीसगढ),  अनिल च्‍यानी, कटहेडा, फाजिल्का (पंजाब),  एम.कृष्ण कुमार, हैदराबाद, (आंध्र प्रदेश),  निर्मल यादव, फतेहपुर ( उत्तरप्रदेश ),  शाम कामरा, पानीपत (हरियाणा), महेश कुमार तिवारी, बिलासपुर (छत्तीसगढ), अशोक चुघ, समालखा, पानीपत (हरियाणा),  कु.भावना बिष्‍ट, होशंगाबाद (मध्य प्रदेश), एस बाबू, आर आर बाबू, ए.एस.एगाबंरम, के.रधिनबेवल, हरिराम चौरसिया, राजेशकुमार, अनुपमादास, एम एम उपाध्याय, अमिताभ मिश्रा, अशोक नेहरू, अरूण जैन, महेन्द्र पंवार, सलिल मालवीय, अरूण वंछोर, डॉ.शशि तिवारी, गुरुशरण शर्मा, राम मेहरा, पवन शर्मा, आई आर कनन, सुरेन्द्र साहू, कृष्णकुमार एवं म.प्र.के विभिन्न अचंलों से आए पत्रकार शामिल थे। प्रेस रिलीज

जहां गई वहां बलात्‍कार, पत्रकार समेत पांच गिरफ्तार

हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में पुलिस ने एक युवती के साथ बलात्कार करने और उसे देह व्यापार के धंधे में उतारने के आरोप में रेलवे सुरक्षा बल(आरपीएफ) के दरोगा और पत्रकार समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक लव कुमार ने बताया कि करीब एक साल पहले जिले के मल्लावों इलाके की रहने वाली शहनाज को उसका बहनोई जबरन अजमेर ले गया था। उसने लड़की को देह व्यापार के धंधे में लगा दिया था।

उन्होंने बताया कि वह लड़की किसी तरह अजमेर से भाग आई और हरदोई रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो आरपीएफ पोस्ट पर तैनात एक दरोगा बी डी राम की नजर उस पर पडी़ और उसने एक महिला के सहयोग से अपने पास बुलाया और जैसे ही उसे उसके मामले और मजबूरी की जानकारी मिली। राम ने लड़की की रक्षा करने बजाय उसे अपने सरकारी आवास पर ले गए और उसे बंधक बनाकर रख लिया। आरपीएफ के दरोगा ने उसके साथ बलात्कार किया और जब लड़की गर्भवती हो गई तो दवा से उसका गर्भ गिरवा दिया गया।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी दरोगा ने गर्भ गिरवाने के बाद लड़की को देह व्यापार के लिए एक महिला के हवाले कर दिया जहां उसकी मुलाकाल एक मीडियाकर्मी शाहनवाज हुसैन से हुई। शाहनवाज ने उसे शादी करने का झांसा दिया और किराए के कमरे में उसे रखा और उसके साथ कई बार बलात्कार करता रहा।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पडो़सियों ने लड़की की मदद का भरोसा दिया तो उसने आपबीती सुनाई। पडो़सी द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने पर आरपीएफ के दरोगा बी डी राम, पत्रकार शाहनवाज हुसैन, लाता सिंह, सोनी और मनोरमा मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। इस सिलसिले में आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और देह व्यापार का मामला दर्ज करा दिया गया है। पुलिस अन्य अरोपियों की तलाश कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। साभार : आईबीएन खबर

पिंक सिटी प्रेस क्लब में रंगबाजी, पहले धुना फिर घर तक पहुंचाया

वैसे तो पत्रकार कलम के सिपाही माने जाते हैं, लेकिन कभी कभी वे मारपीट पर भी उतर आते हैं और तमाशा बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ मंगलवार की रात को जब जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में, वहां अचानक कोहराम मच गया। मारपीट हुई, जाम के साथ-साथ बोतलें भी चलीं और कुर्सियों पर भी गुस्‍सा उतारा गया। इस मारपीट के खलनायक रहे भास्‍कर के प्रवीण्‍ा दत्‍ता, जिन्‍होंने ईटीवी के राकेश मिश्रा को जमकर पीटा।

किसी बात पर हुई टेंशन के बाद प्रवीण दत्ता ने राकेश मिश्रा को जमकर धोया, जिससे राकेश को काफी चोटें आईं। मारने पीटने के बाद प्रवीण फिर अपनी गाड़ी से राकेश को घर तक छोड़ भी आए। इधर प्रेस क्लब भी मामले पर तन गया है। रात को तो प्रेस क्लब दोनों पक्षों की गर्मी देखकर चुप रह गया,  लेकिन अब उसने भी बोलने का मूड बना लिया है।

बहरहाल मारपीट या रंगबाजी का कोई पहला मामला नहीं है स्थानीय पत्रकारों की मानें तो वहां प्रेस क्लब में इस तरह की वारदात कई बार हो चुकी हैं। बुधवार को करीब साढ़े पांच बजे प्रेस क्‍लब की बैठक बुलाई गई,  जिसमें सर्वसम्मति से प्रवीण दत्ता को दोषी माना गया और सजा के तौर पर उन्हें बीस हजार का जुर्माना और एक साल की सदस्यता रद्द करने का फरमान सुनाया गया। इस संदर्भ में जब प्रवीण दत्‍ता का पक्ष जानने के लिए कॉल किया गया तो उन्‍होंने फोन रिसीव नहीं किया।

सड़क हादसे में घायल वरिष्‍ठ पत्रकार पुरुषोत्‍तम सैलानी को दो दिन बाद भी नहीं आया होश

पंचकूला : वरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तम सैलानी दो दिन पहले एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर में गभीर चोट आई। उन्हें तुरंत सेक्टर-२१ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन होने के बाद भी उन्‍हें होश नहीं आया है। उनका एक आपरेशन हो चुका है इसके बावजूद डाक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति अभी खतरे से बाहर नहीं है। कुछ दिन पहले ही उन्होंने दुपहिया चलाना शुरू किया था।

जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया और स्कूटर न संभलने से वे सिर के बल गिर पड़े। परिवार के लोगों में चिंता बनी हुई है। पत्रकारों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। सैलानी दो दशक से पत्रकारिता में है। वे दिल्ली प्रेस की प्रमुख पत्रिकाओं में नियमित लेखक हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न पत्रिकाओं में उनके लेख छपते रहते हैं। पंचकूला जिले में फीचर लेखक के रूप में उनकी पहचान बरसों से है। वे जमीन से जुड़े हुए पत्रकार के तौर पर अपने को आंकते हैं और इससे आगे बढऩे का कभी प्रयास नहीं किया। जो भी लिखते हैं धड़ल्ले से लिखते रहे हैं। हरियाणा यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स की पंचकूला जिला इकाई उनके जल्द स्वस्थ होकर घर आने की कामना की है। उत्तर क्षेत्र में अच्छे लेखक के रूप में उन्हें उनकी पहचान होती है। सभी उनके ठीक होने की दुवाएं कर रहे हैं।

पंचकूला से जयश्री राठौर की रिपोर्ट.

पीआर कंपनी के अधिकारी ने टीवी पत्रकार को दी जान से मारने की धमकी

दिल्‍ली के श्रीनिवासपुरी थाने में एक स्‍थानीय पीआर कंपनी के अधिकारी पर जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई गई है. यह शिकायत एक टीवी चैनल के पत्रकार पुनीत भारद्वाज ने दर्ज कराई है. पुनीत ने पुलिस को बताया है कि उसे फोन पर जान से मारने की धमकी दी गई. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

पुनीत ने पुलिस को बताया कि ब्रैंड्योर कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी के अधिकारी ने सुबह ग्‍यारह बजकर चार मिनट पर अपने निजी नंबर से फोन किया तथा उन्हें जान से मारने की धमकी दी. पुनीत ने यह भी बताया कि इसी अधिकारी ने चेन्‍नई में रहने वाली उनकी बहन को भी फोन करके के धमकी दी है. जबकि इस मामले में आरोपी बनाए गए हरीश चावला ने इस तरह की किसी भी बात से इनकार किया है.

पुनीत ने पुलिस को बताया कि बीते शनिवार को चार बजे इसी कंपनी के एक दूसरे अधिकारी ने भी अपने निजी नम्‍बर से उन्‍हें फोन किया और धमकियां दीं. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने पुनीत को आश्‍वस्‍त किया है कि धमकी का आरोप सही पाए जाने पर किसी को बख्‍शा नहीं जाएगा. उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

सांसद के फर्जी पत्र के सहारे आईपीएस के खिलाफ जांच कराने वाला पूर्व पत्रकार गिरफ्तार

हैदराबाद के पूर्व पत्रकार को चार सौ बीसी के आरोप में क्राइम इनवेस्‍टीगेशन डिपार्टमेंट ने गिरफ्तार किया है. इस पत्रकार पर राज्‍य सभा सदस्‍य का फर्जी हस्‍ताक्षर करके एक सीनियर आईपीएस के खिलाफ जांच कराने का आदेश देने का आरोप है. कोर्ट ने उसे न्‍यायिक हिरासत में भेज दिया है.

जानकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश के गृह मंत्रालय को राज्‍य सभा सदस्‍य एमए खान का हस्‍ता‍क्षरित एक पत्र मिला, जिसमें यूनियन होम सेक्रेटरी को भेजा गया था, जिसमें राज्‍य के वरिष्‍ठ आईपीएस अधिकारी एवं डाइरेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस वी दिनेश रेड्डी पर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई थी. पत्र में लिखा गया था कि वी दिनेश रेड्डी काफी जमीन खरीदा है तथा डील किया है, जिसमें गलत तरीके का इस्‍तेमाल किया गया है.

एमपी का पत्र मिलने के बाद इसकी जांच शुरू की गई. इस संदर्भ में जब एमपी से सम्‍पर्क किया गया तो उन्‍होंने इस तरह का कोई भी पत्र भेजने से इनकार करते हुए आश्‍चर्य जताया. इसके बाद इसकी असलियत पता लगाने की जिम्‍मेदारी सीआईडी को सौंपी गई. जांच पड़ताल के बाद सीआईडी ने सुनील रेड्डी को पकड़ा. इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने उसे न्‍यायिक हिरासत में भेज दिया है.

बंधक बनाए गए तीस पत्रकारों को रिहा किया गया

लीबियाई की राजधानी त्रिपोली में मुअम्मर गद्दाफी के वफादार बंदूकधारियों द्वारा त्रिपोली के एक होटल में बंधक बनाए गए विदेशी पत्रकारों को रिहा कर दिया गया है.  लीबिया संघर्ष की कवरेज करने वाले विदेशी पत्रकार तीन दिनों तक गद्दाफी के निवास स्‍थान के पास स्थित होटल ‘रिक्‍सोस’ में फंसे रहे. विदेशी पत्रकारों की संख्‍या तीस थी.

कई देशों के पत्रकार कुछ दिन पहले लीबिया में चल रहे संघर्ष की कवरेज के लिए पहुंचे थे परन्‍तु गद्दाफी समर्थकों ने इन्‍हें होटल रिक्‍सोस में रविवार को बंदी बना लिया. ये पत्रकार होटल के पहले तल पर रुके हुए थे. इन लोगों ने हेलमेट तथा बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी. इन्‍होंने होटल की दीवारों पर एक बैनर टांग दिया था, जिस पर लिखा था ‘टेलीफोन प्रेस पर गोली मत चलाइए’. ऐसा होटल की दीवारों पर कई गोलियां लगने के बाद किया गया था. बंधक बनाए गए सभी विदेशी पत्रकारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.

दिनदहाड़े बदमाशों ने महिला मीडियाकर्मी का चेन और मंगलसूत्र छीना

मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने एक महिला मीडियाकर्मी की चेन और मंगलसूत्र छीन कर भाग निकले. कई लोगों की मौजूदगी में दिनदहाड़े हुए इस छिनैती की घटना में कोई भी बदमाशों को पकड़ने की हिम्‍मत नहीं दिखा सका. महिला मीडियाकर्मी ने घटना की शिकायत पांडव नगर थाने में दर्ज करा दी है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

सोमवार की दोपहर मीडियाकर्मी सुनीता गोविंद मयूर विहार फेस टू के पाकेट सी के मेन गेट के पास सब्‍जी खरीद रही थीं. वे सब्‍जी वाले से मोलभाव कर ही रही थी कि पीछे से एक मोटरसाइकिल पर सवार दो बदमाशों में से एक ने सुनीता के गले में पड़े चेन और मंगलसूत्र को हाथ से पकड़ कर खींच लिया. सुनीता अभी कुछ समझ पाती उसके पहले ही बदमाश चेन और मंगलसूत्र लेकर फरार हो गए. दिन दहाड़े घटी इस घटना से सभी लोग हतप्रभ हो गए.

जब यह घटना घटी आसपास काफी लोग मौजूद थे, परन्‍तु किसी ने दोनों बदमाशों को रोकने या पीछा करने की कोशिश नहीं की. सुनीता गोविंद स्‍वयं मीडियाकर्मी होने के साथ वरिष्‍ठ पत्रकार केजी सुरेश की बहन भी हैं. उन्‍होंने इस घटना की शिकायत पांडव नगर थाने में करते हुए दो अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया है. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है परन्‍तु अब तक बदमाशों का कोई पता नहीं चल पाया है.

हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के पत्रकार भी अन्‍ना के समर्थन में अनशन पर बैठे

अन्ना हजारे के भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जनलोकपाल लाए जाने के लिए चल रहे आंदोलन को सहयोग देने के लिए अब हरियाणा के पत्रकार भी खुलकर सामने आ गए हैं। इस क्रम में हिसार के पत्रकार हवासिंह शिवांश अपने पुत्र लोकेश शिवांश के साथ सोमवार को पुराना राजकीय कॉलेज के मैदान में अनशन पर बैठे। अनशन के दौरान हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की हिसार जिला इकाई के पदाधिकारी तथा सदस्यों ने भी अन्ना हजारे के आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए धरना दिया।

एचयूजे की प्रदेश इकाई के विशेष सचिव नरेश सेलपाड़ ने इस अनशन को सांकेतिक बताया तथा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अन्ना की मांगों को जल्द न माना गया तो यह अनशन 30 अगस्त के बाद अनिश्चितकालीन किया जा सकता है। उन्‍हों ने घोषणा की कि देश की भलाई तथा भ्रष्टाचार के खात्मे को लेकर चल रही लड़ाई में प्रत्येक व्‍यक्ति उस अन्‍ना के साथ है जो आम जनता के हितों को लेकर संघर्षरत हैं।

अनशनकारी हवासिंह शिवांश ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो 30 अगस्त के बाद जेल भरो आंदोलन में भी वे सबसे आगे रहेंगे। धरने-अनशन पर एचयूजे के वरिष्ठ उपप्रधान जगदीप श्योराण, सचिव महेंद्र सपरा, कोषाध्यक्ष सूर्या गोयल, महेश मेहता, बंसीलाल बासनीवाल, अशोक मोनालिसा, हुनेश्वर प्रसाद, कुलदीप रावलवासिया, प्रवीण त्यागी, रमेश वर्मा, सतपाल अग्रवाल, सुरेश शिवांश, अनिल भादू सहित अनेक पत्रकारगण मौजूद थे।

दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश के मध्‍य जोन मंडी में भी मंडी प्रेस क्‍लब के सदस्‍य भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना के समर्थन में अनशन पर बैठे। पत्रकार समाजसेवी अन्ना हजारे के जन लोकपाल बिल को सही ठहराते हुए उनके अनशन का समर्थन करते हुए मंगलवार को 24 घंटों का अनशन किया। प्रेस क्लब की ओर से सोमवार को ही इस सिलसिले में आपातकालीन बैठक आयोजित की गई थी और यह तय किया गया था कि मंडी प्रेस क्लब के साथी न केवल सोमवार शाम को मंडी अंगेस्ट क्रप्शन के बैनर तले निकलने वाले कैंडल जलूस में शामिल होंगे, बल्कि मंगलवार को 24 घंटों की भूख हड़ताल भी करेंगे।

अनशन पर बैठे मंडी के पत्रकार

प्रेस क्लब की ओर से प्रधान और जनसत्ता के संवाददाता बीरबल शर्मा, उपप्रधान एवं दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रभारी रणबीर ठाकुर, महासचिव एवं अमर उजाला के विधि संवाददाता समीर कश्यप, कोषाध्यक्ष एवं आपका फैसला के पत्रकार जतिंद्र कुमार, दैनिक भास्कर के ब्यूरो प्रभारी एवं लोक कवि विनोद भावुक, रजनी देवी ने ऐतिहासिक सेरी मंच पर सुबह 11 बजे अपना अनशन शुरू किया। उधर अन्ना के समर्थन में पिछले आठ दिनों से अनशन पर बैठे देश राज भी पूर्व पत्रकार हैं। वह लंबे समय तक दैनिक दिव्य हिमाचल के जिला प्रभारी रहे हैं, वहीं शिमला और दिल्ली में पंजाब केसरी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

सेक्‍स रैकेट चलाने वाला पत्रकार पत्‍नी समेत गिरफ्तार

यूपी में बरेली पुलिस ने जिस्म सौंपकर ग्राहकों से लूटपाट करने वाले कॉलगर्ल रैकेट का भंडाफोड़ किया है.  पुलिस के अनुसार इस सेक्‍स रैकेट को राजधानी लखनऊ से प्रकाशित होने वाले एक अखबार के तथाकथित पत्रकार और उसकी पत्नी संचालित कर रहे थे. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है तथा दो अन्‍य लोगों को पूछताछ के लिए पकड़ा है.

पुलिस उपमहानिरीक्षक प्रकाश डी के मुताबिक शहर कोतवाली के पाश इलाके रामपुर गार्डन के निवासी अवकाश प्राप्त सहायक चीनी आयुक्त तथा बारादरी क्षेत्र के ग्रीनपार्क कॉलोनी निवासी एक समृद्ध व्यापारी ने पुलिस को शिकायत की थी कि एक कॉलगर्ल द्वारा नशीला पदार्थ सुंघाकर नगदी और जेवर लूट लिया गया है. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों व्‍यक्तियों द्वारा उपलब्‍ध कराए गए नम्‍बर को सर्विलांस पर लगा दिया.

सर्विलांस पर लगे नम्बर के आधार पर पुलिस ने कथित पत्रकार राहुल शर्मा और उसकी पत्‍नी पूनम उर्फ प्रीति तक पहुंची. दोनों को गिरफ्तार करके उनके पास से चार लाख इकतालीस रुपये से अधिक कीमत के जेवर, सिक्‍के, नगदी और अन्‍य कीमती सामान बरामद किया. प्रकाश डी ने बताया कि राहुल शर्मा और उसकी पत्‍नी द्वारा चलाए जा रहे इस सेक्‍स रैकेट के तहत ग्राहक के बुलावे पर कालगर्ल उसके घर पहुंची कालगर्ल पहले अपना जिस्‍म सौंपती और फिर नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने के बाद नगदी और जेवरात लेकर चंपत हो जाती थी.

डीआईजी ने बताया कि यह गिरोह अब तक कई लोगों को अपना शिकार बना चुका था. ज्‍यादातर लोग बदनामी के डर से पुलिस के पास अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, जिसका पूरा फायदा इस गिरोह ने उठाया. गिरोह के दो अन्‍य सदस्‍यों को क्रमश: बरेली और शाहजहांपुर से हिरासत में लिया गया है. उनसे भी पुलिस इस रैकेट के बारे में पूछताछ कर रही है. पुलिस का कहना है कि शीघ्र ही कुछ और लोगों को हिरासत में लिया जाएगा.

पाली में पत्रकारों के साथ भाजपाइयों ने की मारपीट, आरोपी पुलिस पकड़ से बाहर

राजस्‍थान के पाली शहर में बांगड़ अस्‍पताल के ट्रामा सेंटर में एक हादसे की कवरेज करने मीडियाकर्मियों के साथ भाजपा जिलाध्‍यक्ष एवं उसके सहयोगियों ने मारपीट की. नाराज पत्रकारों ने जिलाध्‍यक्ष एवं उसके सहयोगियों के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत की है. परन्‍तु अभी तक गिरफ्तारी न होने से पत्रकारों में नाराजगी है.

जानकारी के अनुसार पाली के सिंधी कालोनी में एक मकान की बालकनी गिरने से कुछ लोग घायल हो गए थे, जिन्‍हें बांगड़ अस्‍पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था. उसी घटना का कवरेज करने सहारा समय के रिपोर्टर सुभाष रोहिशवाल, टीवी99 के रिपोर्टर दिनेश डुलगच, राजस्‍थान पत्रिका के प्रेस फोटोग्राफर शेखर राठौड़, एचबीसी चैनल के रिपोर्टर श्‍याम चौधरी व दैनिक नवज्‍योति के विक्रम परिहार अस्‍पताल पहुंचे. जब वे लोग अस्‍पताल पहुंचे तो भाजपा जिलाध्‍यक्ष महेंद्र बोहरा, शहर अध्‍यक्ष किशोर साबू, वरिष्‍ठ भाजपा नेता महेंद्र गोयल समेत दस लोगों ने मीडियाकर्मियों से बदतमीजी शुरू कर दी.

पहले कवरेज में बाधा उत्‍पन्‍न किया गया. जब मीडियाकर्मियों ने कहा कि उन्‍हें अपना काम करने से न रोका जाए तो भाजपाइयों ने पत्रकारों के साथ मारपीट शुरू कर दी. पत्रकारों ने इसकी जानकारी अपने सहयोगियों को दी. तत्‍काल कई पत्रकार अस्‍पताल पहुंचे. इन लोगों से भी भाजपाइयों की गरमागरम बहस हुई. इसके बाद सभी पत्रकार एसपी से मिलकर लिखित शिकायत की, जिसके बाद एसपी अजयपाल लाम्‍बा ने जांच कराकर मामले में उचित कार्रवाई का आश्‍वासन दिया. एसपी के निर्देश पर पत्रकारों का मामला शहर के कोतवाली थाना में दर्ज हुआ.

घटना के चौबीस घंटे बाद भी आरोपी भाजपाई पुलिस पकड़ से बाहर हैं. इस घटना से नाराज पत्रकारों ने इस मामले से सीएम अशोक गहलोत, उनके मीडिया सलाहकार को अवगत करा दिया है. पत्रकारों ने निर्णय लिया है कि आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक राजकीय समाचारों का बहिष्‍कार किया जाएगा. प्रेस क्‍लब पाली के उपाध्‍यक्ष जितेंद्र कच्‍छवाह के नेतृत्‍व में आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया गया है. जार ने भी सीएम को पत्र प्रेषित कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

हाई कोर्ट ने फर्जी पत्रकारों की याचिका खारिज की

फर्जी पत्रकार बनकर एक व्‍यक्ति से रकम वसूलने की कोशिश करने के मामले में दो युवकों को हाई कोर्ट ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया है. दोनों युवकों ने कोर्ट में याचिका देकर अपने खिलाफ मामला रद्द करने की अपील की थी. परन्‍तु कोर्ट ने दोनों युवकों के अपराध को समाज के खिलाफ बताते हुए याचिका खारिज कर दी.

कृष्‍णा नगर थाना में शिकायतकर्ता सुरेंद्र पाल ने 29 अप्रैल 2009 को इन दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया था कि इलाके में रहने वाले दो व्‍यक्ति अपने को पत्रकार बता कर उसके भवन निर्माण को रोक रहे हैं. निर्माण कराने के एवज में उसे 50 हजार रुपये मांग रहे हैं. और धमकी दे रहे हैं कि उन्‍हें पैसे नहीं मिले तो वे एमसीडी की अधिकारियों से शिकायत करके निर्माण कार्य ठप करा देंगे. इसके बाद पुलिस ने इन दोनों लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है.

इस मामले में दोनों आरोपियों ने हाई कोर्ट में यह कह कर मामला रद्द करने की याचिका दी थी कि उनका शिकायतकर्ता से समझौता हो चुका है. इस याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों में समझौते के बाद अदालत प्राथमिकी को रद्द कर सकती है, परन्‍तु यह देखना जरूरी होता है कि कहीं अपराध समाज के खिलाफ तो नहीं था, और अदालत को लगता है कि यह अपराध समाज के खिलाफ है. इसलिए ये याचिका खारिज की जाती है.

बीरबल शर्मा बने मंडी प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष, समीर कश्‍यप महासचिव

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के मंडी प्रेस क्लब का चुनाव संपन्न हो गया। इस चुनाव को लेकर आखिरी समय तक आपसी समझ बनाने के प्रयास होते रहे फिर भी हालात ऐसे बने कि प्रधान पद और कोषाध्यक्ष पद के लिए सहमति होने के बावजूद मतदान करवाना पड़ा। आखिरी पलों में हुई तनातनी में अध्यक्ष पद के दो प्रत्याशियों अजय कुमार और रूप उपाध्याय सहित कुछ लोगों ने प्रेस क्लब की प्राथमिक सदस्यता सदस्यता से त्यागपत्र तक दे दिया।

इसके बाद प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद पर सबकी सहमति से बीरबल शर्मा को चुना गया और रणबीर ठाकुर को उपाध्‍यक्ष बनाया गया। दोनों हमीरपुर जिला से संबंध रखते हैं। बीरबल शर्मा बेशक आखिर में सबकी सहमी से अध्यक्ष बने हों लेकिन रूप उपाध्याय जैसे मजबूत उम्मीदवार के चलते आखिर तक उनकी सांसें अटकी रहीं और आखिर दो दिन वह डिनर डिप्लोमेसी के सहारे अपने लिए वोट मांगते रहे। समय पर चुनाव न करवा पाने के आरोपों में घिरी पिछली कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की फिर से चुनाव लडऩे की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया,  लेकिन फोटोग्राफर से पत्रकार की भूमिका में आने वाले जतिंद्र कुमार,  जो पिछली कार्यकारिणी में सहसचिव थे, इस बार फिर से बतौर कोषाध्यक्ष कार्यकारिणी में जगह पाने में कामयाब रहे।

महासचिव पद पर इस बार एडवोकेट समीर कश्यप के रूप में एक जाना परखा महासचिव मिला है। जिला बार एसोशिएशन में बतौर महासचिव अपनी शानदार पारी खेलने वाले समीर कश्यप को महासचिव बनाने में आम सहमति रही। चुनाव में यह भी कम रोचक नहीं रहा कि महिला अधिकारों की बात करने वाले पत्रकारों ने कोषाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रही एकमात्र महिला पत्रकार को कार्यकारिणी में स्थान देने को अपनी शान के खिलाफ समझा। सारे चुनाव पर मानों प्रदेश की सत्तासीन सरकार की नजर थी। यही कारण है कि सीएम का दूत कहा जाने वाला मंडी का एक युवा भाजपा नेता पत्रकारों के इस चुनाव की मॉनीटरिंग करता रहा।

मीडियाकर्मियों पर फायरिंग मामला : पंजाब के पत्रकार उबले, भठिंडा में रोष मार्च

दैनिक जागरण के फोटो जर्नलिस्‍ट रणधीर बॉबी व सीएनईबी के कैमरामेन गुरदास सिंह पर प्राइवेट ठेकेदार अमरजीत सिंह हैप्‍पी द्वारा गुंडों समेत कातिलाना हमले के विरोध में ठेकेदार को ब्‍लैक लिस्‍ट करने व उसके दिए सरकारी ठेके रदद करने की मांग करते हुए बठिंडा के पत्रकारों ने बठिंडा प्रैस क्‍लब की अगुवाई में रोष मार्च निकाला। फायर ब्रिगेड चौक से शुरु हुआ रोष मार्च कोर्ट रोड, बस स्‍टैंड से होते हुए मिनी सचिवालय डिप्‍टी कमिश्‍नर के दफ्‍तर पहुंचा।

पत्रकारों के रोष प्रदर्शन व मुख्‍यमंत्री प्रका‍श सिंह बादल के नाम मांग पत्र सौंपने के बारे में डिप्‍टी कमिश्‍नर को पहले ही बता दिया गया था, इसके बावजूद पत्रकारों के मिनी सचिवालय में पहुंचते ही डिप्‍टी कमिश्‍नर कमल किशोर यादव वहां से चलते बने। जब डीसी से फोन पर संपर्क किया गया तो डीसी ने कहा कि वह 2 बजे से बाहर हैं,  जबकि उनके कार्यालय के कर्मचारियों ने पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल को बताया कि डीसी पांच मिनट पहले ही दफ्‍तर से गए हैं। इस पर पत्रकारों का गुस्‍सा फूट पडा और उन्‍होंने इसे सरकार के इशारे पर ठेकेदार को सरंक्षण देने का आरोप लगाते हुए डिप्‍टी कमिश्‍नर के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी। इसी दौरान एसडीएम संदीप ऋषि भागे-भागे वहां पहुंचे और मेमोरंडम देने को कहा लेकिन पत्रकारों ने इससे इनकार कर दिया तथा वहां से नारेबाजी करते हुए डिप्‍टी कमिश्‍नर के आवास के बाहर रोष प्रदर्शन किया।

रोष मार्च निकालते पत्रकार

इसके बाद एक्‍शन कमेटी व बठिंडा प्रैस क्‍लब के अध्‍यक्ष एसपी शर्मा की अगुवाई में प्रशासन के मुकम्‍मल बायकाट का निर्णय लिया गया। यही नहीं, पत्रकारों ने ऐलान किया कि अगर प्रशासन ने इस शर्मनाक रवैये पर माफी न मांगी व मांग पत्र न लिया तो वह शुक्रवार को अन्‍ना हजारे के समर्थन में होने वाली अकाली-भाजपा की रैली का भी बहिष्‍कार करेंगे। इसमें अकाली दल के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व प्रदेश के उपमुख्‍यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की भी हिस्‍सा लेने की संभावना है। पत्रकारों के साथ प्रशासन के शर्मनाक व्‍यवहार के खिलाफ बठिंडा में सामाजिक, धार्मिक संगठनों समेत सभी लोगों ने आक्रोश जताते हुए इसे निंदनीय करार दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से अब आने वाले दिनों में सरकार की मुसीबतें बढ़ने की संभावना बन गई है क्‍योंकि बठिंडा में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट के मामले में वीरवार को पूरे पंजाब के विभिन्‍न जिलों में रोष प्रदर्शन कर डिप्‍टी कमिश्‍नरों को मांग पत्र सौंपा जा चुका है।

डीसी के घर के सामने धरना देते पत्रकार

उधर, श्री मुक्‍तसर साहिब जिले में पत्रकारों ने डिप्‍टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के समक्ष मामला उठाते हुए साफ कहा कि आरोपी ठेकेदार अमरजीत सिंह हैप्‍पी सरकारी ठेकेदार है तथा वह खुद को सरकार का नजदीकी बताने के साथ यह भी कहता है कि 15 दिन पहले सुखबीर बादल उसके घर आ चुके हैं। इस पर सुखबीर ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, अगर ठेकेदार ने गलती की है तो उसके खिलाफ कानून मुताबिक सख्‍त कार्रवाई की जाएगी। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि मौजूदा डिप्‍टी कमिश्‍नर कमल किशोर यादव पहले भी बठिंडा में बतौर म्‍यूनिसिपल कार्पोरेशन कमिश्‍नर तैनात रह चुके हैं। उस दौरान उन पर लैंड माफियाओं से सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं। अब ताजा मामले में ठेकेदार को सरंक्षण देने का खुलासा होने के बाद इस पर मोहर लग रही है। इसी वजह से पत्रकार समुदाय का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

आरोपी ठेकेदार को गिरफ्तार करने की मांग, कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने घटना की निंदा की

बठिंडा : मॉडल टाउन में पुलिस की मौजूदगी में बुधवार को फायरिंग व पथराव की कवरेज कर रहे दैनिक जागरण के फोटो जर्नलिस्ट रणधीर बॉबी व सीएनईबी  न्यूज चैनल के कैमरामैन गुरदास सिंह पर किए गए हमले की पत्रकारों ने कड़ी निंदा की है। पत्रकारों ने आरोपी प्राइवेट ठेकेदार अमरजीत सिंह हैप्पी को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की है। घटना से नाराज पत्रकारों ने आज सर्किट हाउस में बैठक कर दिनदहाड़े पुलिस के समक्ष हुई गुंडागर्दी पर नाराजगी जाहिर की।

दूसरी तरफ चंडीगढ़ में मौजूद पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बठिंडा में मीडियाकर्मियों और किसानों पर हुई कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की आंखों के सामने मीडियाकर्मी पर बाहरी व्यक्ति द्वारा गोलीबारी करना बेहद चिंतनीय है। कैप्टन ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब पंजाब में सरकार से बेखौफ होकर आम आदमी को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशासन और कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है।

इधर मीडियाकर्मियों पर हमले की जानकारी मिलते ही बठिंडा अस्पताल पहुंचे विधायक हरमिंदर जस्सी ने कहा कि कुछेक सत्ताधारी नेताओं की शह पर ही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया कर्मियों के साथ इस तरह की वारदात को अंजाम दिया गया है। वहीं नाराज पत्रकारों ने चेतावनी दी कि अगर आरोपी ठेकेदार के खिलाफ जल्‍द से जल्‍द कारगर कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

बैठक में हरजिंदर सिद्धु, रविंदर वासुदेव, बलविंदर शर्मा, चरनजीत भुल्लर, सुखजिंदर मान, मनीष शर्मा, यशपाल वर्मा, गुरदीप मान, राज्यदीप, विजय वर्मा, अनिल वर्मा, कंवलजीत सिंह बराड़, गुरतेज सिद्धू, कंवलजीत सिद्धू, नरिंदर शर्मा, वरिंदर राणा, एसएस सोनू, अखिलेश बंसल, अशोक वर्मा, राजेश नेगी, गौरव कालड़ा, तेजिंदर भुल्लर, जब्बार खान, परमिंदर, प्रवीन सिंगला, राम सिंह गिल, सुखजीत सिंह, जसकरन मीत, नैब सिंह सिद्धू, इकबाल सिंह, पवन शर्मा, शमशेर ढिल्लों, सुशील गोयल, अमित शर्मा, गोबिंद सैनी, हरकिशन शर्मा समेत कई मीडियाकर्मी मौजूद थे।

पत्रकारों पर हमला : कठोर कार्रवाई न होने से नाराज मीडियाकर्मियों ने धरना दिया

उत्‍तराखंड के उत्‍तरकाशी में पायलट बाबा आश्रम में मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुलिस एवं प्रशासन द्वारा नरमी दिखाए जाने से नाराज पत्रकारों ने कलक्‍ट्रेट में दो घंटे तक धरना दिया तथा कार्रवाई न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी. पुलिस के रवैये से पत्रकारों में रोष है.

