Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

टीवी

लन्दन में प्रणव रॉय

[caption id="attachment_20712" align="alignleft" width="84"]प्रणब रॉयप्रणब रॉय [/caption]प्रणव रॉय को आज कौन नहीं जानता, एनडीटीवी के मालिक, अंग्रेजी के अत्यंत कुशल समाचार वाचक, चुनावी सर्वेक्षण के जनक और इस देश के सर्वाधिक चर्चित पत्रकारों में से एक प्रणव रॉय एक ऐसी हस्ती हैं जिनके बारे में संभवतः पूरा हिंदुस्तान जानता है. आम तौर पर उनके जैसा बड़ा व्यक्तित्व सड़क चलते नहीं टकराया करता.

प्रणब रॉय

प्रणब रॉय

प्रणव रॉय को आज कौन नहीं जानता, एनडीटीवी के मालिक, अंग्रेजी के अत्यंत कुशल समाचार वाचक, चुनावी सर्वेक्षण के जनक और इस देश के सर्वाधिक चर्चित पत्रकारों में से एक प्रणव रॉय एक ऐसी हस्ती हैं जिनके बारे में संभवतः पूरा हिंदुस्तान जानता है. आम तौर पर उनके जैसा बड़ा व्यक्तित्व सड़क चलते नहीं टकराया करता.

जब मैंने लन्दन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर सफ़ेद दाढ़ी वाले एक खूबसूरत अधेड़ व्यक्ति को देखा तो मुझे यह तो महसूस हुआ कि यह चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा है पर मैं इससे आगे कुछ समझ नहीं सका. पर इसके तुरंत बाद मैं उस समय आश्चर्य में पड़ गया जब वहाँ उपस्थित कुछ लोगों के मुंह से प्रणव रॉय शब्द सुना. पहले किसी एक ने यह नाम लिया और फिर तो जैसे तांता सा लग गया. लगभग हर दूसरा व्यक्ति यही नाम ले रहा था और कुछ कौतूहल भरे आतुर आवाज में बोल रहा था.

अब मैंने एक बार फिर उस शख्स को देखा जिसे छोटे परदे पर तो तब से देख रहा था,  जब मैं आआईटी कानपुर में था और अस्सी के दशक के आखिरी दिनों में प्रणव रॉय और विनोद दुआ नामक दो युवा हमारे देश की पत्रकारिता और राजनीति को पूरी तरह से बदलते हुए चुनावी सर्वेक्षण और चुनावी नतीजों पर अपने विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे थे. उस समय तक यह क्षेत्र अपने देश में लगभग अनजाना सा था और इसीलिए जब इन युवा तुर्कों द्वारा इस तरह की बातें और ऐसे तथ्य प्रस्तुत किये जा रहे थे तो पूरा देश हैरान और मंत्रमुग्ध हो कर उन्हें देख रहा था.

यही हैरानी मुझे उस दिन भी हुई जब लंदन में हवाई जहाज से निकल कर इमिग्रेशन काउंटर पर अपने नंबर की प्रतीक्षा करते समय मैंने प्रणव रॉय को देखा. वैसे सच पूछा जाए तो इसमें हैरानी जैसी कोई बात नहीं होनी चाहिए थी, क्योंकि बड़े लोग अक्सर लन्दन आते ही रहते हैं, यदि किसी आदमी को लन्दन आना है तो वह हवाई हजाह से ही आएगा और यदि हवाई जहाज़ से आया है,  तो उसे इमिग्रेशन चेक के लिए खड़ा होना ही होगा. पर इसके बाद भी यदि कोई इस हैसियत का आदमी अचानक से आम लोगों की लाइन में खड़ा दिख जाता है तो अकस्मात हैरानी सी होती ही है.

मैंने इस बार फिर प्रणव रॉय को देखा और अबकी अधिक ध्यान से. वे इस बहुत लंबी लाइन में हमसे काफी आगे खड़े थे पर चूँकि लाइन आगे-पीछे घूमती थी इसीलिए दूरी अधिक नहीं थी. कुछ बातें जो बहुत साफ़ दिखती थीं वह यह कि प्रणव साहब के चेहरे और व्यक्तित्व पर एक अलग किस्म की भव्यता और खूबसूरती थी जो उस भीड़-भाड़ में भी उन्हें अपना एक अलग आयाम प्रदान कर रही थीं. दूसरी जो सबसे बड़ी बात दिख रहती थी वह थी उनकी सहजता. जैसे-जैसे लोगों, खास कर अंग्रेजी बोलने वाले और हवाई जहाज़ों में सफर करने वाले भारतीय लोगों, को एहसास हो रहा था कि प्रणव रॉय उनके बीच हैं,  वैसे ही वे उपस्थित सभी लोगों की निगाहों में आ गए थे. फिर उन में से कई कम उम्र के लड़के-लड़कियां तनिक रोमांच में जोर-जोर से उनका नाम ले कर उनकी तरफ देख भी रहे थे और उनकी तथा एनडीटीवी की चर्चा भी कर रहे थे. प्रणव रॉय भी बड़े आराम से इन सभी को देखते हुए आराम से मुस्कुरा रहे थे.

