: एम्स ट्रामा सेंटर में जाने के बाद इलाज से वेंटिलेटर हटाने में कामयाबी : पी7न्यूज प्रबंधन जयंत और उनके परिजनों के लिए जो कर रहा है, उसके लिए उन्हें साधुवाद : प्रिय यशवंत भाई, मैं अपने एक साथी के साथ जयंत से मिलने ट्रॉमा सेंटर गया था, लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है, जैसी आपने किसी ‘सज्जन’ के मेल के आधार पर छापी है। ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर कहते हैं कि उनका काम देश भर से आए मरीजों को खतरे से बाहर निकाल कर दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर कर देना है।
उन्होंने जयंत के साथ भी ऐसा ही किया है। मैं अपने किसी जानने वाले डॉक्टर के पास गया था, उन्होंने जो कुछ कहा वो ज्यों का त्यों पूरे देश के सामने रख रहा हूं –
डॉक्टर- जिस बेड पर जयंत हैं, उस बेड पर पहले भी कोई मरीज था?
मैं- हां जरूर रहा होगा।
डॉक्टर- फिर सोचिए अगर आपकी तरह ही वो भी कुछ दिन रूकने की पैरवी करवा कर आता तो क्या जयंत को ट्रॉमा सेंटर में बेड मिलता?
मैं- नहीं मिलता। जयंत के लिए भी इंतजार किया गया था।
डॉक्टर- फिर आप ही बताईए, जिस अस्पताल पर पूरे देश का भार है, वहां इस तरह से कैसे किसी मरीज को ठीक होने तक रखा जा सकता है? ट्रॉमा सेंटर बेसिकली मरीज को आउट ऑफ डेंजर करके दूसरे अस्पतालों को रेफर कर देते हैं, कि उनका इलाज वहां हो सके। हम तो खतरे में पड़े मरीजों को खतरे से बाहर निकालते हैं। यही बात जयंत के साथ भी है। हां, हम शाम में डिस्चार्ज नहीं करते, इसके लिए आपको सुबह तक का समय मिल जाएगा।
इसके बाद मैं डॉक्टर को धन्यवाद देकर आ गया। सोचने वाली बात है, कि कहां गलत कह रहा है डॉक्टर।
अब थोड़ा जयंत भाई की स्थिति देखिए…
जयंत जब ट्रॉमा सेंटर में आए थे, तब वेंटीलेटर पर थे, यानी पूरी तरह से मशीन की दी हुई जिंदगी जी रहे थे। अब वे खुद ही सांस ले रहे हैं, यानी मशीन की जरूरत उन्हें खाना खाने के लिए लेनी पड़ती है, सांस वे खुद ले रहे हैं। अब उनके शरीर में हरकत भी है। नाम लेने पर रिएक्ट करते हैं… हाथ चलाते हैं, पैर पर प्लास्टर होने के बाद भी पैर हिलाते हैं। हां, अभी होश में नहीं आए हैं, जिसकी वजह से आगे का इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है। डॉक्टरों का तर्क है कि जब तक होश में नहीं आएंगे, दिमाग में जमे खून के थक्के का इलाज नहीं किया जा सकता। ये तो हुई पहली बात।
दूसरी बात ये है कि पी7 जैसा संस्थान ही है, जो अब तक जयंत के साथ खड़ा है। मुझे नहीं मालूम कि उसने कितना खर्च किया, या जयंत भाई के ईलाज में कितना खर्च आ रहा है। नहीं तो आज के समय में पत्रकार जैसी कांट्रेक्ट की नौकरी कर रहे हैं, क्या पता था कि उसकी जेब से चैनल का आई कार्ड निकाल लेते और छोड़ देते। भाड़ में जाओ भैया, कौन मुसीबत मोल ले! लेकिन नहीं, पी 7 ने अपने कर्मचारी का पूरा साथ दिया। ऐसे में कहना चाहिए कि जो कुछ भी ये चैनल जयंत भाई के लिए कर रहा है, उसके लिए साधुवाद का पात्र है।