उल्‍लेखनीय है कि स्वतंत्रता दिवस पर खबरों के सिलसिले में सैंज स्थित पायलट बाबा आश्रम में पहुंचे कुछ मीडियाकर्मियों के साथ आश्रम प्रबंधन के कर्मचारियों ने मारपीट की थी, जिसमें कई पत्रकार जख्‍मी हुए थे. पत्रकारों की शिकायत पर पुलिस के मारपीट करने वाले आरोपियें के खिलाफ हल्की फुल्की धारा लगाकर दिया,  जिससे सभी को कोर्ट में जमानत मिल गई.

मीडियाकर्मियों तथा अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने जिला एवं पुलिस प्रशासन की इस कार्यप्रणाली पर रोष प्रकट करते हुए कलक्ट्रेट में दो घंटे तक धरना दिया. नाराज मीडियाकर्मियों ने जिलाधिकारी के माध्‍यम मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भेजा और पुलिस के खुले संरक्षण में पल रहे इन अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने, थाना प्रभारी मनेरी का स्थानांतरण करने तथा उनके आश्रम से संबंधों की जांच, आश्रम में ठहरने वाले विदेशी नागरिकों की जांच तथा वहां के कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन की स्थिति की जांच करवाने की मांग की है.

पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने तक रोजाना एक घंटा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा. अगर तब भी बात नहीं बनी और मीडियाकर्मियों को न्‍याय नहीं मिला तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा.  धरने में वरिष्ठ पत्रकार सूरत सिंह रावत, प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रताप सिंह रावत, राजेंद्र भट्ट, सुनील नवप्रभात, संतोष भट्ट, पुष्कर सिंह रावत, लोकेंद्र सिंह बिष्ट, पंकज गुप्ता, देवेंद्र रावत, जयप्रकाश राणा, भाजयुमो जिलाध्यक्ष नवीन पैन्यूली, महामंत्री कमल किशोर जोशी, दिनेश भट्ट सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.

पुलिस के सामने ठेकदार ने पत्रकारों पर दागी गोलियां, दो मीडियाकर्मी घायल

बठिंडा डेवलपमेंट अथारिटी (बीडीए) के मॉडल टाउन फेज 4 व 5 के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर बुधवार को जमकर बवाल हुआ. पुलिस की मौजूदगी में एक ठेकेदार ने अपने साथियों संग गुण्‍डागर्दी करते हुए पत्रकारों को लक्ष्‍य कर गोलियां चलाईं. उसने दैनिक जागरण के फोटोग्राफर रणधीर बॉबी पर भी हमला किया, सीएनईबी का कैमरामैन गुरदास सिंह भी घायल हो गया.

जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठियां बरसाई. एसडीएम संदीप ऋषि, बीडीए असिस्टेंट चीफ एडमिनिस्ट्रेट उमाशंकर गुप्ता, एएसपी विक्रमजीत सिंह भट्टी, डीएसपी विक्रमजीत सिंह व भारी तादाद में पुलिस फोर्स के साथ मौजूद थे. इन सभी के सामने ही ठेकेदार हैप्‍पी ने पत्रकारों को लक्ष्‍य करके अपने साथियों के साथ गोलियां दागी. अधिकारी एवं पुलिसकर्मी इस गुंडागर्दी को रोकने की बजाय मूकदर्शक बने रहे.

दरअसल, बीडीए के दो फेजों के लिए अधिग्रहीत की जा रही जमीन में 41 एकड़ का मामला हाईकोर्ट में चल रहा था.  हाईकोर्ट ने जमीन मालिकों की याचिका खारिज कर दी थी. कुछ दिन पूर्व बीडीए ने कार्रवाई करते हुए लगभग 16 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर ली थी,  बाकी बची 27 एकड़ जमीन कब्जा करने के लिए बीडीए की टीम बुधवार सुबह 10:00 बजे भारी तादाद में पुलिस फोर्स समेत वहां पहुंच गई.  जब टीम ने वहां कब्जा लेने की कार्रवाई की तो भड़के जमीन मालिकों ने एक जेसीबी मशीन में तोड़फोड़ कर डाली.  इससे नाराज पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया.

इसी दौरान वहां घटना को कवर करने पत्रकार भी पहुंच गए थे. साथ ही बीडीए व पुडा का ठेका लेने वाला ठेकेदार अमरजीत सिंह उर्फ हैप्‍पी भी अपने साथियों के साथ धमका. हाथ में पिस्‍टल लिए ठेकेदार पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में कानून की धज्जियां उड़ाते हुए फायरिंग शुरू कर दी. उसके साथियों ने किसानों पर पथराव शुरू कर दिया. मीडियाकर्मी जब इस घटना का फोटो और विजुअल बनाने लगे तब हैप्‍पी इन लोगों की तरफ लक्ष्‍य करके गोलियां दागनी शुरू कर दी. मीडियाकर्मियों ने किसी तरह नीचे लेटकर अपनी जान बतचाई.

हैप्‍पी के गुण्‍डों ने जागरण के फोटोग्राफर रणधीर बॉबी एवं सीएनईबी के कैमरामैन गुरदास सिंह पर हमला कर दिया, जिससे वे जख्‍मी हो गए. दोनों का इलाज सरकारी अस्‍पताल में करवाया गया.  कई जमीन मालिक भी घायल हुए हैं. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मूक दर्शक बने रहे और हैप्‍पी इनके सामने ही कानून की ऐसी तैसी करता रहा. अधिकारी ठेकेदार को रोकने की बजाय पत्रकारों को ही रोकना शुरू कर दिया. कवरेज करने पर भी एतराज जताया.  इधर, हैप्‍पी आराम से अपने साथियों के साथ फरार हो गया. उसके जाने के बाद पुलिस ने लगभग दो दर्जन किसानों को हिरासत में लेकर थाना कोटफत्‍ता में बंद कर दिया और बीडीए की जमीन पर कब्‍जा कर लिया.

मामला इसलिए भी गंभीर है कि बठिंडा में जिला मजिस्‍ट्रेट ने धारा 144 लगा रखी है, इसके बावजूद ठेकेदार गुंडों समेत रिवाल्‍वर लेकर सरेआम वहां आ धमका और जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे जमीन मालिकों व मीडिया कर्मियों की तरफ रिवाल्‍वर तानकर पांच फायर किए.  इनमें 3 खोखा पुलिस बरामद कर लिया है. एसएसपी डा. सुखचैनन सिंह गिल ने कहा कि आरोपी ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं. पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के ड्यूटी में कोताही एवं लापरवाही बरतने की जांच की जा रही है.

उधर, घटना की खबर मिलते ही मीडिया कर्मियों में रोष फैल गया.  मीडियाकर्मियों ने सर्किट हाउस में बैठक के बाद पांच सदस्‍यीय एक्‍शन कमेटी का गठन कर किया है,  जिसमें द ट्रिब्‍यून के गुरदीप मान, दैनिक जागरण के अरविंद श्रीवास्‍तव, अजीत के हुक्‍मचंद शर्मा, नवां जमाना के बख्‍तौर ढिल्‍लों व न्‍यूज 24 के किरनजीत रोमाणा को शामिल किया गया है.  जिले के सभी पत्रकारों ने आगे का एक्‍शन प्‍लान तैयार करने के लिए इस कमेटी को सारे अधिकार दे दिए हैं. पत्रकारों के रोष को देखते हुए पुलिस महकमें में हडकंप मच गया है तथा मामले को रफा-दफा करने के लिए कई पत्रकारों को पुलिस अफसर फोन कर ताजा हालात की जानकारी लेने के साथ समझौते की गुंजाइश तलाश रहे हैं.

पत्रकारों का कहना है कि एक तरफ समाज सेवी अन्‍ना हजारे को गिरफ्‍तार कर केंद्र सरकार व दिल्‍ली पुलिस ने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है, जिसकी देश व्‍यापी निंदा हो रही है, वहीं बठिंडा में लोकतंत्र के चौथे स्‍तंभ कहे जाने वाले मीडिया कर्मियों पर पुलिस की मौजूदगी में बर्बर कार्रवाई व गुंडों की मारपीट की घटना से फिर से लोकतंत्र कलंकित हुआ है. वह भी तब जब पंजाब के मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, डिप्‍टी सीएम सुखबीर बादल बठिंडा को अपना घर बताते हैं और डिप्‍टी सीएम की सांसद पत्‍नी हरसिमरत कौर बादल का लोकसभा क्षेत्र भी बठिंडा ही है.

पत्रकार की पत्‍नी संदिग्‍ध परिस्थितियों में मृत मिली

बिहार के बांका जिला के कटोरिया थाना क्षेत्र में एक पत्रकार जयप्रकाश चौधरी की पत्‍नी कंचन का शव उसके घर के पास से मिला है. चालीस वर्षीय कंचन मंगलवार से ही लापता थी. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर रही है. अभी तक मौत के कारणों का पता नहीं चला है. शव को पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.

जानकारी के अनुसार कंचन मंगलवार की दोपहर ही अचानक गायब हो गई थी. उसके ससुराल वालों ने उसकी काफी खोजबीन की परन्‍तु कुछ पता नहीं चला. रिश्‍तेदारी नातेदारी में भी पूछताछ की गई परन्‍तु कंचन का कुछ भी पता नहीं चला. आज दोपहर अचानक कुछ लोगों ने कंचन का शव देखा, जिसकी सूचना उन्‍होंने जयप्रकाश चौधरी के परिजनों को दी. इसकी सूचना परिजनों ने पुलिस को दी.

मौके पर गई पुलिस ने शव को अपने कब्‍जे में ले लिया है. उसकी मौत कैसे हुई है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. अभी यह भी स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया है कि कंचन की हत्‍या की गई है या किसी अन्‍य कारण से उसकी मौत हुई है. संदिग्‍ध मौत को देखते हुए पुलिस शव को पीएम के लिए भेज दिया है. पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है, और इसकी जांच की जा रही है.

वंदना टेटे एवं बीरेंद्र कुमार को झारखंड सरकार देगी पत्रकारिता सम्‍मान

‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’  और ‘जोहार सहिया’  की प्रकाशक एवं प्रधान संपादिका वंदना टेटे को झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को विकासात्मक आदिवासी पत्रकारिता के लिए सम्मानित करने की घोषणा की है. इसी के साथ नागपुरी त्रैमासिक पत्रिका ‘गोतिया’  के संपादक बीरेन्द्र कुमार सहित हिंदी के पत्रकारों को भी सरकार पुरस्कृत करेगी.

सम्मान के तहत 75 हजार रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र सरकार की ओर से रांची के होटल बीएनआर में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा प्रदान करेंगे. इस अवसर पर रांची एक्सप्रेस के संपादक और झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त को पत्रकारिता के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित होंगे. समारोह में झारखंड के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त तीन फिल्मकारों को सम्मान और 26 पत्रकारों को मीडिया फेलोशिप भी दिया जाएगा.

वंदना टेटे ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि इस सम्मान का महत्व और बढ़ जाता यदि सरकार झारखंड की सभी 9 भाषाओं का द्वितीय राजभाषा का दर्जा दे देती. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि एक तरफ उन्हें सम्मानित किया जा रहा है तो दूसरी तरफ हमारी मातृभाषाओं की उपेक्षा भी यही सरकार कर रही है.

अन्‍ना के समर्थन में देहरादून के पत्रकार सड़क पर उतरे

: राष्‍ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा : दिल्‍ली पुलिस द्वारा अन्‍ना को गिरफ्तार किए जाने के विरोध में देहरादून के पत्रकारों ने जुलूस निकाला तथा जिलाधिकारी के माध्‍यम से राष्‍ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भेजा. इस दौरान दर्जनों पत्रकारों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के रवैये की निंदा की तथा अन्‍ना एवं उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक बताया.

राष्‍ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में पत्रकारों ने बताया कि विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार है. इसका हनन नहीं किया जाना चाहिए. लोकतंत्र में हर किसी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की आजादी है. पत्रकारों ने राष्‍ट्रपति से तत्‍काल हस्‍तक्षेप करते हुए अन्‍ना हजारे के मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है.

जुलूस तथा ज्ञापन देने वालों में वरिष्‍ठ पत्रकार बसंत निगम, अनिल राणा, मनोज कंडवाल, रॉबिन सिंह, रमन नेगी, मोहम्‍मद रजा, अतुल चौहान, प्रदीप थलवाल, शक्ति सिंह, मयूर, धनंजय भारती, सौरभ भाटिया, कैलाश बिष्ट, राकेश खण्डूडी, दिनेश रतूडी, संजीव, पंकज, परमजीत, भावना, दिव्या, सबीहा, अजय राणा, संदीप, मुजम्मिल, विक्रम, बलवीर समेत कई अन्‍य लोग भी शामिल रहे.

नीचे पत्रकारों द्वारा राष्‍ट्रपति को सौंपा गया ज्ञापन.


 

प्रतिष्ठा में

महामहिम राष्ट्रपति महोदय

भारत गणराज्य

नई दिल्ली

माध्यम से- जिलाधिकारी, देहरादून,उत्तराखंड

महामहिम महोदया

हम उत्तराखंड के तमाम युवा पत्रकार आपका ध्यान निम्नलिखित बिदुंओं पर आकर्षित करते हुए, आपसे उक्त बिदुंओं पर भारतीय गणराज्य के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते विनम्रता से विचार करने का अनुरोध करते हैं-

1- आपके संज्ञान में प्रमुख समाजसेवी अन्ना हजारे एवं सरकार के बीच चल रहे मतभेदों व जनभावनाओं की सूचना भी होगी।

2- सवाल अन्ना के बिल या संसदीय परंपराओं के टकराव पर बहस का भी नहीं हैं।

3- सवाल हैं कि जिस तरह से आज श्री अन्ना हजारे एंव उनकी टीम को शांतिपूर्ण अनशन करने से रोका गया, उसे हम संविधान द्वारा प्रदत्त विरोध के अधिकार, प्रदर्शन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का हनन मानते हैं।

4- सरकार द्वारा जिस तरह से श्री अन्ना हजारे के संवैधानिक अधिकारों का हनन कानून की धाराओं के माध्यम से किया गया, यह भी हम अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।

5- संविधान में निहित अपने अधिकारों के शांतिपूर्ण प्रयोग में अगर श्री अन्ना हजारे के साथ देश के लाखों लोग जुड़ते हैं तो ये देश की जनता का संवैधानिक अधिकार हैं।

महामहिम महोदया, हम लोग स्वयं लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ अर्थात मीडिया में कार्य करने वाले पत्रकार हैं। हमें यह महसूस हो रहा हैं कि सरकार के खिलाफ जब भी कोई व्यक्ति अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करता हैं, और उसे देश की अपार जनता का समर्थन मिलता हैं, तो सरकार विभिन्न कानूनों का सहारा लेकर उस अभिव्यक्ति की स्वंतनत्रता के मौलिक अधिकारों एंव विरोध प्रदर्शन के संविधान प्रदत्त अधिकारों का हनन करती हैं, जैसे कि श्री अन्ना हजारे के साथ हुआ।

महामहिम हम उत्तराखंड के युवा पत्रकार देश की संसदीय व्यवस्था में सरकार द्वारा संवैधानिक अधिकारों के हनन पर चिन्तित हैं, और आपसे इस मामले में तुरन्त हस्तक्षेप करने का विनम्र आग्रह करते हैं, ताकि भारतीय गणराज्य के संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा हो सके।

जयहिन्द

साभिवादन

उत्तराखंड के प्रबुद्व युवा पत्रकार

बाइस साथियों की शहादत के बाद भी नहीं झुके पत्रकार, स्‍वतंत्रता दिवस मनाया

गुवाहाटी। आमतौर पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर सूनी रहने वाली गुवाहाटी की सड़कों पर इस बार बंदे मातरम और भारतमाता की जय के स्वर गुंजते दिखे। ऐसा करने का साहस दिखाया गुवाहाटी के पत्रकारों ने। उगवादियों की स्वतंत्रता दिवस बहिष्कार और तमाम धमकियों को दरकिनार कर असम के पत्रकारों ने ६५वां स्वतंत्रा दिवस मनाया।

गुवाहाटी प्रेस क्लब में राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई और बाद में पत्रकारों और वरिष्ठ नागरिकों ने नगर में रैली निकाली। सैकड़ों पत्रकारों की मौजूदगी में गुवाहाटी प्रेस क्लब के सचिव नव ठाकुरिया तथा वरिष्ठ पत्रकार रणेन गोस्वामी ने झंडोतोलन किया। इस मौके पर देश की स्वतंत्रता के लिए कुर्बानी देने वाले वीर शहीदों को याद करते हुए रणेन गोस्वामी ने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि उल्फा या अन्य उगवादियों के कहने पर हम अपनी आजादी का जस्न न मनाएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई दूसरे देश में बैठ कर हमें आजादी मनाने से रोकने की कोशिश करता है तो उसका कड़ा जवाब देना चाहिए।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए नव ठाकुरिया ने कहा कि उल्फा की धमकियों को दरकिनार कर गुवाहाटी प्रेस क्लब वर्ष १९९८ से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडोतोलन के साथ आजादी की जस्न मनाने के लिए इस मौके पर कई कार्यक्रमों का आयोजन करते आया है। उन्होंने बताया कि उल्फा के निशाने पर हमेशा राज्य के पत्रकार रहे हैं, कम से कम २२ पत्रकार उगवाद की भेंट चढ़ चुके हैं लेकिन पत्रकारों की बिरादरी ने कभी इनके सामने झुकने का काम नहीं किया। ध्वजारोहन के मौके पर जानेमाने पत्रकार अजीत पटवारी, रुपम बरुवा और  डीएन सिंह के साथ जानेमाने समाजिक कार्यकर्त्ता धीरेन बरुवा और पूर्व विधायक तथा समाजसेवी अजय दत्त मौजूद थे।

गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.

चैनल में घुसकर मीडियाकर्मियों पर हमला के मामले में दो गिरफ्तार

पानीपत : एक निजी चैनल के ऑफिस पर हमला करके कई पत्रकारों के साथ मारपीट करने के मामले में हरियाणा जनहित कांग्रेस के जिलाध्‍यक्ष संजय कादियान की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है. पुलिस ने हमला करने के आरोपियों को शरण देने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें एक को कोर्ट ने जमानत पर छोड़ दिया. इस घटना को लेकर हरियाणा के पत्रकारों में रोष है.

बीते बृहस्‍पतिवार को हजकां जिलाध्‍यक्ष संजय कादियान के मीडिया प्रभारी कन्‍हैया व उसके साथियों ने नवल सिनेमा स्थित एक न्‍यूज चैनल के कार्यालय में तोड़फोड़ कर लूटपाट की थी. उन्‍होंने कैमरामैन प्रदीप, संदीप व कर्मचारी पवन को पीटकर घायल कर दिया था. इसके बाद आरोपी फरार हो गए थे. चैनल की ओर से थाना शहर पुलिस में हजकां जिलाध्‍यक्ष संजय कादियान, कन्‍हैया लाल और उसके दो साथियों पर लूटपाट का मामला दर्ज कराया गया था.

इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की गई हैं. मुख्‍य आरोपी अभी पुलिस पकड़ से बाहर हैं परन्‍तु पुलिस ने शरण देने के आरोपी राजपाल निवासी सिवाह और सुरेश निवासी हलदाना को गिरफ्तार किया. इसके बाद उन्‍हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने राजपाल को न्‍यायिक हिरासत में भेज दिया और सुरेश को जमानत पर छोड़ दिया गया है. पुलिस संजय समेत सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है. इस बीच हजकां अध्‍यक्ष कुलदीप विश्‍नोई ने इस मामले पर अफसोस जताते हुए मीडियाकर्मियों ने माफी मांगी है.

पत्रकार के साथ अभद्रता करने वाले एडीएम की जांच होगी : पारस जैन

मंदसौर : जिले के एडीएम आनंद जैन द्वारा एक पत्रकार के साथ की गई बदसलूकी की जांच कराई जाएगी. मंदसौर में कल पत्रकारों से बातचीत के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री पारस जैन से यह बात कही. जिला पंचायत भवन में पत्रकारों ने वार्ता के दौरान जब प्रभारी मंत्री को एडीएम के बदसलूकी करने की जानकारी दी तो उन्‍होंने कहा कि इस मामले की जांच कलक्‍टर स्‍तर के अधिकारी से कराई जाएगी.

स्‍वंतत्रता दिवस पर ‘यह देश है वीर जवानों का’

दिल्‍ली के पत्रकारों की संस्‍था इंडियन मीडिया वेल्‍फेयर एसोसिएशन ने 15 अगस्‍त के दिन सांस्‍कृतिक कार्यक्रम ‘यह देश है वीर जवानों का’ आयोजित किया है. इसकी जानकारी देते हुए पत्रकार राजीव निशाना ने बताया कि यह कार्यक्रम स्‍वतंत्रता दिवस पर मंडी हाउस स्थिति त्रिवेणी ऑडिटोरियम में शाम सात बजे से आयोजित की गई है. इस में शंकर साहनी और राजीव चोपड़ा व कुमार विशु जैसे कलाकार देश भक्ति गीतों की प्रस्‍तुति करेंगे.

राजीव निशाना ने देशभक्ति के इस सांस्‍कृति कार्यक्रम में ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में पत्रकारों एवं नागरिकों से आने की अपील की है.

आगरा में पत्रकार उत्‍पीड़न मामला : कार्रवाई के लिए प्रशासन को चार दिन का अल्‍टीमेटम

: शोर शराबे के बीच बनाई गई रणनीति : आगरा में पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसी क्रम में तीन अगस्त को प्रमुख समाचार पत्रों के फोटोग्राफरों के साथ एक समुदाय के लोगों ने जमकर मारपीट और अभद्रता की। उनके कैमरे तोड़ दिए। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पत्रकारों ने डीआईजी आवास पर धरना दिया और चार दिन में कार्रवाई करने के लिए अल्टीमेटम दिया। आरोपियों में एक पार्षद सुहेल कुरैशी भी शामिल है। हाल के एक वर्ष में ताजनगरी में पत्रकारों के साथ यह 19वीं घटना है।

शहर के दिल की धड़कन एमजी रोड पर बुधवार शाम जाम के नाम पर कुछ अराजक तत्वों ने जमकर नंगा नाच किया। वहां फंसी युवतियों और महिलाओं के साथ छेड़खानी की गई। एंबुलेंस और वाहनों में तोड़फोड़ की कोशिश हुई। मीडियाकर्मियों ने इसे कैमरे में कैद कर लिया तो उपद्रवियों ने हमलावर रुख अपना लिया। उनके कैमरे चकनाचूर कर डाले। मोबाइल लूट लिए। जागरण के फोटोग्राफर को तो पकड़कर नाले में फेंकने की कोशिश की गयी। घटनाक्रम के दौरान वहां पुलिस मौजूद थी, लेकिन मूक दर्शक बनी रही। फोटोग्राफरों और कुछ पत्रकारों ने तत्काल डीआईजी असीम अरुण के आवास पर पहुंचकर जानकारी दी और तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। घटना इतनी बड़ी थी लेकिन खुद को पत्रकारों का एकमात्र नुमाइंदा मानने वाले ताज प्रेस क्लब की नींद तीन दिन बाद खुली। घटिया आजम खां स्थित क्लब भवन में हुई आपात बैठक में संघर्ष की रणनीति तय कर ली गई। इसके तहत आठ अगस्त को क्लब भवन से पत्रकार मौन जुलूस निकालेंगे और कलक्ट्रेट पर डीएम को जापन देंगे। डीएम न आए तो अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा।

संगठन की यह बैठक खासी हंगामेदार रही। पूर्व वाइस प्रेसीडेंट अधर शर्मा ने एक साल में पत्रकारों के साथ हुई 19 घटनाओं पर क्लब की निष्क्रियता पर रोष जताया, जिस में एक पत्रकार मोहन शर्मा की हत्या भी शामिल है। मोहन के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन क्लब ने गुपचुप समाप्त कर दिया था, दलील थी कि हत्यारे पुलिस ने जेल भेज दिए हैं। जबकि तय यह हुआ था कि आंदोलन तब तक चलेगा जब तक आश्रितों को आर्थिक मदद न मिल जाए। बृजेंद्र पटेल ने तत्काल बदला लेने की बात कहकर माहौल गर्मा दिया। डा. एमसी शर्मा ने उनका समर्थन किया। पवन सिंह ने अब तक के घटनाक्रम पर प्रकाश डाला। इसी तरह एक सप्ताह पूर्व हरीपर्वत पुलिस ने एक पत्रकार को सींखचों के पीछे धकेल दिया था। मार्कशीटों में गड़बड़ी करने वाले एक रैकेट ने एक पत्रकार को ब्लैकमेल किया था लेकिन क्लब ने दखल नहीं दिया। हाल यह था कि बैठक में प्रेसीडेंट और जनरल सेकेट्री के अतिरिक्त मात्र दो निर्वाचित पदाधिकारी मौजूद थे।

पीड़ित फोटोग्राफर ने अपने समाचार पत्र के संपादकों के खिलाफ आक्रोष जताया। निंदा इस बात की भी हुई कि पीड़ित तीनों फोटोग्राफर दैनिक जागरण, अमर उजाला और हिंदुस्तान के हैं लेकिन संपादक तो दूर, सिटी चीफ तक बैठक में नहीं आए जबकि जागरण के सिटी चीफ तो क्लब के वाइस प्रेसीडेंट हैं। चर्चित महिला पत्रकार ने संपादकों को आड़े हाथों लेने का विरोध किया तो होहल्ला शुरू हो गया। बैठक में जिस कदम पर सहमति बताई गई, उस पर न प्रेसीडेंट सहमत थे और न जनरल सेकेटरी बल्कि युवा पत्रकारों के हंगामे के बीच पूर्व उपाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने इसकी घोषणा की। बैठक में उपस्थित युवाओं से हाथ उठाकर इसका समर्थन करा लिया गया। करीब तीन घंटे चली बैठक में बड़ी संख्या में प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया और स्वतंत्र लेखन करने वाले पत्रकार उपस्थित थे।

गाल पकड़कर आया पत्रकार : बैठक में एक पत्रकार पिटाई से लाल हुए अपने गाल पकड़कर पहुंचा तो सन्नाटा खिंच गया। दैनिक अमर भारती के इस पत्रकार के साथ पुलिस भर्ती के फार्म खरीद रही भीड़ का कवरेज करते वक्त गर्मागर्मी पर पुलिस ने पीट दिया था। उसे घटनाक्रम लिखकर देने की कहकर टरका दिया गया।

क्यों नहीं होता क्लब सक्रिय : क्लब के हाल बेहाल हैं। पदाधिकारियों के साथ कुछ बाहरी लोग शाम होते ही मदिरा की महफिल सजा लेते हैं। स्वतंत्र लेखन करने वाले पत्रकार देवेंद्र शर्मा ने कहा कि क्लब पदाधिकारियों में से दो अंबेडकर विवि में पत्रकारिता पढ़ाते हैं, हालांकि वह हिंदी और कामर्स में पीएचडी हैं। वह सिर्फ अपनी नौकरी बचाने की जुगत में रहते हैं। छात्र संख्या कम होने पर विवि कोर्स बंद कर रहा था इसीलिये पत्रकारिता दिवस के कार्यक्रम में कुलपति और कुलसचिव को बुलाया गया। प्रेसीडेंट खुद वकालत करते हैं और उनके पास टाइम नहीं है।

दो बड़े अखबारों के चाट को प्रशासन ने खराब किया!

