अब खुद से सांस लेने लगे हैं जयंत

: एम्स ट्रामा सेंटर में जाने के बाद इलाज से वेंटिलेटर हटाने में कामयाबी : पी7न्यूज प्रबंधन जयंत और उनके परिजनों के लिए जो कर रहा है, उसके लिए उन्हें साधुवाद :  प्रिय यशवंत भाई, मैं अपने एक साथी के साथ जयंत से मिलने ट्रॉमा सेंटर गया था, लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है, जैसी आपने किसी ‘सज्जन’ के मेल के आधार पर छापी है। ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर कहते हैं कि उनका काम देश भर से आए मरीजों को खतरे से बाहर निकाल कर दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर कर देना है।

सड़क दुर्घटना में मुकुंद शाही, जयंत चड्ढा समेत चार की हालत गंभीर

एक दुखद सूचना है. कल रात पी7न्यूज से जुड़े चार लोग सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गए. क्राइम टीम के मुकुंद शाही, जयंत चड्ढा, एक कैमरा पर्सन और ड्राइवर को कैलाश हास्पिटल में भर्ती कराया गया है. जयंत चड्ढा की हालत नाजुक बताई जा रही है. पता चला है कि पी7न्यूज की यह टीम एक क्राइम शो को शूट कर लौट रही थी. दिल्ली के मथुरा रोड पर किसी गाड़ी से इन लोगों की गाड़ी भिड़ गई.

मुर्दा हल्का हो रहा है….

जयंत चड्ढापता नहीं क्यों, कवायद ”इकोनामी क्लास” में सफर कर ”इकोनामी” को संभालने की है और मेरा मन आज बतंगड़ करने पर अमादा है… हालांकि खुद से बात करते हुए मैं खुद को आम आदमी कहने या सोचने का कभी कायल न रहा लेकिन चलिए, आज मन के बंतगड़ और चिल्लपौं सुन माने लेता हूं कि ये भड़ास एक आम आदमी की निकल रही है…। तो भैया पैसा बचाने की बयार चल निकली है…

जयंत चड्ढा ने पी7न्यूज ज्‍वाइन‍ किया

एमएच1 के क्राइम रिपोर्टर जयंत चड्ढा ने इस्‍तीफा दे दिया है. उन्होंने नई पारी की शुरुआत पी7 न्‍यूज, नोएडा के साथ शुरू की है. सूत्रों के मुताबिक जयंत पी7न्यूज में भी क्राइम रिपोर्टिंग करेंगे. नौ साल से मुख्‍य धारा की पत्रकारिता में सक्रिय जयंत  ने करियर की शुरुआत अमृत प्रभात, इलाहाबाद से की थी.

सुख कहां है…???

जयंत चड्ढासोचता हूं कि क्या सुख.. पैसा, नौकरी और इज्जत की जमकर लानत मलानत करने के बाद… सब कुछ को छोड़छाड़ कर… उत्तर प्रदेश के किसी गांव में हमेशा के लिए बस जाने में है… लेकिन हां वो गांव बसा पंजाब में हो… मौसम वहां हिमाचल प्रदेश जैसा हो और सुविधाएं दिल्ली के किसी गांव वाली हों…। हंहंहंहहंहंहहंह……। आप कहेंगें मियां दिनै में सपना देखत हैं…

टूटे चश्मे से दुनिया देखता पत्रकार

जयंत चड्ढाजगह दिल्ली का दक्षिणपुरी इलाका… वक्त- रात के दस बजे… सीलन से भरे एक घर में एक औरत लगभग चीख-चीख के रो रही थी। आस-पास छोटी सी भीड़ की शक्ल में कुछ लोग खड़े थे जो लगातार उसे घूरे जा रहे थे…। घर में घुसते वक्त उसे दूर-दूर तक किसी कैमरे को न देख खुशी का अहसास हुआ…। उसके आफिस के लगभग सोनीपत से सटे होने के बावजूद वो फिर से सबसे पहले स्पाट पर पहुंचा था….। आएगा सालों का फोन ट्रांसफर मांगने के लिए…वो बुदबुदाया… एसाइनमेंट को खबर नोट कराने के बाद उसने कैमरापर्सन को शाट्स सहेजने के आदेश दे दिए…। वो आगे बढ कर मामले को समझने की कोशिश कर ही रहा था कि पीसीआर से उसका फोनो थ्रू कर दिया गया। वो चीख-चीख के कहने लगा… जीहां राजधानी दिल्ली एक बार फिर से शर्मसार हुई है….। उधर उसके आफिस में भी रिक्रियेशन की तैयारियां होने लग गई थी। फोनो खत्म कर उसने उस लड़की की ओर फिर से देखा जिसका रोना बद्सतूर जारी था..।

किस्सा-ऐ न्यूज़ रूम (चार)

