: विरोध में पत्रकारों ने निकाली रैली : मिड डे के क्राइम रिर्पोटर जे डे की हत्या के मामले में अंडरवर्ल्ड और तेल माफिया के बाद अब शक की सुई एक एसीपी की तरफ घूम रही है। इसके तुरंत बाद मुंबई पुलिस के सहायक उपायुक्त (एसीपी) अनिल महाबोले का सोमवार रात तबादला कर दिया गया। महाबोले पर जे डे की हत्या में लिप्त होने का शक किया जा रहा है।
महाबोले के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एक रिपोर्ट पिछले दिनों मिड डे के वरिष्ठ पत्रकार जे डे ने राज्य के गृह मंत्री आरआर पाटिल को सौंपी थी। इस रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद महाबोले को कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर भेज दिया गया था। लेकिन, जे डे की हत्या से चार दिन पहले ही महाबोले ने पुन: अपना कार्यभार संभाल लिया था। महाबोले के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की रिपोर्ट के बावजूद उन पर राज्य सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
एसीपी अनिल महाबोले लंबे समय से दक्षिण मुंबई क्षेत्र में ही जमे रहने में कामयाब रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के रिश्तेदारों के घर उसका आना-जाना है। कुछ अन्य मामलों में भी जे डे ने महाबोले के खिलाफ सबूत जुटाए थे। मालूम हो कि जिस तरह से एक एसीपी पर शक की सूई घूम रही है। उससे सवाल उठने लगे हैं कि खोजी पत्रकार जे डे की हत्या की साजिश में क्या मुंबई के वर्दीवाले भी शामिल हैं? क्या जे डे को खाकी और अंडरवर्ल्ड के नापाक रिश्तों का सच बताने की वजह से मारा गया?
जे डे ने अपनी एक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि एसीपी महाबोले के तार डी कंपनी से जुड़े हैं। जे डे को कुछ ऐसे कागजात हाथ लगे थे, जिससे ये साफ है कि महाबोले का दाऊद के रिश्तेदारों के घर आना-जाना है। इस रिपोर्ट के बाद से ही महाबोले जे डे से खुन्नस रखता था। ये बात खुद जे डे ने साथी पत्रकारों को बताई थी। दूसरी ओर जे डे हत्याकांड में एसीपी का नाम चर्चा में आने के बाद पुलिस कमिश्नर ने आननफानन में महाबोले को आजाद मैदान से लोकल आर्म्स कंट्रोल रूम 1 में ट्रांसफर कर तीन दिन की छुट्टी पर भेज दिया है। ऐसे में एसीपी के ट्रासंफर ने एसीपी को शक के घेरे में ला खड़ा कर दिया है।
इस बीच मुम्बई पुलिस ने डे पर हमला करने वाले चार संदिग्ध हमलावरों में से एक हमलावर का सोमवार को स्कैच जारी किया था। जे डे के हत्या के विरोध में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के 500 से ज्यादा पत्रकारों ने सोमवार को राज्य सचिवालय तक एक विरोध रैली निकाली थी। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से मुलाकात कर मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग की थी, लेकिन सीएम ने उनकी ये मांग ठुकरा दी। अब पत्रकारों ने 15 जून के बाद विरोध-प्रदर्शन, भूख हड़ताल करने और इस मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग को लेकर बम्बई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
















arvind sharma
June 14, 2011 at 4:07 pm
is mamle ki cbi janch hona chayie. maharastra govtt par dabab banana hoga. iske liye pure desh ke patrakaro ko aage ana padega.
arvind sharma itarsi mp.
m.no 09827323332
Indian citizen
June 14, 2011 at 5:17 pm
पुलिस का कोई बाल बांका नहीं कर सकता. हत्याकांड में लिप्त होने की आशंका और महज ट्रांसफर.
Neha Jain
June 14, 2011 at 6:03 pm
patrakarita ko desh ki sena ke samaan samjha jata hai. dono me fark ye h ki sena k paas aatmaraksha k liye hathiyaar h lekin patrakaar k paas nhi. J D ki hatya nindaneeya hai… beshak iske peeche powerful person hai… maamle ki nishpaksha roop se CBI jaanch honi chahiye…
Arun Kumar, President, The Times Of India Newspaper Employees Union Patna
June 15, 2011 at 7:41 am
[b][/b]On behalf of the Bihar Sharamjevi Patrakar Union (Bihar Working Journalists Union – popularly known as BWJU) I, Arun Kumar, General Secretary BWJU extend my whiole-hearted support to our Mumbai and Maharastra friends – colleagues – who are in the forefront of struggle for justice in this case. Long Live their struggle. Wish you a glorious victory.