ग्वालियर से प्रकाशित समाचार पत्रों में से कुछ प्रमुख समाचार पत्रों के नगर निगम देख रहे संवाददाताओं ने अपना कॉकस बना रखा है। यह कॉकस निगम की खबरें एक साथ अपने-अपने समाचार पत्र में लगाकर निगम अधिकारियों से लेकर महापौर, सभापति व पार्षदों पर दबाव बनाकर पिछले कुछ सालों से अपने स्वार्थों की पूर्ति कर रहे हैं।

ऐसा ही कुछ पिछले दिनों हुआ, जब शहर के हृदय स्थल महाराज बाड़ा और सराफा बाजार में नाइट चाट बाजार लगाने को लेकर दो बड़े अखबारों ने एक साथ मुहिम शुरू की, लेकिन मझोले अखबारों ने सराफा बाजार के निवासियों एवं दुकानदारों के दर्द को समझा और उसको अपने समाचार पत्र में स्थान दिया। तत्पश्चात प्रशासन के दबाव से भयभीत दुकानदारों ने कुछ जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेकर अपनी आवाज बुलंद की।

नतीजा यह रहा कि प्रशासन ने सराफा बाजार के दुकानदारों और निवासियों की बात को गंभीरता से सुना एवं महाराज बाड़ा व सराफा बाजार में नाइट चाट बाजार लगाने से तौबा कर ली गई। इस समूचे घटनाक्रम में नाइट चाट बाजार को लेकर मुहिम चला रहे अखबारों की किरकिरी हुई है। इसको लेकर एक स्थानीय समाचार पत्र ने सम्पादकीय में आईना भी दिखाया है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

चार सितम्‍बर को चित्‍तौड़गढ़ में मीडिया कार्यशाला आयोजित

राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ चित्तौडग़ढ़ द्वारा मेवाड़ पत्रकार संघ के सहयोग से आगामी 4 सितम्बर को चित्तौडग़ढ़ मुख्यालय पर प्रदेश मीडिया कार्यशाला का आयोजन होगा। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष एंव कार्यक्रम संयोजक अनिल सक्सेना ने बताया कि 4 सितम्बर, रविवार को होटल पदमनी में आयोजित होगा।

इसमें राजस्थान प्रदेश की मीडिया कार्यशाला में दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार किशोर मालवीय, अतुल अग्रवाल, जयपुर से वरिष्ठ पत्रकार राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष इशमधु तलवार, प्रेमचन्द्र गांधी इन्दौर से वरिष्ठ पत्रकार संजय रोकड़े एंव राजस्थान प्रदेश भर के कई पत्रकार भाग लेंगे। प्रदेश मीडिया कार्यशाला हेतु उदयपुर की पत्रकार, मेवाड़ पत्रकार संघ की महासचिव शकुन्तला सरूपरिया को कार्यक्रम सहसंयोजक नियुक्त किया गया है। उक्त कार्यक्रम राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार इशमधु तलवार के निर्देशन में किया जा रहा है।

दर्द से कराहता रहा मासूम, तड़पती रही मां, नहीं आए डॉक्‍टर

: अमित को न्‍याय दिलाओ मीडियावालों : तकलीफ से कराह रहे बच्चे को लिये रो रही मां का दर्द सुनने वाला शायद सदर अस्पताल में कोई नही था. बच्चे के कान से लगातार कान से खून बह रहा था और बच्चे की हालात चिंताजनक बनी हुई थी, पर सदर अस्पताल के भगवान कहे जाने वाले डाक्टर का कोई आता पता नही था. ऐसे हालात में एक गरीब मां अपने बच्चे को लेकर कहां जाए उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

जब हमारी नजर दर्द से तड़प रहे इस बच्चे पर पड़ी तो हमने सबसे पहले अस्पताल में नर्स के लिखे उस दवा की पर्ची को देखा, जिस पर अस्पताल में अनुपलब्‍ध दवा लिखे गए थे. सबसे पहले वहां पहुंचे महुआ न्‍यूज के पत्रकार ने अपने पैसे से दवा बाहर से मंगवाया फिर उन्‍होंने ये जानने की कोशिश की कि डाक्‍टर साहब कहां हैं? डाक्‍टर को खोजते घंटों बीत गए.

नीचे आप जो तस्‍वीर देखेंगे वो उस वक्‍त का है जब अमित जिंदा था. जी हां! अमित को बचाया जा सकता था, लेकिन डाक्‍टरों की लापरवाही के कारण उसकी मौत हो गई. यह मामला पूर्णिया के सदर अस्‍पताल का है, जहां एक दो घंटे नहीं बल्कि पूरे छह घंटे दर्द से कराहते हुए अमित ने अपनी जान गंवा दी. ऐसे में सवाल यह है कि कहां गया सुशासन सरकार का दावा. हैरत की बात है कि इस मामले में पूर्णिया के सर्जन हर बार बयान बदलते देखे गए. इतना ही नहीं वे मीडिया वालों से गुंडई करने पर भी उतर आए और मीडिया वालों को धमकाने लगे.

मैं महुआ न्‍यूज के पत्रकार के इंसानियत का कायल हो गया. उसने ना सिर्फ अमित के लिए अपने पैसे से दवा मंगाई बल्कि उसने खबर को भी प्रमुखता से भेजा, इसके बाद सहारा समय और आर्यन टीवी ने इस खबर को प्रमुखता दी. अन्‍य किसी चैनल ने अमित को न्‍याय दिलाने के लिए कोई पहल नहीं की है. क्‍या सभी पत्रकारों की संवेदना मर गई है या सभी पत्रकार सरकार के तलवे चाटने लगे हैं! सभी पत्रकारों से आग्रह है कि वो अमित को न्‍याय दिलाने की पहल करें ताकि आगे किसी अमित की डाक्‍टरों की लापरवाही से असमय मौत न हो सके.

सुशासन का सच और डाक्‍टरों की लापरवाही के लिए वीडियो देखें – तड़प तड़प कर मासूम की मौत

पूर्णिया से अंकुर कुमार की रिपोर्ट.

पत्रकार की पिटाई होती रही, विधायक तमाशबीन बने रहे

बख्तियारपुर :  बिहार में नीतीश शासन की दूसरी पारी में अपराधियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है. अपराधी तांडव कर रहे है और पटना पुलिस मसाज पार्लरो और पार्कों में छापामारी कर लडकों लड़कियों को एक दूसरे से करीब आने से रोकने के अभियान में लगी है. इसी पटना जिला के बाढ़ अनुमंडल में अपराधियों का मनोबल कुछ इस कदर बढ़ा हुआ है कि अब पत्रकार भी लगातार निशाने पर हैं.

ताजा मामला बख्तियारपुर के प्रभात खबर संवाददाता सबल कुमार का है,  जिनकी अपराधियों ने हथियार के बल पर जमकर पिटाई कर दी और कैमरा छीन लिया. सारा तांडव बख्तियारपुर के विधायक अनिरुद्ध यादव के सामने हुआ, पत्रकार पिटता रहा और विधायक तमाशा देखते रहे. विधायक के साथ रहे सुरक्षा गार्डों ने भी पत्रकार को बचाने की को‍ई कोशिश नहीं की.  उनके लगुये भगुए भी तमाशबीन बने रहे. तीन की संख्या में रहे अपराधियों ने जब अपनी मनमानी कर ली और पत्रकार सबल कुमार को पीट कर चलते बने तब विधायक हरकत में आये.

सबल कुमार ने इलाके के डीएसपी रामानंद कुमार कौशल को सूचना डी और विधायक ने भी उसी समय डीएसपी रामानंद कुमार कौशल से कार्रवाई की मांग की. विधायक अनिरुद्ध यादव के पैतरे से भन्नाए डीएसपी रामानंद कुमार कौशल ने तत्काल उलाहना दे दी की कार्रवाई उनके गार्डों ने क्यों नहीं की. डीएसपी रामानंद कुमार कौशल ने विधायक अनिरुद्ध यादव से यह भी शिकायत की क्यों नहीं उन्होंने अपने गार्डों को पत्रकार के हमलावरों के पीछे दौड़ाया. सारा घटना क्रम तब हुआ जब विधायक अनिरुद्ध यादव गंगा कटाव का निरिक्षण करने गए थे.

पत्रकार ने पुलिस थाने को लिखित सूचना दे दी है और नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है. बताया जाता है की विधायक अनिरुद्ध यादव इसलिए मौन रहे क्योंकि हमलावर उनके स्वजातीय थे. पत्रकार को उनके अखबार प्रभात खबर ने भी ईनाम दे दिया. यह इनाम है सबल को अखबार की सेवा से हटाये जाने का. ताजा सूचना है कि सात अगस्त को पत्रकार सबल कुमार अपराधियों क़ी गुंडागर्दी के शिकार हुए और शाम में अखबार ने उनको हटाये जाने का फैसला कर दिया. इससे पहले इसी अनुमंडल के बाढ़ थाना इलाके में सहारा समय के संवाददाता कमालुद्दीन को भी बदमाशों ने धमकाया था कि वो बलात्कार क़ी खबर ना चलाएं.

बाढ़ इलाके में तीन दिनों में पत्रकार उत्पीड़न का यह दूसरा मामला है. यहाँ यह बता देना गौरतलब होगा कि सुशासन का नारा देने वाले राज्य सरकार के मुखिया नीतीश कुमार बाढ़ इलाके से लगातार पांच बार सांसद रह चुके है और केंद्र में मंत्री भी. दोनों ही मामले में कोई कारगर कार्रवाई नहीं हुयी है, जिससे पत्रकारों में रोष व्‍याप्‍त है. शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है.

पटना से कृष्‍ण कुमार की रिपोर्ट.

बहराइच में पत्रकारों के साथ धक्‍कामुक्‍की एवं बदसलूकी

मंदिर तुड़वाने के आरोप पर पीडब्ल्‍यूडी के अधिशासी अभियंता का पक्ष जानने पहुंचे पत्रकारों से अधिशासी अभियंता के स्टाफ और उनके पाले चम्‍मचों ने बदसलूकी और डराने की कोशिश की. बहराइच के एल.आर.पी. कालोनी में स्थित शिव मंदिर को तोड़ने की जानकारी से इलाके में तनाव की आशंका फ़ैल गयी थी. इस मामले में यह बात भी खुलकर आ रही थी कि इस शिव मंदिर को तोड़ने का आदेश बहराइच पीडब्ल्‍यूडी के अधिशासी अभियंता ने दिया था.

यह शिव मंदिर इस कालोनी में कई वर्षों से स्थित था और आस पास के लोगो के श्रद्धा का केन्द्र था. जब इस मंदिर के टूटने की सूचना शहर में फैली तो बीजेपी और कई हिन्दुवादी पार्टियों के नेता तथा प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचने लगा. लोगों अच्छी भीड़ भी वहां मौके पर जुट गयी. इस बात की खबर जब मीडिया को लगी तो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार भी हालात का जायजा लेने वहां पहुँच गए.

वहां के तथ्यों और नेताओं के अनुसार जब यह जानकारी मीडिया में आई की इस मंदिर को तोड़ने का आदेश बहराइच पीडब्ल्‍यूडी के अधिशासी अभियंता ने दिया है,  जो स्वयं एक अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं,  तो इस घटना की संवेदनशीलता बहुत अहम हो गई. इस अहम मुद्दे पर गर्म होती राजनीति से जिले की शान्ति व्यवस्था भी बिगड़ सकती थी. बीजेपी के विधायक और अन्य संगठनों के नेताओं ने पत्रकारों के सामने पीडब्ल्‍यूडी के अधिशासी अभियंता के ऊपर सीधे आरोप लगाने शुरू कर दिए कि उन्होंने जानबूझकर अल्पसंख्यक समुदाय के होने के नाते इस मंदिर को ईष्‍यावश तुड़वाया है. इस मामले पर बीजेपी की ओर से जिलाधिकारी को एक पत्र भी दिया गया है,  जिस में अधिशासी अभियंता पर आरोप लगाए गए हैं. इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद की ओर से संबंधित थाने को एक प्रार्थनापत्र भी दिया गया है. जिसमे अधिशासी अभियंता की नियत पर संदेह करते हुए उन पर कार्रवाई करने की बात की गयी है.

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ पत्रकारों ने जब बहराइच कलक्ट्रेट के समीप स्थित पीडब्ल्‍यूडी के अधिशासी अभियंता के ऑफिस में जाकर उनसे जब इस बारे में जानना चाहा तो वहां बताया गया कि साहब लखनऊ गए हुए हैं. इस पर जब प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने अधिशासी अभियंता के बंद कमरे की फोटो और विजुअल लेने लगे तभी अधिशासी अभियंता के स्टाफ के लोगों और ऑफिस के बाहर के चम्‍मचों ने पत्रकारों को घेर लिया साथ ही बदतमीजी तथा धक्का मुक्की करने लगे,  इसी के साथ ही उन लोगों ने पत्रकारों को डराने की भी कोशिश की. उनकी इस कोशिश के पीछे मंतव्य यही था कि इन लोगों को बंधक बनाकर डरा दिया जाए और इस घटना पर पर्दा डाल दिया जाए. पत्रकारों को धमकाने में यह लोग इतना ज्यादा जुट गए कि करीब पूरे ऑफिस ने पत्रकारों को ऐसे घेर लिया जैसे यह पत्रकार ना होकर बकरी हैं और यह लोग कसाई.

पीडब्ल्‍यूडी जैसे मालदार विभाग के पास ठेकेदारों के रूप कई सारे प्रभावशाली लोग होते हैं जो इस विभाग से मिलने वाले लाभ के लिए अपने दायित्वों को भूलकर उनकी जी हजूरी करने लगते हैं. इन्ही स्थानीय लोगों की शह पर यह विभाग मीडिया की आवाज़ दबाने की पूरी कोशिश में जुट गया है. जहां एक ओर मुख्यमंत्री मीडिया से मधुर सम्बन्ध की बात कहती हैं वहीं बहराइच पीडब्ल्‍यूडी विभाग ने मीडिया को एक तरह से बंधक बनाने की कोशिश की है. पत्रकारों ने बहराइच पीडब्ल्‍यूडी के अधिशासी अभियंता के स्टाफ की बदसलूकी की इस घटना की जानकारी प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया को भी देने की बात कही है. अब देखना है प्रेस कौंसिल मीडिया की स्वतंत्रता पर हुए हमले पर बहराइच पीडब्ल्‍यूडी के अधिशासी अभियंता और उनके बिगडै़ल स्टाफ पर क्या कार्रवाई करता है.

छायाकार से दुर्व्‍यहार मामला : डीएम ने महिला चि‍कित्‍सक को हटाया

जौनपुर में छायाकार व अन्य पत्रकारों से दुर्व्यवहार के प्रकरण में पत्रकारों की मांग पर जिला महिला अस्पताल की चिकित्सक डा. रीता दूबे को जिलाधिकारी गौरव दयाल ने वर्तमान पद से कार्यमुक्त कर दिया। आज प्रशासन की पहल पर पत्रकारों व प्राथमिक चिकित्सा संघ के बीच जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में वार्ता कलक्‍ट्रेट अनुश्रवण कक्ष में हुई।

बैठक में प्राथमिक चिकित्सक संघ के सचिव डा. आरके सिंह ने उपरोक्त घटना पर पत्रकारों से क्षमा मांगी। अध्यक्ष डा. केएल वर्मा ने पूरी घटना को खेदजनक बताकर पत्रकारों के साथ हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। पत्रकारों के प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व कर रहे जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह ने घटना का पटाक्षेप मात्र क्षमा याचना के बिन्दु पर करने से इनकार करते हुये दोषी डाक्टर के विरूद्ध कार्रवाई की मांग को रखा।

संघ के महामंत्री डा. मधुकर तिवारी ने बताया कि वार्ता के क्रम में पुलिस अधीक्षक एसके भगत ने कहा कि घटना में दोषी डा. रीता दूबे के विरूद्ध पंजीकृत मुकदमे पर विधि सम्मत सम्पूर्ण कार्रवाई की जायेगी। इस क्रम में जिलाधिकारी गौरव दयाल पत्रकारों को आश्वस्त किया कि दोषी चिकित्सक को जिला महिला चिकित्सालय के वर्तमान पद से तत्काल कार्यमुक्त कर दिया गया है। साथ ही उनके विरूद्ध लिखे गये शासन को पत्र के आधार पर चिकित्सक के स्थानान्तरण व अन्य दण्डात्मक कार्रवाई को सम्पादित कराने की प्रक्रिया में तेजी लायी जायेगी। इसके साथ छायाकर के टूटे कमरे के जगह नया कैमरा भी दिया गया।

जिलाधिकारी के इस आश्वासन के बाद पत्रकारों ने उक्त प्रकरण पर चल रहे आंदोलन को स्थगित कर दिया। प्रकरण पर प्रशासन के सकारात्मक निर्णय पर जौनपुर पत्रकार संघ, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, गोमती जर्नलिस्ट एसोसिएशन व प्रेस क्लब ने हर्ष व्यक्त किया है। पत्रकारों के प्रतिनिधिमण्डल में ओम प्रकाश सिंह, सम्पादक कैलाशनाथ, कैलाशनाथ मिश्र, राजेन्द्र सिंह, विनोद पाण्डेय, डा. राम सिंगार शुक्ल गदेला, कपिलदेव मौर्य, शशिमोहन सिंह, साजिद हमीद, लोलारक दूबे, डा. मधुकर तिवारी, राजकुमार सिंह, राजेश गुप्ता, अखिलेश तिवारी अकेला, मनोज वत्स, सुबाष पाण्डेय, रामजी जायसवाल, राजेश श्रीवास्तव, हसनैन कमर दीपू, अजीत सिंह, मारकण्डेय मिश्र आदि पत्रकार व छायाकार उपस्थित रहे।

ऑफिस में घुसकर पति ने महिला पत्रकार को मार डाला

टोरंटो में भारतीय मूल की एक महिला पत्रकार की हत्‍या उसके पति ने उसके ऑफिस में घुसकर कर दी. अखबार की ऑफिस में हुई इस हत्‍या से सनसनी फैल गई. बीच बचाव करने में एक अन्‍य युवती और फोटोग्राफर भी गंभीर रूप से घायल हो गए. पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है.

टोरंटो के वैंकुवर के बाह‍री इलाके में स्थित राजपुर की मिचंडी में रहने वाली अंग्रेजी एवं पंजाबी अखबार की पत्रकार रविंदर कौर भंगू (24 वर्ष) आज अपने कार्यायल गई हुई थी. उसके सहयोगी पत्रकार ने बताया कि इसी दौरान उसका पति सनी उसके ऑफिस आया. उसके हाथ में मांस काटने वाला धारदार चाकू था. उसने आते ही रविंदर पर चाकू से हमला शुरू कर दिया. बीच बचाव करने गए एक फोटोग्राफर तथा महिला पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए.

रविंदर की उसके कार्यालय में ही मौत हो गई. सूचना पर पहुंची पुलिस ने सनी को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि रविंदर ने कुछ समय पहले सनी को छोड़ दिया था, शायद इसी के चलते सनी ने रविंदर की जान ले ली.

पत्रकारों का एक लाख का दुर्घटना बीमा कराएंगे शिवराज

मध्यप्रदेश सरकार पत्रकारों के लिये व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना लागू करने जा रही है, जिसके तहत प्रदेश के सभी पत्रकारों को किसी दुर्घटना के चलते सुरक्षा हासिल हो जाएगी। इस उद्देश्य से लागू की जा रही दुर्घटना बीमा योजना में सरकार प्रीमियम की 75 प्रतिशत राशि देगी, जबकि 25 प्रतिशत राशि संबंधित पत्रकार को देनी होगी।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दुर्घटना के सुरक्षा में अधिकाधिक पत्रकारों को शामिल किया जायेगा। इसके चलते शहरी ही नहीं बल्कि ग्रामीण अंचल तक में काम कर रहे पत्रकारों को बीमा योजना का फायदा मिल सकेगा। इनमें संचार प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे सभी ऐसे पत्रकार, संवाददाता, फोटोग्राफर और कैमरामेन शामिल होंगे, जो किसी गैर सरकारी समाचार एजेंसी, टेलिविजन चैनल, नेट मीडिया या समाचार पोर्टल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

अलबत्ता इन पत्रकारों का मध्यप्रदेश में निवास करना और उनका कार्यक्षेत्र इसी प्रदेश में होना जरुरी होगा। इसी तरह इनकी उम, 21 से 70 साल के बीच होना जरुरी रखी गई है। सूत्रों के अनुसार योजना पर अमल को लेकर जनसंपर्क विभाग जल्द ही केन्द्र सरकार की सार्वजनिक उपक्रम की बीमा कंपनी से करार करने जा रहा है। इस बीमे की कुल राशि एक लाख रुपये तय की गई है। यह बीमा एक साल के लिए होगा और यह अवधि पूरी होने के पहले अगले साल के लिये इसका नवीनीकरण होगा।

योजना का लाभ लेने के लिये इच्छुक पत्रकारों से निर्धारित प्रारुप में आगामी दस अगस्त तक आवेदन बुलाये गये हैं। पत्रकारों की सुविधा की दृष्टि से ये आवेदन पत्र जिला जनसंपर्क कार्यालय में प्रस्तुत किए जा सकेंगे। साभार : नवभारत टाइम्‍स

प्रेस छायाकार पिटाई मामला : पत्रकारों ने प्रशासन को दिया 48 घंटे का अल्‍टीमेटम

जौनपुर के जिला महिला चिकित्सालय परिसर में बीते सोमवार को प्रेस छायाकार अजीत बादल चक्रवर्ती व अन्य पत्रकारों पर जानलेवा हमले की घटना पर 48 घण्टे के प्रशासन के समय सीमा के बाद संतोषजनक कार्रवाई न होने पर जनपद के पत्रकारों ने आक्रोश व्यक्त किया। इस संदर्भ में गुरुवार को पत्रकारों की बैठक कलेक्‍ट्रेट स्थित सामुदायिक भवन में जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पत्रकारों ने इस प्रकरण पर प्रशासन के ढीले रवैये की कड़ी निंदा की।

बैठक में उपस्थित पत्रकारों ने आरोप लगाया कि मामले की आरोपी डा. रीता दूबे के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत होने के बाद भी गिरफ्तारी प्रशासन जान-बूझकर नहीं करा रहा है। प्रशासन ने पत्रकारों से 48 घण्टे का समय मांग कर इस अवधि में विधिक व प्रशासनिक कार्रवाई का आश्वासन दिया परन्तु कोई भी कार्रवाई नहीं किया। बैठक में जौनपुर पत्रकार संघ, गोमती जर्नलिस्ट एसोसिएशन, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, प्रेस क्लब सहित अन्य पत्रकार संगठनों के सदस्य मौजूद थे। बैठक में पत्रकारों ने अपना विचार रखते हुये इस प्रकरण पर आर-पार की लड़ाई लड़ने का एलान किया। इसके प्रथम चरण में पत्रकारों ने आज से प्रशासन को 48 घण्टे का समय देकर प्रकरण के आरोपी डा. रीता दूबे के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की गयी। यदि इस समय सीमा के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो जनपद के पत्रकार प्रशासन के प्रति अपना असहयोगात्मक रवैया अपनायेंगे। साथ ही पत्रकार संगठन जनपद की सभी तहसीलों पर उक्त मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। आंदोलन को जारी रखने के लिये जनपद के अधिवक्ताओं, व्यापारियों सहित अन्य सामाजिक संगठनों से भी पत्रकार जन सहयोग लेंगे।

बैठक में कैलाशनाथ, कैलाश मिश्र, राजेन्द्र सिंह, विनोद पाण्डेय, कपिलदेव मौर्य, डा. राम सिंगार शुक्ल गदेला, आईबी सिंह, हसनैन कमर दीपू, राजेश गुप्ता, जेडी सिंह, साजिद हमीद, राजकुमार सिंह, यशवंत गुप्ता, रामजी जायसवाल, सुभाष पाण्डेय, खुर्शीद अनवर खां, प्रमोद जायसवाल, राजेश श्रीवास्तव, संजय अस्थाना, अजय पाण्डेय, अजीत सोनी, सूरज साहू, आरिफ हुसैनी, मनोज ओझा, डा. प्रमोद वाचस्पति, शम्भूनाथ गुप्त विशारद सहित सैकड़ों पत्रकार मौजूद रहे। बैठक का संचालन महामंत्री डा. मधुकर तिवारी ने किया। इसके बाद पत्रकारों का एक दल जिलाधिकारी से मिलकर उन्हें पत्रक सौंपा जहां पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी नगर भी मौजूद रहे।

एटा में कोतवाल ने पत्रकार के साथ की बदतमीजी

एटा में पत्रकारों के साथ पुलिस ने बदतमीजी करने का रवैया लगातार अपनाए रखा है. ताजा मामला एक चैन लूट के प्रयास से संबंधित है. जागरण का एक पत्रकार इस संबंध में जानकारी लेने कोतवाली पहुंचा तो कोतवाल ने ना सिर्फ बदतमीजी करी बल्कि कोतवाली से निकाल भी दिया. पत्रकार ने इसकी शिकायत पुलिस महानिदेशक एवं एसपी से की है.

मामला यह है कि एटा में ठंडी सड़क स्थित पेट्रोल पम्‍प के सामने बाइक पर पीछे बैठकर जा रही महिला से एक लुटेरे ने चैन लूटने का प्रयास किया. वहां मौजूद भीड़ ने लुटेरे को मौके पर ही दबोच लिया. किसी की सूचना के बाद पहुंची पुलिस को नगर कोतवाली ले आई. जानकारी होने पर दैनिक जागरण का एक पत्रकार खबर लेने के लिए पहुंचा. उसे देखते ही कोतवाल डालचंद तथा दूसरे पुलिसकर्मियों ने बदतमीजी शुरू कर दी.

पुलिस वालों ने पत्रकार को भला-बुरा कहने के साथ थाने से जबरिया बाहर निकाल दिया. बताया जा रहा है कि डालचंद अक्‍सर पत्रकारों के साथ ऐसा रवैया अपनाता रहता है. आए दिन वो किसी के कैमरा पर हाथ मारता है तो धक्‍का देता रहता है. उसकी वजह से पत्रकारों ने कोतवाली जाना बंद कर दिया है. बताया जा रहा है कि पीडि़त पत्रकार ने अपने साथ हुए बदतमीजी की सूचना जिले के आला अधिकारी तथा डीजीपी को दी है. परन्‍तु किसी प्रकार की कार्रवाई होने की संभावना नहीं है.

सूत्रों का कहना है कि कोतवाल के रवैये की शिकायत एसपी तक से की गई परन्‍तु एसपी इस तरह कोई ध्‍यान ही नहीं देते हैं. गौरतलब है कि यूपी की सीएम का आदेश है कि पत्रकारों का उत्‍पीड़न और उनसे बदतमीजी न की जाए बावजूद उसके पत्रकारों के साथ बदतमीजी नहीं रूक रही हैं. एटा में तो स्थिति और भी अधिक विषम हो गई है.

यहां पत्रकारों की सुनने वाला कोई नहीं

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में अफसरशाही इस कदर हावी हो चली है कि मंत्री के प्रवास पर पत्रवार्ता के दौरान पत्रकारों ने सवालों के तीर छोडऩे के साथ अफसरों के खिलाफ अपनी भड़ास भी निकाली। मंत्री महोदय को भी पत्रकारों की दशा पर थोड़ा तरस आया। उन्होंने दिलासा भी दिया। लेकिन पत्रकारों पर हावी होती अफसरशाही आपे से बाहर होता जा रहा है। तभी तो पहली दफा किसी मंत्री ने अपने प्रवास के दौरान दो अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की तो एक वरिष्ठ पत्रकार ने मौका पाकर चौका जड़ दिया।

अब यह खबर अफसरों को रास नहीं आ रही है। लेकिन खबर को लेकर जनप्रतिनिधियों के अलावा पत्रकारों में खुशी का माहौल है। पिछले कुछ महीनों से पत्रकारों और प्रशासन के आला अफसरों में घमासान मचा हुआ है। मंत्रीजी के प्रेस कांफ्रेंस में ही एक पत्रकार ने यह शिकायत कर दी कि कलेक्टर साहब फोन नहीं उठाते। यह सुन मंत्री महोदय को भी ताजुब्‍ब हुआ। जो भी हो देश के सबसे नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पत्रकारिता काफी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में अफसरशाही अगर हावी हो तो पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन आखिर कैसे करें? जब उनकी यहां सुनने वाला कोई नहीं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

क्या मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के पत्रकार लालची हैं?

अभी तक आपने ग्राहकों को लुभाने के लिए व्यापारियों को तरह- तरह के स्कीम बाजार में लाते हुए देखा एवं सुना होगा लेकिन छत्तीसगढ़ से प्रकाशित होने वाली एक हिन्दी मासिक पत्रिका ने पत्रकारों को अगस्त के महीने में ही लाखों रुपए कमाने के आफर दे डाला है। फरवरी माह से छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जिले से प्रकाशित हो रही मासिक पत्रिका ‘पंचायत की मुस्कान’ के संपादक ने अपने एक अन्य ब्लाग ”मेरी दोस्ती मेरा प्यार”  में पत्रकारों को 15 अगस्त में हजारों लाखों कमाने का आफर दिया है।

यह आफर मेरी दोस्‍ती मेरा प्‍यार पर मौजूद है। पंचायत की मुस्कान के संबंध में एक अन्य ब्लाग में जहां इस पत्रिका के बारे में जानकारी हासिल होती है, पंचायत की मुस्कान में भी यह आफर एक विज्ञापन के रूप में मौजूद है। पंचायत की मुस्कान में पत्रकारों को जो हजारों लाखों रुपए कमाने के आफर दिए गए हैं,  उस में उन्होंने लिखा है कि पत्रकार साथी चाहे तो पंचायत की मुस्कान के अगस्त के अंक के लिए प्रति पेज 6000 रूपए में बुक कराएं और उस पेज पर अपने संबंधों के बल पर जो विज्ञापन उन्हें हासिल होते हैं,  वो विज्ञापन जितनी चाहे उतनी राशि में लगवाएं। यह आफर सिर्फ पत्रकारों को ही दिया गया है।

विज्ञापन दाता अगर पत्रिका से सीधे संपर्क करता है तो उसके लिए विज्ञापन की दर ज्यादा है,  ऐसे में पत्रकार चाहे तो 6000 रुपए के हिसाब से पत्रिका के पेज बुक कराकर उस में 15 से 20  हजार तक के विज्ञापन आसानी से लगवा सकता है। ब्लाग http://panchayatkimuskan.blogspot.com में मौजूद पत्रिका पंचायत की मुस्कान के अनुसार उसमें बहुसंख्यक विज्ञापन मध्य प्रदेश से लगे हैं तथा पत्रिका छत्तीसगढ़ से प्रकाशित होती है। सो जाहिर है कि यह आफर मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के लिए है। पत्रिका वालों का आफर देते समय मानसिकता क्या रही ये तो वही जाने,  लेकिन पत्रकारों के लिए इस आफर को देखकर प्रथम दृष्टया तो आम आदमी का मन यही सोचता है कि क्या मध्यप्रदेश एवं छत्तसगढ़ के पत्रकार लालची हैं,  जो उन्हें पैसे कमाने के लिए इस तरह के लालच दिए जा रहे हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Senior Journalists denounce Bihar Chief Secretary’s threat to media

Patna : Senior journalists of Bihar, or those who have worked in the state, have taken strong exception to Bihar Chief Secretary Anup Mukherjee’s BIADA probe report (http://gov.bih.nic.in/documents/BIADA-Report-by-CS.pdf) which said there is an attempt to adversely affect the progress of the state through ‘so-called exposure by negative and irresponsible reporting.’