इलाहाबाद से आए जयंत के माता पिता को अपने गेस्ट हाउस में रखे हुए है। बेटे के पास आने जाने के लिए एक गाड़ी मय ड्राइवर दे रखी है। चैनल का एक कर्मचारी लगातार उनके साथ या उनके संपर्क में बना रहता है।
अब आज के समय में किसी चैनल से कितनी उम्मीद की जा सकती है? कभी किसी कर्मचारी को एक महीने की सेलरी एडवांस चाहिए होती है, तो तमाम मीडिया हाउस नाक भौं सिकोड़ते हैं। कई तरह की कागजी कार्यवाई के बाद खानापूर्ति करते हैं, और फिर बड़े ही एहसान के साथ एक महीने की सेलरी एडवांस में देते हैं, जैसे इसके एवज में वे काम ही नहीं कराएंगे। इस हकीकत से आप भी वाकिफ होंगे। सो किसी पर भी उंगली उठाने से पहले या इस तरह किसी मेल पर आधारित बातों को छापने से पहले जांच लें, या संबंधित पक्ष का रूख जरूर लें।
जयंत को ठीक होने में कितना समय लगेगा, ये तो सिर्फ भगवान ही जानता है। ऐसे में क्या अच्छा नहीं होगा, कि जो पत्रकार साथी उसके लिए चिंतित हैं, वे उसके ठीक होने के लिए दो घड़ी समय निकाल कर दुआ करें…
राजन अग्रवाल
जर्नलिस्ट
दिल्ली












Deepak Srivastav, Gorkhpur
May 6, 2011 at 7:33 am
जयंत जी जल्द ठीक होकर पी7 को अपनी सेवायें दें, यही ईश्वर से कामना है…
amitvirat
May 5, 2011 at 10:25 am
jayant bhai sahi hon yahi dua channel unke saath hai ye badi rahat ki baat hai
प्रशांत गुप्ता
May 5, 2011 at 4:53 pm
पी 7 अगर सच में जयंत चड्ढा और उनके परिवार की इस मुश्किल की घड़ी मदद कर रहा है तो प्रबंधन का साधुवाद। भड़ास मीडिया से अनुरोध है कि कृपया ऐसी खबरें न छापें के प्रबंधन नाराज हो और बेचारे जयंत चड्ढा के साथ कुछ अनहोनी हो जाए। क्योंकि कोई तो है जो मदद कर रहा है, विपरीत खबरें स्थिति को बिगाड़ सकती हैं। आपका प्रशांत
SHANKAR SUMAN
May 6, 2011 at 9:27 am
ये बिलकुल सच्ची बात है कि ने जयंत का पूरा ख्याल रखा है…..जयंत को पूरी तरह स्वस्थ्य होने में दवा के साथ साथ दुआ की जरुरत है….हम सभी पत्रकार साथी जयंत के लिए वही कर रहे हैं…..एक बात जरूर है कि और चैनलों के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आया है कि किस तरह मुश्किल वक्त में अपने स्टाफ के साथ खडा हुआ जाता है….. thnkx
SHANKAR SUMAN
May 6, 2011 at 9:28 am
ये बिलकुल सच्ची बात है कि P7 ने जयंत का पूरा ख्याल रखा है…..जयंत को पूरी तरह स्वस्थ्य होने में दवा के साथ साथ दुआ की जरुरत है….हम सभी पत्रकार साथी जयंत के लिए वही कर रहे हैं…..एक बात जरूर है कि P7 और चैनलों के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आया है कि किस तरह मुश्किल वक्त में अपने स्टाफ के साथ खडा हुआ जाता है…..
विवेक बाजपेई
May 6, 2011 at 12:35 pm
जयंत चड्ढा को में पिछले कई सालों से जानता हु , उन्होंने हमेशा अपने नए साथियों की मदद की हैं इसी लिए आजकल हर कोई उनकी तबियत को लेकर फिर्कमंद हैं , उनके और मुकंद शाही के साथ जो हुआ उससे दिल्ल्ली के क्राईम रिपोर्टर दुखी हैं , भगवान् से प्राथना हैं की दोनों लोग जल्द ठीक होकर फिल्ड में लौटेगे उसी धार और अंदाज के साथ ,, साथ ही पी 7 को भी धन्यवाद की उसने अपने योग्य कर्मचारी की जरुरत के समय मदद की /
विवेक बाजपेई