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किस्सा-ऐ न्यूज़ रूम (तीन)

: रुख हवाओं का जिधर था…. उधर के हम थे…. : किस्सा न्यूज़ रूम का में आज की किश्त में रिपोर्टर्स की अन्नत कथा….. जी हाँ जो सब की ख़बर लेते हैं….आज उनकी ख़बर ली जायेगी…!!!! तो किसी दूसरे की बात करने से पहले सोच की पहले ख़ुद की खिल्ली उड़ा लूँ…. यकीं मानिये इस काम को जमाना पुरी निष्ठांऔर इमानदारी से अंजाम देता आया है…. लेकिन आज… अपने मुह से…… तो ये मैं हूँ…. गर्व और दुःख दोनों को जगाती हुई इस नौकरी में आज ख़ुद को तौलता हुआ सा… यकीन मानिये… ये नौकरी एक खेल सी लगती है… एक निर्दोष खेल जो अब खतरनाक शक्ल लेने ही वाली है… खतरे का बिगुल बजने ही वाला है…

: रुख हवाओं का जिधर था…. उधर के हम थे…. : किस्सा न्यूज़ रूम का में आज की किश्त में रिपोर्टर्स की अन्नत कथा….. जी हाँ जो सब की ख़बर लेते हैं….आज उनकी ख़बर ली जायेगी…!!!! तो किसी दूसरे की बात करने से पहले सोच की पहले ख़ुद की खिल्ली उड़ा लूँ…. यकीं मानिये इस काम को जमाना पुरी निष्ठांऔर इमानदारी से अंजाम देता आया है…. लेकिन आज… अपने मुह से…… तो ये मैं हूँ…. गर्व और दुःख दोनों को जगाती हुई इस नौकरी में आज ख़ुद को तौलता हुआ सा… यकीन मानिये… ये नौकरी एक खेल सी लगती है… एक निर्दोष खेल जो अब खतरनाक शक्ल लेने ही वाली है… खतरे का बिगुल बजने ही वाला है…

तो ये तो तय है की मैं इन्तजार में हूँ… मैं इस सच को भी यकीन में बदलने की कोशिश में हूँ की इन्तजार मेरी जिंदगी का बहुत बड़ा रूपक है… स्थितियों के बदले का इन्तजार….. सेहतमंद होने का इन्तजार… ध्वस्त आत्मविश्वास से उबरने का इन्तजार… खैर ख़ुद से लड़ता हुआ… ख़ुद को गलियां देता हुआ… मैं सोच रहा हूँ की आख़िर गलती कहाँ हुई मुझसे… सब कुछ तो ठीक ही है मुझमे… फ़िर मैं दूसरों की गलतियों पर क्यों गलियाँ सुनु… शायद ये मेरी ग़लतफ़हमी है की कोई भी काम हो भले वो रिपोर्टिंग हो…मेहनत हो… कॉपी हो… जिम्मेदारियों का एहसास हो… वीओ हो… या जिम्मेदारी का कोई भी काम… सभी में न्यूज़ रूम में मौजूद बाकी लोगों से कुछ ठीक-ठाक ही तो है मुझमे…. फ़िर क्यों बादल… किसी बारीक से सुराख से निकल कर…. पी कर…..ढेर सी स्याही ख्वामखाह ही…मुझ पर दोषारोपण की तरह फट पड़ने को आजाते हैं….

खैर कल रात वोदका के चार पैग मार कर मैंने इस बारे में बहुत सोचा…. शाम के धुंधलके तक ये मुगालता भी अंधरे में खो गया की “मेरा वक्त बदल जाएगा… तुम्हारी राय बदल जायेगी… ॥ पता नही कब बदलेगा ये वक्त… शायद शक्ल कुछ अच्छी होती तो… खैर कुछ भी कहें गलती शायद मुझमे ही है… कुछ भी उट- पटांग पहन लेने, दाढ़ी- बाल के बड़े रहने और कुछ भी बोल देने से होने वालों नुकसानों से अनजान एक सनकी…

कल एक मित्र की पोस्ट पढने और बहुत कुछ सोच लेने के बाद तय कर लिया की अगर यही सब कुछ है… तो मुझे कुछ नही चाहिए…. पहले सोचा करता था की रोकेट से कूद कर कुएं में गिरा हूँ तो अब खाई में नही कूदना है… लेकिन अब मुगालता पीछे छूट गया… इस तरह की सुहागन से तो अच्छा है….विधवा हो जाना…. नही मानते मेरी बात को… चलिए कल मानेंगे….

