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दुख-दर्द

छोटेलाल की मौत और यूपी पुलिस का विद्रूप चेहरा

डा. नूतन ठाकुरआज सुबह मुझे एक ऐसी खबर मिली जो उत्तर प्रदेश पुलिस की हकीकत को और जोरों से बयान करती है. यह खबर जुडी हुई है लखनऊ स्थित न्यूज़ एक्स के फोटोग्राफर गोपाल चौधरी से. गोपाल भाई गोरखपुर के रहने वाले हैं और पिछले काफी समय से लखनऊ में इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में कैमरामैन का काम कर रहे हैं.

डा. नूतन ठाकुरआज सुबह मुझे एक ऐसी खबर मिली जो उत्तर प्रदेश पुलिस की हकीकत को और जोरों से बयान करती है. यह खबर जुडी हुई है लखनऊ स्थित न्यूज़ एक्स के फोटोग्राफर गोपाल चौधरी से. गोपाल भाई गोरखपुर के रहने वाले हैं और पिछले काफी समय से लखनऊ में इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में कैमरामैन का काम कर रहे हैं.

उनके एक सगे रिश्तेदार छोटे लाल गोरखपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र के दीवान बाजार इलाके में रहते थे. वे एक सीधे-साधे व्यवसायी किस्म के आदमी थे. कुछ दिनों पहले उनके इलाके के कन्हैया लाल यादव नाम के बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर ने उन्हें कहा था कि उनके घर पर बिजली का काफी बकाया है और इस कारण उन पर बिजली चोरी का मुक़दमा दर्ज होने वाला है. कन्हैया लाल यादव ने उनसे यह भी कहा कि इससे बचने का एक ही उपाय है कि छोटे लाल उन्हें पचास हज़ार रुपये दे दें. यानी कि घूस के पचास हज़ार से छोटे लाल के सारे अपराध माफ हो जाते.

छोटे लाल इस बात से काफी डर से गए थे. एक सीधे-सादे आदमी को बिजली चोरी के मामले में जेल जाने का डर तो समा ही गया, साथ ही बचने के लिए पचास हज़ार का इंतज़ाम करने की चिंता हो गयी. इसके बात क्या हुआ यह तो कोई अभी नहीं जान रहा है पर इतना जरूर है कि छोटे लाल अपने घर से गायब हो गए. छोटे लाल के घर वाले सारे लोग बहुत परेशान हुए. उन्होंने तुरंत गोपाल भाई से संपर्क किया जिन्होंने इंस्‍पेक्‍टर कोतवाली, गोरखपुर से बात की. इंस्‍पेक्‍टर ने शुरू से ही टाल-मटोल वाली नीति अपनाई और गोपाल भाई को कह दिया कि वे इस बारे में प्रयास करेंगे, लेकिन वास्तव में कुछ भी नहीं किया. कई बार कहने के बाद और आईबीएन चैनल से जुड़ाव की बात जानने के बाद बहुत मशक्कत कर के गोपाल भाई मात्र एक गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवा सके. गोपाल भाई के रिश्तेदारों ने कन्हैया लाल यादव के खिलाफ जो एफ़आईआर दी उसे इंस्‍पेक्टर कोतवाली ने दर्ज नहीं किया.

गोपाल भाई ने एक मित्र के रूप में मेरे पति से भी बात की और अमिताभ जी ने मेरे सामने ही इंस्‍पेक्टर कोतवाली, गोरखपुर से बात की. इंस्‍पेक्टर ने कहा कि वह छोटेलाल को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ देर बाद गोपाल भाई का फिर फोन आया कि इंस्‍पेक्टर मुक़दमा दर्ज नहीं कर रहा है और ना ही कन्हैया लाल यादव से किसी तरह की पूछताछ ही कर रहा है.

