सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा है कि क्यों ना टेलीकॉम घोटाले की जांच की निगरानी के लिए एक कमेटी बना दी जाए. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि 2जी मामले में चाहे कोई कितना भी बड़ा आरोपी क्यों न हो उसके बख्शा नहीं जाएगा. दरअसल, मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने याचिका दायर करके सीबीआई पर पक्षपात का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि प्रशांत भूषण ने कहा कि सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और टाटा को चार्जशीट में शामिल नहीं किया है.
सुप्रीम कोर्ट मे प्रशांत भूषण ने कहा कि सीबीआई अनिल अंबानी और रतन टाटा जैसे बड़े लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है. करोड़ों रुपयों के गोलमाल में सिर्फ स्पेक्ट्रम का लाइसेंस पाने वाली कंपनियों के अधिकारी ही जिम्मेदार नहीं हैं. इस घोटाले की असल जिम्मेदारी कंपनियों के मालिकों की है, जिन्हें इस डील से सबसे ज्यादा फायदा होने वाला था, लेकिन सीबीआई ने एडीएजी के अनिल अंबानी और टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा का नाम अपनी चार्जशीट में नहीं डाला.
प्रशांत भूषण ने कहा कि अब तक जो तथ्य मिले हैं, उससे अंबानी और टाटा के खिलाफ सीधा मामला बनता है, इसलिए टेलीकॉम घोटाले की जांच को सही दिशा में रखने के लिए कमेटी बनाई जानी चाहिए. सीबीआई की तरफ से दलील दी गई कि जांच निगरानी के लिए कमेटी बनाने का मतलब होगा कि कोर्ट को सीबीआई पर भरोसा नहीं है. परन्तु कोर्ट सीबीआई की इस दलील से सहमत नजर नहीं आया. कोर्ट से सीबीआई के साथ इनकम टैक्स विभाग के ढुलमुल रवैये पर भी सवाल उठाए तथा कहा कि इनकम टैक्स विभाग इस बात की पूरी जानकारी दे कि पिछले तीन सालों में उसने इस मामले में क्या तहकीकात की है. कितने सबूत इकट्ठे किए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया इस मामले में आरोपी चाहे कितना भी बड़ा क्यों उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चत की जाए. सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में रिलायंस और टाटा की भूमिका की जांच चल रही है. इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी. अगर सीबीआई कोर्ट को अपने जवाबों से संतुष्ट नहीं कर पाती है तो निगरानी के लिए एक कमेटी गठित कर दी जाएगी.