देखिये पेट का संगीत एक पत्रकार को कब तक नचा पाता है…

शायद पोस्ट कुछ बोझिल होती जा रही है… देखिये बात रिपोर्टर्स की हो रही थी और मैं ख़ुद की बक बक किए जा रहा हूँ… शायद भूल जाता हूँ बार-बार की मैं तो अब रिपोर्टर ही नही रहा….
खैर सबसे परिचय करा दूँ… एक मैडम हैं जो इस चैनल के लिए भारत ही नही विश्व ही नही बल्कि ब्रम्हांड की खबरें भी देखती हैं…. दिल्ली की एमसीडी से लेकर नासा तक इनका ही साम्राज्य है… तो उनका एक किस्सा… नागपंचमी के दिन उन्हें ओबी लेजाकर लाइव करने को कहा गया… कुछ अलग करने की चाह में उन्होंने कर डाली एक अजीब सी हरकत… आप शायद यकीन न करें लेकिन उन्होंने ऑन एयर सांप को दूध की बजाये कोल्ड ड्रिंक पिलाने की कोशिश की… सांप बेचारा ना ना में सर हिलाता रहा और मैडम कोशिश करती रहीं… खैर ऑन एयर चल रहे इस ड्रामे को पाँच सात मिनट बाद किसी तरह गिरवाया गया…..

एक और साहब हैं… जो बच्चे बन कर इस चैनल में आए थे और देखते देखते मर्द बन गए… अक्सर मुझसे पूछते हैं की…”भइया…..नॉर्थ कैम्पस किस डिस्ट्रिक में आता है…” मैं बेचारा बार बार उन्हें समझाता हूँ की बेटा तू चाहे हजार दफा पूछे नॉर्थ कैम्पस तो साउथ डिस्ट्रिक में आने से रहा…

एक और सज्जन हैं… जिनका नाम लोग पुलिस मुख्यालय के “प्रेस को बेवकूफ बनाइये” कार्यक्रम के अधिकारी की तर्ज पर गोलू रखते हैं… एक नंबर के दिलफेंक हैं… और दिल के साथ अक्सर बकैती भी फेंक आते हैं…. ये सोचे बगैर की पत्रकारों की दुनिया बड़ी छोटी है…..

खैर एक और सज्जन हैं… नए-नए ही चैनल में आए हैं… पिछले आठ-दस महीनों में उनके इतने किस्से हुए की पूछो मत… खैर आप भी एक सुन लीजिये… मीटिंग चल रही थी ब्यूरो की… किसी बात पर उनसे पूछा गया की पी एम् ओ क्या है जानते हो… उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया… वो न वहां किसी प्राइम मिनिस्टर का कतल हो गया था तबसे उसे पी एम् ओ कहते हैं….

एक और सुनिए……. उन्ही सज्जन को एक बार रात में एक मर्डर केस को कवर करने के लिए भेजा गया… साहब बहुत लेट पहुंचे और बगल के किसी दुसरे के घर का दरवाजा खटखटा दिया… जो सज्जन बाहर निकले उनके मुह पर आईडी लगाकर सीधे जवाब दाग दिया… “आपने किया है मर्डर…”

खैर वो शायद कुछ और पूछना चाहते थे लेकिन एन मौके पर जबान फिसल गई… और रिपोर्टर साहब किसी तरह बस अपनी जान बचा कर भागे…..

एक और मोहतरमा हैं जिनको मैं कभी थिलासिमिया कभी पीलिया तो कभी फ्लू कह के बुलाता हूँ… मैडम की एक्सक्लूसिव ख़बरों में भी एक स्थानीय चैनल की “मनोहर” छवि छाई रहती है…

खैर लिखने को बहुत कुछ है और ये पोस्ट लम्बी होती जा रही है… तो आज बस इतना ही… बाकी अगली बार… आज की जय हिंद… ॥

जर्नलिस्ट जयंत चड्ढा के ब्लाग नई कलम से साभार

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