: गाँधी जी का जंतर…. :  ”मैं तुम्हे एकजंतर देता हूँ… जब भी तुम्हे ख़ुद पर गर्व होने लगे या फ़िर दिल में कोई संशय हो की जो कदम तुम उठाने जा रहे हो वो कितना सही है तो इस जंतर का इस्तेमाल करनातुम अपने दिमाग में सबसे गरीब आदमी (या औरत ) की तस्वीर बनाने की कोशिश करना… उस आदमी को याद करना जिसे तुमने अपनी जिंदगी में सबसे गरीब सबसे कमज़ोर के तौर पर देखा हो… फ़िर ख़ुद से पूछना की जो कदम तुम उठाने जा रहे हो वो उस आदमी को कितना फायदा पहुंचाएगा… क्या तुम्हारे उस काम से उस कमजोर आदमी के पेट की भूख शान्त हो पाएगी….तुम देखोगे कि तुम्हारा अंहकार और संशय खत्म होता जा रहा है…..”

किस्सा-ऐ न्यूज़ रूम (तीन)

: रुख हवाओं का जिधर था…. उधर के हम थे…. : किस्सा न्यूज़ रूम का में आज की किश्त में रिपोर्टर्स की अन्नत कथा….. जी हाँ जो सब की ख़बर लेते हैं….आज उनकी ख़बर ली जायेगी…!!!! तो किसी दूसरे की बात करने से पहले सोच की पहले ख़ुद की खिल्ली उड़ा लूँ…. यकीं मानिये इस काम को जमाना पुरी निष्ठांऔर इमानदारी से अंजाम देता आया है…. लेकिन आज… अपने मुह से…… तो ये मैं हूँ…. गर्व और दुःख दोनों को जगाती हुई इस नौकरी में आज ख़ुद को तौलता हुआ सा… यकीन मानिये… ये नौकरी एक खेल सी लगती है… एक निर्दोष खेल जो अब खतरनाक शक्ल लेने ही वाली है… खतरे का बिगुल बजने ही वाला है…

पीएमओ माने जहां पीएम का हुआ था कत्ल!

”…एक मैडम हैं जो इस चैनल के लिए भारत ही नहीं, विश्व ही नही बल्कि ब्रम्हांड की खबरें भी देखती हैं. दिल्ली की एमसीडी से लेकर नासा तक इनका ही साम्राज्य है. तो उनका एक किस्सा. नागपंचमी के दिन उन्हें ओबी ले जाकर लाइव करने को कहा गया. कुछ अलग करने की चाह में उन्होंने कर डाली एक अजीब सी हरकत. आप शायद यकीन न करें लेकिन उन्होंने ऑन एयर सांप को दूध की बजाय कोल्ड ड्रिंक पिलाने की कोशिश की. सांप बेचारा ना ना में सर हिलाता रहा और मैडम कोशिश करती रहीं. खैर, ऑन एयर चल रहे इस ड्रामे को पांच सात मिनट बाद किसी तरह गिरवाया गया.

किस्सा-ऐ न्यूज़ रूम (दो)

: होता है शबे-रोज़ ही, तमाशा मेरे आगे…. : चलिए… पिछली पोस्ट की अपार सफलता के बाद… जानता की बेहद मांग पर पेश है न्यूज़-रूम की कहानी की दूसरी किश्त ( ख़ुद के खुश रखने को… ग़ालिब ये ख्याल…..) तो आज डरने की थोडी ज्यादा जरुरत है…. क्योंकि आज बात उस डेस्क की जिसे गोलियों का भी कोई डर नही… जीहाँ बामुलाहिजा होशियार… ख़बरदार… आज बात होगी न्यूज़ डेस्क की… यानि आउट पुट डेस्क की…असाईनमेंट के बाद की अगली डेस्क का नंबर आता है इस डेस्क का … लेकिन न तो काम और न प्रभाव किसी लिहाज से ये डेस्क असाईनमेंट से कम तो हरगिज नही है… बल्कि कई मामलों में तो बहौत ज्यादा ही है… इस डेस्क का विस्तार चैनल की सभी डेस्कों में सबसे ज्यादा है……

किस्सा-ऐ न्यूज़ रूम (एक)

: कलम नई है सो कुछ गलतियाँ भी हो सकती हैं…. मज़ा ना आए तो पैसा तो वापस नही…लेकिन सॉरी… : आज किस्सा न्यूज़ रूम का… जी हां बंद गली का आखिरी मकान… पूरी गली की ख़बर यहाँ तो आ जाती है लेकिन यहाँ की खबरें कहीं नही जाती…. तो आज आपको सुनते हैं यहाँ की खबरें…. लेकिन पहले एक चेतावनी…. ये न्यूज़ रूम है मियां… अगर कलेजे में हिम्मत या फ़िर दिलेरी की कमी हो तो प्लीज ये पोस्ट आगे मत पढिये… या फ़िर पढ़ते समय याद रखियेगा इस जुमले को कि “कमजोर दिल वाले इस पोस्ट को ना पढ़ें… ये पोस्ट आपको विचलित कर सकती है…..