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पॉवर-पुलिस

औरैया के मीडिया वाले तारीफ के हकदार हैं

23/24 दिसंबर 2008 की सुबह के धुंधलके के बीच स्थानीय पुलिस कर्मी का फोन मेरे पास आया ”गुरु सोवत अह्यौ का? जल्दी जिला अस्पताल आओ मसाला बढि़या है।”  फोन कट होते ही अनमने तरीके से मौके पर मेरा जाना हुआ, जिला अस्पताल में एक स्ट्रेचर पर लुंगी और बनियान में एक आदमी मृत लेटा हुआ था। उस पुलिस कर्मी ने मेरे कान में फूंका ”शेखर तिवारी….” पर जब मैं उस व्यक्ति के बारे में आश्वस्त हुआ तब तक वहां उस पुलिस कर्मी और एक पागल और चंद कुत्तों के अलावा कोई नहीं था। मुझे पता चला चंद मिनटों पूर्व दिबियापुर थानाध्यक्ष होशियार सिंह इसे छोडकर तेजी से निकल गए हैं।

23/24 दिसंबर 2008 की सुबह के धुंधलके के बीच स्थानीय पुलिस कर्मी का फोन मेरे पास आया ”गुरु सोवत अह्यौ का? जल्दी जिला अस्पताल आओ मसाला बढि़या है।”  फोन कट होते ही अनमने तरीके से मौके पर मेरा जाना हुआ, जिला अस्पताल में एक स्ट्रेचर पर लुंगी और बनियान में एक आदमी मृत लेटा हुआ था। उस पुलिस कर्मी ने मेरे कान में फूंका ”शेखर तिवारी….” पर जब मैं उस व्यक्ति के बारे में आश्वस्त हुआ तब तक वहां उस पुलिस कर्मी और एक पागल और चंद कुत्तों के अलावा कोई नहीं था। मुझे पता चला चंद मिनटों पूर्व दिबियापुर थानाध्यक्ष होशियार सिंह इसे छोडकर तेजी से निकल गए हैं।

सुबह का उजाला फैलने के साथ ही खबर ब्रेक होना शुरू हुआ। इस दौरान एक पुलिस कर्मी ने सपा के एक शीर्ष नेता तक ये बात फैला दी थी, उस नेता ने तुरंत ही यह खबर बांटना शुरू कर दिया था। दूसरी ओर खबर को पुख्ता करने की कोशिश बेकार जा रही थी शेखर तिवारी का मोबाइल स्विच आफ बता रहा था। एक विधायक की अनदेखी करतूत को टीवी पर ब्रेक करने में खबर की सत्यता महज पुलिस कर्मी का आफ द रिकार्ड बयान ही था। पर तब सुबह 6 बजे तक इंजीनियर मनोज गुप्ता की हत्या की खबर और सत्ता पक्ष के लोगों की संलिप्तता उजाले के साथ उजागर हो चुकी थी।

अब दिबियापुर थाने पहुंचने के दौरान ही पूरा देश शेखर तिवारी और उनके कारनामों से परिचित हो चुका था। दिबियापुर थाने में होशियार सिंह और तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक सुरेश्वर मिश्रा की मौजूदगी में जीडी और मामले की पूछताछ के बीच एएसपी सुरेश्वर ने मुझसे 5 मिनट रूकने को कहा। पर 10 वें मिनट सुरेश्वर मिश्रा सामने आए और स्वीकार किया कि सदर विधायक शेखर तिवारी और उनके कई सहयोगी देर रात 1-2 बजे के बीच इंजीनियर मनोज गुप्ता को थाने में अधमरा छोड़ गए थे। इसके बाद टीवी की खबरों में शेखर तिवारी ही छा गए। तुरंत ही मैं निकल कर इंजीनियर के आवास गेल के गेट पर गया जहां सुरक्षा कर्मियों ने रोक लिया। मेरी उनके साथ झड़प भी हुई पर मीडिया के दबाव के बाद अंदर जाने को मिल ही गया। जहां एक सपा नेता और चंद लोगों के अलावा कुछ पुलिस कर्मी इंजीनियर के घर के बाहर पहरा दे रहे थे।

