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चिरानुच : जमानत पर वेब मीडिया की हिरोइन

चेरानुचक्या आप चिरानुच प्रेमचायपोर्न को जानते हैं? शायद नहीं! एक ऐसे वक्त में जब फेसबुक और ट्विट्टर से क्रांतियाँ हो रही हैं, समाचार पत्रों और व्यवसायिक चैनलों की कुकुरदौड़ से बिलकुल अलग वेब पर स्वतंत्र पत्रकारिता का अभिनव इतिहास लिखा जा रहा हो, ऐसे में चिरानुच को जानना बेहद जरुरी है. थाईलैंड की रहने वाली 32  वर्ष की चिरानुच फिलहाल जेल से जमानत पर छूटी हैं.

चेरानुचक्या आप चिरानुच प्रेमचायपोर्न को जानते हैं? शायद नहीं! एक ऐसे वक्त में जब फेसबुक और ट्विट्टर से क्रांतियाँ हो रही हैं, समाचार पत्रों और व्यवसायिक चैनलों की कुकुरदौड़ से बिलकुल अलग वेब पर स्वतंत्र पत्रकारिता का अभिनव इतिहास लिखा जा रहा हो, ऐसे में चिरानुच को जानना बेहद जरुरी है. थाईलैंड की रहने वाली 32  वर्ष की चिरानुच फिलहाल जेल से जमानत पर छूटी हैं.

चेरानुच को थाईलैंड के साइबर क्राइम एक्ट के सेक्शन 14 और 15 के तहत निरुद्ध किया गया है, जिसमें उन्हें न्यूनतम 85 साल की सजा हो सकती है, उन्हें ”लेजे मेजेस्ते”  (सत्ता के विरुद्ध साजिश) का अभियुक्त बनाया गया है. उनका कसूर ये है कि जिस न्यूज पोर्टल “प्रजातायी” की वो सम्पादक हैं, वो न्यूज पोर्टल थाईलैंड की दमनकारी राजसत्ता के खिलाफ जनता द्वारा की जाने वाली टिप्पणियों को लगातार बिना किसी माडरेशन के प्रकाशित कर रहा था. चिरानुच को एक सम्पादक के तौर पर इन टिप्पणियों के प्रकाशन के लिए दोषी पाया गया, हालाँकि पोर्टल के प्रबंधन ने थाईलैंड सरकार के दबाव में बाद में उन टिप्पणियों को हटा लिया. गौरतलब है कि 2004 में एक पत्रकार के तौर पर अपना कैरियर शुरू करने वाली चेरानुच को अभी हाल में प्रतिष्ठित “नाइट अशोक फेलो”  दी गयी थी. फिलहाल “प्रजातायी “बंद हो चुका है.

थाईलेंड में स्वतंत्र पत्रकारिता का प्रतीक बन चुका “प्रजातायी” अब तीसरी दुनिया के देशों में न्यू मीडिया के खिलाफ चलाये जा रहे दमन चक्र का प्रतीक बन गया है. ये समय है कि वेब मीडिया की स्वतंत्रता का शत-प्रतिशत इस्तेमाल कर रहे भारत समेत अन्य देशों के ब्लागर्स, पत्रकार सावधान हो जाएं. चेरानुच कहती हैं कि थाईलैंड का कानून वेबसाइट संचालकों और ब्लागरों के लिए बेहद चुनौती भरा है, जिस तरह के प्रतिबन्ध हमारे यहाँ लगाए गए हैं, उन्हें लागू करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं है. हमारे यहाँ संपादकों को प्रकाशित सामग्री के अलावा जनता द्वारा दी जाने वाली टिप्पणियों पर भी पैनी निगाह रखनी पड़ती है, ऐसे में सम्मानजनक ढंग से वेब पत्रकारिता कदापि संभव नहीं है.अभिव्यक्ति का ऐसा दमन निश्चित तौर पर आम जनताके लिए भी बेहद खीज भरा है.

थाईलैंड की पुलिस ने जिस वक्त चेरानुच को कोर्ट में प्रस्तुत किया उनके लैपटाप की वो हार्ड-डिस्क भी प्रस्तुत की, जिसमे कथित तौर पर वो तस्वीरें थी, जिनमें राजा बन्दर की वेशभूषा में थे. चिरानुच कहती हैं कि ये फोटो यू ट्यूब से प्राप्त की गयी थी, अब अगर आप कहें कि गूगल से फोटो अपलोड करना भी अपराध है तो बताइए हम क्या करें? चेरानुच कहती हैं कि अब आज हाल ये है कि मैंने अपनी भविष्यगत योजनाओं को सिरहाने रख दिया है. महीने में एक दिन पुलिस के पास जाकर बयान देना बेहद तकलीफ देने वाला होता है. “प्रजातायी” का बंद होना उस में काम करने वाले पत्रकारों और उसे पढ़ने वाली जनता और मेरे लिए किसी सदमे से कम नहीं है. मैं कह सकती हूँ आज थाईलैंड तो कल पूरी दुनिया में अभिव्यक्ति का स्वंत्र और सुरक्षित माध्यम बनाये रखना बेहद कठिन होगा. फिलहाल दमन के इस चक्र से चेरानुच हारी नहीं है और न ही न्यू मीडिया में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता को लेकर उनकी आवाज में कोई बदलाव आया है. फेसबुक और ट्विटर पर उनके समर्थकों की लगातार बढ़ रही संख्या इसका प्रमाण है.

लेखक आवेश तिवारी कई अखबारों में काम कर चुके हैं. इन दिनों नेटवर्क6 पोर्टल के संपादक के रूप में काम कर रहे हैं.

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