What is more, journalists were shocked by what the Chief Secretary said ‘effective legal actions to curb such practices.’ The report also questioned timing of telecast and said that it smacks of a conspiracy.

‘How can a permanent executive (bureaucracy) call it negative and irresponsible reporting. What type of legal actions is he talking about in his report? If the state government or those who have been allotted the land have any problem they should just move the court?’ asked a Patna-based Editor.

The tone and tenor of the report have surprised and shocked even independent journalists. ‘This just arms-twisting,’ said a scribe while another one said that this is warning from the state government.

Former Resident Editor of Hindustan Times, Patna, N R Mohanty, said it is extremely dangerous trend and the Chief Secretary has exceeded his limits. Mohanty, who is at present Director, Jagaran Institute of Mass Communication, added that if the Nitish government has any grievances it should move the Press Council of India rather than threatened media with the help of the Chief Secretary.

‘Was that in terms of reference of inquiry,’ asked Ali Abid, formerly with ATN in New Delhi, Rozana and Pataliputra Times. ATN, it needs to be recalled, was the first private news channel of India.

‘Who is this Chief Secretary to gag the media. The terms of reference should be made public. Why not an independent body probe the whole land deal,’ he further asked. Former Chief Reporter of The Times of India, Patna, K K Singh, said exactly the same and added that it is a move to browbeat the media, which is reprehensible.

It needs to be recalled that on July 18 IBN-7 and Mahua News highlighted the story of what they said the land scam in Bihar Industrial Area Development Authority. They followed the story for a couple of days forcing the chief minister, Nitish Kumar, to ask the Chief Secretary to probe the matter. Later, the Indian Express too followed the story in great details.

The Opposition parties too got an issue to attack the state government, which had already been under fire over the Forbesganj BIADA land issue, which led to the death of four people on June 3 last. Journalists are unequivocal in denouncing the move to slap legal notices on some media houses, which did the story on BIADA land.

However, many political observers ask as to how can the Chief Secretary go against the ministers so close to the chief minister, who have already taken a stand. Thus his report was on expected line. courtesy : The Bihar Times

26 पत्रकारों को झारखंड सरकार का मीडिया फेलोशिप

रांची : झारखंड सरकार ने 26 पत्रकारों को 50-50 हजार रुपये की मीडिया फेलोशिप की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने संवाददाता सम्मेलन में चयनित पत्रकारों की सूची जारी की। जनहित के मुद्दों पर शोध आधारित प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग के द्वारा शोध एवं अन्वेषण की योजना प्रारम्भ की गयी है।  इसके लिए विभागीय समिति गठित कर अखबारों में विज्ञापन देकर प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई थी। गठित विभागीय समिति ने कुल 26 आवेदकों का चयन फेलोशिप प्रदान करने हेतु किया है। प्रत्येक फेलोशिप हेतु पचास हजार रुपये की राशि प्रदान की जानी है।

चयन समिति में डा. रमेश शरण (स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग, रांची विश्वविद्यालय), श्री चंदन मिश्र (ब्यूरो प्रमुख, दैनिक हिन्दुस्तान), डा. विष्णु राजगढि़या (ब्यूरो  चीफ, नई दुनिया), श्री विजय पाठक (स्थानीय सम्पादक, प्रभात खबर), श्री सुमन श्रीवास्तव (ब्यूरो प्रमुख, दी टेलीग्राफ), श्री अरविन्द मनोज कुमार सिंह (सहायक क्षेत्रीय निदेशक, इग्नू), श्री राजीव लोचन बख्शी (संयुक्त सचिव, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) तथा श्रीमती स्नेहलता एक्का (उप निदेशक, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) शामिल है।

मीडिया फेलोशिप हेतु चयनित पत्रकार एवं उनका शोध-विषय

1. अनुपमा कुमारी- पंचायती राज और महिला सशक्तिकरण
2. आलोका- झारखण्ड में मनरेगा का महत्व
3. अनंत – हजारीबाग में लतिका का सामाजिक संघर्ष
4. योगेश्वर राम – पंचायत व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका
5. आशिषी कुमार सिन्हा – बिरहोर समुदाय की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली
6. ओमप्रकाश पाठक – ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य अधिसंरचना
7. रूपक कुमार – झारखंड में जैव-विविधता और जीविकापार्जन
8. सुरेन्द्र लाल सोरेन – कचड़ा चुननेवाले बच्चों के बेहत्तर भविष्य की संभावन
9. सर्वजीत – झारखंड में सूचना का अधिकार
10. प्रशांत जयवर्द्धन – वन प्रबंधन और पारंपरिक नियम
11. नदीम अख्तर – झारखण्ड राज्य में कृषि में तकनीक का इस्तेमाल
12. महेश्वर सिंह छोटु – आदिम जनजाति पहाडि़या कल आज और काल
13. नौशाद आलम – झारखण्ड में समुदायिक वन प्रबंधन की प्रासंगिकता
14. संजय श्रीवास्तव – झारखण्ड के विकास में संसदीय राजनीति का योगदान
15. शैली खत्री – राँची में बच्चों के विकास की स्थिति ।
16. प्रशांत झा – तसर सिल्क उद्योग और इससे जुड़े लोगों की स्थिति
17. कुमार संजय – बच्चों के भोजन और पोषण का अधिकार
18. विकास कुमार सिन्हा – झारखण्ड के पर्यटन स्थलों की स्थिति व विकास।
19. तनवी झा – झारखंड में समुदाय आधरित स्वास्थ्य सेवा
20. अमित कुमार झा – नेशनल गेम्स आयोजन से झारखण्ड में खेल प्रतिभाओं का उदय।
21. चन्दो श्री ठाकुर – राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का सामुदायिक परिदृश्य
22. संजय कृष्ण – ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महिला पलायन का असर
23. सलाउद्दीन- हजारीबाग में एड्स का विस्तार एवं नियंत्रण
24. शैलेश कुमार सिंह – स्वर्णिम झारखंड में नक्सलवाद का अंत
25. पंकज त्रिपाठी – राज्य में बिजली की स्थिति, समस्या और समाधान।
26. शक्तिधर पांडेय – लोक स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में समुदाय की भूमिका।

कवरेज करने गए बुजुर्ग पत्रकार को पुलिस ने दौड़ाकर पीटा

देवरिया जिला के पथरेवा के जागरण प्रतिनिधि जगदीश धर द्विवेदी को बुधवार की दोपहर पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा. उनके सिर और आखों के ऊपर गंभीर चोटें आई हैं. घटना के समय श्री द्विवेदी भाजपा का प्रदर्शन कवर कर रहे थे. इसी से नाराज पुलिस वालों ने उन्‍हें पीट दिया. इस घटना के बाद पत्रकारों में काफी रोष है.  उन्‍होंने आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

बदहाल सड़क एवं कई अन्‍य समस्‍याओं को लेकर भाजपा कार्यकर्ता प्रदेश अध्‍यक्ष सूर्य प्रताप शाही के नेतृत्‍व में प्रदर्शन कर रहे थे. इसी प्रदर्शन को कवर करने गए हुए थे. थानेदार उपेन्‍द्र यादव जगदीश धर द्विवेदी को ठीक से पहचानता था, बावजूद इसके उसने सिपाहियों को ललकार कर द्विवेदीजी को पिटवा दिया. जिससे बुजुर्ग पत्रकार के सिर एवं आंखों के ऊपर चोटें आई हैं. सहयोगियों ने उनका प्राथमिक उपचार करवाया.

श्री द्विवेदी की पुलिस द्वारा की गई पिटाई से पत्रकारों में काफी रोष है. नाराज पत्रकारों ने थानाध्‍यक्ष देवेंद्र यादव एवं अन्‍य पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. भारतीय पत्रकार

घायल पत्रकार
संघ के पदाधिकारी सरदार दिलावर सिंह व विपुल कुमार तिवारी ने घटना की निंदा की तथा इसे अभिव्‍यक्ति की आजादी पर हमला बताया.

इसमें सबसे दुखद बात तो यह रही कि वेज बोर्ड की सिफारिशों पर लम्‍बी-लम्‍बी भाषणबाजी करने वाला जागरण अपने प्रतिनिधि द्विवेदी जी के साथ हुई घटना की कवरेज तो दो तीन लाइन में दिया है, लेकिन उसने कहीं यह नहीं लिखा कि द्विवेदी जी उस अखबार से जुड़े हुए हैं. यह है जागरण वालों की दोगली और बनिया नीति. आप की जान चली जाए पर उन्‍हें कोई फर्क नहीं पड़ता. नीचे जागरण में छपी खबर.

पत्रकार को भी नहीं बख्शा : पथरदेवा में कवरेज के लिए गए पत्रकारों को भी पुलिस ने नहीं बख्शा। लाठीचार्ज के दौरान सत्तर वर्षीय पत्रकार जगदीश धर द्विवेदी को इस कदर पीटा गया कि सिर में गंभीर चोट आने की वजह से वे लहुलूहान होकर गिर पड़े। द्विवेदी को गंभीर हालत में इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया।

गंगा का कटान रोकने में पत्रकार भी गटक गए लाखों

कांशीरामनगर में गंगा के तटीय क्षेत्र पचलाना के निकट गंगा के कटान को रोकने के लिए गंगा के किनारे स्टट बनाकर बालू की बोरी भरकर लगाए जाने का काम सिंचाई विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसके लिये जिलाधिकारी सेल्वाकुमारी जे ने शासन से 1 करोड़ 75 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत कराई। सिंचाई विभाग के अधिकारी पूरे दिन में हजारों रुपये की चपत शासन की धनराशि को लगा रहे हैं।

यहां पर बच्चों से बोरियों के भरने के पैसे देकर कार्य कराया जा रहा है। जो सस्ते में कराया जा रहा है। इसके अलावा बच्चों से कार्य कराना नियम विरूद्ध है। यहां पर कार्य करते समय कई जनपद के कई पत्रकार भी पहुंच गये। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हें भी लाखों रुपये देकर शांत कर दिया। यहां पर शासन की धनराशि को चपत लगाए जाने का घिनौना खेल अभी भी जारी है। पचलाना के ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी सुबह 8 बजे से देर रात्रि तक यहां पर कार्य करवाते हुए देखे जा रहे हैं। इसकी भनक अभी तक जिला प्रशासन तक नहीं पहुंच पाई है। बताया जाता है कि गंगा में बोरी डालने पर डूब जाती है वह दिखाई नहीं देती इसका फायदा अधिकारी अधिक से अधिक उठा रहे है।

समस्‍तीपुर में थानाध्‍यक्ष ने किया मीडियाकर्मियों से दुर्व्‍यहार

बिहार के सुशासन वाली सरकार में पुलिस ने मीडियाकर्मियों के ऊपर दिखाई अपनी दबंगई। एक घटना के मामले में जानकारी लेने पहुंचे मीडियाकर्मियों को पुलिस ने धक्का मारकर थाने से निकाल दिया। पुलिस ने अपनी गलती को छुपाने के लिए धक्‍का-मुक्‍की की। इसे लेकर मीडियाकर्मियों में गुस्‍सा और रोष दोनों है।

मामला है, समस्तीपुर जिला के दलसिंहसराय थाना के पीपरपति का, जहां बीते दस जुलाई को हथियार बंद अपराधियों ने घर में घुसकर एक महिला की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इस घटना में एक दस वर्षीय बच्चा भी घायल हो गया था। शाम को पाँच बजकर तीस मिनट के आसपास अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया। घटना के लगभग तीन घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची तो मौर्य टीवी के रिपोर्टर मुकेश कुमार, महुआ न्यूज़ के रिपोर्टर रजनीश कुमार और ताज़ा टीवी के संजीव नैपुरी दलसिंहसराय थाना पर पुलिस का पक्ष जानने के लिए पहुंचे।

जैसे इन मीडियाकर्मियों ने थाने में बैठे डीएसपी  रामसागर शर्मा से प्रश्न  किया,  बगल में बैठे थाना अध्यक्ष रमेश चन्द्र उपाध्याय कैमरे पर हाथ मारते हुए तीनों मीडियाकर्मियों को धक्का देते हुए थाना से बाहर कर दिया। इस मामले की शिकायत मीडियाकर्मियों ने जिले के एसपी दलजीत सिंह से लेकर मुख्यमंत्री नितीश कुमार से किया है। इस मामले  में मुख्यमंत्री ने जिले के एसपी दलजीत सिंह को जाँच का आदेश भी दिया है। पर क्या दोषी थाना अध्यक्ष पर कार्रवाई होगी या फिर पुलिस की ये दबंगई ऐसे ही चलती रहेगी?

बीमार पत्रकार के इलाज के लिए फेसबुक ने जुटवा दिए 60 हजार

सोशल नेटवर्किंग साइट्स अब केवल अपने विचार एवं भावनाओं को व्‍य‍क्‍त करने के मंच ही नहीं रह गए हैं बल्कि अब ये राहत कोष भी साबित हो रहे हैं। इसे साबित किया फेसबुक के जरिए एक पत्रकार के इलाज के लिए जुटाए गए पैसों ने। कानपुर के एक बीमार पत्रकार की मदद के लिए उनके कुछ  जानने वाले पत्रकारों ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर लोगों से मदद की अपील की थी। और देखते ही देखते करीब 60 हजार रुपए एक हफ्ते के अंदर एकत्र हो गए, जिसे बीमार पत्रकार को सौंप दिया गया।

कानपुर के एक दैनिक के पत्रकार दीपचन्द पांडे को कैंसर हो गया है। वे अपना इलाज मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल हास्‍पीटल में करवा रहे थे। इस इलाज पर उन्‍होंने करीब तीन लाख रुपए खर्च हो चुके थे। इसी बीच उन्हें पता चला कि उनकी 21 साल की बीए में पढ़ने वाली बेटी शिखा को ‘ब्लड कैंसर’ हो गया है। इसके बाद दीपचंद ने अपना इलाज अधूरा छोड़कर अपनी बेटी के कैंसर इलाज शुरू करा दिया। परन्‍तु इस जानलेवा और पैसा खाऊ बीमारी के चलते उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई और पैसे की कमी इलाज के आड़े आने लगी।

दीपचंद और उनकी बेटी को कैंसर होने और इलाज कराने में आर्थिक दिक्‍कत आने की जानकारी उनके साथियों  जफर इरशाद, धर्मेद्र पाण्‍डये और विवेक त्रिपाठी को मिली, तब उन लोगों ने उनके इलाज में मदद की खातिर सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर उनकी फोटो के साथ लोगों से मदद करने की अपील की। फेसबुक पर किए गए इस अपील का असर यह हुआ कि देखते ही देखते देश-विदेश से कई लोग मदद के लिए हाथ बढ़ाने लगे। इन सभी के सहयोग से लगभग 60 हजार रुपये इकट्ठे हो गए। इसे सहयोगियों ने दीपचंद को सौंप दे दिया।

दीपचंद
दीपचंद को पैसे सौंपते उसके साथी

पंचायत करने गए पत्रकार को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

यूपी के कांशीरामनगर में अकिंचन भारत के ब्‍यूरोचीफ बॉबी ठाकुर की जान उस समय सांसत में पड़ गई जब फर्रुखाबाद में ग्रामीणों ने उन्‍हें बंधक बनाकर पेड़ से बांध दिया. बेचारे गए थे मामला सुलझाने और खुद ही फंस गए. किसी तरह एक पत्रकार ने पुलिस को सूचना देकर उनकी जान बचाई. मौके पर पहुंची पुलिस ने बॉबी को आजाद कराया.

कांशीरामनगर नगर के अकिंचन भारत के ब्‍यूरोचीफ बॉबी ठाकुर को कुछ लोग एक मामले में पंचायत करने के लिए बुलाकर फर्रुखाबाद जिले के मोहम्‍मदाबाद थाने के सिमशेरपुर गांव लेकर गए थे. सूत्रों का कहना है कि इस पंचायत के लिए पार्टी उन्‍हें पांच हजार रुपये पर तय करके ले गई थी. पंचायत होते होते बात बढ़ गई और बॉबी ठाकुर ग्रामीणों को धमकाने लगे. पत्रकार होने का धौंस दिखाते हुए उन्‍होंने ग्रामीणों को धमकी दी कि सबको पुलिस से खदेड़वा दूंगा.

बॉबी के इस धमकी के बाद ग्रामीण नाराज हो गए. सभी ने मिलकर उन्‍हें तथा उनके साथी को एक पेड़ से बांध दिया तथा बंधक बना लिया. कुछ लोगों ने दोनों को एकाध थप्‍पड़ भी रसीद कर दिया. इसकी जानकारी जब एक पत्रकार को हुई तो उसने इसकी सूचना एसपी फर्रुखाबाद ओपी सागर को दी. जिसके बाद उन्‍होंने मोहम्‍मदाबाद पुलिस को मौके पर भेजा. पुलिस ने बॉबी को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया. इस संदर्भ में जब बॉबी से बात की गई तो उन्‍होंने इस तरह की किसी घटना से इनकार करते हुए बहस होने की बात कही.

पत्रकार संघ अध्‍यक्ष बताकर हेराफेरी करने वाला गिरफ्तार, जमानत खारिज

छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ का अध्यक्ष बताकर लाखों रुपये फर्जी तरीके से गबन करने के आरोप में नारायण शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस मामले में चालान पेश करने पर कोर्ट में जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई। पुलिस ने यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ के वास्तविक अध्यक्ष अरविंद अवस्थी की शिकायत के बाद की है।

पुलिस के मुताबिक आरोपी नारायण शर्मा ने 2008 में छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ के नाम से लेटर में अपने आपको अध्यक्ष बताकर शासन से पत्रकारों को गोवा टू ले जाने की बात कर और विज्ञापन के लिए 5 लाख 92 हजार 5 सौ रुपये प्राप्त कर लिया था। इस रुपये का हिसाब भी नहीं दिया गया। नारायण शर्मा द्वारा इसी लेटरहेड से अपने आपको अध्यक्ष बताकर फिर से शासन को श्रमजीवी पत्रकार संघ के लिए पत्रकार जगत नाम से पत्रिका के प्रकाशन के लिए 5 लाख, विज्ञापन के लिए 5 लाख व टेलीफोन डायरेक्टरी के लिए 2 लाख की मांग की गई थी, इसके अलावा वेबासाइट भी शुरू कर शासन की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए 5 लाख रुपये की मांग की गई थी।

पुलिस के मुताबिक इस मांग के आधार पर शासन से 2 लाख रुपये स्वीकृत भी हो गए। इस बात का पता जब श्रमजीवी पत्रकार संघ के वास्तविक अध्यक्ष अरविंद अवस्थी को लगा तो उन्होंने शिकायत दर्ज की, जिसके बाद स्वीकृत दो लाख रुपये को नारायण शर्मा द्वारा नहीं उठाया गया। इधर इस मामले को पुलिस में ले जाते हुए अरविंद अवस्थी ने नारायण शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया। इस शिकायत के बाद पुलिस ने जांच की तो पता चला कि छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ के पंजीयन क्रमांक 163 का अध्यक्ष अरविंद अवस्थी पाया गया। पुलिस द्वारा शिकायत सही पाए जाने पर नारायण शर्मा के खिलाफ फर्जीवाड़ा, गबन सहित अन्य पांच मामलों में अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने इस मामले में जमानत याचिका भी खारिज कर दिया है और आरोप नारायण शर्मा को जेल भेज दिया गया है। साभार : देशबंधु

देहरादून में अखबार के संपादक पर हमला, अपहरण की कोशिश

देहरादून के मालसी डियर पार्क के समीप सोमवार को हथियारबंद बदमाशों ने दून के प्रमुख सांध्य दैनिक समाचार पत्र के संपादक प्रवीण भारद्वाज पर कातिलाना हमला व उनके अपहरण का प्रयास किया। बदमाशों के साथ महिलाएं भी शामिल थीं। बदमाशों ने हथियार लहराते हुए प्रवीण भारद्वाज को कार से बाहर निकालने का प्रयास किया। खौपफजदा प्रवीण व उनके साथी ने किसी तरह फोन पर दून पुलिस को सूचना दी।

पुलिस के आने तक प्रवीण भारद्वाज ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकाल कर किसी तरह अपनी जान बचाए रखी। कुछ ही देर में राजपुर पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंची और प्रवीण भारद्वाज को बदमाशों के चंगुल से बामुश्किल मुक्त कराया। यहां चर्चाओं से बाजार गर्म है कि प्रवीण भारद्वाज के अपहरण के लिए पश्चिम यूपी के कुख्यातों को लाखों की सुपारी दी गई है। उत्‍तराखंड पुलिस के अधिकारी तो जैसे बदमाशों के सामने पानी भर रहे हैं। इसका एक नमूना प्रवीण भारद्वाज मामले में देखने को मिला। मुजफ्फरनगर के 10 से 12 बदमाशों ने राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत दादागिरी करते हुए उनके ऊपर हमला तथा अपहरण की कोशिश किया फिर पुलिस के एक अधिकारी की शह पर साफ बच निकले। इससे नाराज पत्रकारों ने सीएम से मिलकर विरोध जताया तथा उचित कार्रवाई की मांग की।

सांध्य दैनिक समाचार पत्र के संपादक प्रवीण भारद्वाज ने राजपुर थाना क्षेत्र के मालसी डियर पार्क में साल 2010 के मार्च माह में एक जगह जाखन शिवम विहार निवासी धर्मेन्‍द्र सिंह राणा से ली, एग्रीमेंट के मुताबिक प्रवीण ने धर्मेन्‍द्र को लाखों रूपए सिक्योरिटी के रूप में दी। इस वर्ष के मार्च माह में नया एग्रीमेंट अगले 6 सालों के लिए कराया गया। बताया जा रहा कि रेस्टोरेंट अच्छा चल निकला तो धर्मेन्‍द्र वह जगह प्रवीण से खाली कराना चाहता है। बताया गया कि इसके लिए धर्मेन्‍द्र ने पश्चिम यूपी के कुख्यात बदमाश सुशील मूंछ का सहारा लिया। बीती शनिवार को प्रवीण के मोबाइल पर फोन आया। रिसिव करने पर दूसरी तरफ से प्रवीण को धमकाते हुए कहा गया कि ‘रेस्टोरेंट खाली कर दो, तुम हमें जानते नहीं।’ पीड़ित प्रवीण के अनुसार ध्मकाते हुए कहा गया कि रविवार तक रेस्टोरेंट से सामान समेट लो वरना जान ले ली जाएगी। उन्होंने इस बात की लिखित शिकायत एसएसपी जीएस मर्तालिया से की।

एसएसपी के आदेश के बाद एसओ राजपुर ने क्षेत्रा में बाहरी संख्या की गाड़ियों की चेकिंग शुरू कर दी। इसी दौरान एक जगह कुछ बाहरी नम्बरों की गाड़ियों को पुलिस ने खंगाला। कल दोपहर प्रवीण भारद्वाज अपने साथी के साथ कार में सवार होकर घर लौट रहे थे। इसी समय मालसी डियर पार्क के समीप चार कारों में सवार 10-12 बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया। गालियां देते हुए प्रवीण भारद्वाज को कार से बाहर खींचने का प्रयास किया गया। बंद शीशों को बदमाशों ने तोड़ने का प्रयास किया। खौपफजदा प्रवीण ने फोन पर पुलिस अधिकारियों को अपने अपहरण के प्रयास की सूचना दी। चंद समय बाद एसओ राजपुर पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रवीण को बदमाशों से मुक्त कराया और सभी को कब्जे में लिया साथ ही उनकी गाड़ियों को भी थाने में खड़ी करवा दी। घटना की सूचना पर एसपी सिटी, सीओ मसूरी व अन्य अधिकारी भी राजपुर थाने पहुंचे। एसओ राजपुर ने बताया कि खौफजदा प्रवीण भारद्वाज ने बंद कार में अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर निकाल ली थी,  जिसके चलते बदमाश उनका अपहरण नहीं कर सके। प्रवीण भारद्वाज की तहरीर पर राजपुर थाने में रविन्द्र राणा, चेतन, हेमंत व अन्य 10-12 बदमाशों पर 147/341/504/506 आईपीसी की धराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

हमला

बदमाशों के हाथ बिके एसपी सिटी : इस मामले की एक बानगी देखिये कि किस तरह से बदमाश पुलिस के हाथ आने के बाद भी फुर्र हो गये। हुआ ये कि रविवार की दुपहर मुजफ्फरनगर के बदमाशों ने दून के प्रमुख सांध्य दैनिक अखबार के संपादक प्रवीण भारद्वाज के अपहरण का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बदमाशों की मंशा परवान नहीं चढ़ने दी और उन्हें हिरासत में ले लिया। राजपुर थाने में अभी बदमाशों से पूछताछ हो ही रही थी कि एसपी सिटी अजय जोशी वहां पहुंचे। पीड़ित ने उन्हें अपने साथ हुई घटना से अवगत कराया। उसके बाद एसपी सिटी ने कहा कि आरोपियों से बात करेंगे। एक बंद कमरे में मात्र दस मिनट हुई बातचीत के बाद एसपी सिटी के आदेश के बाद अखबार के संपादक पर कातिलाना हमले व अपहरण के प्रयास करने के सभी आरोपियों को पुलिस ने छोड़ दिया।

घंटी बजी और छूट गए बदमाश : बताया जा रहा कि जिस समय एसपी सिटी आरोपियों से बात कर रहे थे, उनके फोन पर कहीं से एक कॉल आई जिसके बाद पुलिस अधिकारी बेबस दिखे और उन्होंने बदमाशों को छोड़ देने के आदेश दिए। पुलिस सूत्रों की माने तो फोन कॉल सत्ताधरी किसी नेता के करीबी की आई थी। आरोपियों के घनिष्ट संबंध उस नेता के करीबी से होना बताया जा रहा है।

‘मर्डर’  हो जाएगा तो बता देना –  एसपी सिटी : अखबार संपादक के अपहरण के प्रयास की घटना के बाद दून में मीडिया जगत में आक्रोश भर गया है। आज इस मुद्दे को लेकर कई अखबारों के संपादक व मीडियाकर्मी डीजीपी ज्योति स्वरूप पाण्डे से मिले। डीजीपी को रविवार की दोपहर हुई घटना से अवगत कराया गया। पीड़ित के अनुसार उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कल दोपहर अपने साथ हुई घटना की जानकारी फोन पर दी। एसपी सिटी अजय जोशी को भी इसकी शिकायत की गई। पीड़ित का कहना है कि एसपी सिटी ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि बदमाशों के वाहन की तलाशी ली गई, उनके पास कोई हथियार नहीं मिला। एसपी सिटी ने पीड़ित को कहा कि उसे कुछ नहीं होगा। डीजीपी को बताया गया कि एसपी सिटी ने प्रवीण भारद्वाज से कहा कि जब ‘मर्डर’  हो जाएगा तो बताना, हम बदमाशों को पकड़ लेंगे।

डीजीपी ने कहा जांच की जा रही है : आज पुलिस मुख्यालय में अखबार संपादकों व मीडिया कर्मियों की शिकायत सुनने के बाद पुलिस महानिदेशक ज्योति रूवरूप पाण्डे ने कहा कि मामले की जांच राजपुर पुलिस कर रही है। उन्होंने कहा कि राजपुर एसओ मौके के प्रत्यक्ष गवाह हैं। उनके दिए बयानों में यह पुष्ट हुआ कि उन्होंने ही पीड़ित को मौके पर अपहरणकर्ताओं के कब्जे से मुक्त कराया है। बदमाशों को थाने से छोड़े जाने की बात पर डीजीपी ने कहा कि राजपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। उन्होंने कहा कि एसपी सिटी ने पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया, डीजीपी के अनुसार मुकदमा दर्ज है और कभी भी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है।

दर्ज मुकदमे में धाराओं का खेल : दून में बाहुबलियों का साम्राज्य इस कदर पैठ कर गया कि पुलिस चाहकर भी बदमाशों पर उचित धराओं में कार्रवाई नहीं कर पा रही है। मालसी डियर पार्क पर कार सवार प्रवीण भारद्वाज को चार कार में सवार कई बदमाशों ने घेर लिया और उनके अपहरण का प्रयास किया। पुलिस ने दर्ज मुकदमे में अन्य धराएं तो लगाई किन्तु पीड़ित की तहरीर में अपहरण का प्रयास लिखे होने पर भी बदमाशों पर अपहरण की धराएं नहीं लग सकी।

तो क्यूं दी गई पुलिस सुरक्षा : इधर एसपी सिटी कह रहे हैं कि आरोपियों की मंशा गलत नहीं थी वहीं राजपुर पुलिस ने प्रवीण भारद्वाज की जान खतरे में पाते हुए उन्हें पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई है। राजपुर पुलिस ने प्रवीण भारद्वाज की 24 घण्टे की सुरक्षा के लिए एक सिपाही उनके साथ तैनात किया है। वहीं उनके रेस्टोरेंट में भी दो सिपाही अनिश्चित समय के लिए सुरक्षा के मद्देनजर तैनात किए गए हैं।

डाक्‍टर ने किया छायाकार से दुर्व्यवहार, कैमरा छीना

गोरखुर के बुद्धा हास्‍पीटल पर शुक्रवार को आयकर विभाग के सर्वे के दौरान एक अखबार के छायाकार के साथ अस्‍पताल के डाक्‍टर तथा कर्मचारियों ने दुर्व्‍यवहार किया. छायाकार का कैमरा छीन लिया तथा उसे कर्मचारियों ने जबर्दस्‍ती अस्‍पताल से बाहर कर दिया. उक्‍त छायाकार आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा हास्‍पीटल का सर्वे किए जाने की फोटो खींच रहा था.