एक व्यक्ति ”मालूम नहीं” ने मुझसे रिक्वेस्ट किया प्लीज आप वाइफ को यह एहसास मत दिलाइए कि मनोज गुप्ता की हत्या हो चुकी है। मैंने उन महोदय को आश्वस्त करते हुए दहलीज पर कदम रखा और अंदर का नजारा किसी अपशकुन होने की कहानी कह रहा था। एक कमरे में महिला की कराहने की आवाजें आ रही थी उसी ओर मैं भी बढ़ गया। एक बेड पर मुझे शशि गुप्ता से मिलाया गया। मैंने उनको आश्वस्त किया कि सब ठीक हो जाएगा बस आप ये बता दें कि कैसे क्या कब हुआ। उन्होंने सब कुछ बताया सिवाय यह छोड़कर कि शेखर तिवारी वहां थे या नहीं. इसके पीछे उन्होंने यही बताया कि वो सदर विधायक से कतई परिचित नहीं थी और औरैया जिले से उनका कोई नाता नहीं रहा है।

खबर कवर करने के दौरान अन्य मीडिया कर्मी भी अंदर आ गए फिर इस तरह घटना के सभी तार जुड़ चुके थे और सदर विधायक शेखर तिवारी अपने  अन्य साथियों के साथ फरार थे। दिन भर खबरों में सदर विधायक और उनके प्रदेश की मुखिया मायावती के जन्म दिन के लिए चंदा मांगने के लिए इंजीनियर की हत्या सुर्खियों में रही। विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए यह सुनहरा अवसर था। दोपहर तक जिला अस्पताल से लाश पीएम के लिए नहीं जा सकी थी। दूसरी ओर मुहिम पर जिलाधिकारी शशिकांत शर्मा लगे थे। देर शाम करीब 4 बजे लाश पीएम के लिए रवाना हुई और औरैया इस बात के लिए शांत हो गई कि जैसे तूफान से पहले खामोशी होती है। अगले दिन विभिन्न दलों के लोगों ने बाजार बंदी करवा दी।

सपा नेताओं ने सुभाष चौक पर माया सरकार का पुतला फूंका और सदर कोतवाल टीपी सिंह का कालर पकड़ बाहर का रास्ता दिखा दिया। फिर पूरे शहर में दिन भर पुलिस बैकफुट पर रही और आगजनी पथराव मजकर हुआ। देर शाम पुलिस बल बाहर से आई और उपद्रवियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। पत्रकार पिटे पुलिस पिटी और नेता जीत गए अपना कद बढा कर…। इस मामले में कई नेताओं और उपद्रवियों पर रासुका लगी गैंगस्‍टर लगा। शेखर तिवारी हत्या के बाद कानपुर देहात ”अब रमा बाईनगर”  के अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र से पकडे़ गए, और फिर ये दास्तान माया सरकार पर भारी पड़ने लगी जन्मदिन भी मना और अलग-अलग जगहों से पिछली बार की अपेक्षा चंदा भी पहुंचा नहीं पहुंचे तो सिर्फ शेखर जो चंदे के फंदे में फंसे थे।

शेखर पार्टी से उस समय भी नहीं निकाले गए और न ही आज। पर शेखर ने इस बात का इशारा जरूर किया था कि उनकी चुप्पी की एक खास वजह है। मीडिया ने इस मामले को जघन्यतम करार देकर इस कृत्य की भर्त्‍सना की पर अब न्यायालय से फैसला आने के बाद औरैया की वो मीडिया उपेक्षित रही जिसने उस समय के सबसे जघन्य अपराध को सार्वजनिक करने और सच्ची घटाना कवर करने के लिए उस शासन सत्ता का विरोध किया और पीडित परिवार की आवाज बनी वो भी तब जबकि खाकी और अपराधी जिले में डंका बजाए हुए थे। थानों से अवैध इनकम कल भी थी और आज भी है, पर इस मामले में होशियार सिंह जैसे दरोगा के आजीवन कारावास पाने से एक बात तो साबित है कि मीडिया शासन सत्ता और खाकी से आज भी ऊपर है।