इस बार जब अमिताभजी ने कोतवाल से बात की तो उनका बड़ा ही नायाब किस्म का जवाब मिला. उन्होंने कहा कि वे मुक़दमा दर्ज करने को तैयार हैं, बस दिक्कत यह है कि इस समय वे थाने पर बिलकुल अकेले हैं. उनके साथ मात्र एक होमगार्ड है, ना तो कोई सब इंस्‍पेक्टर है और ना ही कोई सिपाही. जैसे ही कोई भी थाने पर आ जाएगा, वे तुरंत मुक़दमा दर्ज कर देंगे और पूछताछ भी शुरू कर देंगे. अमिताभ जी ने मेरे सामने ही कहा कि ऐसा ही ठीक रहेगा क्योंकि यदि मुक़दमा भी दर्ज नहीं हुआ और कोई कार्रवाई नहीं हुई फिर यदि कल को छोटेलाल जी की लाश मिली तो बड़ी फजीहत होगी, वे निलंबित होंगे और बदनामी अलग से होगी. इंस्‍पेक्टर ने भी उनकी हाँ में हाँ मिलाई.

अमिताभजी ने यही बात गोपाल भाई को बता दी और कहा कि इंस्‍पेक्टर ने अपनी मजबूरी बताते हुए तुरंत मुक़दमा लिख कर छानबीन करने की बात कही है. आज सुबह दुबारा गोपाल भाई का फोन आया. इस बार वे काफी टूटे हुए लग रहे थे. कहने लगे कि कल रात में छोटेलाल जी की लाश मिली. गले पर चोट के निशान दिख रहे हैं. हम लोग मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर पर हैं और लाश के पोस्ट मार्टम के लिए इन्तज़ार कर रहे हैं. मैंने अपने पति को बहुत नाराज़ होते देखा और उन्हें गोपाल भाई को इस मामले में ऊपर तक कम्प्लेन करने की बात कहते सुना. उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि गोपाल भाई चाहें तो वे उनका नाम भी अपनी शिकायत में लिख दें और वे अपनी और इंस्‍पेक्टर के बीच हुई बात को हर जगह कहने को तैयार हैं.

इस घटना को सुन कर मैं भी सन्न रह गयी. गोपाल भाई हम लोगों के बहुत ही अच्छे मित्र हैं और एक बहुत भले, खुशमिजाज और सीधे-सादे आदमी हैं. साथ ही बहुत ही मददगार किस्म के भी हैं. एक बार हम लोगों को अपने कुछ अच्छे फोटो की जरूरत थी तो उन्होंने गोरखपुर के मूल निवासी और लखनऊ में ही आइबीएन7  के अमितेष श्रीवास्तव जी के साथ घर पर आ कर हम लोगों की काफी सारी बहुत प्यारी फोटो खींची थी. भड़ास पर मेरी और अमिताभजी की जो फोटो लगी है वह भी गोपाल भाई ने ही खींची थी. ऐसे में उनके जैसे आदमी के साथ गोरखपुर के इंस्‍पेक्टर द्वारा किया गया यह काम मुझे भी बहुत खराब लगा. मैं सोचती हूँ कि कम से कम उन्हें मुक़दमा लिख कर छोटे लाल जी की तलाश तो करनी ही चाहिए थी, कन्हैया लाल यादव से पूछताछ को करनी चाहिए थी.

मैं नहीं जानती कि आगे गोपाल भाई इस मामले में क्या करेंगे और यदि वे शिकायत देंगे भी तो कार्रवाई होगी या नहीं होगी पर इतना जरूर है कि यह घटना उतर प्रदेश पुलिस का एक विद्रूप चेहरा ही दिखाता है.

डॉ. नूतन ठाकुर

संपादक

पीपल’स फोरम, लखनऊ

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0 Comments

  1. r p yadav

    May 9, 2011 at 5:54 pm

    madam nutan thakurji,
    this bloody UP police is very corrupt, the gorakh pur police its very well you are beloning journalist community, they could not claim the bribe from mr gopal. Engineer has paid them a lot of amount for not launch complaint,
    i request you (nutan ji),we should have joint to with
    anna hazare anti corruction movement
    r p yadav new delhi

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