जब हास्‍पीटल के डाक्‍टर और कर्मचारियों द्वारा छायाकार के सथ दुर्व्‍यवहार किए जाने की जानकारी मिली से काफी संख्‍या में मीडियाकर्मी मौके पर पहुंच गए तथा डाक्‍टर की गिरफ्तारी की मांग करने लगे. इसकी सूचना मिलने पर एसपी सिटी उमेश श्रीवास्‍तव और इंस्‍पेक्‍टर कैंट अश्‍वनी सिन्‍हा भी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए. इन लोगों ने पत्रकारों को समझाया बुझाया, परन्‍तु मीडियाकर्मी डाक्‍टर को गिरफ्तार किए जाने की मांग पर अड़े रहे. काफी मान मनौव्‍वल के बाद मीडियाकर्मी छायाकार से माफी मांगने की बात पर सहमत हुए. शाम को डाक्‍टर कौशिक ने छायाकार से माफी मांग ली, जिसके बाद पत्रकार शांत हुए.

किसी से कम नहीं हैं डायरेक्‍टरी छाप पत्रकार

वैसे तो पत्रकारों के कई टाइप होते हैं। कोई लिखने में माहिर होता है। उसे लोग लिख्खाड़ पत्रकार की उपमा देने से नहीं चूकते। कोई बातों के बताशे देने में एक्सपर्ट होता है तो पत्रकार बिरादरी उसका नाम बतोलेबाज रख देती है। किसी को लाइजनिंग में महारथ हासिल होती है तो किसी को राजनीतिक पोस्टमार्टम करने में या फिर अपराध जगत की बखिया उधेडऩे में। मतलब जैसा काम, वैसा नाम।

अपराध जगत का अगर सीनियर रिपोर्टर हुआ तो उसे आईजी उसके साथी कहने लगते हैं पर इन दिनों ग्वालियर में पत्रकारों की एक नई पौध खड़ी हो गई है। यह पौध है डायरेक्टरी छाप पत्रकारों की। यह नाम भी उनके काम से पड़ा है। यदि इनसे पूछा जाए जाए तो यह बता नहीं पाते कि यह किस अखबार के लिए अपनी कलम घिसते हैं पर इनके कंधे पर लदा झोला और उसमें भरी किताबें इशारा कर देती हैं यह डायरेक्टरी छाप पत्रकार हैं।

वैसे भी ग्वालियर के बारे में कहा जाता है कि सौ में साठ, ग्वालियर के पत्रकार। खैर, यहां बात रही थी डायरेक्टरी छाप पत्रकारों की। इन्हें टेलीफोन डायरेक्टरी निकालने में महारथ हासिल है। इसके लिए इन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ती। पूरे अंचल के सरकारी सेवकों के टेलीफोन नंबर इन्हें कमिश्नर या महानिरीक्षक पुलिस के दफ्तर से मिल जाते हैं। यह भी पता चल जाता है कि कौन सा अफसर कहां पर पदस्थ है और उसका मोबाइल नंबर क्या है। अंचल भर के पत्रकारों के नंबर यह जिलों में स्थित जनसंपर्क विभागों से जुटा लेते हैं। बस इसके बाद शुरू होती है इनकी जनसेवा।

इन सभी नंबरों को कंप्यूटर ऑपरेटर से गुटका नुमा डायरेक्टरी या पोस्टकार्ड साइज डायरेक्टरी साइज पर सेट करवा लिया जाता है। यह तो हुई इनकी प्रारंभिक तैयारी। मुश्किल काम इसके बाद शुरू होता है। फिर यह घूमने लगते हैं विज्ञापन दाताओं के निहोरे करने के लिए। टेलीफोन नंबर डायरेक्टरी छाप पत्रकारों की डायरेक्टरी में एक समान होते हैं। यानी किसी का टेलीफोन नंबर या मोबाइल नंबर एक टेलीफोन डायरेक्टरी में गलत छप गया है कि शेष सभी डायरेक्टरियों में भी गलत छपेगा यह गारंटी है। हंड्रेड परसेंट। हर डायरेक्टरी में विज्ञापन दाताओं के नाम-फोटो बदल जाते हैं। किसी में बड़े नेता का फोटो पहले होता है कि किसी में दूसरी पार्टी के बड़े नेता का स्तुतिगान होता है। यानी जैसा फाइनेंस, वैसा स्तुति गान।

कुछ जुगाड़ी डायरेक्टरी छाप पत्रकार सरकारी विज्ञापन भी हथियाने में कामयाब हो जाते हैं। इसके बाद एक बार फिर यह सभी डायरेक्टरी छाप पत्रकार एक बार माथा भिड़ाकर बैठते हैं कि तुम्हारी डायरेक्टरी का डिजायन कैसा होगा और मेरी डायरेक्टरी का कैसा। ताकि एक-रूपता कम से कम छपाई में तो नजर न आए। बस इसके बाद छप गई डायरेक्टरी और पहुंच गई उन लोगों के हाथों में विमोचन के लिए जो सबसे ज्यादा फाइनेंस करते हैं। इनमें से कोई डायरेक्टरी छाप पत्रकार कहता है कि हमारी डायरेक्टरी तो कलेक्टर जेब में रखते हैं तो दूसरा कहता है कि पुलिस वालों का काम तो उनकी डायरेक्टरी के बिना चलता ही नहीं है। यह सब खुद अपनी पीठ थपथपाते हुए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर में यह डायरेक्टरी अफसरों को भेंट और बाकी स्टॉफ को बेचते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं।

दो दिवसीय भाषाई पत्रकारिता महोत्सव का आयोजन 15 जुलाई से

: उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी करेंगे महोत्सव का उद्घाटन : इंदौर में आगामी 15-16 जुलाई को आयोजित भाषाई पत्रकारिता महोत्सव, प्रभाष प्रसंग का उद्घाटन महामहिम उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान विशिष्ठ अतिथि होंगे। महोत्सव में देशभर के 150 से ज्यादा संपादक और सामाजिक कार्यकर्ता जुटेंगे।

यह जानकारी रविवार को इंदौर प्रेस क्लब के राजेन्द्र माथुर सभागृह में महोत्सव के आयोजन समिति की बैठक में दी गई। इंदौर प्रेस क्लब और प्रभाष परंपरा न्यास द्वारा आयोजित महोत्सव में मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति अभ्यास मंडल इंदौर नगर पालिक निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण सहभागी है। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने की। इस अवसर पर श्री गर्ग ने कहा कि आज के दौर में सच्ची पत्रकारिता करना सबसे मुश्किल काम हो गया है। प्रेस जगत को इस वक्त अंदर और बाहर कई ताकतों से जूझना पड़ रहा है। यह आयोजन ऐसे सवालों का जवाब खोजने में सहयोगी सिद्ध होगा।

बैठक को अभ्यास मंडल के अध्यक्ष शिवाजी मोहिते, हिंदी साहित्य समिति के प्रचार मंत्री हरेराम वाजपेयी, पूर्व अध्यक्ष जयकृष्ण गौड़, अपर संचालक जनसंपर्क सुरेश तिवारी, संयुक्त संचालक अशोक मिश्रा ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने जानकारी दी कि रवीन्द्र नाट्यगृह में आयोजित महोत्सव में 6 सत्र आयोजित किए गए हैं। महोत्सव के अंतर्गत सम्मान समारोह और सांस्कृतिक निशा का आयोजन भी होगा। महामहिम उपराष्ट्रपति की इंदौर यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम जिला प्रशासन को प्राप्त हो गया है।

कार्यक्रम में जबलपुर के गायक दम्‍पति तापसी और मुरली नागराज का गायन भी खासा आकर्षक का केंद्र रहेगा. ये लोग भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा अनुदित रवींद्र नाथ टैगोर की कविता ‘देश की माटी, देश का जल’ से समां बांधेंगे.

महोत्सव के आकर्षण

राष्ट्रीय परिसंवाद

आज के संदर्भ में मीडिया
जल-जंगल-जमीन और जन आंदोलन
क्रिकेट का बदलता स्वरूप : नायडू से धोनी तक
देश के समक्ष चुनौतियां और मीडिया की भूमिका

सांस्कृतिक आयोजन

सुप्रसिद्ध गायिका शुभा मुद्गल की प्रस्तुति ‘स्मृति गीत’
जी सारेगामापा लिटिल चैंप के प्रतियोगियों की प्रस्तुति
मूर्धन्य गायक कुमार गंधर्व के पोते भुवनेश का शास्त्रीय गायन

अन्य आयोजन

प्रभाष जोशी के व्यक्तित्व पर केन्द्रित तीन पुस्तकों का विमोचन
गणेश शंकर विद्यार्थी प्रतिमा स्थल से पैदल मार्च
भ्रष्टाचार पर कार्टूनिस्ट देवेन्द्र की पुस्तक एवं प्रदर्शनी
भाषा से जनता तक विषय पर रूपांकन द्वारा पोस्टर प्रदर्शनी
मध्यप्रदेश के विकास पर राज्यस्तरीय छायाचित्र प्रतियोगिता
राष्ट्रीय फलक पर चमक रहे प्रदेश के पत्रकारों का सम्मान

इन पत्रकारों का किया जायेगा सम्मान

आकांक्षा परे
वर्षा मिर्ज़ा भाम्भानी
रुना गुप्ते
डॉ. शमीम खान
उपमिता वायपेयी
नुपुर आचार्य
प्रणव रावल
सुमित अवाश्थी
सईद अंसारी
सिद्धार्थ शर्मा
दीपक चौरसिया
हेमंत शर्मा
मिलिंद खांडेकर
मनोज मनु
प्रमोद राघवन

बसपा की बैठक से पत्रकारों को बाहर निकाला गया

उत्तर प्रदेश में आने वाले विधान सभा चुनावों की तैयारी में हर दल जुटा है इसी क्रम में सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी भी अपने दल के मजबूत आधार को अपने साथ जोड़ने में जुटी हुई है. बसपा पार्टी विभिन्न जातियों के साथ भाईचारा बनाने के लिए अपने कैडर के साथ कार्यक्रम आयोजित कर रही है. वहीँ साथ ही साथ विभिन्न समाचार माध्यमो के पत्रकारों को इन बैठकों से दूर रखा जा रहा है. जिससे बसपा की इन बैठकों में हो रहे दूसरी जातियों के विरोध के भाषण को सबके सामने आने से रोका जा सके.

इसी तर्ज़ पर उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद के जिला मुख्यालय स्थित नगर पालिका सभागार में बसपा पार्टी के द्वारा आयोजित ‘राजभर समाज भाईचारा बनाओ’  बैठक में पत्रकारों को कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के काबीना परिवहन मंत्री रामअचल राजभर थे तथा आयुर्वेदिक चिकित्सा राज्यमंत्री दद्दन मिश्रा भी मौजूद थे. विभिन्न समाचार माध्यमों के पत्रकार इस कार्यक्रम को कवर करने के लिए गए थे उन्हें जहां उन्हें बसपा के कैडरों के द्वारा कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया.

बसपा के कैडरों ने कहा कि यह पार्टी कैडरों की बैठक है इसमें पत्रकारों का कोई काम नहीं है. गौरतलब है जब तक मंत्री राम अचल राजभर ने माइक संभाल कर बसपा की शैली में भाषण देना शुरू नहीं किया था तब तक पत्रकारों को अंदर कार्यक्रम में रहने की अनुमति थी. ज्यों मंत्री जी ने पुराने ढर्रे पर चलते हुए छुआछूत और पुराने ज़माने के अत्याचारों पर आक्रामक होकर ऊँची जातियों के खिलाफ बोलना शुरू किया. त्यों ही पार्टी कैडर ने पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया.

कार्यक्रम के बाद जब अतिथि मंत्री जी से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो मंत्री जी पत्रकारों की बातों का जवाब देना उचित नहीं समझा और अपनी लाल बत्ती वाली गाड़ी में बैठकर चले गए. इस कार्यक्रम में भिनगा के विधयाक और आयुर्वेदिक चिकित्सा राज्यमंत्री दद्दन मिश्रा ने भी यही तरीका अपनाया. बसपाइयों के रुख के खिलाफ पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया. जिले के वरिष्ठ पत्रकार शादाब हुसैन ने कहा कि बसपा में अभी भी वही तिलक तराजू और तलवार वाला नारा जिन्दा है, जिससे वंचित जातियों के लोगों को भड़काकर वोट लिया जाता है. चूँकि यह सारी बातें मीडिया के द्वारा बाहर आ जाती है इसीलिए मीडिया को दूर रखा जा रहा है. पत्रकारों में अनिल तिवारी, नदीम और अकरम सईद सहित कई अन्य भी इस निंदनीय घटनाक्रम में मौजूद थे.

बहराइच से हरिशंकर शाही की रिपोर्ट.

चंडीगढ़ के पांच सितारा होटल में पत्रकारों का हुडदंग

चंडीगढ़ के जेडब्‍ल्‍यू मैरियट होटल के उद्घाटन समारोह में पत्रकारों ने शराब पीने के बाद जमकर उत्‍पात मचाया. पहले तो होटल प्रबंधन ने पत्रकारों को समझाने की कोशिश की, जब बात नहीं बनी तो उन्‍होंने पुलिस को फोन कर दिया. मौके पर आई पुलिस ने भी समझाने का प्रयास किया तो उनके साथ भी हाथापाई की गई. जिसके बाद पुलिस इन लोगों को उठा ले गई और अस्‍पताल में मेडिकल कराने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया.

जेडब्‍ल्‍यू मैरियट ने उत्‍तर भारत में अपना पहला पांच सितारा होटल चंडीगढ़ में खोला है. इस ग्रुप का पूरे भारत में यह दूसरा होटल है. यह उत्‍तर भारत का पहला लक्‍जरी होटल है, जिसे डिजाइनर विल्‍सन एसोसिएट्स सिंगापुर और कारेन किम ने संयुक्‍त रूप से डिजाइन किया है. इस होटल का उद्घाटन था. इसमें मीडियाकर्मियों को भी आमंत्रित किया गया था. मीडियाकर्मियों ने पहले तो जमकर शराब पी, इसके बाद उन्‍होंने हुडदंग मचाना शुरू कर दिया. होटल प्रबंधन के लोगों ने इनलोगों को समझाने की कोशिश की परन्‍तु ये लोग नहीं माने. हाथापाई पर उतारू हो गए.

इसके बाद होटल प्रबंधन ने पुलिस को फोन कर दिया. मौके पर पहुंची सेक्‍टर 48 की पुलिस ने इन तथाकथित पत्रकारों को समझाने की कोशिश की, परन्‍तु ये लोग मानने को तैयार नहीं हुए. पुलिस के साथ भी उलझने और हाथापाई करने लगे. जिसके बाद पुलिस इन लोगों को अपनी जीप में उठाकर अस्‍पताल ले गई तथा मेडिकल कराने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया.  इस संदर्भ में सेक्‍टर 48 के एसएचओ एसएस राणा ने बताया कि कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, परन्‍तु ये लोग पत्रकार नहीं है.

चंडी

चंडी

चंडी

चंडी

चंडी

चंडी

रंगदार थानेदार, बेबस पत्रकार

: समाचार संकलन के दौरान पत्रकार का वाहन जब्‍त : बिहार में पंचायत चुनाव मतगणना में गड़बड़ी को लेकर प्रत्याशी के समर्थकों ने धरना प्रदर्शन किया था. पूरे दिन पुलिस और समर्थकों में आन्दोलन चलता रहा.  पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज की गई और गोली भी चलाई गयी. इसी मामले पर अपने अखबार के लिये समाचार संकलन करने के लिये वहाँ के स्थानीय पत्रकार भी गए हुए थे.

पुलिस और पब्लिक की भिड़ंत में कई बेगुनाहों, बूढ़े, बच्चे, महिलाओं तक पर बेरहमी से पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था. जब पुलिस प्रत्याशी के समर्थकों पर भारी पड़ने लगी तो आखिर में धरना पर बैठे समर्थकों को वहाँ से उठ कर भागना पड़ा, लेकिन वहाँ पर जो भी लोग तमाशा दख रहे थे उनको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उनके वाहन को जब्त कर लिया. जिसमे वहाँ के स्थानीय पत्रकार का भी वाहन पुलिस ने जब्त कर लिया.

पत्रकार जब थानेदार पास पहुंचे और वाहन के बारे में बताया तो थानेदार बात को टालमटोल करने लगा, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि थानेदार वाहन को छोड़ने के लिये तैयार नहीं था. थानेदार ने कहा कि अब वाहन कोर्ट के आदेश पर ही छूटेगी. एक महीने तक पत्रकार थाने के चक्कर लगाते रहे लेकिन थानेदार नहीं माना. एसपी और डीएसपी के कहने पर भी थानेदार अपनी बात पर अड़ा रहा. अब तक वो गाड़ी छोड़ने को तैयार नहीं है. उसका कहना है कि जो करना हो कर लो गाड़ी तो थाने से नहीं छूटेगी.

रुड़की के चार पत्रकारों के खिलाफ लूट और मारपीट का मुकदमा दर्ज

: पत्रकारों ने भी दर्ज कराया मामला : रुड़की जिले के चार टीवी पत्रकारों के खिलाफ एक व्‍यक्ति ने भगवानपुर थाने में लूट, मारपीट, ब्‍लैकमेलिंग समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है. इन पत्रकारों पर धौंस देकर पैसे वसूलने का आरोप था. पत्रकारों ने भी उक्‍त व्‍यक्ति के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया है. पुलिस मामला दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच कर रही है.

जानकारी के अनुसार टीवी100 के लिए रिपोर्टिंग करने वाले जुबेर काजमी, जैन टीवी से जुड़े शकील अनवर, टीवी 99 से जुड़े वीरेंद्र चौधरी एवं चढ़दीकला टाइम टीवी से जुड़े अरशद हुसैन रुड़की में आयोजित कांग्रेस की रैली कवर करने गए थे. ये लोग रैली को छोड़कर भगवानपुर थाना क्षेत्र के ग्राम अनंतपुर ननेडा पहुंचे. आरोपों के अनुसार वहां एक चक्‍की पर पहुंचकर कहने लगे कि तुम राशन की गेहूं का आटा पीस रहे हो. वहां चक्‍की पर बैठकर पैसे गिन रहे मालिक के लड़के ने कहा कि यहां ऐसा कोई काम नहीं होता है, आप चाहे तो तलाशी ले लो. इस पर इन लोगों ने कहा कि हमें पचास हजार रुपये दे दो नहीं तो तेरे यहां छापा मरवाकर तुम्‍हारी चक्‍की सील करवा देंगे.

इतना सुनकर लड़का घबरा गया. उसको घबराया देखकर वो जो पैसे गिन रहा था (आरोपों के अनुसार लगभग बारह हजार) इन लोगों ने छीन लिए. इतने में चक्‍की का मालिक आ गया. लड़के ने सारी बात उसे बता दी. चक्‍की मालिक ने और लोगों को बुला और इन लोगों की धुनाई शुरू कर दी. ये चारो लोग किसी तरह जान बचाकर वहां गन्‍ने की खेतों की तरफ भागे. गन्‍ने के खेत में छुपकर पुलिस को फोन किया. मौके पर पहुंची पुलिस इन लोगों को खेतों में से तलाश कर थाने ले आई. इन लोगों पर इसके पहले भी लोगों से ब्‍लैकमेलिंग कर पैसे वसूलने का आरोप लग चुका है.

चक्‍की मालिक की तहरीर पर पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया. इसके बाद पत्रकारों ने भी चक्‍की मालिक और अन्‍य लोगों के खिलाफ मारपीट, धमकी आदि का मुकदमा दर्ज कराया. पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है. प्रभारी एसओ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है.

ट्रेनी आईपीएस ने मीडिया‍कर्मियों को धकियाकर थाने से बाहर निकाला

जोधपुर में खबर कवरेज करने गए तीन पत्रकारों के साथ ट्रेनी आईपीएस अजय सिंह ने बदसलूकी करते हुए जबरदस्‍ती थाने से बाहर निकलवा दिया। इससे नाराज पत्रकार इसका विरोध करते हुए धरना पर बैठ गए तथा ट्रेनी आईपीएस को हटाने की मांग करने लगे। पहले से पुलिस अधिकारियों ने मामले को टालने की कोशिश किया, परन्‍तु जब पत्रकार नहीं माने से अजय सिंह को वहां से हटा दिया गया।

यह घटना जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में हुई। मीडियाकर्मी देह व्‍यपार में पकड़ी गई महिलाओं से संदर्भित समाचार का कवरेज करने के लिए गए थे। इसमें पी-7 चैनल के रिपोर्टर, पत्रिका टीवी के कैमरामैन राजू रामदेव और राजस्थान पत्रिका के फोटो जर्नलिस्ट चन्द्रप्रकाश कुमावत शामिल थे।  हाउसिंग बोर्ड थाने का प्रभार प्रशिक्षु आईपीएस अजयसिंह के पास था। तीनों मीडियाकर्मी थाने पहुंच कर रिसेप्शन पर खड़े होकर समाचार के बारे में पूछताछ कर रहे थे,  इतने में अजयसिंह धड़धड़ाते हुए अंदर आए। उन्होंने आते ही पूछा कि आप लोग कौन हो और थाने में क्यों आए हो?

तीनों मीडियाकर्मियों ने बारी-बारी से अपना परिचय दिया ही था कि अजयसिंह का पारा चढ़ गया। उन्होंने कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई थाने के अंदर घुसने की। यहां कोई न्यूज़-व्यूज़ नहीं है,चलो निकलो यहां से बाहर। मीडियाकर्मियों ने कहा कि वे न्यूज कवरेज के लिए थाने आए हैं, इसके पहले भी आते रहे हैं। यह सुनते ही अजयसिंह मीडियाकर्मियों को धकियाने लगे। उनका साथ उनके गनर घेवरराम ने भी दिया। दोनों ने मिलकर तीनों मीडियाकर्मियों को जबरदस्‍ती धक्‍का देकर थाने से बाहर निकाल दिया और कहा कि दोबारा थाने में घुसने की जुर्रत मत करना।

इस घटना की जानकारी मिलने पर पत्रकारों में नाराजगी फैल गई। वरिष्ठ पत्रकार एमआर मलकानी, ललित परिहार, भानवार जंगीद, सीएम कल्‍ला , राजेन्द्रसिंह सांजू,  सुनील दत्त,  विक्रम दत्त,  संगीता शर्मा सहित बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी वहां पहुंच गए। उन्होंने अजयसिंह को थाने से हटाने की मांग को लेकर थाने के चौक में धरना दे दिया। परन्‍तु पुलिस अफसरों ने कोई ध्‍यान नहीं दिया। इसके बाद पत्रकारों ने अपने आंदोलन को तेज करते हुए शहर के प्रमुख नई सड़क चौराहे पर धरना दिया। धरने में कांग्रेस व भाजपा के जिलाध्यक्ष व अन्य नेता और शहर के कई संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। आखिर में मजबूर होकर पुलिस आयुक्त भूपेन्द्र कुमार दक ने अजयसिंह थाने से हटा दिया। अजय सिंह को हटाए जाने की जानकारी पुलिस उपायुक्त राजेश मीणा ने धरने पर पत्रकारों को दिया, जिसके बाद उन्‍होंने अपना धरना समाप्‍त किया।

बसपा विधायक के हाथों बिके पत्रकार, खबर को मार डाला

यशवंतजी, नमस्‍कार। सहारनपुर में मीडिया का इतना बुरा हाल होगा यह किसी ने सोचा भी ना होगा। शुक्रवार को सहारनपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। लेकिन इसमें सहारनपुर की मीडिया को इस तरह से मैनेज कर लिया गया कि इस खबर को सभी ने बहुत हल्का कर दिया। अधिकतर अखबारों ने तो इसे छापा ही नही और न्यूज चैनलों में तो लगभग सभी चैनल मैनेज हो गये। कुछ अखबारों ने खबर छापी तो बहुत मामूली करके।

शुक्रवार 24 जून को एक औरत अपने बच्चों के साथ मिलकर अपने बीमार पति,  जो कि इस वक्त कोमा में पड़ा हुआ था,  को लेकर सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के सामने पहुंच गयी। उसने अपने पति की चारपाई वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक के कार्यालय के सामने ही बिछा दी और इंसाफ़ की मांग करने लगी। उसका आरोप था कि उसके पति को इस हालत में पहुंचाने वाले अभियुक्तों को बसपा विधायक रविन्द्र मोल्हु का सरंक्षण प्राप्त है। इसी कारण से पुलिस रिपोर्ट दर्ज होने के एक माह बाद भी कोई कार्रवाई नही कर रही है।

जैसे ही विधायक जी को यह पता चला कि मीडिया इस खबर के पीछे लग गया है और अब वह भी शाहनवाज राणा की तरह की तरह अखबारों व चैनलों की सुर्खियां बनेंगे तो उन्होंने मीडिया मैनेजमेंट शुरू कर दिया। विधायक महोदय इसमें सफ़ल भी हो गये। क्योंकि किसी भी अखबार व चैनल ने उनका नाम तक नही छापा। हालांकि वह औरत व उसका भाई दोनों इस बात को गला फ़ाड़-फ़ाड़ कर कह रहे थे।

इसमें एक फ़ायदा तो उस महिला को जरूर मिला। एक माह से जो कार्रवाई पुलिस द्वारा रूकी हुई थी उसमें अचानक तेजी आ गयी। या यह मानें कि विधायक जी को शाहनवाज राणा का हाल नजर आ गया तो उनके रिश्तेदार अभियुक्त तुरन्त पुलिस गिरफ़्त में आ गये। पुलिस ने देर रात उन्हे गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया। लेकिन वाह री सहारनपुर मीडिया – विधायक जी को मुख्यमंत्री के प्रकोप से बचाने को उनका नाम तक नही छापा या दिखाया।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

राघवेंद्र सिंह, शैलेष दीक्षित एवं अखिलेश मिश्रा को पत्रकारिता पुरस्‍कार

कानपुर में पत्रकारिता के क्षेत्र में पत्रकारों के प्रोत्साहन के लिए वर्ष 2011 से प्रारम्भ किए गए दादा देवी सहाय बाजपेयी स्मृति पुरस्कार के वितरण समारोह पर स्वतंत्रता सेनानी स्व. दादा देवी सहाय बाजपेयी के पौत्र एवं उड़नतस्तरी समाचार पत्र के संपादक राजेश बाजपेयी ने पुरस्कार वितरित किए। पुरस्‍कार समारोह में राघवेन्द्र सिंह चौहान को बेस्ट फोटोग्राफी, फीचर लेखन में शैलेष दीक्षित, विशेष रिपोर्टिंग के लिए अखिलेश कुमार मिश्रा को शाल एवं मोमेन्टो देकर सम्मानित किया गया।

पब्लिक प्रेस एसोसिएशन के तत्वाधान में प्रारम्भ किए गए इस पुरस्कार कार्यक्रम के मौके पर घोषित किया गया कि पत्रकारों के सम्मान के लिए प्रतिवर्ष जून एवं दिसम्बर माह में सम्मान समारोह कार्यक्रम कानपुर शहर में आयोजित किया जाएगा। दादा देवी सहाय बाजपेयी एक स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं,  जिनके नाम पर कानपुर शहर के दादानगर एवं देवीसहाय नगर बसाए गए हैं। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सरनाम सिंह, गौरव तिवारी, विवेक दीक्षित, अशोक शुक्ला लाली आदि लोग मौजूद रहे।

पत्रकार को सबक सिखाने के लिए भतीजी से गैंग रेप

नई दिल्ली। अपराधियों को बेनकाब करने वाले पत्रकार और उनके परिवार वाले इन दिनों दहशत के साये में हैं। मुंबई के टैब्लॉइड मिड-डे के क्राइम रिपोर्टर जे. डे की दिनदहाड़े हत्या के बाद एक पत्रकार को उत्तर प्रदेश के एक कुख्यात गैंगस्टर के खिलाफ लिखने और दोहरे हत्याकांड में गवाही देने की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। महबूब पांडे गैंग के गुर्गों ने दिल्ली में रहने वाली उनकी भतीजी को किडनैप कर तीन दिनों तक उसके साथ गैंग रेप किया।

बुलंदशहर, खुर्जा, गाजियाबाद और नोएडा में क्राइम करने वाला महबूब पांडे गैंग के गुर्गे कई मर्डर और दूसरे मामलों में आरोपी हैं। बताया जाता है कि इन लोगों ने युवती को रिपोर्टर की बेटी समझकर किडनैप किया था। रिपोर्टर एक न्यूज चैनल और हिंदी पत्रिका के लिए काम करता है। मर्डर केस में गवाही के बाद इस गैंग की ओर से मिली धमकी के बाद रिपोर्टर को पुलिस सुरक्षा भी दी गई थी।

दिल्ली पुलिस में स्पेशल सेल के डीसीपी अरुण कंपानी ने बताया कि लड़की को अगवा कर तीन दिनों तक गैंग के कई सदस्यों ने बलात्कार किया। एसीपी एल.एन. राव ने बताया कि कोतवाली पुलिस में दर्ज कराई गई एफआईआर में 5 लोगों को नामजद किया गया है। यासीन भटौला, आबिद भटौला और महबूब पांडे को बुलंदशहर में दबोचा जा चुका है, जबकि नवाब और जावेद अभी भी फरार हैं।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ में यासीन ने कबूल किया है कि वह महबूब पांडे गैंग का शार्प शूटर है। पत्रकार सिंकदराबाद के इरशाद और इदरिश हत्याकांड में गवाह है, जिसमें महबूब पांडे प्रमुख अभियुक्त है। पांडे और उसके गुर्गों ने पत्रकार को कई बार धमकी भी दी थी कि अगर उसने अपना नाम वापस नहीं लिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कंपानी ने बताया कि बार-बार की धमकी से भी जब पत्रकार पीछे नहीं हटे तो गैंग ने पत्रकार के भाई की बेटी को किडनैप कर लिया। हालांकि, गैंग के लोग उसे पत्रकार की बेटी समझ रहे थे। साभार : नवभारत टाइम्‍स

रायपुर में पत्रकारों पर हमला, तीन के सिर फूटे

देश में वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे हत्याकांड में पुलिस की जांच अभी खत्म ही नहीं हुई कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बुधवार रात पत्रकारों पर फिर से कातिलाना हमला किया गया. छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हमला कोई नई बात नहीं है. पिछले छह महीने के अंदर प्रदेश में दो पत्रकारों की निर्मम हत्या की जा चुकी है, वहीं करीब दर्जन भर पत्रकारों पर कातिलाना हमला किया जा चुका है.