जरूरत इस बात की है कि वो शेखर तिवारी जैसे नेताओं का तलुआ चाटने से दूर रहे और खाकी को इस बात का एहसास दिलाती रहे के तुम सरकारी नौकर हो किसी के भाग्य विधाता नहीं जिम्मेदारी दी गई है, तो समाज हित में और न्याय का काम करो और हैसियत मत भूलो वरना आक्रोश की चिंगारी में शासन और सत्ता तक गंवानी पडी है, ये याद रखना होगा। शायद इंजीनियर मनोज गुप्ता मामले का फैसला इसी बात की ही सार्थकता की कहानी कह रहा है।

लेखक अभिषेक शर्मा औरैया में पत्रकार हैं तथा ईटीवी से जुड़े हुए हैं.

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0 Comments

  1. renuka tiwari

    May 10, 2011 at 6:38 pm

    abhishek ji wakai me app bhut achcha likhte h.:)

  2. Ashwani Bajpayee

    May 10, 2011 at 2:51 pm

    यार सुरेश्वर मिश्रा का अर्थ कही सुरेश मिश्रा तो नहीं

  3. anant

    May 9, 2011 at 2:57 pm

    Hats off to all the journalists of Auriya (my home district) who brought this case in lime light on national media.:)

    Anant Paliwal
    http://www.liveindia.tv
    C/O Live India,
    New Delhi

  4. GhanshyamKrishana

    May 10, 2011 at 8:15 am

    अभिषेक जी आप की लेखनी में वो ताकत है। जो गणेश शंकर विध्यार्थी जी की लेखनी में था । आप जब भी लिखते है तो औरैया के दलाल टाइप के पत्रकार जाने क्यों पीछे खिसकनें लगते है। कहीं ऐसा तो नहीं कि बेचारों को डर हो कि अगर ज्यादा मुंह खोला तो कवरेज क्षेत्र जनपद औरैया की जगह रमाबाई नगर पकडना पडें ,खैर सबका दाता राम है।

  5. Shailendra Mohan Tiwari

    May 13, 2011 at 1:54 pm

    Dear Friend
    Kya Kha Kar Likhana Shuru Karte Ho Bhai ………….Hila Dala
    Bindaas

  6. suresh mishra

    May 14, 2011 at 11:10 am

    23/24 december 08 ko subah 4 baje the . mere cell no. par giri darogaa ji ki call aayi. unhone mujhe poori ghatnaa batayi . maine call kar is lekhak ko bulayaa aur chay peene ke baad hosital pahunchaa. cover kiya , engineer ki tasdeek karayi. khabar break kiya. subah 5 ki bulettin se phono shuru huaa . jo adyatan jari rahaa. mai aaj samajha ki farji naam kamaane ke liye log kitanaa jhoot bolate aur likhate hain. soochanaa dene wale daroga ji the Giri. mai samajhataa hu ki lekhak meri baat se sahmat hogaa. suresh mishra

  7. Gaurav srivastava

    May 17, 2011 at 3:27 pm

    lo tees mar khaan ke comments aane shuru…..

  8. lavinsh chaubey

    May 26, 2011 at 7:06 am

    manoj gupta marder kace me auriaya ke media ke kavrej up govt. ko hila diya tha. cort ke phaisle ke bad janta ka media par vishwash bada hai. shuresh jee app se auriaya elictronik media ke pahchan goti gai. apke jimmedari bauti hai ke elc.media me jo dalal tareke ke log aa gaye hai unhe kishi tareka se patrakarita ke sidhanto se jode taki auriaya ke media ke pahchan kayam rah sake. abhishek jee apke tulna ganesh shankar vidharthi se ke gaye to app bhi unke jaisha kuch karke dikhaye. thank you lavinsh chaubey auriaya

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