करीब पांच-सात मिनट बाद उनका नंबर आ गया और वे वहाँ से चले गए पर इनका चेहरा, उनकी भावप्रणव आँखें, उनकी खिली हुई मुस्कान और उनकी सहजता वहाँ उपस्थित सभी लोगों पर देर तक असर डालती रहीं. मैं यह बात दावे से इसीलिए कह सकता हूँ कि वहाँ हम कई आईपीएस अधिकारी भी मौजूद थे जो अपने मिड कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए लन्दन आये थे और आपस में हम सभी इन बातों पर सहमत दिख रहे थे.

एक दूसरी बात मैं यह भी कहना चाहूँगा कि लन्दन के हवाई अड्डे पर प्रणव रॉय की लोकप्रियता उनके व्यक्ग्तिगत सम्मान के साथ पूरे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की असीम लोकप्रियता और स्वीकार्यता का भी परिचायक है. जब उन्होंने डीडी पर अपना प्रोग्राम ‘द वर्ल्ड डिस वीक’  शुरू किया था उस समय के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और आज के इलेक्ट्रानिक मीडिया में सचमुच जमीन और आसमान का अंतर है. आज यह एक-एक घर में घुस कर हमारे-आपके जेहन और हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है. शायद यही कारण है कि आज के समय कोई भी फीचर फिल्म किसी खास न्यूज़ चैनल के साथ सहभागिता किये बिना नहीं बनती.

कई बार तो इससे आगे बढ़ कर टीवी न्यूज़ रिपोर्टिंग के माध्यम से फिल्मों को आगे बढ़ाया जाता है और बहुत बार अतिशय चर्चित वास्तविक जीवन के टीवी न्यूज़ रिपोर्टरों को फिल्मों में भूमिका दी जाती है. मेरी दृष्टि में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सफलता की यह सबसे बड़ी निशानी है,  क्योंकि फिल्म वालों से बढ़ कर जमाने की बदलती दृष्टि पर नज़र रखने वाले लोग कोई नहीं

अमिताभ

अमिताभ

होते. उन्हें तो वही दिखाना होता है जो वक्त की आवाज़ हो और आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वक्त की आवाज़ बन चुकी है तथा उसके साथ प्रणव रॉय जैसे उसके पुरोधा आज के वक्त की चुनिन्दा तस्वीरें.

लेखक अमिताभ यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और मेरठ में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में बतौर पुलिस अधीक्षक पदस्थ हैं. इन दिनों पुलिस प्रशिक्षण के लिए इंग्‍लैंड में हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. Neeraj Bhushan

    July 1, 2011 at 3:34 pm

    उनकी इसी ‘सफलता’ के कारण मीडिया इंडस्ट्री ने करीब पांच वर्ष पहले इन्हें ‘लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड’ देकर वृद्ध घोषित कर दिया था.

  2. श्रीकांत सौरभ

    July 1, 2011 at 5:28 pm

    अमिताभ जी नमस्कार ! लंदन से भड़ास पर भेजा गया आपका यह दूसरा आलेख पढ़ा.पढ़कर बेहद खुशी हुई कि आप मीडिया व इससे जुड़ी खास पर्सनालिटी के प्रति काफी सकारात्मक व संवेदनशील लगते हैं.एक तरफ जहां यूपी सरकार के इशारे पर कई सारे आइएएएस व आइपीएस स्थानीय मीडिया के खिलाफ अपनी ओछी हरकतों और उटपटांग बयानों की वजह से पत्रकारों के आखों की किरकिरी बने हुए हैं.वहीं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में आप जैसे आइपीएस अधिकारी की दिलचस्पी वाकई काबिले तारीफ है. श्रीकांत सौरभ,मो. 9473361087

  3. दिनेश

    July 1, 2011 at 5:31 pm

    अमिताभ जी,
    प्रणव बाबू से सड़क में टकराने पर मैं भी आप जितना ही अभिभूत होता अगर मैंने उनके बारे में आलोक तोमर जी का लिखा हुआ पढ़ा न होता। अब तो एनडीटीवी देखने का भी मन नहीं करता।