बावजूद इसके प्रशासन इन घटनाओं से सबक नहीं ले रही. और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की जान आफत में है. बुधवार रात राजधानी रायपुर की घटना को ही लिया जाए. कचहरी चौक पर स्थित महिंद्रा होटल में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों और गुंडों आधा दर्जन पत्रकारों की बेदम पिटाई कर दी. होटल में एक कंपनी की पार्टी थी. पत्रकारों को उसी में आमंत्रित किया गया था. होटल में मौजूद असामाजिक तत्वों ने भोजन बनाने वाले लोहे के बड़े सामानों से पीटा. मारपीट में तीन पत्रकारों के सिर फूट गए.

पत्रकारों का हाल देखकर राजधानी के मीडिया कर्मियों ने गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सिविल लाइन थाने का घेराव कर दिया. पत्रकारों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस द्वारा आनन-फानन

घायल
घायल पत्रकार
में दर्जन भर आरोपियों को गिरफ्तार करना पड़ गया.और पत्रकारों पर जानलेवा हमले करने के जुर्म में आईपीसी की धारा 307 के तहत उनपर मामला दर्ज किया गया. दरअसल पेन सोल कंपनी की ओर से होटल में पार्टी का आयोजन किया गया था. इसमें मीडिया के लोग आमंत्रित थे. पार्टी के दौरान ही होटल में मौजूद असामाजिक तत्वों ने पत्रकारों को अपशब्द कह दिया. पत्रकारों ने उनकी बातों का विरोध किया. जिसके बाद होटल में मौजूद इन लोगों ने भोजन तैयार करने के सामानों से मीडिया कर्मियों पर टूट पड़े. इस काम में होटल के मालिक और उनके स्टाफ ने भी पूरा सहयोग किया.

इस घटना में प्रदीप और अशोक सहित एक अन्य मीडिया कर्मी का सिर फूट गया. पूरी घटना के बाद पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश है. पूर्व मंत्री विधान मिश्रा भी घटना स्थल पर तत्काल वहां पहुंच गए. उन्होंने अपनी गाड़ी में ही घायलों को थाने पहुंचाया. ये घटनाएं बत्ताने के लिए काफी है कि पूरे देश खासतौर पर छत्तीसगढ़ में पत्रकार अब सुरक्षित नहीं रह गये हैं. छत्तीसगढ़ में दो पत्रकारों की हत्या के बाद इन घटनाओं से पूरी पत्रकार बिरादरी दहशत में आ गई है. करीब छह महीने पहले बिलासपुर में दैनिक भास्कर से जुड़े पत्रकार सुशील पाठक को भी दफ्तर से घर लौटते हुए कुछ अज्ञात लोगों ने गोलियों से भून दिया था. उस मामले में भी पुलिस ने आनन फानन में सुशील पाठक के पड़ोस में रहनेवाले बाबर खान को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन जांच अभी भी अधूरी है क्योंकि मारे गये पत्रकार का मोबाइल अभी तक बरामद नहीं किया जा सका है. स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक असल में अब प्रशासन ही पत्रकारों के पीछे पड़ गया है. सुशील पाठक हत्याकांड की जांच चल ही रही थी कि रायपुर जिले के छुरा में नई दुनिया के पत्रकार उमेश राजपूत की उन्हीं के घर पर घुसकर हत्या की गई थी.

पिछले छह महीने में दो पत्रकारों की हत्या और कुछ पत्रकारों पर किए गए हमले यह बत्ताने के लिए काफी है कि रमन राज में पत्रकार सुरक्षित नहीं रह गये हैं. किसी दौर में निश्चित रूप से पत्रकारपत्रकारों की प्रशासन के सामने चलती थी लेकिन अब प्रशासन ने भी पत्रकारों को पटाने की बजाय सीधे मालिकों को मिलाने का काम कर लिया है,  जिसके कारण अब संकट में होने पर भी पत्रकार की मदद में प्रशासन आगे नहीं आता. इन घटनाओं से आम लोग भी काफी दहशत में हैं. पत्रकारों के स्वर्ग कहे जाने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उनकी इस तरह से हत्याएं निश्चित रूप से प्रशासन की लापरवाही दर्शाता है. छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की दशा दयनीय होती जा रही है. अखबार मालिकों के दबाव से इतर अब प्रशासन के सामने भी उनकी स्थिति लाचारों की होती जा रही है. इसी का परिणाम है कि एक महीने के अंदर दो पत्रकारों की हत्या हो जाती है और रमन सरकार सिर्फ जांच का आश्वासन देकर चुप हो जाती है. लिहाजा ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी है कि रमन राज में किसका बोलबाला है.

आम जनता की आवाज उठाने वाले पत्रकार भी इनके निशाने पर हैं. लगातार मीडियाकर्मियों पर हमला हो रहे हैं. आदतन बादमाश मीडियाकर्मियों को निशाना बना रहे हैं. जनता की बात को रखने वाले प्रेस के लोग इनके निशाने पर हैं. मीडिया पर हुए हमले ने गुंडों की बढ़ती रंगदारी की पोल खोल कर रख दी है. जब जनता की बात रखनेवाले ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा…इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं.

रायपुर से आरके गांधी की रिपोर्ट.

बाल रिपोर्टर लिख रहे हैं बदलाव की नई इबारत

दुर्ग, छत्‍तीसगढ़।  जब 16 साल की पौशा मधारिया बोलती है तो वह छत्तीसगढ़ के हर बच्चे के लिये उम्मीदों, सपनों एवं भय की आवाज बन जाती है। छत्‍तीसगढ विधान सभा के समक्ष खड़ी पौशा मधारिया बाल श्रम, कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव और अनेक लड़कियों द्वारा स्कूल जाने के रास्ते में आने वाली दिक्कतों को लेकर अपनी चिंतायें जाहिर करती है।

पौशा बिना किसी झिझक के विधायकों से कहती है कि उसके पास के एक गांव मुरमुंडा में शराब की एक दुकान के बाहर शराबी लोग नशे में धुत होकर झूमते रहते हैं और वहां से गुरजने वाले बच्चों को धमकाते रहते हैं। वह कहती है,  ”मैंने शराब पीने वाले लोगों से कहा कि वे स्कूल जाने वाले बच्चों के लिये बाधा पैदा कर रहे हैं।”  वह याद करते हुये कहती है,  ” मैंने कहा कि इस दुकान को सार्वजनिक जगह से हटा कर कहीं और ले जाया जाये।”

उसने इस मामले पर हाल में शुरू हुये ”बाल स्वराज”  नामक समाचार पत्र में भी लिखा है। यह समाचार पत्र यूनिसेफ की चाइल्ड रिपोर्टर्स इंसिएटिव के तहत राज्य में 2007 से निकलना शुरू हुआ और यह महीना में दो बार प्रकाशित होता है। शराब की दुकान चलाने वाले मिथलेश पाण्डे का कहना है कि बच्चों की चिंताओं के प्रति वह अब अधिक संवेदनशील हो गया है। पाण्डे कहता है,  ”मैं यहां अपनी नौकरी कर रहा हूं। लेकिन समाचार पत्र में रिपार्ट पढ़ने के बाद मैं बच्चों की भी मदद कर रहा हूं।” वह कहता है। हाल में उसने सड़क पर गिरे एक आदमी को उठाया।

संयुक्त राष्‍ट्र बाल अधिकार प्रस्ताव के अनुच्छेद 12 के अनुपालन के प्रयास के तौर पर चाइल्ड रिपोर्टस इनिशिएटिव के तहत बाल कार्यकर्ताओं की भर्ती की जाती है और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। यह बच्चों को निर्भीक होकर बोलने और अपनी चिंताओं को उजागर करने का अधिकार देता है। छत्तीसगढ़ के एक बड़े क्षेत्र में हिंसक राजनीतिक उपद्रव हुये हैं, जिसके कारण बच्चों एवं उनके परिवारों के लिये सामाजिक सुविधाओं को हासिल करना अधिक मुश्किल हुआ है। मायाराम सुरजन फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन की सहायता से पौशा जैसे करीब 1,200 बाल रिपोर्टर उन्हें, उनके परिवारों एवं राज्य में विभिन्न समुदायों को प्रभावित करने वाले मुददों के बारे में लिख रहे हैं।

गंभीर मुददों को उजागर करना :  एक अन्य बाल रिपोर्टर 16 वर्षीय पूजा देवांगन की मदद से पौशा ने गांव में मरीजों का इलाज डाक्टरों से कराने के बजाय झाड़-फूंक करने वालों से कराने की प्रथा पर काबू पाने में सफलता पायी। वे कहते हैं, ”सही इलाज नहीं मिलने के कारण एक बच्चे की मौत हो गयी।” उसने हाल में एक त्यौहार के मौके पर अपने घर के बाहर अत्यंत मनोरम रंगोली बनायी। उसने झाड़-फूंक पर लिखे गये लेख के साथ प्रकाशित हुये एक कार्टून की डिजाइन बनाने में मदद की। इस कार्टून में दिखाया गया है कि बड़े-बड़े बालों वाला एक साधु एक मरीज के सिर पर झाडू फेर रहा है तथा एक दूसरे को काटने वाली दो हडिडयों के बीच एक कपाल इस खतरे से लोगों को आगाह कर रहा है।

स्वराज के एक नवीनतम अंक में पोलियो से ग्रस्त एक बच्ची के कष्‍ट, तंबाकू खाने के खतरों, होटलों में एवं बढ़ई के रूप में गैर कानूनी तौर पर काम करने वाले बच्चों तथा उन्हें स्कूल जाने से रोकने वाली गरीबी के बारे में भी लेख छापे गये हैं। मुमुंडा के सरकारी माध्यमिक स्कूल में छह बच्चे अपने लेख नियमित तौर पर अखबार को देते हैं। चैदह साल के उमा शंकर जोशी ने उस बच्चे के बारे में लिखा है जो बिना ढके एक कुएं में गिर गया और वह डूबते-डूबते बचा। एक गर्मी भरी दोपहरी में देवरथ चंडेल नामक बच्चा कुएं के पास अपने दोस्तों के साथ नहाता है। खेल-कूद के दौरान वह अपना संतुलन खो देता है और कुएं के पानी में गिर जाता है। उसके दोस्त लाकेश लाहरे और अन्य बच्चे एक मानव श्रृंखला बनाते हुये उस बच्चे को बाहर निकाल लेते हैं।

उमा शंकर का लेख प्रकाशित होने के बाद गांव के सरपंच ने उसका लेख पढ़ा और एक निर्जन घर के बाहर खुदे उस कुएं को मिट्टी से भरवाने की व्यवस्था की। उमा शंकर कहता है, ”मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। मैं बच्चों की मदद करने के लिये इस तरह का काम कर रहा हूं।” उसके माता-पिता निरक्षर मजदूर हैं। उसे अपने बेटे पर गर्व है। वह कहता है, ”मेरे माता-पिता कहते हैं कि यह अच्छा काम मैं करता रहूं।”

द टीन ने गांव के त्यौहार में रस्सी पर चलने का करतब दिखाने वाले पांच साल के एक बच्चे के बारे में भी लिखा है। द टीन ने लिखा है, ”हर रात वह एक धूल भरे चैराहे पर अपना अत्यंत खतरनाक करतब दिखाने के लिये अपने लिये यह खतरा मोल लेता है।” द टीन लिखता है, ”यह खतरनाक काम है और बाल श्रम की अनुमति नहीं है।”

परिवर्तन के दूत :  हर बाल रिपोर्टर को एक आधिकारिक प्रेस पास जारी किया गया है जिसे वे अपनी रिपोर्ट लिखने के लिये संबंधित लोगों को दिखा सकते हैं। चैदह साल की सुमन जोशी जब एक लेख लिखने के लिये शोध के लिये लोक निर्माण विभाग जाती है तब अपना प्रेस पास दिखाती है। उसे स्कूल के पास की नहर में बाढ़ के बारे में लिखना था।

सुमन कहती है, ”लोग समझते हैं कि हम यहां परिवर्तन लाने की कोशिश कर रहे हैं।”  वह कहती है, ”वे हमारी रिपोर्टों से प्रभावित होते हैं!”  स्कूल के हेडमास्टर हेमराज साहू कहते हैं, ”वह नियमित तौर पर बच्चों के अखबार को पढ़ते हैं और वह इस तरह से अपने समुदाय के बारे में बहुत कुछ जानकारी पाते हैं।” साहू कहते हैं, ”ये छात्र समस्याओं को उजागर करते हैं और वे उस हौसले को दिखा रहे हैं जिसे ज्यादातर बड़े लोग नहीं दिखा पाते।”

यह लेख फर्स्ट न्यूज लाइव डाट काम से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.

यूपी के दो वरिष्‍ठ पत्रकारों को पितृशोक

अमर उजाला, लखनऊ के चीफ सब एडिटर राजेंद्र सिंह के पिता बनारसी सिंह का निधन हो गया. वे 68 वर्ष के थे. उनका निधन बिजनौर जिले के खुशालपुर गांव स्थित पैतृक निवास में हुआ. उनका बैराज घाट पर अंतिम संस्‍कार किया गया. वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं.

जनवाणी, कानपुर में तैनात वरिष्‍ठ पत्रकार सूर्य प्रकाश तिवारी के पिता का निधन हो गया. शनिवार को एक सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे. जिसके बाद उन्‍हें सहारा हास्‍पीटल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्‍होंने अंतिम सांस ली. सूर्य प्रकाश 18 सालों तक कानपुर में अमर उजाला के साथ जुड़े रहे हैं.

चार साल में 247 पत्रकारों की हत्‍या हुई

पाकिस्तानी पत्रकार सलीम शाहजाद और भारत के ज्योतिर्मय डे की हत्या भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ अभिव्यक्ति के सिद्धांत पर अमल करते हुए हुई. डे और शाहजाद इस मुहिम में अकेले नहीं रहे, यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक 2006 से 2009 तक दुनिया में 247 पत्रकार सूचना क्रांति को आगे बढ़ावा देते हुए कुर्बान हुए.

संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की रिपोर्ट के अनुसार, 2006 से 2009 के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मुहिम को कलम के माध्यम से आगे बढाते हुए भारत में छह पत्रकार बलिदान हुए.

यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2006 में 69 पत्रकारों की हत्या हुई जिसमें सबसे अधिक 29 इराक, छह फिलिपीन, दो भारत, दो पाकिस्तान, तीन अफगानिस्तान, तीन रूस, चार श्रीलंका के थे. साल 2007 में सबसे अधिक 33 पत्रकार इराक में मारे गए जबकि सोमालिया में सात, अफगानिस्तान में दो तथा ब्राजील, तुर्की, मैक्सिको में एक.एक पत्रकार कुर्बान हुए.

साल 2008 में दुनिया में 49 पत्रकार मारे गए जिसमें 11 पत्रकार इराक में, जार्जिया में पांच, मैक्सिको और रूस में चार चार, फिलिपीन में तीन पत्रकार शामिल हैं. साल 2008 में भारत में भी चार पत्रकार चौथे स्तम्भ की रक्षा करते हुए शहीद हुए.

साल 2009 में 77 पत्रकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मुहिम को आगे बढ़ाते और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ क्रांति की मशाल जलाते हुए मारे गए. इस वर्ष सबसे अधिक 34 पत्रकार फिलिपीन में मारे गए जबकि सोमालिया में सात, रूस में चार, मैक्सिको में सात, इराक में चार, अफगानिस्तान में चार पत्रकार मारे गए. यूनेस्को की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन वर्षों में पत्रकारों की हत्या के मामलों से स्पष्ट है कि मीडिया से जुड़े लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाये गए हैं.

यह दुखद है कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं. अगर इनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाये गए तो पत्रकार ऐसे भ्रष्ट तत्वों का ‘आसान निशाना’  बने रहेंगे. रिपोर्ट के अनुसार, ‘2006 से 2009 के बीच पत्रकारों की हत्या के संबंध में बांग्लादेश, भारत, ब्राजील, कोलंबिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडो, ग्लाटेमाला, इंडोनेशिया, लेबनान, म्यामां, फलस्तीन, फिलिपीन, रूस, तुर्की ने न्यायिक जांच करायी. जबकि इराक, अफगानिस्तान, चीन, श्रीलंका आदि देशों में ऐसे मामलों की न्यायिक जांच नहीं करायी गई.’ साभार : आजतक

पीएमओ में अटकी मजिठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशें, अखबारी कर्मचारी आज करेंगे प्रदर्शन

वेतनमान में संशोधन संबंधी मजीठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशों को लागू करने में सरकार की ओर से हो रही देरी के खिलाफ अखबारी कर्मचारियों ने शुक्रवार को आईएनएस एवं श्रम मंत्रालय के सामने विशाल प्रदर्शन करने का फैसला किया है.

उधर श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को कहा कि पत्रकारों, गैर पत्रकारों के लिए गठित वेतनबोर्ड की सिफारिशों की मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखने के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय कदम उठाएगा. अखबार कर्मचारियों, पत्रकार संगठनों के शीर्ष मंच कन्‍फेडरेशन ऑफ न्‍यूज पेपर्स एण्‍ड न्‍यूज एजेंसी आर्गेनाइजेशन्‍स की गुरुवार को हुई आपात बैठक के बाद कन्‍फेडरेशन के महासचिव एमएस यादव ने अखबार मालिकों के संगठन के मुख्‍यालय आईएनएस और श्रम मंत्रालय पर शुक्रवार को जोरदार प्रदर्शन की घोषणा की. उन्‍होंने कहा कि आईएनएस दुश्‍प्रचार में लगा है. सरकार भी उसके दबाव में है. अखबार मालिक अपनी बात तो प्रकाशित कर रहे हैं लेकिन हमारे पक्ष को नहीं. आखिर यह कैसी अखबारी स्‍वतंत्रता है. यादव ने कहा कि महंगाई के इस कठिन दौर में पिस रहे अखबार उद्योग के पत्रकारों और गैर पत्रकारों की सब्र का सरकार इम्तिहान ले रही है यह कतई जायज नहीं है.

शुक्रवार को दिल्‍ली में कन्‍फेडरेशन के बैनर तले बड़ी संख्‍या में पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचा‍री यूएनआई में एक बजे इकट्ठे होंगे और वहां से आईएनएस एवं श्रम मंत्रालय की ओर मार्च करेंगे. गुरुवार की बैठक में कन्‍फेडरेशन के घटक आईएफडब्‍ल्‍यूजे, एनयूजे, आईजेयू, एआईएनईएफ,  फेडरेशन ऑप पीटीआई एम्‍पलाइज यूनियन और यूएनआई वकर्स यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हुए. यादव ने कहा कि हम उम्‍मीद कर रहे थे कि मंत्रिमंडल की गुरुवार की बैठक में बारह साल बाद हमारे वेतनमान में संशोधन की सिफारिश पर न्‍याय हो जाएगा. पर श्रम मंत्री खड़गे की इस बात से हमें निराशा हुई है कि मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में अटका पड़ा है. जबकि यह हफ्तों पहले से लगातार कहते आ रहे हैं कि जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड का प्रस्‍ताव जल्‍द ही मंत्रिमंडल को भेजा जाएगा. कन्‍फेडरेशन ने कहा कि अगर और देरी हुई तो अखबारी कर्मचारी देशभर में धरना-प्रदर्शन तेज करेंगे.

इससे पहले श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को कहा कि वेतन बोर्ड की सिफारिशों की मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के सामने रखने के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय ही कदम उठाएगा. खड़गे ने न्‍यायमूर्ति जीआर मजीठिया की रिपोर्ट की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मुझे सभी मंत्रालयों से टिप्‍पणियां पहले ही मिल चुकी है. मैंने उन्‍हें प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंप दिया है. अब प्रधानमंत्री कार्यालय इस मुद्दे को मंत्रिमंडल के सामने लाने के लिए निश्चित तौर पर कदम उठाएगा. ये सिफारिशे पिछले साल 31 दिसम्‍बर को सरकार को सौंपी गई थी. प्रस्‍तावों को लागू करने में देरी के खिलाफ कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं. साभार : जनसत्‍ता

पर्यावरण जागरूकता के लिए कई मीडियाकर्मी सम्‍मानित

ग्वालियर में विश्व पर्यावरण दिवस पर मध्यप्रदेश पत्रकार संघ द्वारा पर्यावरण संरक्षण में मीडिया की भूमिका विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता देश के मूर्धन्य पत्रकार स्वर्गीय प्रभाष जोशी के बेटे और जाने -माने पर्यावरण पत्रकार सोपान जोशी थे. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता थी जबकि कार्यक्रम के अध्यक्ष विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के अध्यक्ष जय सिंह कुशवाह थे.

विशिष्ठ अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल, डॉ. केशव पांडे, सुरेश डंडौतिया, जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक एचएल चौधरी तथा नव भारत के पूर्व संपादक डॉ. सुरेश सम्राट मौजूद थे. कार्यक्रम के प्रारंभ में संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेन्द्र माथुर ने स्वागत भाषण और महासचिव राजेश शर्मा ने कार्यकारिणी की रूपरेखा पेश की. इसके बाद सभी ने पर्यावरण संरक्षण में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला और आह्वान किया कि वे इस पर गंभीरता के साथ जन जागरण की खबरें लिखें.

सम्‍मान

इस मौके पर अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य करने के लिए दैनिक भास्कर के रिपोर्टर हरे कृष्ण दुबोलिया और फोटो जर्नलिस्ट विक्रम प्रजापति, पीपुल्स के फोटो जर्नलिस्ट रवि उपाध्याय. पत्रिका के रिपोर्टर राजदेव पांडे और नई दुनिया के रिपोर्टर अरविन्द पांडे को शाल, श्री फल और पर्यावरण की प्रतीक बम्बू स्टिक के रूप में स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया. राज देव की अनुपस्थिति में उनका सम्मान संस्था के ही वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र सिंह तोमर ने ग्रहण किया.

कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन सत्य प्रकाश शर्मा ने किया. इस संगोष्ठी में मौजूद अन्य वरिष्ठ पत्रकारों में ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान के अध्यक्ष देव श्रीमाली, वरिष्ठ पत्रकार साविर अली, समाजसेवी राजेश मंगल, जावेद खान, नासिर गौरी लाजपत अग्रवाल, समेत संभाग भर के सैकड़ों पत्रकार सामिल हुए.

पीटीआई के पत्रकार के खिलाफ धोखधड़ी का मुकदमा

रायगढ़ में पीटीआई के पत्रकार विजय केडिया पर पुलिस ने धोखाधड़ी और एससीएसटी एक्‍ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है. विजय पर आरोप है कि उन्‍होंने एक आदिवासी कोटवार से धोखाधड़ी कर जमीन हथियाई है. लिहाजा जिला कलेक्‍टर ने जांच के बाद मामला पुलिस को सौंप दिया था. जिसके बाद पुलिस ने विजय पर मुकदमा दर्ज कर लिया.

जानकारी के अनुसार रायगढ़ के ग्राम गोरखा में विजय ने शासन स्‍तर से जमीन छह- सात साल पहले ली थी. यह जमीन उनको शासन की तरफ से आवंटित कराया गया था. कोटवार ने उनके खिलाफ प्रशासन से शिकायत की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ 420 समेत कई मामलों में मुकदमा दर्ज किया गया. इस संदर्भ में आरोपी बनाए गए विजय केडिया का कहना है कि मैंने कोई धोखाधड़ी नहीं की है.

विजय का कहना है कि उक्‍त जमीन का आबंटन शासन की तरफ से नियमानुसार हुआ था. एक अक्‍टूबर 2005 को उक्‍त जमीन मुझे आबंटित किया गया था, जिसके लिए मैंने एक लाख तीन हजार सात सौ पचास रुपये जमा किए थे. सारी प्रकिया कानूनी रुप से पूरी की गई थी. इतने सालों बाद अचानक कैसे कोटवार ने मुझे धमकी देकर जमीन लिखवाने का आरोप लगा दिया.

विजय का कहना है कि कलेक्‍टर अशोक अग्रवाल तथा एसपी ने मुझे मिलकर निपटाने की कोशिश की है. मुझे खबर लिखने के कारण प्रताडि़त किया जा रहा है. कलेक्‍टर ने अपने ट्रांसफर का आदेश आने के बाद मेरे खिलाफ कार्रवाई की है. बिना मेरा बयान लिए गए कार्रवाई कर दी गई. अब मेरे भाई को भी फर्जी मुकदमें में फंसाने की साजिश रची जा रही है.

पत्रकार राजीव गोयल पर कातिलाना हमला

डबवाली ( सिरसा) :  शहर में गुंडागर्दी चरम सीमा पर पहुंच गई है। गुंडातत्व बौखलाहट में पत्रकारों पर भी कातिलाना हमला करके जनता की आवाज को दबाने का प्रयास करने लगे हैं। सोमवार रात को अज्ञात कार सवारों ने पत्रकार राजीव गोयल पर जानलेवा हमला करके उसकी हत्या करने का प्रयास किया। घायल अवस्था में वार्ड नं. 1 के पार्षद जगदीप सूर्या ने उन्हें उपचार के लिए सरकारी अस्पताल में पहुंचाया।

पत्रकार राजीव गोयल सोमवार रात को करीब सवा नौ बजे दैनिक लहू की लौ कार्यालय से अपने घर के लिए अपनी एवीएटर पर निकले थे। कार्यालय से कुछ दूरी पर स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर के बैक साईड वाली गली में वे जैसे ही पहुंचे तो पीछे से एक फोर्ड फिगो गाड़ी आई और एवीएटर का रास्ता रोककर खड़ी हो गई। कार से दो युवक बाहर आए। जिनमें से एक ने मुंह कपड़े से ढांप रखा था। उन्होंने उसकी हत्या का प्रयास करते हुए बैसबॉल बैट से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। राजीव गोयल ने एवीएटर वहीं फेंककर अपनी जान बचाई और शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर घरों से निकले लोगों को देखकर गुण्डे भाग खड़े हुए।राजीव गोयल ने बताया कि गुण्डों की संख्या चार से पांच हो सकती है। जिन लोगों ने कार से निकलकर उस पर हमला किया उनकी संख्या दो थी। बाकी कार के भीतर बैठे हुए थे।

क्या कारण हो सकता है : 4 जून रात करीब सवा नौ बजे थाना शहर के बाहर दो युवकों ने गांव जण्डवाला जाटान के बीरबंत सिंह नामक व्यक्ति पर हमला करके उसके कपड़े फाड़ दिए थे। शिकायतकर्ता बीरबंत ने इसकी शिकायत लिखित रूप से थाना शहर में भी की थी। इस समाचार को न प्रकाशित किया जाए इसके लिए इसी रात को करीब 11 से 12.30 बजे के बीच दो कॉल राजीव गोयल के मोबाइल पर आई। जिसमें एक कॉल हैप्पी और दूसरी कॉल उसी मोबाइल नं. से काला ग्रोवर ने करके कहा था कि यह समाचार अखबार में प्रकाशित न किया जाए। अगर अखबार में प्रकाशित किया गया तो इसके गंभीर परिणाम निकलेंगे। साथ में यह भी कहा था कि आप नहीं जानते कि बीरबंत कौन है? 5 जून का दैनिक लहू की लौ का अंक रात्रि 9 बजे से पूर्व प्रकाशित हो चुका था। जिसके चलते 6 जून के अंक में उपरोक्त घटना का समाचार लहू की लौ सहित अन्य समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ।

हमले से पूर्व गुण्डों ने की रेकी : गुण्डों ने राजीव पर कातिलाना हमला करने से पूर्व 6 जून की रात को करीब 8 बजे दैनिक लहू की लौ कार्यालय के आस-पास रेकी की। इस रेकी के लिए दो गुण्डे दैनिक लहू की लौ कार्यालय में आए। उन्होंने अपने आपको गांव मांगेआना निवासी हरजीवन सिंह सिधू और अवतार सिंह सिंधू के नाम से परिचित करवाते हुए कहा कि उन्होंने पिल्ले बिकाऊ का विज्ञापन अखबार में देना है। करीब आधा घण्टा तक कार्यालय में बैठे रहे। गांव मांगेआना में पता करने पर मालूम हुआ कि उक्त नाम के दोनों युवक गांव में है ही नहीं। इससे संदेह है कि इस हमले में ये दो युवक भी शामिल थे। हमले से पूर्व उन्होंने रेकी भी की थी।

घटना की सूचना पाकर मंगलवार सुबह हरियाणा पत्रकार संघ जिला सिरसा के अध्यक्ष लाजपुष्प राजीव गोयल का हालचाल जानने के लिए सरकारी अस्पताल डबवाली में पहुंचे। यहां डबवाली पत्रकार संघ के अध्यक्ष राजीव वढेरा, फतेह सिंह आजाद, विजय वढेरा, इकबाल सिंह शांत, महावीर सहारण, सुखपाल सिंह, डीडी गोयल, पवन कौशिक उपस्थित थे। इससे पूर्व रात को जयमुनी गोयल, रवि मोंगा, अशोक सेठी भी अस्पताल में पहुंचे। जबकि सुभाष सेठी ने फोन पर राजीव गोयल का हालचाल जाना। डबवाली के पत्रकारों ने पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के भीतर पत्रकार राजीव गोयल पर जानलेवा हमला करने वाले गुण्डों को पकड़ा नहीं गया तो पूरे हरियाणा में पत्रकार संघर्ष का बिगुल बजा देंगे। जिसकी जिम्मेवारी पुलिस और प्रशासन की होगी।

रायपुर में अखबार खोलकर पत्रकारों को ठगा जा रहा

रायपुर में नए खुल रहे अखबारों के हाल बेहाल हैं. कुछ महीने पहले ही सैकड़ों लोगों का पैसा लेकर फरार दैनिक ‘नेशनल लुक’ के मालिक राजेश शर्मा ने कई पत्रकारों को एक झटके में बेरोजगार कर दिया था. अब पत्रकारों से आठ-दस दिन काम कराकर पैसा न दिए जाने की बात सामने आ रही है. ये हाल है लगभग डेढ महीने पहले शुरू हुए दोपहर के टैबलायड अखबार ‘आज की दिनचर्या’ का.

अखबार को पूरा रंगीन और सोलह पेज का निकालने की बात कही गई थी. शुरू के 15 दिनों तक यह अखबार सिर्फ आठ पेज का निकाला गया. पहले सभी पन्‍ने रंगीन निकलने के बाद दूसरे दिन से ही अंदर के पन्‍ने सादे कर दिए गए. अखबार के संपादक प्रणय जैन हैं, जो कुछ समय पहले मुंबई में एड एजेंसी चलाते थे. इस दोपहर के अखबार की खासियत यह है कि ज्‍यादातर खबरें दूसरे अखबारों या अन्‍य माध्‍यमों से कट-पेस्‍ट की जाती हैं.

