: होता है शबे-रोज़ ही, तमाशा मेरे आगे…. : चलिए… पिछली पोस्ट की अपार सफलता के बाद… जानता की बेहद मांग पर पेश है न्यूज़-रूम की कहानी की दूसरी किश्त ( ख़ुद के खुश रखने को… ग़ालिब ये ख्याल…..) तो आज डरने की थोडी ज्यादा जरुरत है…. क्योंकि आज बात उस डेस्क की जिसे गोलियों का भी कोई डर नही… जीहाँ बामुलाहिजा होशियार… ख़बरदार… आज बात होगी न्यूज़ डेस्क की… यानि आउट पुट डेस्क की…असाईनमेंट के बाद की अगली डेस्क का नंबर आता है इस डेस्क का … लेकिन न तो काम और न प्रभाव किसी लिहाज से ये डेस्क असाईनमेंट से कम तो हरगिज नही है… बल्कि कई मामलों में तो बहौत ज्यादा ही है… इस डेस्क का विस्तार चैनल की सभी डेस्कों में सबसे ज्यादा है……
खैर बाअकी चैनलों से जुदा हमारे चैनल की ये डेस्क अपनी तरह से अनोखी ही है…. आप इस डेस्क पर काम के वक्त हर आदमी को इस तरह से देख सकते हैं मनो मैराथन में हिस्सा लेने जा रहे हों… तो इसकी उलट कई बार ख़बरों के ककहरे को जोकहरे में तब्दील होते भी मैंने इसी डेस्क में देखा है…. कहतें हैं की गलतियाँ इंसान से ही होती है, लेकिन यकीन मानिये अगर गलतियों के विश्वा रिकॉर्ड की कोई बात होगी तो गिनीज बुक वाले इसी डेस्क के आस-पास मंडराते हुए नज़र आयेंगे…. खैर आइये मिलवाते हैं कुछ ख़ास-ख़ास लोगों से… यानि आइसे लोगों से जिन पर मुझे यकीन हैं की वो बुरा नही मानेंगे…. आज तो नही कल तक इस डेस्क के एक अहम् सदस्य थे जिनका नाम था मिस्टर गूगल… किसी भी व्यक्ति, देश, राजनेता, फिल्मस्टार, समूह, रिश्ते, काम या विषय, किसी भी चीज का उनके सामने नाम ले लीजिये भर…. अगले पन्द्रह मिनट तक भगवान् भी साक्षात् धरती पर उतर आयें तो आपको बचा नही सकते उस अथाह ज्ञान की बारिश से….
एक और सज्जन हैं… जिनकी डाइट माशा अल्लाह इतनी अच्छी है की वो बड़ी से बड़ी खबर को भी आराम से पचा जाते हैं…. बाद में दरियाफ्त करने में यही सुनने को मिलेगा… लिखित में मिला था क्या…. भले ही पाकिस्तान में हुए ब्लास्ट में हज़ार-पाँच सौ लोग मर गए हों… और चैनल का पाकिस्तान तो छोडिये गाजियाबाद में कोई रिपोर्टर न हो उन्हें ख़बर लिखित में ही चाहिए…. एक लड़की है जिसे लोग नाम से कम और उसकी चाल से ज्यादा जानते हैं…. दिन भर फिरकी की तरह इधर से उधर भागने के साथ साथ एक और काम है उनके पास….. हा हा… हु हु …. ही ही…. हें हें … कही कही…. कहें कहें….यानि हँसी के हर प्रकार हर विधा को बड़ी खूबसूरती से अंजाम देती हैं ये मैडम… पूरा ऑफिस ये सोच सोच कर हैरान है की आख़िर इस चैनल की नौकरी में ऐसा क्या बचा है की वो इतना खुश रहती हैं…. लेकिन बावजूद इसके एक बात की गारेंटी है… पूरी डेस्क में किसी भी काम को इन मैडम के हाथों में सौंप आप निश्चिंत हो सकते हैं…
एक और मैडम हैं जिनको देख लेखक खुश हो जाता है… उनके चेहरे पर ख़ुद का सपना बस पूरा ही होता दीखता है… सपना लम्बी सी सड़क पर लम्बी सी गाड़ी पर चलने का… देखिये कब दया करतीं हैं मैडम…. एक ब्राहमण ने कहा है की ये साल अच्छा है…. एक और साहब हैं जो लेखक के ही शहर के हैं और मंदी के दौर पर भी तरक्की पर हैं…. मेरे अछें मित्र हैं… और लेखक अकसर उनसे कहते फिरते हैं…. कभी फंसो….. चलिए आज की राम राम…. फ़िर मिलेंगे अगली किश्त में न्यूज़ रूम के अगले किस्से की और… अगलेइ बारी हमारी बारी…. यानि रिपोर्टर्स की चुगली….. आज की राम-राम॥
जर्नलिस्ट जयंत चड्ढा के ब्लाग नई कलम से साभार