  4. अनाम भाई

    July 1, 2011 at 5:43 pm

    कितने नसीब वाले होंगे वो लोग जो एनडीटीवी में काम करते हैं और जो रोज़ प्रणब राय से मिलते होंगे।

  5. Kr Ashok S Rajput

    July 1, 2011 at 5:43 pm

    London mein Pranab..ke lekhak IPS officer Amitabh ne Pranab Roy ki jo kabile tareef ki he yeh third grsde bhandgiri he..aisa well-wisher Pranab ko apne media carrier mein sayad hi mila ho…yeh IPS official police services ke liye kitne layak hein ki policing ke bjaya abhi tk management ki study kr rhe the or abhi pkilwaqt London mein mid carrier training programme ke liye Airport pr khde Pranab Roy ke 5mnts stay pr long size article likh mara he….

  6. nishant

    July 1, 2011 at 7:57 pm

    his name is pranoy roy… not pranav roy

  7. ravi kumer

    July 2, 2011 at 3:45 am

    डॉक्टर प्रणय रॉय को मैंने भी नजदीक से देखा है..उनके दफ्तर में चलते फिरते..लेकिन उनसे बात नहीं हुई।आपने लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर उनकी मौजूदगी का जो वर्णन किया है,एकदम सटीक है।प्रणय खुशमिज़ाज इंसान हैं।जो इंसान ख़ाक से उठकर बुलंदी तक पहुंचा हो..उसका व्यक्तित्व ऐसा ही होता है।प्रणय हिन्दुस्तान में इलैकट्रोनिक मीडिया के किंग हैं।सबसे बड़ी बात की वो अपनी टीम को काम करने का ना केवल पूरा मौका देते हैं,बल्कि उन पर पूरा भरोसा भी जताते हैं।यही बात उन्हें प्रणय राय बनाती है..और उनका सम्मान बढ़ाती है

  8. Pushpendra mishra

    July 2, 2011 at 5:41 am

    Amitab ji jankar khushi hui ki aap jaise adhikari ke jahan me media ke prati kafi samman avam Pranv rai jaise waristya patrakaro ke ejjat…….. ha aap ke likhne ka andaj v kafi accha laga. Namaskar

    Pushpendra mishra
    Naidunia, Jabalpur.

  9. moin

    July 2, 2011 at 8:13 am

    dr.roy’s been a benchmark for tv journalism in india…..and so is his company ndtv..

  10. श्रीकांत सौरभ

    July 2, 2011 at 4:04 pm

    हैलो,कुमार अशोक एस राजपूत व दिनेश जी! क्या आप सुन रहे हैं.लंदन से आइपीएस अधिकारी अमिताभ जी ने मीडिया के सरताज प्रणव राय के बारे में जो भी लिखा है.यह उनके लंबे अरसे का अनुभव व व्यक्तिगत सोच को दिखाता है.साथ ही यह भी कि वे कितना सकारात्मक हैं.सच्चे दिल से किसी की प्रशंसा करना चापलुसी या तेल मालिश करना नहीं होता.रही बात शिकायत की तो किसी एक-दो आदमी के कह या लिख भर देने से कोई बुरा नहीं हो जाता.वैसे भी यह दुनिया एक काजल की कोठरी है भाई.कितना भी बचाओ दाग लगना तय है.आज प्रणव राय जिस मुकाम पर हैं,वहां तक पहुचने के लिए उन्होंने कई तरह के पापड़ बेले होंगे.हो सकता है करियर की इस आपाधापी में उनसे कोई भयंकर गलती या ऊंच-नीच हो गया हो.यदि आपके पास इस बात का पक्का सबूत है, और आपको ऐसा लगता है कि उनकी काली करतूत के कच्चे चिट्ठे को उजागर करने से सामाज का कुछ भला होने वाला है… तो आप इसे बेशक भड़ास पर डालें.वरना आप जैसे महानुभवों को इतना तो पता ही होगा कि सूरज की ओर बेवजह थूकने से अपना ही मंुह गंदा होता है. श्रीकांत सौरभ मो.9473361087

  11. ek patrkar

    July 3, 2011 at 12:06 pm

    amitabhji

    koi aadami london me hawai adde par hi takrayega , pahadganj me nahin.lagta hai aapki pahali london yatra hai, paris, newyork me aise hi paise wale log mila karte hain jyada abhibhut hone ki jaroorat nahin, regine digiye aapko bhi india jab bhukhe pet rahiyega bada bana degi .

  12. kamlesh

    July 6, 2011 at 3:43 am

    i feel that, you want to join media….or you want to be a hero on television news. one more thing, also trying to tell public that u have been to england…. hahahh… it’s so childish…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...