अखबार प्रबंधन जिन पत्रकारों को एप्‍वाइंट करता है, उनसे सात से दस दिन काम लेने के बाद कुछ न कुछ कमियां निकाल कर बाहर कर दिया जाता है. जबकि इस दौरान उनके काम करने के दिन के पैसे नहीं दिए जाते हैं. प्रबंधन इस तरह की कोई शर्त ज्‍वाइनिंग से पहले नहीं रखता है कि आपका टेस्‍ट लिया जा रहा है, या आपका काम ठीक नहीं होगा तो निकाल दिया जाएगा, उसका पैसा नहीं दिया जाएगा. प्रबंधन नए पत्रकारों को सिर्फ बेवकूफ बनाकर अपना काम निकाल रहा है.

पिछले दिनों पुलिस ने एक स्‍कोडा गाड़ी से 65 लाख रुपये की नकदी पकड़ी थी, उससे भी इस समूह का संबंध होने की चर्चा है. संपादक के रवैये से कई पत्रकार और आपरेटर काम छोड़कर चले गए हैं. सवाल अखबार निकालने का नहीं बल्कि उसके लिए अपनाए जा रहे तरीके का है. कुछ दिन काम कराकर पत्रकारों को छला जा रहा है. रायपुर में जैसे अखबार निकालकर दलाली करने का दौर चल पड़ा है. पत्रकारों को शिकार बनाकर संपादक-मालिक अपने काम निकाल रहे हैं.

कुछ समय पूर्व लोगों के अरबों रुपये लेकर फरार हुए ‘नेशलन लुक’ के मालिक-संपादक राजेश शर्मा अभी भी फरार है, जबकि उसके यहां काम करने वाले दर्जनों पत्रकार बेरोजगार हो चुके हैं. यह शख्‍स भी अखबार का दबाव बनाकर अपने उल्‍टे-सीधे कामों को अंजाम दे रहा था. जिस अमित अग्रवाल के मकान में राजेश शर्मा अपना चैनल चला रहा था, अब उस अमित अग्रवाल ने भी ‘ट्रू सोल्‍जर’ नाम से एक सांध्‍य दैनिक प्रकाशित करना शुरू कर दिया है. अब यह पत्रकारों का कितना भला करेंगे भगवान जाने.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

अखबारों के रंग : एक ने गोवा बंद किया दूसरे ने खोल दिया

नमिता
नमिता
शांति और खूबसूरती के लिए जाना जाने वाला गोवा 6 जून को दहक उठा.  मुद्दा था सरकारी अनुदान सिर्फ अंग्रेजी माध्यम के प्राइमरी स्कूलों को न मिले बल्कि मराठी और कोकनी भाषा के स्कूलों को भी मिले. बीबीएसएम यानी भारतीय भाषा सुरक्षा मंच ने कामथ सरकार के उठाये इस कदम का विरोध करते हुए 6 जून को गोवा बंद का आहवान किया.

पेरने से लेकर मप्सा, पणजी, वास्को, मार्गो और कनकोना तक इसका असर दिखा. ज्यादातर दुकान और स्कूल बंद रहे. हालाँकि कुछ जगहों पर बंद का असर कम भी दिखा. कई रास्ते सुनसान थे तो कई जगहों पर आगजनी भी देखने को मिली.  प्रशासन ने भारी तादाद में पुलिस की व्यवस्था की थी और आरएएफ़ के जवान भी तैनात थे. ये सब जिक्र करना जरूरी है क्योंकि 7 जून को गोवा के सभी अखबारों का प्रथम पृष्ठ इसी खबर से पटा हुआ था,  जो स्वाभाविक भी है, लेकिन जो अस्वाभाविक चीज़ देखने में आयी वो ये कि सभी अख़बारों ने अपने-अपने हिसाब से 6 जून की गोवा बंद की तस्वीर खींच डाली है.

गोवा

गोवा का एक बेहद प्रतिष्ठित अखबार अपने फोटो और आलेखों के जरिये ये दर्शाने की कोशिश कर रहा था कि बंद बिलकुल असफल रहा. वहीं दूसरी तरफ एक और अखबार ये बताने में जुटा था कि बंद पूरी तरह से सफल रहा. एक तीसरे अखबार ने संतुलन बनाये रखने की कोशिश की कि बंद का असर फिफ्टी-फिफ्टी रहा. गोवा कि ये सभी अखबार मुख्यधारा के अखबार हैं, ना कि किसी जाति या धर्म के मुखपत्र. ऐसे में इस गंभीर विषय, जो बच्चों के भविष्य से जुड़ी है, पर गंभीरता से विचार करने की बजाये अगंरेजी बनाम क्षेत्रीय भाषा ( कोंकणी, मराठी ) की लड़ाई में फँस कर रह गयी लगती है.

मुख्यधारा के एक अखबार की या पत्रकारिता क़ी जो गरिमा या जिम्मेदारी दिखनी चाहिए, वो 7 जून को प्रकाशित होने वाले अख़बारों में देखने को नहीं मिला. हर जगह भटकाव देखने को मिला, जो बेहद दुःखदाई है. मीडिया का काम व्यकितगत विचारों से परे उठ कर तथ्यों को सामने लाना है और वो भी पूरी पारदर्शिता के साथ, परन्‍तु गोवा के बड़े अखबार पूरी तरह से असफल दिखे.

नमिता शरण

एडिटर, गोवासमाचार.कॉम

जमीन की जंग लड़ने वाले पत्रकारों की संस्‍था में ही करोड़ों का घोटाला

इन्दौर । जमीन की जंग लड़कर भूमाफियों के सरदार बाबी छाबड़ा को भले ही मीडिया ने जेल की हवा खिला दी हो मगर हजारों सदस्यों को अभी तक भूखंड नहीं मिल सके। वहीं पत्रकार खुद अपनी जमीन ही नहीं बचा सके। पत्रकारों की गृह निर्माण संस्था ही पूरी भूमाफियों के हाथों बिक गई और एक भी पात्र पत्रकार भूखंड हांसिल नहीं कर सका।

संवादनगर एक्सटेंशन के नाम पर काटी जाने वाली कालोनी की इन्दौर के बिचौली हप्सी एवं टिगरियाराव की 8.30 एकड़ जमीन पर 199 फर्जी सदस्यों के नाम रजिस्ट्री हो गई, अब सहकारिता विभाग 365 सदस्यों की सूची को टांग कर दावे आपत्ति बुलाने की खानापूर्ति में जुटा हुआ है। नवलखा के पास जो संवादनगर बसा है उसमें 37 भूखंडों पर मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल ने मकान बनाए थे, जो पत्रकारों को आवंटित किए गए। उसके बाद संवादनगर एक्सटेंशन के नाम पर इसी संस्था ने ग्राम बिचौली हप्सी और टिगरियाराव में आवासीय जमीन खरीदी और 1993 से 1997 तक इन जमीन की रजिस्ट्री संस्था के पक्ष में हो गई।

संस्था का पंजीकृत पता 80 वल्लभनगर इन्दौर था, जो बदलकर वर्तमान में 6 एमजी रोड इन्द्रप्रस्थ टॉवर हो गया। हालांकि पता परिवर्तन की कोई सूचना सहकारिता विभाग को नहीं दी गई। संस्था के 2008-09 के आडिट में सहकारिता विभाग ने भी जबर्दस्त अनियमितताएं पाई हैं। इस आडिट रिपोर्ट के अनुसार संस्था में जहां वरीयता क्रम का उल्लंघन किया गया और नए सदस्यों को भूखंड देकर उनकी रजिस्ट्रीट कर दी गई। ये सभी गैर पत्रकार सदस्य थे। साल 2008-09 में संस्था ने 365 सदस्य बनाए जो विधान के विपरीत थे।

संस्था ने 8.30 एकड़ भूमि पर 276 भूखंड विकसित करना बताए,  जिसमें से संवादनगर एक्सटेंशन में 120 और तिलकनगर एनएक्स में 79 इस तरह कुल 199 भूखंडों को फर्जी सदस्यों को आवंटित कर उनकी रजिस्ट्रियां करवा दी और संस्था के जो पत्रकार सदस्य बनाए गए उसमें से एक को भी भूखंड हांसिल नहीं हुआ। वर्तमान में 27 भूखंड बचे हैं। अब सहकारिता विभाग सभी 365 नए पुराने सदस्यों की सूची टांगकर दावे आपत्तियां बुला रहा है, जिसकी समयावधि समाप्त होने पर कई पत्रकार सदस्यों ने हल्ला मचाया तब दावे आपत्तियों की सुनवाई की अवधि को बढ़ाया गया।

आडिट रिपोर्ट में सहकारिता विभाग ने यह भी पाया कि कालोनी के विकास में जो 65 लाख 83 हजार रुपये खर्च किए गए, उसका भी विधिवत अनुबंध विकास करने वाली फर्म के साथ नहीं किया गया और ना ही चेक से भुगतान हुआ। जबकि 20 हजार से अधिक का भुगतान अकाउंट पेई चेक से होना चाहिए। संस्था के कर्ताधर्ताओं ने एमके कंस्‍ट्रक्‍शन कम्पनी से विकास करवाकर लाखों का भुगतान नकद कर दिया, सालों पूर्व संस्था भूमाफियों के हाथ में बिक गई। इस संस्था में इन्दौर के पत्रकार जयकिशन गौड, प्रेस क्लब के अध्यक्ष सतीश जोशी जैसे लोग पदाधिकारी रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इन्दौर का जिला प्रशासन जिन 25 दागी संस्थाओं की जांच कर रहा है उसमें संवादनगर भी शरीक है। बहरहाल इन्दौर के अधिकांश पत्रकार अपनी किस्मत को कोस रहे हैं, सालों पहले सदस्य बने ये पत्रकार अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इन्दौर की पत्रकारिता में यह सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है।

इंदौर से अर्जुन राठौर की रिपोर्ट.

‘द न्‍यू क्रूसेडिंग गाइड’ को मनमोहन सिंह ने दिया कुलिश पुरस्‍कार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में पत्रिका समूह के संस्थापक कर्पूरचन्द्र कुलिश की स्मृति में प्रिंट मीडिया का “के.सी.कुलिश अन्तरराष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार-2009” प्रदान किया। इस बार यह पुरस्कार अफ्रीकी देश घाना के दैनिक “द न्यू क्रूसेडिंग गाइड” की टीम को प्रदान किया गया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेड न्यूज के बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त की। होटल ताज पैलेस में शाम को आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घाना की विजेता टीम को 11 हजार अमरीकी डॉलर की राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार के लिए घाना के दैनिक “द न्यू क्रूसेडिंग गाइड” की टीम को चुना गया था। इसके अतिरिक्त दुनिया के विभिन्न देशों से मिली प्रविष्टियों में से सात टीमों को मेरिट अवार्ड दिया गया।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी एल जोशी, सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, भूतल परिवहन मंत्री सी पी जोशी, सचिन पायलट , नमोनारायण मीणा, सहित अनेक केंद्रीय मंत्री , सांसद, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेशी राजनयिक व विभिन्न गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

दैनिक अखबारों में पत्रकारों की टीम की ओर से किए गए बेहतरीन काम को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार राशि के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है।

रचनात्मक बहस को बढ़ावा दे मीडिया: पीएम

प्रधनमंत्री ने कहा कि मैं पत्रिका और उसके मैनेजमेंट को जर्नलिज्म के क्षेत्र में एक अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार स्थापित करने के लिए बधाई देता हूं। मैं “द न्यू क्रूसेडिंग गाइड” के उन पत्रकारों को भी बधाई देता हूं, जिनको आज यह तीसरा के. सी. कुलिश पुरस्कार मिल रहा है। यह हम सबके लिए विशेष प्रसन्नता की बात है कि राजस्थान पत्रिका का यह अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार अफ्रीका के पत्रकारों को मिला है।

पीएम ने कहा कि हिन्दी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं का जर्नलिज्म भारत की सामाजिक असलियत को ज्यादा अच्छी तरह से पेश करता है। उन्होंने “हरिजन” और “आनन्द बाजार पत्रिका” जैसे अखबारों का हवाला देते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में और उसके बाद राष्ट्र निर्माण के काम में हिन्दी और दूसरी भारतीय भाषाओं के प्रेस ने संवेदनशील होकर अपनी जिम्मेदारी खूब निभाई है और भारतीय समाज का मार्गदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मे अंग्रेजी, हिन्दी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं के 2,000 से भी ज्यादा अखबार हैं। साप्ताहिक अखबारों की संख्या भी 3,000 से अधिक है।

उन्होंने पेड न्यूज के चलन पर चिंता जताते हुए कहा कि यह हम सबके लिए चिंता की बात है कि कुछ पत्रकार और संपादक छोटे फायदों के लिए उस समय अपनी गरिमा भूल जाते हैं। पेड न्यूज जैसी बातें मीडिया की इज्जत कम करती हैं। कभी-कभी खबरों को सनसनीखेज बनाने के लालच में हमारे कुछ पत्रकार भाई-बहनों को यह ख्याल नहीं रहता है कि असलियत को तोड़-मरोड़ कर पेश करने से हमारे समाज को बहुत नुकसान भी पहुंच सकता है। मुझे याद है कि अमरीका के एक प्रसिद्ध जर्नलिस्ट वॉल्टर लिपमैन ने एक बार कहा था कि “फैक्ट्स आर सेक्रेड एंड ओपिनियन इज फ्री, आई थिंक दैट होल्ड्स वैलिड इवन टुडे फॉर द मीडिया।” मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में मीडिया से सम्बंधित सभी लोग इन कमियों को दूर करने की पूरी-पूरी कोशिश करेंगे।

वट वृक्ष बन गया छोटा-सा बिरवा : जोशी

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी एल जोशी ने कहा कि कुलिश जी ने राजस्थान निर्भीक पत्रकारिता के माध्यम से राजस्थान में सूचना समाचार, सूचना, विवेचना एवं सामयिक घटनाओं को जानने की ललक पैदा की। यह एक बड़ी बात थी कि तत्कालीन राजस्थान जिसमें प्रगतिशीलता के नाम पर बहुत कुछ नहीं था, वहां के निवासियों में उन्होंने इसके लिये उन्होंने हिन्दी समाचार पत्र का एक छोटा “बिरवा” रोपा, जो समय के साथ-साथ आज एक विशाल “वट-वृक्ष” बन गया है। स्व. कुलिश जी सामाजिक सरोकार से जुड़े थे और उन्होंने अपने संसाधनों का उपयोग समाचार पत्र निकालने में किया, जो उस समय उद्योग कम जन-सेवा अधिक थी। यदि कुलिश जी चाहते तो अपने संसाधनों को ऎसे उद्योग धन्धों में लगा सकते थे जिनसे मुनाफा शीघ्र और पर्याप्त मात्रा में मिल सकता था, किन्तु उन्होंने समाचार पत्र निकालना श्रेयस्कर समझा।

आवश्यक बौद्धिक खुराक है पत्रकारिता : कोठारी

तृतीय केसीके अर्वाड के मौके पर पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि पत्रकारिता आज की जीवनशैली में एक आवश्यक बौद्धिक खुराक बन गई है। सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना तंत्र का विस्तार व्यक्ति की क्षमता से बाहर निकलता जान पड़ता है। तंत्र की संवेदनशीलता भी आज धराशायी हो गई। जिस गति से सूचना का प्रसारण होने लगा है, उस गति से उसे वापस नहीं लिया जा सकता। विकिलीक्स ने सूचना तंत्र को जिस तरह का झटका दिया, उसने तो खुफिया तंत्र को भी नाकारा साबित कर दिया। यह आपराधिक गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बन गया। सूचना के साथ जुड़ी सामाजिक शिक्षा मीडिया तंत्र से बाहर हो गई। मनोरंजन का हावी हो जाना मीडिया की भावी आपराधिक भूमिका का ही संकेत है।

पेड न्यूज के बढ़ते चलन पर कोठारी ने कहा कि जो रिपोर्ट प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया ने “पेड न्यूज” के मुद्दे पर प्रकाशित की, वह इस बात का प्रमाण है कि बड़े-बड़े समाचार-पत्र समूहों के लिए अपने-अपने स्वार्थो के आगे देश और लोकतंत्र गौण हो गया। लेकिन राजस्थान पत्रिका समूह इसका अपवाद कहा जा सकता है। जहां इसकी बराबरी वाले लगभग सभी पत्रों के नाम हैं, पत्रिका का नाम इस रिपोर्ट में नहीं है। लोकतंत्र इससे गौरवान्वित नहीं होता? इस अवसर पर जनाब बशीर बद्र का एक शेर याद आता है –

तुम्हारे शहर के सारे दीये तो सो गए कब के,
हवा से पूछना, दहलीज पर ये कौन जलता है।

इसी दीये का नाम राजस्थान पत्रिका है। पत्रिका का संकल्प सदैव इसी दीये की भूमिका में जीना है। इसीलिए हम पत्रिका को “द न्यूज पेपर विद् ए सोल” कहते हैं। इसीलिए हम पाठक नहीं, परिजन तैयार करते हैं। इसी विश्वास के कारण माननीय न्यायाधीश गण हमारे समाचारों को रिट मान लेते हैं।

केसीके अवार्ड का निर्णायक मण्डल- प्रविष्टियों के मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मण्डल मे न्यूयॉर्क टाइम्स के इंटरनेशनल व सम्पादकीय विभाग की उपाध्यक्ष ग्लोरिया एंडरसन, ख्यातनाम खोजी पत्रकार एस गुरूमूर्ति, इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट के अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार अलघ व राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी शामिल थे। साभार : पत्रिका

गुवाहाटी प्रेस क्‍लब में कहीं भी बैठकर भेजिए अपनी स्‍टोरी

गुवाहाटी प्रेस क्लब अब हाईटेक हो गया है। जावा इंटरनेट सर्विस प्राइवेट लि.ने प्रेस क्लब को इंटरनेट से लैस कर दिया है। कंपनी की ओर से पत्रकारों के लिए नि:शुल्क इंटरनेट सेवा (वाईफाई) की व्यवस्था की गई है। अब प्रेस क्लब के सदस्य क्‍लब परिसर में कहीं भी बैठ कर अपनी स्टोरी भेजने के साथ इंटरनेट सर्च कर सकेंगे।

आज सुबह इस सेवा का विधिवत उदघाटन किया गया। इंटरनेट सेवा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ॠषिकेश कलिता तथा गुवाहाटी प्रेस क्लब के सचिव नव ठकुरिया ने इस सेवा का विधिवत उद्‌घाटन किया। श्री ठकुरिया ने इस सेवा के लिए इंटरनेट कंपनी के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारिता का काम लोकतंत्र की रक्षा करना है तो पत्रकारों जो कई मायने में सामाजिक स्तर पर हासिए पर हैं, उनकी सहायता करना भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया गया एक कदम है।

उन्होंने कहा कि आज पत्रकारों की आर्थिक हालात काफी खराब स्थिति में है और अनेकों पत्रकार और फोटोग्राफर ऐसे हैं जो इंटरनेट पर प्रति माह एक हजार रुपए खर्च नहीं कर सकते। ऐसे पत्रकारों के लिए यह सेवा बड़ा ही मददगार साबित होगा। श्री ठाकुरिया ने कहा कि प्रेस क्लब की ओर से उनका व्यक्तिगत प्रयास रहता है कि पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए समय-समय पर चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया जाए और पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के शिविरों से लोगों को लाभ पहुंचा है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार डीएन सिंह,  नीरज कुमार झा व रामेश्वर शर्मा सहित कई जानेमाने पत्रकार व साहित्यकर्मी मौजूद थे।

पत्रकार ने कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी को जूतियाने की कोशिश की

बाबा रामदेव और केन्द्र सरकार के बीच मचे घमासान के बीच नया घटनाक्रम सामने आया है.  कांग्रेस मुख्यालय में रामदेव के आरोपों पर मीडियाकर्मियों को जवाब दे रहे कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी को एक पत्रकार ने जूता मारने की कोशिश की. हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और जमकर धुनाई की. पत्रकार राजस्‍थान का रहने वाला है.

24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्‍यालय में जर्नादन बाबा रामदेव से संबंधित मुद्दे पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे. जनार्दन द्विवेदी से एक सवाल किया गया जिसका उन्‍होंने जवाब भी दे दिया. इसके बावजूद यह पत्रकार जूता लेकर मंच पर चढ़ गया और जर्नादन द्विवेदी को जूता मारने की कोशिश की. हालांकि वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया.

इस पत्रकार की पहचान सुनील कुमार के रूप में की गई है. राजस्‍थान के झुझनु के रहने वाला सुनील दैनिक नवसंचार में संवाददाता बताया जा रहा है. पत्रकार को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है. मामले की जांच की जा रही है. इस संदर्भ में जनार्दन द्विवेदी ने बताया कि यह हमला पूर्व नियोजित था.

एसएसपी ने प्रेस फोटोग्राफरों को भाड़े का टट्टू कहा

आदरणीय यशवंतजी,  मैं आपका ध्यान शनिवार को मुजफ्फरनगर के खतौली कोतवाली में निरीक्षण के लिए आए एसएसपी से जुड़ी घटना की तरफ दिलाना चाहता हूं। एसएसपी प्रवीण कुमार कोतवाली के निरीक्षण पर आए थे। जिस्म फरोशी के एक मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नगर अध्यक्ष शाकेब अली बांके मोहल्ला जैन नगर के लोगों के साथ एसएसपी से मिलने के लिए कोतवाली पहुंचे।

एसएसपी ने इन लोगों की बात सुनने के बाद कोतवाल को कार्रवाई का निर्देश दिया। इस पर वापस लौटते समय बांके और अन्य लोगों ने एसएसपी जिंदाबाद के नारे लगा दिए। नारे लगने से अपराधों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से परेशान कप्तान का मूड खराब कर दिया तथा उन्होंने शाकेब अली को बुलाकर उसकी जमकर क्लास ली। थाने में कवरेज के लिए खडे़ मीडिया कर्मियों ने इसकी फोटो ले ली। जिससे एसएसपी पूरी तरह बौखला गए तथा उन्होंने पद की गरिमा के विपरीत प्रेस फोटोग्राफरों को भाडे़ का टटटू बता दिया।

जिस समय यह घटना घटी उस समय दैनिक जागरण के संवाददाता बसंत गौतम, अमर उजाला के प्रेस फोटोग्राफर शाहिद अंसारी, हिंदुस्तान के सचिन गुप्ता, सच्चाई अभी तक के संवाददाता सैनी आदि मौजूद थे। एसएसपी की लैंग्वेज से ये सभी मीडिया कर्मी सन्न रह गए। लेकिन किसी की भी हिम्मत एसएसपी द्वारा कहे गए अपशब्दों का विरोध करने की नहीं पड़ी।

दरअसल खतौली में बहुत से संवाददाता प्रशासन के मुखबिर और दलाल बने हुए है तथा ऐसे लोगों के कारण पूरी मीडिया की किरकिरी होती है। शनिवार को घटी घटना के बाद किसी भी मीडिया संगठन ने इसका विरोध तक करने की हिम्मत नहीं की। अखबारों ने भी मीडिया को भाडे़ का टट्टू बताने की एसएसपी की बयानबाजी को लेकर समाचार तक प्रकाशित करना गंवारा नहीं समझा। धन्य हैं खतौली के संवाददाता और कहां तक गिरोगे दोस्तों?

कपिल पाराशर

खतौली

पत्रकार वार्ता में नेता ने बांटे हजार के नोट, पत्रकारों ने किया बॉयकाट

गुड़गांव के शमां रस्टोरेंट में शनिवार को आयोजित एक तथाकथित कांग्रेसी नेता ने हजार के नोट बांटकर पत्रकारों को खरीदने की कोशिश की। इस पर गुस्साए मीडियाकर्मियों ने नोट का लिफाफा कांग्रेसी नेता को वापस कर पत्रकार वार्ता का बॉयकॉट कर दिया। बाद में तथाकथित कांग्रेसी नेता अपने रवैए पर माफी मांगकर मामले को सुलटाने की कोशिश भी की।

उधर, इस मामले पर जिला कांग्रेस कमेटी के शहरी अध्यक्ष जीएल शर्मा ने लिखित स्पष्टीकरण देकर उस तथाकथित कांग्रेसी नेता से कांग्रेस का संबंध होने से इनकार कर दिया।

दरअसल मेवात में आयोजित सोनिया गांधी की रैली में राव इंद्रजीत के साथ हुए बर्तात को लेकर उनके तथाकथित समर्थक अरविंद वर्मा ने एक प्रेसवार्ता आयोजित की थी। पर पत्रकार वार्ता की शुरुआत में ही अरविंद वर्मा ने मौजूद सभी मीडियाकर्मियों को एक-एक लिफाफा पकड़ा दिया। उसमें हजार का नोट देखकर मौजूद सभी मीडियाकर्मी भड़क गए। उन्होंने तुरंत पत्रकार वार्ता का बॉयकाट कर दिया। अरविंद वर्मा स्‍वयं को जिला कांग्रेस कमेटी शहरी का महासचिव बता रहा था।

इस मामले पर जब कांग्रेस कमेटी के शहरी जिला अध्यक्ष जीएल शर्मा से बात की गई तो उन्होंने लिखित रूप से स्पष्टीकरण देकर अरविंद वर्मा नामक किसी भी व्यक्ति के पार्टी में होने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि अरविंद वर्मा नामक किसी भी व्यक्ति को शहरी ईकाई में महासचिव नहीं बनाया गया है। अगर कोई व्यक्ति कांग्रेस का नाम लेकर कोई भी पत्रकार वार्ता या अन्य कोई काम करता है तो इसकी जिम्मेदारी स्‍वयं उस व्यक्ति की होगी।

नेता द्वारा पत्रकारों को पैसे देने की खबर को लगभग सभी छोटे और बड़े अखबारों  ने  दबा दिया. पंजाब केसरी और आज समाज को छोड़कर किसी भी इस खबर को प्रकाशित करने का जहमत नहीं उठाया.  इन दोनों अखबारों ने अंबाला एडिशन में इस खबर को प्रकाशित किया है.

चाय-पान वाले बन रहे हैं इंदौर प्रेस क्‍लब के सदस्‍य

इंदौर में पत्रकारिता को कलकिंत करते हुए आए दिन इंदौर प्रेस क्लब चाय, पान वाले और सजायाफ्ता मुजरिमों को प्रेस क्लब की सदस्यता देकर उनके आईडी कार्ड बनाए जा रहे हैं। शुरुआत में प्रेस क्लब सदस्यों की संख्या 300 थी, लेकिन हाल के दो सालों में यहां के सदस्यों की संख्या बढ़कर 1500 हो गई है। प्रेस क्लब की सदस्यता लेने के लिए पहले पत्रकारों को 250 रुपये सदस्यता शुल्क देना पड़ता था, जो अब बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है।

यह सब दूसरी बार प्रेस क्लब चुनाव जीते अध्यक्ष की मनमानी से हो रहा है। वहीं बड़ी-बड़ी संस्था में काम करने वालों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में काम करने वाले पत्रकार प्रेस क्लब की सदस्यता पाने के लिए कई सालों से मशक्‍कत कर रहे हैं।

आर्यन दिलीप

aryan.dilip349@gmail.com

अब मीडिया फाउण्‍डेशन लड़ेगा उत्‍तराखण्‍ड के पत्रकारों की लड़ाई

उत्तराखण्ड के पत्रकार अब एकजुट होने लगे हैं। हाल में ही राज्य के दिग्गज पत्रकारों ने एक मंच पर आकर पत्रकार विरादरी की समस्याओं को मजबूती के साथ उठाने के लिए ‘मीडिया फाउण्डेशन’ नाम से एक फोरम का गठन किया है। राजधनी देहरादून स्थित एक पंचसितारा होटल में मीडिया फाउण्डेशन की नींव रखी गई। बैठक में उत्तराखण्ड के कई वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए। नवगठित मीडिया फाउण्डेशन के इस कार्यक्रम में टीवी चैनल्स, समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा एजेन्सियों से जुड़े सभी वरिष्ठ पत्रकारों ने शिरकत की।

बैठक में सर्वसम्मति से एएनआई के उत्तराखण्ड प्रभारी आशीष गोयल फाउण्डेशन के अध्यक्ष तथा सहारा समय उत्तराखण्ड के ब्यूरो चीफ अवनीश प्रेमी महासचिव चुने गये। टीवी 100 चैनल के उत्तराखण्ड ब्यूरो प्रमुख शाहीन चौधरी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक को सम्बोधित करते हुए नवनिर्वाचित महासचिव अवनीश प्रेमी ने कहा कि लम्बे समय से उत्तराखण्ड में एक ऐसी पत्रकार यूनियन की जरूरत महसूस हो रही थी, जो पत्रकार बिरादरी से जुड़ी समस्याओं को उचित माध्यम से उठा सके। उन्होंने प्रेस क्लब खोले जाने का भी आश्वासन दिया।

बैठक में हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ अविकल थपलियाल, नवीन थलेड़ी, हेडलाइन टुडे न्यूज चैनल की प्रदेश संवाददाता श्वेता, विज़न 2020 राष्ट्रीय मासिक समाचार पत्रिका के सम्पादक एसएस तोमर, स्टार न्यूज के राज्य संवाददाता अतुल चौहान, इंडिया टीवी के हिमांशु कुशवाहा, साधना न्यूज चैनल के हेड संजय काऊ, जी न्यूज चैनल के सोनू सिंह तथा ‘हिन्दुस्तान बोल रहा है’ पत्रिका के संपादक जयपाल चौधरी समेत दर्जनों पत्रकार शामिल हुए।

विश्‍वसनीयता की लड़ाई लड़ रहे छोटे अखबारों के पत्रकार : पुण्‍य

आज के दौर में मीडिया विश्वसनीयता के संकट से गुजर रहा है. ऐसे में सूचना, समाचार एवं विचारों के संप्रेषण में छोटे समाचार पत्रों की अपनी अलग भूमिका है। हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने शिमला के गेईटी थियेटर में साप्ताहिक समाचार पत्र ‘मोनाल टाईम्स’ के रजत जयंती समारोह में अपने अध्यक्षीय भाषण में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक चुनौतीपूर्ण व्यवसाय है, जिसके लिए कड़ी लगन एवं प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ने देश के स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के लिए विश्वनीयता सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे हर कीमत पर बनाए रखा जाना चाहिए। जी न्यूज चैनल के सम्पादकीय सलाहकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि छोटे समाचार पत्रों की पत्रकारिता विश्वसनीयता की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाचार पत्र या चैनल के लिए विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण है। मीडिया अपने नवीन विचारों से राजनीतिक सरोकारों का मार्गदर्शन करता रहा है।

वाजपेयी

वरिष्ठ पत्रकार जेएन साधु और पीसी लोहमी ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए। वरिष्ठ पत्रकार राम दयाल नीरज, सत्येन शर्मा, रविन्द्र रणदेव, सीता राम खजूरिया और अमर उजाला के स्थानीय सम्पादक गिरीश गुरूरानी को इस अवसर पर सम्मानित किया गया। इस मौके पर सांसद वीरेन्द्र कश्यप, विधायक सुरेश भारद्धाज, किशोरी लाल के अलावा जेपी नड्डा, रामलाल, रूपा शर्मा, राजेश शारदा, नगर निगम ए.एन.शर्मा, सूचना, एवं जन सम्पर्क विभाग के निदेशक बीडी शर्मा, भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक प्रेम शर्मा, उपायुक्त ओंकार शर्मा और शहर के गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

महेंद्र सिंह राठौड़ की रिपोर्ट.

‘लखनऊ लाइव’ में दिखने लगा फोटो जर्नलिस्‍टों का ‘हुनर लाइव’

कहावत है एक फोटो एक हजार शब्दों से ज्यादा की बात खुद कहने में सक्षम है। कहने को यह कहावत तो सभी अखबारों के संपादक अपने फोटोग्राफरों की क्लास लेने में जरूर सुनाते हैं, लेकिन फोटो का डिस्पले अक्सर खबरों और विज्ञापन के बोझ तले मर ही जाता है। उत्तरप्रदेश में प्रेस फोटोग्राफरों के इस दर्द पर साइबर मरहम लगाने का काम किया है, यूपी फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने।

यूपी फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने गूगल पर लखनऊ लाइव नामक एक ब्लाग बनाया है। इस ब्लाग पर लखनऊ में होने वाली दिनभर की घटनाओं के साथ आफ बीट की फोटो रोजाना देखने को मिल रही है। इस ब्लाग की खासियत है इसमें फोटो के साथ फोटोग्राफर का नाम और नंबर भी दिया जा रहा है। लखनऊ लाइव की कोई फोटो अगर किसी को पसंद आ गई तो वह संबंधित फोटोग्राफर से बात करके उसके निजी प्रयोग के बारे में अनुमति ले सकता है।

यूपी फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञान स्वामी का कहना है कि अखबार में सबसे ज्यादा मेहनत फोटोग्राफर करता है। दिनभर की घटना-दुघर्टनाओं के साथ राजनीतिक सरगर्मी को अपने कैमरे में कैद करने के लिए वह धूप हो या बरसात देररात तक भागता रहता है। दिनभर की मेहनत करने के बाद अक्सर सबेरे फोटोग्राफरों के हाथ में जब अखबार आता है तो फोटो का डिस्पले न ठीक से होने, फोटो का सेंस मर जाने, फोटो के न प्रकाशित होने से मूड आफ रहता है। प्रेस छायाकार इसे अपने मजबूरी मानकर खामोश रह जाते हैं।

एसोसिएशन ने इस ब्लाग का निर्माण इसलिए किया है ताकि छायाकार साथी इसमें अपनी फोटो शेयर कर सके। एक सप्ताह से कम दिनों के भीतर फोटो जर्नलिस्टों के योगदान के चलते ब्लाग की लोकप्रियता बढ़ती दिख रही है। इस ब्लाग से जुडक़र प्रदेश के लोग दिनभर लखनऊ में होने वाली सरगर्मी को कैमरे की नजर से देख सकते हैं। आने वाले समय में इस ब्लाग को और अपग्रेड करने के साथ साइबर दुनिया में लखनऊ के फोटो जर्नलिस्टों की अलग पहचान दिलाने का काम किया जाएगा। यह ब्लाग लखनऊ के उन फोटोग्राफर साथियों के प्रति श्रद्घांजलि भी है, जो काम के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं। आप भी लखनऊ लाइव देखने के लिए यहां www.lucknowlive.blogspot.com क्लिक कर सकते हैं।

‘दबंग दुनिया’ ने पैदा की इंदौर में हलचल

इंदौर की पत्रकारिता में लंबे समय बाद कुछ हलचल होती दिखाई दे रही है। चार-पाँच साल पहले ‘जागरण के आने से इंदौर के अखबारों में भगदड़ मची थी। लेकिन, बदतर मैनेजमेंट के कारण जागरण का यह प्रयोग फेल हो गया था। जो लोग इस अखबार से जुड़े थे, उन्हें भी मायूसी हाथ लगी थी। लेकिन, ‘दबंग दुनिया’ ने यहाँ के पत्रकारों में एक बार फिर उम्मीद जगा दी है।

‘दबंग दुनिया’ की शुरूआत तो अच्छी नहीं कही जा सकती, क्योंकि बहुत चुके और थके लोगों ने यह अखबार शुरू किया था। लेकिन, धीरे-धीरे ‘दबंग दुनिया’ जमीन पकड़ता दिखाई दे रहा है। इस अखबार ने बड़े अखबारों को अपना निशाना बनाया है। पहले दैनिक भास्कर से उनके मैनेजर अवनींद्र जोशी को तोड़ा और अब शिमला के संपादक कीर्ति राणा को इंदौर ले आए। इस बीच राज एक्सप्रेस से कार्पोरेट एडीटर बसंत पाल को तोड़ा, जो कार्पोरेट मामलों के सबसे अच्छे जानकार माने जाते हैं। इसके बाद ‘पत्रिका’ के कुछ जूनियरों को भी मौका दिया है। विनोद शर्मा और गौरीशंकर को भी दबंग की टीम मे शामिल कर लिया गया है, जिन्हें पत्रिका ने निकल दिया था ।

ताजा खबर यह है कि दैनिक भास्कर के कुछ जाने-माने नियमित कॉलमिस्टों को भी ‘दबंग दुनिया’ में लाने की तैयारी है। जानकारी यह भी है कि ‘नईदुनिया’ के तीन-चार वरिष्ठ लोगों से भी बात चल रही है जो कभी भी ‘दबंग दुनिया’ ज्वाइन कर सकते हैं। इन दिनों दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया तीनों अखबारों में जबरदस्त असंतोष होने की खबर है। इसका सबसे बड़ा कारण असंतुलित वेतन बढ़ोतरी बताया जा रहा है। इसके अलावा नईदुनिया के स्थानीय संपादक जयदीप कर्णिक की अक्षमता, उनका व्यवहार और मराठी प्रेम भी लोगों की आपत्ति का कारण है। मराठी लोगों को नईदुनिया में जिस तरह तरजीह मिल रही है, अन्य वर्ग के लोगों में नाराजी है। वेतन बढ़ोतरी के मामले में भी उनका पलड़ा भारी रहा।

जबकि, दैनिक भास्कर के संपादक अवनीश जैन से स्टॉफ की नाराजी लंबे समय से चल रही है। नेशनल हेड कल्पेश याज्ञनिक के इंदौर आ जाने से मामला और बिगड़ गया है, क्योंकि वे स्टॉफ में बेहद अलोकप्रिय चेहरा रहे हैं। ‘पत्रिका’ में वेतन को लेकर तो असंतोष है ही, मैनेजमेंट का राजस्थान प्रेम काम करने वालों को हमेशा परेशान करता है। पत्रिका में राजस्थान से लाए गए लोगों को ही सबसे ज्यादा योग्य माना जाता है। अरूण चौहान को लेकर भी मामला जरा उखड़ा हुआ सा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इंदौर में भागमभाग जैसा माहौल है और ‘दबंग दुनिया’ इसमें फायदा उठा सकता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

इंदौर प्रेस क्‍लब के महासचिव अन्‍नादुराई की प्राथमिक सदस्‍यता समाप्‍त

इंदौर प्रेस क्‍लब की मैनेजिंग कमेटी ने संस्‍था की गरिमा गिराने तथा अनुशासनहीनता के मामले में क्‍लब के महासचिव अन्‍नादुराई की प्राथमिक सदस्‍यता समाप्‍त कर दी है. गुरुवार को मैनेजिंग कमेटी की बैठक में महासचिव को कारण बताओ नोटिस पर सफाई देने का अंतिम अवसर दिया गया था, लेकिन वे बैठक में उपस्थित नहीं हुए. जिसमें बाद कमेटी ने यह निर्णय लिया.

अन्‍नादुराई को फोन करके भी अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया परन्‍तु उन्‍होंने ऐसा नहीं किया. जिसके बाद प्रबंध कमेटी उनकी प्राथमिक सदस्‍यता समाप्‍त करने के फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी. बैठक में तीन पूर्व अध्‍यक्ष ओमी खंडेलवाल, सतीश जोशी और जीवन साहू भी मौजूद थे, इन्‍होंने भी फैसले पर सहमति जताई. मैनेजिंग कमेटी ने 27 अप्रैल को अन्‍नादुराई को कारण बताओ नोटिस जारी करके पंद्रह दिनों के भीतर जवाब देने को कहा था.

नोटिस पर न तो महासचिव अन्‍नादुराई ने जवाब दिया और ना ही बैठक में उपस्थित हुए. महासचिव अन्‍नादुराई प्रेस क्‍लब में लाए गए उस संशोधन से खिन्‍न और नाराज थे, जिसमें लगातार दो मर्तबा के कार्यकाल के बाद चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी. समिति ने ये फैसला नए लोगों को भी प्रेस क्‍लब के विभिन्‍न पदों पर मौका देने के लिए लिया था. इसके बाद से ही अन्‍नादुराई नाराज चल रहे थे.

मैनेजिंग कमेटी के इस फैसले के बाद महासचिव का पद खाली हो गया है. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि क्‍लब के संविधान के अनुसार छह महीने से पहले महासचिव पद के लिए उपचुनाव करा लिया जाए. इसके लिए शीघ्र मीटिंग बुलाए जाने का भी निर्णय लिया गया. प्रेस क्‍लब की कमेटी का चयन तीन साल के लिए होता है. यह कार्यकाल भी मई 2012 तक रहेगा. पिछले चुनाव में महासचिव पद छोड़कर सरस्‍वती समूह ने सभी पदों पर कब्‍जा जमाया था.

प्रेस क्‍लब के संविधान संशोधन से लोगों की नाराजगी पर प्रवीण खारीवाल ने कहा कि क्‍लब के इस संशोधन से सबसे ज्‍यादा परेशानी उन लोगों को हुई है, जो पिछले 20-25 सालों से प्रेस क्‍लब पर अपना कब्‍जा जमाए बैठे हैं. उन्‍होंने कहा कि सभी को मौका मिलने के लिए इस तरह का संशोधन जरूरी था. कुछ लोगों को छोड़कर सभी ने इसका स्‍वागत किया है.

यूपी में ईमानदार अधिकारियों को अस्‍तबल में बांधने की कोशिश

देश में बढ़ रहे दिनोंदिन भ्रष्टाचार को लेकर जहां अन्ना हजारे व उनके समर्थकों ने दिल्ली को हिलाने का काम किया काबिले तारीफ था। चलो एक कोशिश तो रही एक सामान्य इंसान की इस भ्रष्टतंत्र के खिलाफ आवाज उठाने की। लेकिन बात यहीं पे खत्म नहीं होती, भ्रष्टाचार को लेकर अब ईमानदार कोशिश की सतत जरूरत है और देश के सभी राज्यों में अमरबेल की तरह फैला भ्रष्टाचार एक अन्ना या कुछ आम व सामान्य आदमी खत्म कर सके एसा संभव नहीं है।

इसके लिए अगर अन्ना और भ्रष्टाचार का एंटीवायरस तैयार करने वाले वे लोग अगर पारखी नजरिए से शासन में बैठे ”बेरोजगार जैसे” लोगों को अगर इसका हिस्सा बनाएं तो शायद ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। हम अन्य किसी अन्‍य राज्य नहीं, हम देश में सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाले राज्य उत्तर प्रदेश की बात कर रहे हैं। अगर ये राज्य देश के सर्वोच्च पदाधिकारियों को दे सकता है तो ये भी कहना गलत नहीं कि इसकी जनसंख्या भी देश के अन्य राज्यों से ज्यादा है। तो स्वाभाविक सी बात है कि जनसंख्या में अगर नंबर वन हैं तो यहां जनता के नुमाइंदे भी बड़ीर तादात में हैं। और जहां पर सफेदपोशों की संख्या इतनी ज्यादा है तो लाजमी है कि भ्रष्टाचार को मिटाने की विचारधारा वाले लोग भी बहुत हैं। अगर इस अभियान में ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग मिले तो इस भगीरथ प्रयास में ज्यादा समय नहीं लगेगा और जल्द ही गंगा की तरह ईमानदारी रूपी पवित्र बयार इन भ्रष्टाचारियों को बहाने में सक्षम होगी।

मैं प्रदेश के एक आईपीएस सुभाष दुबे से काफी समय से परिचित हूं और मैं ही नहीं जिन जनपदों में उनकी तैनाती रही वहां का बच्चा-बच्चा उनकी ईमानदार कोशिशों से वाकिफ है, लेकिन प्रदेश की जनता का दुर्भाग्य है कि अपराधियों और कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों को ईमानदारी पूर्वक उनको उनकी जगह पहुंचाने वाले आईपीएस सुभाष दुबे आज अस्तबल का घोड़ा ही साबित हो रहे हैं,  न जाने कितने ऐसे सुभाष प्रदेश में मन मसोस कर ऐसे विभागों में फाइलों के ढेर में बैठे हैं, जो उनकी कार्यशैली के अनुरूप नहीं रही है। अपने ईमानदारी से आम लोगों के बीच जगह बनाने वाले से अधिकारी एक विभागीय कोठरी तक सीमित हो गए हैं।

सुभाष दुबे की कार्यशैली एसी है कि वो जिस जिले में गए वहां अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने में कोई गुरेज नहीं किया, भले वो शासन सत्ता से जुडे हों या फिर वो ग्रेड वन या ग्रेड टू आफिसर ही क्यूं न हो। अगर इन बातों की सच्चाई शासन सत्ता या आम लोगों को नहीं दिखती है तो आंकडे़ उठा के देखे जा सकते हैं कि उनकी तैनाती के दौरान हुई गिरफ्तारियों और कार्रवाई को। वो जिन जनपदों में रहे वहां के अपराधी जेल की राह पकड़ गए,  जो बडे़ अपराधी बने वो मारे गए। अपराधियों में हताशा और निराशा उन्होंने इतनी भरी कि सिफारिश नेता जी की जब तक आती तब तक गैंगस्‍टर की कार्ररवाई हो चुकी होती। इससे शासन सत्ता के नेता अपनी बेइज्जती जरूर मानते पर आम जनता को इससे राहत जरूर मिलती। जिसका फायदा उनकी विदाई के बाद चार्ज सम्हालने वाले अधिकारी महीनों तक लेते रहे।

हम प्रदेश के सबसे कुख्यात जनपद गाजीपुर की बात बताते चलें कि जहां पर बडे़ माफिया अपने पैर पसारे हैं, वहां भी चंद माह में ही माफियाओं को इस होनहार पूत ने अपने पैर दिखा दिए। कम समय में आम जनजीवन को सामान्य कर जनता के मन से भय निकालने का काम किया, पर अफसोस कि कन्नौज, हाथरस और औरैया की ही तरह उनको नेताओं ने यहां भी रहने नहीं दिया। सफेदपोश ऐसे अधिकारियों की कार्यशैली से कभी संतुष्ट नहीं होते हैं, जिसका खामियाजा मिला कि लखनऊ में एसपी एंटी करप्शन बना कर उनकी प्रतिभा को दम तोड़ने के लिए छोड़ दिया गया। जिस विभाग में उनको बैठाया गया वहां उसका काम भी भ्रष्टाचार को मिटाने का ही है, लेकिन शायद वहां की स्थिति भी एक अस्तबल से इतर नजर नहीं आती। अन्ना देश को बदलना चाहते हैं पर उनके जैसी विचार धारा के लोग शासन सत्ता के अस्तबल में बंधे हुए हैं। अगर अस्तबल में बंधे हुए इन ईमानदार घोड़ों को आजाद कर दिया जाए तो शायद अन्ना का काम आसान नजर आएगा और आम जनता राहत मिलने की उम्‍मीद।

लेखक गौरव त्रिवेदी औरैया जिले में सहारा समय के रिपोर्टर हैं.

झारखंड सरकार पत्रकारों को देगी पुरस्‍कार और मीडिया फेलोशिप

झारखंड सरकार ने पहली बार पत्रकारों के लिए पुरस्कार और फेलोशिप की बड़ी योजना घोषित की है। इसके तहत दस पत्रकारों/छायाकारों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार और 20 पत्रकारों को 50-50 हजार की मीडिया फेलोशिप दी जायेगी। आवेदन की अंतिम तिथि 25 मई 2011 है। संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

दस पत्रकारों/छायाकारों के लिए एक-एक लाख का पुरस्कार :  झारखंड सरकार ने दस पत्रकारों/छायाकारों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की योजना बनायी है। दो पुरस्कार राज्य स्तरीय विकास के लिए और दो पुरस्कार जिला स्तरीय विकास के लिए दिये जायेंगे। जनजातीय भाषाओं में विकास संबंधी दो पत्रकारों,  इलेक्ट्रानिक के दो पत्रकारों और दो छायाकारों को पुरस्कार मिलेंगे। आवेदन के साथ संबंधित संपादक/ब्यूरों चीफ की अनुशंसा संलग्न करना आवश्यक है।

झारखंड मीडिया फेलोशिप :  20 पत्रकारों को 50-50 हजार : झारखंड सरकार ने 20 पत्रकारों को मीडिया फेलोशिप के तहत 50-50 हजार की राशि देने की घोषणा की है। यह खासकर युवा एवं गंभीर मीडियाकर्मियों एवं शोधकर्ताओं के लिए एक अनूठा अवसर है। इसमें प्रिंट के दस मीडियाकर्मियों को विकासात्मक विषयों पर शोध व रिपोर्टिंग के लिए फेलोशिप दी जायेगी। सात फेलोशिप इलेक्ट्रानिक और तीन फेलोशिप रेडियो पत्रकारों को देने की योजना है।

दोनों योजनाओं के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 मई 2011 है। पूरी जानकारी http://www.jharkhand.gov.in में मिलेगी। इस वेबसाइट पर परेशानी हो तो सामान्य जानकारी के लिए मेरे ब्लॉग – http://rtistory.blogspot.com पर भी देख सकते हैं। 0651-2282522 पर पूछताछ कर सकते हैं।

विष्‍णु राजगढि़या

ब्‍यूरोचीफ नई दुनिया

झारखंड

मीडिया फालतू खबरें दिखाकर क्‍या साबित करना चाहता है

: जैप के कार्यक्रम में अजय चौधरी ने खड़े किए सवाल : लोगों में यह एक आम धारणा बन गयी है कि पुलिस खराब ही होती है. उससे अच्छाई की उम्मीद की ही नहीं जा सकती. मगर सच्चाई यह है पुलिस के लोग भी साधारण इंसान होते हैं और उसे हर किसी ने अपने-अपने तौर पर अत्यधिक बदनाम कर दिया है. उक्त बातें दक्षिण पूर्वी दिल्ली के नए एडिशनल पुलिस आयुक्त अजय चौधरी ने जर्नलिस्‍ट एसोसिएशन फॉर पीपल द्वारा पुलिस पब्लिक इंटेरक्‍शन के दौरान कही.

उल्लेखनीय है कि आम लोगों की भलाई के लिए काम करने वाले पत्रकारों के संगठन जर्नलिस्ट एसोसिएशन फॉर पीपल (जैप) ने नए एडिशनल पुलिस आयुक्त अजय चौधरी से जामिया नगर की जनता के साथ एक मुलाक़ात का आयोजन किया था. इस आयोजन का उद्देश्य यह था कि जामिया नगर के लोग अजय चौधरी को जान सकें और पुलिस से उनकी जो शिकायत है वह उनके सामने रख सकें.

श्रोताओं में से कई लोगों ने संबोधित किया. अधिकतर लोगों की यही शिकायत थी पुलिस का रवैया जनता के प्रति अच्छा नहीं होता. सभों की शिकायत सुनने के बाद अजय चौधरी ने कहा कि हर कोई अपनी गलती नहीं देखता बस एक ही बात की रट लगाए रहता है कि पुलिस खराब होती है. हर पुलिस वाला बेइमान ही होता है और पुलिस से सहानुभूति की उम्मीद नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि यह एक गलत सोच है जो हर किसी के भीतर पैदा हो गई है.

अजय चौधरी ने कहा कि बहुत से लोग ऐसे हैं जिन से पुलिस ने कभी एक पैसा भी नहीं लिया, उनका कोई नुकसान नहीं किया इसके बाद भी वो यही कहते हैं कि पुलिस खराब होती है. उन्होंने यह बात मानी कि हमारे अंदर भी खराबी है, मगर खुद की कमी पर भी ध्यान देना चाहिए. जामिया नगर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यहां बड़े-बड़े पदों पर काम करने वाले लोग भी हैं और अफसोस की बात यह है कि इस इलाक़े में अपराधी लोग भी हैं. उन्होंने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह अनावश्यक समाचार कार्यक्रम दिखा कर समाज को खराब कर रहा है उसकी चिंता किसी को नहीं है.

उन्‍होंने मीडिया की शिकायत करते हुये कहा कि यदि किसी तीन साल की बच्ची के साथ कुछ बुरा हुआ है तो उसे दिन भर दिखाकर मीडिया क्‍या साबित करना चाहता है। जुर्म से संबंधित कई कार्यक्रमों का नाम लेते हुये उन्‍होंने कहा कि ऐसे बकवास प्रोग्राम से आम जनता का क्‍या भला हो रहा है। आप पुलिस को तो दोष देते हैं, मगर मीडिया को दोष नहीं देते जिनकी ग़लत खबरों से कई बार मामला बिगड़ता है। कार्यक्रम में फिरोज बख्त अहमद, मोहम्मद अखलाक, जावेद खान, जफर अब्बास व इजहरुल हसन आदि ने भी अपने विचार रखे।

समारोह में इलाक़े के महत्वपूर्ण व्यक्ति के अलावा पत्रकार तारिक हुसैन रिजवी, खालील हाशमी, प्रभात मोहन, मीडिया पोस्ट के संपादक मोहम्मद अनवर, इम्तियाज़ अहमद आजाद, एनएफसी और जामिया नगर के एसएचओ के अलावा एसीपी दाता राम भी शामिल हुए. कार्यक्रम को सफल बनाने में जैप के अध्यक्ष महमूद अहमद, उपाध्यक्ष इनमुर रहमान, महासचिव माज अली हैदर, सचिव ख़ालिद मोइन, पीआरओ एएन शिबली और अन्य महत्वपूर्ण सदस्यों में यावर रहमान, इमरान शाहिद, जफर अब्बास मोबाशिर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रेस रिलीज

पत्रकार आजाद खालिद के घर की बिजली-पानी काटी गई

: परिजनों को भी किया जा रहा है प्रताडि़त : उत्तर प्रदेश में चल रहे घपले और घोटालो पर गाजियाबाद के जुझारु पत्रकार आजाद खालिद ने मायावती के भाई समेत कई नामों का खुलासा करके लगता है बहुत बड़ी गलती कर दी है। ताज्जुब इस बात का है कि दिल्ली की सरकार यदि कलमाड़ी, राजा जैसों को जेल भेज सकती है तो मायावती जी अपने भाई के नाम आने से ही इतना क्यों तिलमिला रही हैं।

आजाद खालिद के अखबार ‘दि मैन इन अपोजिशन’ की खबर अगर गलत थी उनको नोटिस दिया जा सकता था। लेकिन पिछले सात दिन से उनके घर की बिजली पानी काट दी गई। जबकि उनके घर का बिजली का आज की तारीख तक का बिल पहले ही जमा है। इसके अलावा उनकी प्रेस को सील कर दिया गया। जबकि प्रेस किसी और की थी और वो ना तो सम्पादक था और ना ही मालिक फिर भी आजाद के नाम एफआईआर दर्ज करके उत्तर प्रदेश सरकार ने केवल आजाद जी को ही दबाव में लेने के लिए एक ही दिन में कई एफआईआर दर्ज कर दी है। उधर उनके भाई जिसका इस पूरे मामले से कोई लेना देना नही था, उनको आजाद के बदले कई दिन तक थाने के वीआईपी कमरे में बिठा कर बिना बिना एफआईआर दर्ज किये ही छोड़ दिया।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

अपनी-अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं जामिया प्रशासन और छात्र

कम हाजिरी के चलते परीक्षा देने से रोके गए एजेके मास कम्युनिकेशन एंड रिसर्च सेंटर के 17 छात्रों का आंदोलन गम्भीर रूप लेता जा रहा है। रविवार को मामले में स्थानीय पुलिस के हस्तक्षेप के चलते मचे हंगामे के बाद सोमवार को फिर छात्र-प्रशासन अपने-अपने पक्ष पर अड़ गए हैं। जामिया प्रशासन ने साफ कर दिया कि किसी भी छात्र के साथ अनुचित कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्र आज भी मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं।

जामिया की मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ.सिमी मल्होत्रा ने बताया कि छात्रों को बार-बार जामिया प्रशासन इस बात की सूचना देता रहा है कि 75 फीसदी से कम हाजिरी वाले छात्रों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। बावजूद इसके छात्रों ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया और जब उनके रोल नम्बर रोके गए तो उन्होंने मेडिकल के आधार पर राहत की गुहार लगाई। जांच में कई मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए, जिनकी शिकायत जामिया प्रबंधन ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से भी की है। मल्होत्रा ने बताया कि एजेके मास कम्युनिकेशन एंड रिसर्च सेंटर के छात्रों के लिए सेंटर प्रमुख प्रो.उबेद सिद्दीकी का कार्यालय खुला है। वह जब चाहें, अपने रोल नम्बर रोके जाने की जांच कर सकते हैं।

उधर, सोमवार तीसरे दिन भी छात्रों की भूख हड़ताल जारी रही। पीडि़त छात्रा नाबिला जैदी ने बताया कि हड़ताली छात्रों की हालत बिगड़ रही है। प्रशासन अपनी बात पर अड़ा हुआ है। प्रशासन मेडिकल दस्तावेजों की जांच करें तो अवश्य छात्रों को परीक्षा देने का हक मिल सकता है। छात्रों के समर्थन में सोमवार को जामिया के जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी के नेतृत्व में वीसी आफिस पर प्रदर्शन किया गया। संगठन से जुड़े शाह आलम ने बताया कि नियमों की दुहाई देने वाले जामिया प्रशासन को छात्रों की बातों पर भी गौर कर अपने फैसले पर पुन: विचार करना चाहिए। साभार : भास्‍कर

अपनों के ठुकराए इंद्र भूषण रस्‍तोगी किसे याद हैं?

: बदहाली में जीवन गुजारने को मजबूर है यह पूर्व संपादक :  ये इन्द्र भूषण रस्तोगी,  कोई गुमनामी बाबा नहीं हैं जो देश-भर में इनको कोई जानने वाला न हो. राजेश श्रीनेत जी के अमर उजाला, बरेली में सीनियर रह चुके श्री रस्तोगी देश भर में पत्रकारिता जगत खासकर संपादक मंडली में कभी परिचय के मोहताज नहीं रहे. उनका एक भरा-पूरा सम्पादकीय जीवन का इतिहास रहा है, यदि अभी भी उनके शेष जीवन का संरक्षण हो गया तो देश के भविष्य के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान होगा.

आज जब देश भर में अक्षय तृतीया को कार्पोरेटीय अवसर बनाते हुए सोने की खरीद में सारे पूंजीपति व्यस्त थे तब मैं अपने वरिष्ठ साथी राजेश श्रीनेत जी के साथ आज के हृदयहीन समाज के लिए इस गुमनाम हो चुके व्यक्ति के खंडहरनुमा घर में दस्तक दे रहे थे. उनसे जब मिला तो लगा उनमें अभी पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने की आग ज्वालामुखी के फूटने के ठीक पहले की जैसी अपने चरम पर विद्यमान है. बातों में ऊष्मा का स्तर ऐसा जैसे अभी उनका श्रेष्ठ कार्य आना बाकी है. परन्तु आज का समाज क्या उन्हें इस काबिल मानता है. एक तरफ इसी कानपुर से निकल कर राज्यसभा के सदस्य बने पत्रकार और मालिकान हैं और दूसरी तरफ अपने निवास स्थल पर टिमटिमाते बल्ब की रोशनी में अपनी पहचान और अस्तित्व की लड़ाई लड़ते सूरज जैसे श्री रस्तोगी हैं. पत्रकारिता के कार्यकाल में पेशे के सभी संभावित बड़े पदों पर रह चुके इस व्यक्ति का आज का जीवन देखकर उसकी दशा पर कोई भी व्याख्या और विवेचना के लिए मेरे जैसे शब्दवीर के मन में चलती उथल-पुथल अकल्पनीय है.

1976 में पत्रकारिता का करियर अपनाने वाले श्री रस्तोगी ने कानपुर में दैनिक जागरण के अंग्रेजी अखबार से करियर शुरू किया. फिर ‘पायनिअर दैनिक’ से होते हुए ‘समाचार’ न्यूज एजेंसी में चले गए. यहाँ से काम करते-करते वे ‘ट्रिब्यून’ में काम करने लगे. यहाँ से ‘पंजाब केसरी’ में अस्सिटेंट एडिटर के पद पर तैनात हुए. फिर वे अमर उजाला में बरेली एडिशन के चीफ बनाए गए. भास्कर के शुरुआती दिनों की बात है जब वे अमर उजाला की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर दैनिक भास्‍कर के भोपाल एडिशन के प्रमुख संपादक बनाए गए. तब के दैनिक भास्‍कर के सुधार और उत्थान में आपकी महती भूमिका थी. इसी बीच इन्हें लकवे का अटैक पड़ा. मालिकानों ने इनका इलाज कराया और कम महत्वपूर्ण और कम व्यस्त एडिशन ग्वालियर का काम सौंप दिया. परन्तु वे मालिकानों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सके. शीघ्र ही इन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा. हिसाब-किताब के बाद मिले धन को इनकी पत्नी और बेटियों ने ले लिया. इनके किये गए कामों के प्रतिफल के रूप में मालिकानों ने इनकी एक बेटी को अखबार में काम दे दिया. बाद में पत्नी भी उसी दैनिक भास्‍कर अखबार में काम करने लगीं. उन सभी ने ग्वालियर की जगह भोपाल में रहना शुरू कर दिया.

इसके बाद बेघर और बेसहारा अपंग श्री रस्तोगी ने कई छोटे-मोटे अखबारों और पत्रिकाओं में काम किया. परन्तु अपेक्षाओं के चरम के कारण आज के प्रतियोगी युग में वे टिक नहीं पाए. पत्नी, बेटे और बेटी आज उनकी बनादग्‍ स्थिति से मजे कर रहे हैं. राजेश जी बताते हैं बरेली में सानिध्य के दौरान उनका वैभवपूर्ण जीवन पत्रकारों के लिए ईर्ष्या का कारण होता था. वे अपने और अपने परिवार के रहन-सहन पर दिल खोलकर खर्च करते थे. परिवार के मन में उनके व्यवहार के प्रति कोई मलाल नहीं होना चाहिए